आनंद शर्मा के खिलाफ जनसंगठन लामबंद, दोहा दौर समाप्त करने का विरोध
नये वाणिज्य मंत्री द्वारा दोहा दौर की वार्ता को समाप्त करने की घोषणा का जन संगठनों ने विरोध किया है. देश के 10 से अधिक जनसंगठनों ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री को लिखे गये एक सामूहिक पत्र में मांग की है कि जब तक दोहा दौर की वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच जाती अमेरिका के साथ किसी प्रकार का द्विपक्षीय समझौता न किया जाए.
भारत के नये वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा दो दिन के दौरे पर अमेरिका में हैं. 17 और 18 जून को अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान वे वहां यूएस ट्रेड रिप्रेजेन्टेटिव रोनाल्ड किर्क से बातचीत करेंगे. अमेरिका रवाना होने से पहले उन्होंने अमेरिकी न्यूज एजंसी रायटर से बात करते हुए कहा ता कि दोहा दौर विफल हो चुका है और नये दौर की बातचीत शुरू होनी चाहिए.
दोहा दौर की वार्ता को विफल बताने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए जनसंगठनों का कहना है कि विश्व व्यापार में भारत का प्रभुत्व बढ़ रहा है और पिछले वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने सेवाओं और कृषि के मुद्दे पर भारत के हित को ध्यान में रखते हुए किसी प्रकार का समझौता नहीं किया इसके कारण दोहा दौर की वार्ता समाप्त नहीं हो पायी. लेकिन नयी सरकार बनी तो कमलनाथ को ही वाणिज्यमंत्री पद से हटा दिया गया और उनकी जगह आनंद शर्मा को वाणिज्य मंत्री बना दिया गया. आनंद शर्मा ने आते ही भारत के अब तक के स्टैण्ड से मुंह मोड़ लिया और अब वे दोहा दौर की वार्ता को समाप्त करने की बात कर रहे हैं.
आनंद शर्मा के बयान का विरोध करनेवालों में भारतीय किसान संघ, शेतकारी संगठन, फोकस आन द ग्लोबल साउथ, थर्ड वर्ल्ड नेटवर्क और भारतीय किसान आंदोलनों का सामूहिक मंच शामिल है. इन जनसंगठनों ने सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मांग की है कि विश्व व्यापार संगठन के तहत 153 देश जब अपने देश की जरूरतों के हिसाब से विश्व व्यापार संगठन की नीतियों में हस्तक्षेप कर रहे हैं तब भारत अपने ही किसानों और सेवा क्षेत्र में कार्यरत लोगों की कीमत पर अमेरिका की शर्तों को क्यों स्वीकार कर रहा है? अगर दोहा दौर की वार्ता को समाप्त मानकर स्वीकार कर लिया जाता है तो माना जाएगा कि भारत ने उस दौर की वार्ता पर अपनी सहमति दे दी है. इसका परिणाम यह होगा कि सेवा, मछली पालन और कृषि के क्षेत्र में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा और अमेरिकी कंपनियों को इस क्षेत्र में व्यापार करने की खुली छूट मिल जाएगी.
जनसंगठनों ने अपील की है कि किसी भी कीमत पर भारत सरकार दोहा दौर की वार्ता को समाप्त न करे जब तक कि उस दौर की वार्ता में भारत के हितों की रक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती है. जनसंगठनों ने प्रधानमंत्री और यूपीए अध्यक्ष दोनों से अपील की है कि चुनाव प्रचार के दौरान जिस आम आदमी के नारे को कांग्रेस ने बुलंद किया था अब उस नारे पर अमल करने का वक्त आ गया है. ऐसे वक्त में अमेरिका के हाथ में लाखों लोगों के रोजगार को गिरवी रख देने से आम आदमी का नारा झूठा साबित होगा.
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