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कमल का चला जोर, हाथ हुआ कमजोर

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मध्यप्रदेश में हुए नगरीय निकाय चुनावों के पहले चरण में भाजपा ने एक बार फिर बाजी मार ली है। पहले दौर में 12 नगर निगमों में से सात में महापौर पद पर भाजपा का कब्जा हो गया है। सूबे के चार बड़े शहरों की नगर निगम अब बीजेपी के खाते में हैं।

काँग्रेस और बसपा को दो-दो निगमों के महापौर पद से संतोष करना पड़ा, जबकि एक नगर निगम पर लोगों ने निर्दलीय को महापौर चुना है। लगातार दो बार से भोपाल का महापौर पद अपने पास रखने वाली काँग्रेस के हाथ से बाज़ी निकलगई है। पहला नतीजा ग्वालियर का आया,जहाँ भाजपा की समीक्षा गुप्ता ने बाज़ी मार ली ।

भोपाल की प्रतिष्ठित महापौर की सीट पर भाजपा का कब्जा हो गया है। इसके पहले यह सीट कांग्रेस के पास थी। भोपाल नगर निगम में अब दृश्य पिछली परिषद के उलट होगा। महापौर भाजपा की, तो परिषद कांग्रेस की होगी। भारतीय जनतापार्टी की प्रत्याशी कृष्णा गौर भोपाल की मेयर होंगी। गौर ने कांग्रेस की उम्मीदवार आभा सिंह को कांटे की टक्कर में 15 हजार 321 मतों से हराया है। वहीं, इन्दौर में भारी कश्मकश के बाद बीजेपी के कृष्ण मुरारी मोघे जीते। इसके अलावाबुरहानपुर, ग्वालियर, जबलपुर, खंडवा और रीवा में भी कामयाबी हासिल की। खंडवा में भाजपा की भावना शाह ने कांग्रेस की सुनीता सकरगाए, जबलपुर में भाजपा के प्रभात साहू ने कांग्रेस के दिनेश यादव, रीवा में भाजपा के शिवेंद्र पटेल नेकांग्रेस के प्रहलाद पटेल, बुरहानपुर में भाजपा की माधुरी पटेल ने कांग्रेस की शहनाज इस्माइल बानो और ग्वालियर में भाजपा की समीक्षा गुप्ता ने कांग्रेस की डॉ. उमा सेंगर को पराजित किया। भाजपा को पिछली बार की तुलना में कुछनुकसान उठाना पड़ा है। पिछली बार दो निर्दलियों समेत भाजपा के खाते में 12 में से 11 नगर निगम थे।

कशमकश भरी जीत
इंदौर में महापौर पद के परिणाम को लेकर जबर्दस्त कशमकश के बाद देर रात रिटर्निग अधिकारी ने पुनर्मतगणना के आदेश दिए। पुनर्मतगणना में भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मुरारी मोघे 2,292 मतों से विजयी घोषित किए गए। इससे पहले मोघेको 3,371 मतों से विजयी घोषित किया गया था। 22,729 अमान्य मत मिलने के बाद काँग्रेस प्रत्याशी पंकज संघवी ने प्रशासन पर मतदान में गड़बड़ी का आरोप लगाया और समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। इसके बाद अमान्य मतों कोफिर से गिना गया।

कमलाबाई गुरू की जीत सबसे बड़ी
सागर नगर निगम में महापौर का पद निर्दलीय उम्मीदवार कमला किन्नर के खाते में गया। कमलाबाई गुरू (किन्नर) ने न केवल सागर महापौर पद पर कब्जा जमाया, बल्कि प्रदेश में सबसे अधिक अंतर 43,433 वोट से जीत भी दर्ज की। प्रदेशके इतिहास में यह दूसरा मौका है जब किन्नर महापौर बनेगी। इससे पहले कटनी में किन्नर कमला जान महापौर रहीं। कमला गुरु का कहना है कि वे भ्रष्टाचार नहीं होने देंगी। शहर के विकास के काम कराएँगी और एक-एक पाई का हिसाबमाँगेंगी। वे शहर के विकास के लिए हाई पॉवर कमेटी बनाएँगी,जो काम की समीक्षा करेगी।"

बसपा ने खोला खाता
बसपा ने पहली बार खाता खोलते हुए महापौर के दो पद अपनी झोली में कर लिये हैं । तीसरी मजबूत ताकत के रूप में उभरी बसपा को सतना और सिंगरौली में जीत मिली। सतना में पुष्करसिंह तोमर ने कांग्रेस के मनीष तिवारी और सिंगरौलीमें रेनू शाह ने भाजपा की कांतशीर्ष देवसिंह को हराया। काँग्रेस ने भोपाल नगर निगम गँवा दिया, लेकिन संतोष की बात यह रही कि उसे पिछली बार के एक महापौर (भोपाल) के मुकाबले इस बार देवास और कटनी के महापौर पद हासिलकरने में कामयाबी मिल गई। काँग्रेस के लिए कटनी में निर्मला पाठक ने भाजपा की अलका जैन और देवास में रेखा शर्मा ने भाजपा की बबली यादव को पराजित किया। नगर पालिका और नगर पंचायतों में भी उसकी स्थिति पिछली बार केमुकाबले कुछ बेहतर हुई है।

मंत्रियों की लगी लॉटरी
नगरीय निकाय चुनाव में प्रदेश सरकार के कुछ मंत्रियों की लॉटरी लग गई है। चुनावी नतीजों ने अपने परिवार की महिलाओं को टिकट दिलाकर आलोचना का शिकार बने मंत्रियों का राजनीतिक कद बढ़ा दिया है । इसके अलावा उनके परिजनोंकी राजनीतिक जमीन भी भाजपा में तैयार हो गई। मंत्रियों की परिजनों को टिकट देने पर पार्टी में बीच तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। यही वजह थी कि कृष्णा को राजधानी भोपाल में, भावना को खण्डवा और ज्योति को विदिशा में अंतर्कलह सेजूझना पड़ा। ये और बात है कि अपने रसूख और प्रशासनिक अमले के बेजा इस्तेमाल से वित्तमंत्री राघवजी की बेटी ज्योति शाह, नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर और आदिम जाति कल्याण मंत्री विजयशाह की पत्नीभावना शाह अपने-अपने चुनाव जीत गई। कृष्णा गौर राजधानी की महापौर बनेंगी,जबकि भावना ने खण्डवा नगर निगम को भाजपा के खाते में डाला। ज्योति ने विदिशा नगर पालिका में असंतोष और भितरघात से पार पाते हुए करीबीमुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी को 3 हजार 406 वोटों से हराया। ग्वालियर के वरिष्ठ नेता नरेश गुप्ता की बहू व महापौर की उम्मीदवार समीक्षा गुप्ता, संघ और भाजपा नेताओं के करीबी जबलपुर से महापौर प्रत्याशी प्रभात साहू भी अपनी लाजबचाने में सफल रहे। बुरहानपुर के महापौर अतुल पटेल की पत्नी माधवी पटेल को भी महापौर पद के लिए करीबी मुकाबले में जीत मिली।

घर नहीं बचा पाए कांग्रेसी दिग्गज
उधर पूरी ताकत झोंकने के बावजूद काँग्रेस के दिग्गज अपने गढ़ भी नहीं बचा पाये । आपसी खींचतान में उलझी पार्टी के क्षत्रपों को अपने ही घर में मात खानी पड़ी। कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी और दिग्विजयसिंह के क्षेत्र में काँग्रेस पराजित हो गई। कमलनाथ, सिंधिया और पचौरी ने तो प्रचार में पूरा जोर लगाया था। इन नेताओं ने रोड शो और सभाओं के ज़रिये माहौल तो खूब बनाया लेकिन उसे वोटों में तब्दील करने से चूक गये ।

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ANURAG BAJPAI on 16 December, 2009 18:35;32
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MAI BAHUT HAPPY HU KOI B.J.P ITNE BADI PARTY KE 7 MAYAR BANE HAI.....IN FUTURE ME BHI B.J.P CENTREL ME JARUR AYEGE AUR PRIME MINISTER ADWANI JI HOGE .......I PRAY TO GOD ...FOR B.J.P
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Ritesh on 17 December, 2009 13:08;32
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सरिता जी,
बीजेपी कमजोर हुई है, कांग्रेस नहीं. 13 नगर निगम में से 11 पर पहले बीजेपी का कब्जा था और 1-1 कांग्रेस और निर्दलीय के पास थीं.
12 के नतीजे आए हैं. इसमें मात्र 7 बीजेपी के पास रह गई. 2 बीएसपी, 2 कांग्रेस और 1 निर्दलीय के पास चली गई. बीजेपी 11 से 7 पर आ गई, कांग्रेस 1 से 2 पर चली गई, बीएसपी शून्य से 2 पर आ गई. ऐसे में कैसे कह सकती हैं आप कि बीजेपी का जोर, हाथ हुआ कमजोर. ये दरअसल उलटा है.
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image सरिता अरगरे संघर्ष को पत्रकारिता से जोड़नेवाली सरिता अरगरे भोपाल में रहती हैं और पारिवारिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी पत्रकारिता के प्रति पूरी तरह से समर्पित. विस्फोट के अलावा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेखन और दूरदर्शन में अंशकालिक पत्रकार के बतौर कार्यरत.
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