अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने किया युसुफ अंसारी का सम्मान
मीडिया जगत में मुसलमानों की संख्या बेहद कम है और उसमें भी पश्मांदा (पिछड़े) मुसलमान तो नाममात्र के हैं. ऐसे में इसी वर्ग से मीडिया जगत में प्रवेश करके नाम कमानेवाले युसुफ अंसारी की प्रगति सबको आकर्षित करती है. युसुफ अंसारी हाल में ही एक समाचार चैनल चैनल वन के मैनेजिंग एडिटर नियुक्त हुए हैं जिसके उपलक्ष्य में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने उनका सम्मान किया है.
इस मौक़े पर यूसुफ़ अंसारी ने याद दिलाया कि तीन साल पहले वो कैनेडी ऑडिटोरियम में मुसलमान और मीडिया पर हुई परिचर्चा में हिस्सा लेने आए थे तब विश्विद्यालय के छात्रों ने मीडिया पर मुसलमानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि तब भी उन्होंने कहा था कि इस भेदभाव से निपटने का एक ही तरीक़ा है कि मुसलमान भी टीवी चैनल इंडस्ट्री मे आगे आएं और चैनल चलाएं। आज चैनल वन के चेयरमैन ज़हीर अहमद ने इस मामले में एक क़दम आगे बढ़ाया है तो हम स्थापित चैनल की ग्यारह साल पुरानी नौकरी छोड़कर उनके साथ हो लिए। अंसारी ने कहा कि चैनल वन के चेयरमैन ज़हीर अहमद ने मीडिया की अहमियत को समझते हुए न्यूज़ चैनल शुरू करके ठीक वैसा ही काम किया है जैसा सवा सौ साल पहले सर सैयद अहमद ख़ान ने शिक्षा की अहमियत समझते हुए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय क़ायम करके किया था। उन्होंने कहा कि अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय को ये शिकायत नहीं होगी कि देश और समाज के विकास में उसके योगदान को कोई सामने नहीं लाता। उन्होंने ज़ोर देकर कहा चैनल वन विकास की सीढ़ी के सबसे निचले पायदान पर खड़े समाज के हर उस आदमी की आवाज़ सत्ता के बहरे कानों तक पहुंचाएगा जिसकी कहीं सुनवाई नहीं होती। सत्ता के गलियारों में फैले भ्रष्टाचार और लालफ़ीताशाही जैसी बुराइयों के खिलाफ़ ये चैनल आगे बढ़कर फैसलाकुन मुहिम चलाएगा। यूसुफ़ अंसारी के अलीगढ़ दौरे से विश्वविद्यालय में “चैनल वन” चर्चा में आ गया।
“चैनल वन” आगे चल कर देश के दबे कुचले तबके दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों की आवाज़ को बुलंद करेगा। देश के इस सबसे बड़े वर्ग को समूचे मीडिया जगत ने नज़र अंदाज़ कर रखा है-युसुफ अंसारी
अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय से ये संदेश देकर यूसुफ़ अंसारी ने साफ़ कर दिया कि वो “चैनल वन” के लिए एक नया और बड़ा दर्शक वर्ग तैयार करने की योजना बना रहे हैं। चैनल की कमान संभालने के बाद से ही यूसुफ़ अंसारी इसे आम जनता के बीच ज़्यादा से ज़्यादा पॉपुलर और ऐसा मंच बनाने बनाने की क़वायद में जुटे हैं जहां से आम आदमी ख़ुद सामने आकर अपनी आवाज़ को बुलंद कर सके।



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