बूंदों को तरसते राजस्थान में खून के सौदागरों की बाढ़
एक ओर जहॉ विश्व रक्तदान दिवस पर लोग स्वेच्छा से गरीबों के लिए अपना रक्तदान कर रहे थे वही राजथान में लाल पत्थर के लिए प्रसिद करौली जिले के हिन्डौन कस्बे में लहू के सौदागर बने डॉक्टरों के पत्थरदिल बनकर मासूम बच्चों के जिस्म से खून निकाल लेने के मामले के उजागर होने से लोग हैरान थे। तो पुलिस अपराधियों की धर-पकड़ में भागदौड कर रही थी। मानवता को शर्मसार करने वाले इस प्रकरण में भगवान का दर्जा प्राप्त डॉक्टरों के हैवान बनने की ये एक ऐसी कहानी है जिसमें उन्होंने अपने लालच के लिए मासूम बच्चों को भी नहीं बख्शा है ।
लाल पत्थर के लिए मशहूर राजस्थान के करौली जिले के हिण्डौन कस्बे में निजी नर्सिग होम चलाने वाले डाक्टरों ने 10 से 15 साल के मासूम बच्चों को खाने की जोधपुरी कचौरी खिलाने के बदले उनके शरीर से खून निकाल लेते और उसे मरीजों को ऊंची दरों पर बेचकर अपना जेब गरम करते चले आ रहे है। ऐसा करने के लिए इन्होंने क्षेत्र में एक गिरोह सक्रिय किया हुआ था जो गली मोहल्लों में खेलते छोटी उम्र के बच्चों को कचौरी खिलाने के बहाने बहकाकर ले आता और उसके बाद डाक्टर उन मासूम नासमझ बच्चों के शरीर से खून निकाल कर ´इससे कुछ फर्क नहीं पडता´कहकर छोड़ दिया जाता। गिरोह के सदस्य उसके बाद बच्चों को कभी एक तो कभी दो कचौरी खिलाकर किसी से कुछ न कहने की बात कहकर भगा दिया जाता ।
हिण्डौन कस्बे के राजगिरीश और तिरूपति नर्सिग होम के संचालक डॉक्टर गिरीश अग्रवाल और डॉ नबाब सिंह ने ऐसे कुछ गुर्गे पाल रखे थे जो कस्बे सहित आस पास के ग्रामीण इलाकों में घूम कर ऐसे बच्चों की तलाश करते जो गरीब और अनपढ जैसे दिखाई पडते, उन्हें खाने पीने की चीजों का लालच देकर अपने साथ नर्सिग होम ले आते और वहॉ उन्हें खून लेने वाले कर्मचारी के हवाले कर अपना कमीशन ले कर रफूचक्कर हो जाते ।ये कर्मचारी बच्चों को मानसिक रूप से तैयार कर उन्हें खून देने को किसी भी कीमत पर राजी कर लेता और उसके बाद मासूमों के जिस्म से बेशकीमती खून निकाल लिया जाता और कचौरी खाने को दे दी जाती थी ।ऐसे में अगर कोई बच्चा चालाकी दिखाता तो उसे अलग से 5-10 रूप्ये देकर उसका मुंह बन्द कर दिया जाता था।राजगिरीश नर्सिग होम के पास चाय की थडी चलाने वाले महेश कोली का कुछ और ही कहना है उसके अनुसार बच्चे जिन्हें नशे की आदत है वो खुद ही अपना खून देने आते थे ।
पुलिस की अब तक की जॉच में करीब 35 ऐसे बच्चे सामने आऐ है जो इन नर्सिग होमों में अपना खून दे चुके है जबकि लोगों का मानना है कि बहुत से बच्चे और अभिभावक पुलिसिया कार्यवाही के डर से सामने नही आना चाहते है । भावुक हुए पुलिस अधीक्षक सरवर खान-मामले के प्रकाश में आते ही इसकी गम्भीरता को भॉप आनन फानन में हिण्डौन पहुंचे पुलिस अधीक्षक सरवर खान ने एक ओर जहॉ विभाग को सख्त कार्यवाही शीघ्रता से करने को कहा तो खुद को ऐसे बच्चों से मिलने से रोक नहीं पाऐ ।एक बच्चे को पूछताछ के बाद प्यार से अपनी गोदी में उठाया तो मासूम के ये बोल ´अंकल आप कचौरी खिलाने ले चल रहे हो क्या´।ने उन्हें भी भावुक कर दिया और उसके बाद उन्होंने कहा कि ऐसा जघन्य कृत्य करने बाले अपराधी उन्होंने अपने सेवा काल में दूसरे नहीं देखे है इन्हें कठोर सजा दिलाने के बाद ही उन्हें सुकून मिल पाएगा।
अब तक हुई कार्यवाही में डॉ गिरीश अग्रवाल सहित पॉच को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है जबकि दूसरे डॉ नबाब सिंह फरार हो गये है पुलिस उनकी सरगर्मी से तलाश कर रही है वही कस्बे के लोगों का कहना है कि सब कुछ मिली भगत से चल रहा था जिसकी शिकायत भी की गई मगर कुछ नही हुआ, अब जब मामला खुल गया है तो कार्यवाह जैसा कुछ होता दिखाई दे रहा है।लोगों में पुलिस और प्रशासन को लेकर भी आक्रोश है जिसका सामने आना अभी बाकी है ।दूसरी तरफ यदि देखा जाऐ तो ऐसे मामलों के प्रकाश में आने पर कुछ समय के लिए प्रसाशनिक कार्यवाही होती दिखाई पडती है जबकि उसके बाद मामले को रफा दफा कर दिया जाता है जिससे ऐसा करने बालों के होंसले फिर से बुलन्द हो जाते है।प्रदेश के चिकित्सा मंत्री का इस पूरे प्रकरण पर यह कहना कि ये निजी क्षेत्र का मामला है इसमें जब तक जॉच में गडबडी सामने नहीं आ जाती सरकार कुछ नहीं कर सकती ।तो क्या निजी क्षेत्र को इतनी छूट देना कि वो इस प्रकार के कृत्य करे किसी भी जबाबदेही सरकार के लिए सही कहा जा सकता है।गरीब मॉ बाप के बच्चों के जिस्म से खून निकालकर बेचने के इस प्रकरण ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि चिकित्सा जैसे पेशे में ऐसे तत्वों ने अपनी पैठ बना ली है जिनके कारण पूरे पेशे की प्रतिश्ठा दॉव पर लग गई है।
हिण्डौन के इन नर्सिगहोमों का यह प्रकरण प्रदेश में कोई नया नही है ।राजधानी जयपुर में प्रदेश के सबसे बडे सवाईमानसिंह हॉस्पीटल के बाहर ऐसे दलालों की कोई कमी नहीं है जो मजबूर लोगों के खून से रोजाना अपनी जेबे गरम कर रहे है और उनके खिलाफ कोई कार्यवाही करने तक की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है वही भरतपुर की ब्लडबैंक के खिलाफ भी रक्तदाताओं ने आबाज उठाकर ट्रस्ट बनाने को लेकर लगातार संघर्ष किया जा रहा है जहॉ उनकी सुनने वाला कोई नहीं है ।और खुलेआम खून को कर्मचारी बडे लोगों के इशारों पर इधर उधर कर रहे है।
ऐसे मामलों से ऐसा लगता है कि पानी की बूदों को तरसते राजस्थान में लोगों के खून से होली खेली जा रही है जहॉ गरीब और मजबूर लोग खून बेचकर पेट भर रहे है तो दूसरी तरफ खरीददार उसे दूसरे मजबूरों को मंहगे दामों में बेचकर अपनी जेबें भर रहे हैं.
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