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माओवादियों से लड़ाई की तैयारी

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माओवादियों से लड़ाई की तैयारियां शुरू हो गयी है. इस कड़ी में सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से मुलाकात की. मुलाकात के बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य ने एक प्रेस कांफ्रेस में बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा है कि राज्य में माओवादियों के खिलाफ केन्द्र और राज्य सरकार का संयुक्त अभियान जारी रहना चाहिए जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया है.

बुद्धदेव भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री के अलावा वित्त मत्री प्रणव मुखर्जी से भी मुलाकात की है. लालगढ़ में माओवादियों के खिलाफ चल रहे संयुक्त अभियान की सफलता के बारे में बताते हुए बुद्धदेव ने कहा कि केन्द्र की मदद के बिना पुरुलिया, बांकुरा और पश्चिमी मिदनापुर में अभियान सफलतापूर्व संचालित नहीं किया जा सकता था.बुद्धदेव ने बताया कि उन्होंने गृहमंत्री से आग्रह किया था कि पैरा मिलिट्री फोर्स की 17 बटालियन राज्य में तैनात रहने दिया जाए, जिसे गृहमंत्री ने स्वीकार कर लिया.

ऐसा समझा जा रहा है कि नक्सलियों से निर्णायक जंग का ब्लूप्रिंट तैयार है। इस ब्लूप्रिंट के तहत त्रिस्तरीय व्यूह रचना कर सुरक्षा बल नक्सलियों के कई गढों़ पर एक साथ धावा बोलने की तैयारी कर रहे हैं। जिसमें राज्य पुलिस और केन्द्रीय अर्धसैनिक बल दोनों शामिल होंगे. योजना के मुताबिक, नक्सलियों की हथियारबंद सेना की जमीन पर त्रिस्तरीय घेरेबंदी होगी तो आसमान से वायुसेना व अ‌र्द्धसैनिक बलों के हेलीकाप्टर व विमानों की निगरानी रहेगी। जंगल और गुरिल्ला युद्ध के लिए विशेष तौर पर बनी कोबरा की दो बटालियनें अभियान में उतारी जा चुकी हैं। दिसंबर तक और दो हजार कोबरा सैनिक अभियान में और जुड़ जाएंगे। नक्सलियों से सीधी मोर्चेबंदी के लिए सेना द्वारा विशेष रूप से प्रशिक्षित 30 से ज्यादा कंपनियां प्रभावित इलाकों के लिए भेजी जा चुकी हैं। जंगल की जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षित और साजो-सामान से लैस ऐसी 70 कंपनियां तत्काल सीधी लडा़ई वाले क्षेत्रों में उतारी जाएंगी।

आपरेशन के दौरान तीन चक्र बनाने की योजना है। पहला चक्र तो नक्सलियों के अलग-अलग ठिकानों या शक वाली जगहों के इर्द-गिर्द बनाने की कोशिश की जाएगी। सबसे अहम दूसरा चक्र होगा। जुडी़ हुई सीमा वाले राज्यों की तरफ से प्रभावित जिलों की सफल घेरेबंदी पर ही इस आपरेशन का दारोमदार टिका है। झारखंड-उड़ीसा-बंगाल और छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश-उड़ीसा की जहां सीमा मिलती है, उन इलाकों के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है। तीसरा और अंतिम सुरक्षा चक्र सभी नक्सल प्रभावित राज्यों की सीमाओं की तरफ से बनेगा। यह आखिरी घेरा होगा, जिससे न तो बाहर से नक्सली मदद के लिए अंदर जा सकें और न ही भाग सकें। योजना के मुताबिक, पहला चक्र कसने के बाद नक्सली मांद से बाहर निकलेंगे तो सीमा पर तैनात सुरक्षा बल वहीं उनकी खबर लेंगे।

माओवादियों ने तेज किया हमला, पांच राज्यों में पांच िदन का बंद

उधर केन्द्र द्वारा उनके खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाई की खबरों के बीच सोमवार को माओवादियों ने पांच राज्यों में बंद का ऐलान किया है. झारखण्ड के पाकुड़ में सोमवार को माओवादियों ने कोल कंपनियों के दो अधिकारियों की हत्या कर दी और रांची नई दिल्ली लाईन के कुछ हिस्से को धमाके से उड़ा दिया. इसके साथ ही झारखण्ड के गिरीडीह जिले में तीन ट्रकों को आग लगा दी तथा बंद को प्रभावी बनाने के िलए एक बस पर हमला बोलकर तीन नागरिकों को जख्मी कर दिया. बिहार के औरंगाबाद जिले में भी माओवादियों ने एक मोबाइल टावर को उड़ा दिया और सड़क खोद दी.

इस बात की खबरें आ रही हैं कि झारखण्ड में पहले िदन माओवादियों द्वारा बंद का पूरा असर रहा है। ज्यादातर बाजार और कामकाजी स्थानों पर सन्नाटा पसरा रहा जबकि बिहार में पटना के अलावा कुछ जिलों में माओवादियों के बंद का पूरा असर हुआ है जिसमें गया, जहानाबाद और औरंगाबाद शामिल हैं.

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ANILREJA on 15 October, 2009 00:12;05
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sir,
maobadi are not terrorists so therefore keeping the fact Indian government should call them round the table talk can solve the problems because they are our brothers and sisters so their guanine demand should be considered and all sort of medical, education , road and electricity can solve their half of the problems and rest they should be given concealing to bring them mainstream because maobadi are basically population of socially and economically backward or neglected by state and central governments not today’s but previous govts too any way we have to think for today’s problems as we have seen violence way taking by maobadi are not correct and unnecessarily property of crores and our innocent people and policemen are being killed so immediate attention to resolve this in-house burning issue may be resolved by taking confidence of all party meet as this is not only problem of a single state and single leader . This problem belongs to all people, civic society and all leaders. Blame game does not server any problems so all party meet with all maowadi can give some positive results. Denial of army action on maowadi is intelligent and praiseworthy step of our hon. prime minister dr. man Mohan Singh jee-regards
Sunita Anil reja, Mumbai
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