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सपा से फिल्मी समाजवाद का सफाया शुरू

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नई दिल्ली/इटावा। आखिरकार, सपा से अमर सिंह के समाजवाद का सफाया शुरू हो गया है. शनिवार को एक ओर जहां फिल्मी समाजवादियों संजय दत्त और मनोज तिवारी ने सपा से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी वहीं दूसरी ओर खांटी समाजवादियों ने अमर सिंह के लिए दरवाजे बंद करने जैसी बयानबाजी का सहारा ले लिया.

यानी समाजवादी पार्टी से नेताजी के न चाहने के बावजूद अमर सिंह के समाजवाद का सफाया शुरू हो गया है. जरा सुनिये मुंबई में संजय दत्त ने सपाई न रहने की सफाई में क्या कहा है? संजय दत्त का कहना है- अमर सिंह ने पार्टी के लिए जान लगा दी और जब वह पार्टी के महासचिव नहीं रहे, तो मेरा भी इस पद पर हक नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह से अमर सिंह के साथ हैं और जहां अमर सिंह जाएंगे उनके साथ वह भी जाएंगे।" अब संजय दत्त का दुख यह है कि रामगोपाल यादव ने अमर सिंह और उनके फिल्मी समाजवाद दोनों को फिजूल बता दिया था.

उधर, भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी ने भी एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा है कि आनेवाले एक दो दिनों में वे भी इस्तीफा दे सकते हैं. उनकी भी निष्ठा अमर सिंह के समाजवाद में हैं इसलिए वे भी संकट की इस घड़ी में अमर सिंह के साथ खड़े हैं. अमर सिंह के साथ कुछ और फिल्मी समाजवादी लॉबी बनाकर आ खड़े हुए हैं. इन्हें अमर सिंह का खेमे वाला बताया जा रहा है. अमर सिंह के खेमे में कुछ और फिल्मी सितारें हैं जो समाजवाद की रोशनी बुझा सकते हैं. इसमें बड़े भैया की पत्नी और अमर सिंह की आदरणीय भाभी जया बच्चन और जयाप्रदा शामिल हैं. खेमा भले ही फिल्मी समाजवादियों का हो लेकिन अमर सिंह इसी खेमे से प्रेशर ग्रुप बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन सपा के दगड़ू पहलवानों पर कोई असर नहीं हो रहा है. रामगोपाल यादव अभी भी अखाड़े में खड़े हैं और ललकार रहे हैं-" अमर सिंह से इस्तीफा वापस लेने के लिए नहीं कहा जाएगा." रामगोपाल यादव कह रहे हैं कि "पार्टी को अमर सिंह की कोई जरूरत नहीं है." इटावा से सीधे दिल्ली पहुचें डा. यादव ने यह तक कह डाला कि अमरसिंह ने पार्टी का सत्यानाश किया है. कोई खुद को पार्टी से बड़ा समझे यह कतई उचित नहीं.हालांकि यादव ने यह भी कहा कि अमरसिंह के बारे में अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह को लेना है.लेकिन अमर सिंह के बारे में जो कुछ भी रामगोपाल यादव कह रहे है ‘ाायद उसी को मुलायम सिंह यादव की बात भी मानी जा सकती है.

अमरसिंह के खिलाफ रामगोपाल की कड़ी बयानबाजी को राजनीतिक हलके में मुलायम की शह पर होना माना जा रहा है. पार्टी में ही कुछ नेताओं का दबे स्वर में कहना है कि मुलायम की शह के बिना रामगोपाल यादव इतना कुछ नहीं बोलते. बहरहाल अमर सिंह पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा भले ही दे चुके हों लेकिन वे पार्टी में बने हुए हैं. इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि वे सपा छोड़कर किसी अन्य पार्टी का दामन थाम सकते हैं. अमर सिंह के समाजवादी पार्टी में सभी पद छोड़ने के ऐलान के बाद बने हालात पर जहां यादव परिवार मंथन कर रहा है ,वहीं यह भी साफ कर दिया गया है कि अमर सिंह को अब कोई मनाएगा नहीं.

अब समाजवादी पार्टी नेतृत्व, खासतौर पर यादव परिवार बदले हालात का मूल्यांकन कर रहा है. पार्टी में अमर सिंह के करीबी लोगों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है. रामगोपाल यादव कह रहे हैं कि पार्टी अमर सिंह को (इस्तीफा वापस लेने के लिए) मनाने के मूड में नहीं है.
मुलायम परिवार ने पिछले दिनों हुई सभी घटनाओं का संज्ञान लिया है. विधान परिषद चुनावों में सांसद जयाप्रदा और जया बच्चन द्वारा मतदान न करना और अमिताभ बच्चन द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करना भी इन घटनाओं में शामिल है. यही नहीं अमर सिंह की चिट्ठी पाती और ब्लाग पर लिखे गए लेखों का भी मतलब खोजा जा रहा है. माना जा रहा है कि यादव परिवार अभी अमर मुद्दे पर कोई फैसला नहीं करेगा. फिलहाल अमर के अगले कदम का इंतजार किया जाएगा. मुलायम सिंह चाहते है कि अमर सिंह ने जिस तरह पद छोड़े हैं, उसी तरह अपना अगला फैसला भी जाहिर कर दें ताकि उन्हें कुछ भी करना या कहना नहीं पड़े. देखना यह है कि अमर सिंह क्या फैसला करते हैं?

जबकि अमर सिंह ने दुबई से एक टीवी से बात करते हुए साफ कहा है कि मुझे अभी तक मनाने की मुलायम सिंह ने कोई कोशिश नहीं की है.उन्होंने ये भी कहा कि,वैसे मुझे नहीं लगता कि मुलायम सिंह को मुझे मनाने की कोई कोशिश करनी चाहिए लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि "मेरा मुलायम सिंह जी से सीधा संवाद आज कल नहीं हो रहा है. मेरी मुलायम सिंह से पहली जनवरी को बात हुई थी, उन्हें हमने दल के मुखिया और परिवार के बडे होने के रूप में नए साल की बधाई दी थी.उसके अलावा मुलायम सिंह जी ने मुझसे कोई बात नहीं की है." एनसीपी में जाने की अटकलों पर अमर सिंह ने कहा कि "शरद पवार जी से मेरे अच्छे संबंध हैं, इससे मैं इनकार नहीं करता लेकिन मैं ईश्वर की शपथ खा कर कहता हूं कि मेरी शरद पवार जी से अभी तक कोई बात नहीं हुई है।"

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Jeet Bhargava on 11 January, 2010 02:00;21
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फ़िल्मी समाजवाद के साथ ही 'जेहादी समाजवाद' का सफाया भी बहुत जरूरी है. तो ही लोहिया और जे पी का Original Indian समाजवाद निखर कर देश को संवार सकेगा.
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sunita anil reja on 11 January, 2010 05:58;34
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SIR, NO PPOLITICAL PARTY CAN RUN ON THE PILLARS OF ACTORS IF IT IS SO THEN ALL FAMOUS ACTOR AND ACTRESS WILL BE MEMBER OF PARLIAMENT AND MEMEBER OF LAGISLATIVE (MLA). POLITICS IS BASICALLY SOCIAL WORK SO NOBODY WANTS TO JOIN THIS AREA AND MOREOVER IT IS COSTLY AFFAIR SO A COMMON MAN CAN NOT FIGHT ANY ELECTIONS OF MEMBER OF PARLIAMENT AND MLA. IT IS POWER GAME, PRESSURE TACTICS AND INDIAN POLITICS HAS BECOME FOR THE RICH AND FAMOUS. ONLY 10-20 PERCENTAGE PEOPLE ARE JINING THE POLITICS FOR SOCIAL WELFARE MEASURES AND REST FOR POWER, MONEY MAKING AND STSTUS SYMBOL AND ALL SORT OF LUXURY LIFE. THNAKS-REGARDS-SUNITA ANIL REJA, MUMBAI
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image दिनेश शाक्य इटावा के रहनेवाले दिनेश शाक्य १९८९ से मीडिया में कार्यरत. १९८९ में पत्रिका हलचल से जुडे फिर साप्ताहिक चौथी दुनिया के बाद दिल्ली प्रेस प्रकाशन से जुडे,१९९६ से समाचार ए़जेसी वार्ता में २००३ मार्च तक इटावा में रिपोर्टर के रूप में काम किया, सहारा समय न्यूज चैनल में काम. उत्तर प्रदेश में विस्फोट.कॉम की ओर से स्पेशल स्टेट करेस्पांडेन्ट.
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