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अमर सिंह सौदेबाज हैं, कोई खुदा नहीं: रामगोपाल यादव

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इटावा। सैफई महोत्सव में यादव वंश ने ठाकुर अमर सिंह के सफाये की जो योजना बनाई थी अब उस पर काम करते दिखाई दे रहे हैं. मंगलवार को सपा संसदीय दल के नेता डॉ रामगोपाल यादव ने अमर सिंह के बारे तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अमर सिंह कोई खुदा नहीं है जो मैं उनसे माफी मांगू.

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की मध्यस्थता के बाद सपा संसदीय दल के नेता डा. रामगोपाल यादव और सपा नेता अमर सिंह के मध्य तल्ख तेवर को शांत होता दिख रहा था लेकिन महज चौबीस घंटे के अंतराल के बाद ही इन दोनों नेताओं के मध्य उत्पन्न हुई रार ने खाई पैदा कर दी है। सोमवार को ही सपा महासचिव डा. रामगोपाल यादव ने अमर सिंह को छोटा भाई करार दिया था तो मंगलवार को तेवर ऐसे बदले कि उन्होंने उन्हें सौदेबाज करार दे दिया। डा. रामगोपाल यादव के इन तेवरों के बाद यह तय माना जा रहा है कि अब यह दूरी मिट पाना सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के लिए भी आसान नहीं होगी।

सपा नेता डा. रामगोपाल यादव यूं तो अमर सिंह के इस्तीफे के पक्ष में पहले से ही थे परंतु सोमवार को मुलायम की मध्यस्थता के बाद नैतिक और सामाजिक दायित्व को स्वीकार करते हुए अपने व अमर सिंह के मतभेद खत्म करने की कोशिश करते हुए उन्होंने हालात को सामान्य करने का काम किया परंतु सोमवार की रात में ही आये अमर सिंह के बयान ने मानों चिंगारियों को हवा दे दी है। अमर सिंह के बयान से मिली हवा के बाद अमर सिंह और डा. रामगोपाल यादव के मध्य की खाई और गहरा गई है।

मंगलवार को डा. रामगोपाल के तेवर यकायक ही तल्ख हो गये और उन्होंने एक ओर जहां बीमारी के चलते अमर सिंह का मानसिक संतुलन खराब हो जाने की बात कही तो यह भी साफ कर दिया कि अमर सिंह खुदा नहीं जो मैं उनसे माफी मांगू। उन्होंने एक मुलाकात में कहा कि मैंने ऐसी कोई गलती ही नहीं की, जिसके लिए मुझे माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक उन्हें सिर्फ संदेह भर था कि बीमारी के चलते उनका मानसिक संतुलन बिगड. गया है परंतु सोमवार की रात आये बयान के बाद उनका संदेह यकीन में बदल चुका है।

डा. रामगोपाल ने कहा कि अमर सिंह एक सौदेबाज हैं। चूंकि उनकी सभी राजनीतिक दलों के साथ संबंध रहते हैं, मुमकिन है कि किसी राजनीतिक दल के साथ उनके सौदेबाजी चल रही है। उन्होंने कहा कि यदि यह सौदेबाजी कामयाब हो जाती है तो ठीक है अन्यथा फिर कहने लगेंगें कि मुलायम सिंह मेरे भाई हैं और यह सब मेरा परिवार है। हालातों की तल्खी का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से भी उनके इस्तीफे को स्वीकारने का दबाब बनाना शुरू कर दिया है। अपने नैतिक एवं सामाजिक दायित्वों का हवाला देने से भी नहीं चूके रामगोपाल ने कहा कि चूंकि उन्हें सैफई महोत्सव में आना था और मैं नहीं चाहता था कि हमारे घर कोई आये और वह हीनता महसूस करे अथवा किसी प्रकार का तनाव महसूस करें, यही बजह थी कि मैंने रिस्ते सामान्य होने के प्रयास किये परंतु उन्होंने इसके नजरिये ही बदल दिये हैं।

सपा संसदीय दल के नेता रामगोपाल ने एक सवाल के जबाब में कहा कि मुमकिन है कि यह माफी शब्द का प्रयोग अमर सिंह और पार्टी के बीच दूरी का कारण बन जाये। उन्होंने कहा कि अमर सिंह ने अपना इस्तीफा उस वक्त दिया जब पार्टी को अगले ही दिन चुनाव का सामना करना था। यह एक घोर अनुशासनहीनता थी और इसके लिए पार्टी अध्यक्ष को उसी दिन उनका इस्तीफा स्वीकार कर लेना चाहिए था। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि पार्टी का 99 फीसदी कार्यकर्ता अमर सिंह से दूरी चाहता है और अब तो अमर सिंह पार्टी अध्यक्ष को भी अपने बयानों के जरिये अपमानित करने पर उतारू हो गये हैं। रामगोपाल ने यह भी कहा कि अमर सिंह के बयानों से वे आहत हुए हैं और अब मुमकिन नहीं कि वह किसी प्रकार की पहल करें क्योंकि रिस्तों को बिगाड़ने के लिए अमर सिंह खुद जिम्मेदार हैं।

गौरतलब है कि विगत दिनों उत्तर प्रदेश विधान सभा के उप चुनावों में पार्टी को मिली करारी हार के बाद आये अमर सिंह के बयान ने रामगोपाल को इस कदर आहत किया था कि अमर सिंह और रामगोपाल के मध्य एक रार पैदा हो गई। अमर सिंह ने अपने बयानों में पार्टी को मिली हार के प्रति मुलायम सिंह के परिवारवाद को दोषी करार देते हुए पार्टी अध्यक्ष के अति विश्वास को जिम्मेदार ठहराया था। अमर सिंह के इस बयान के बाद जब रामगोपाल ने अमर सिंह को अपनी मर्यादाओं में रहने का पाठ पढ़ाया तो अमर सिंह को यह नागवार गुजरा। हालात इस कदर तल्ख हो गये कि अमर सिंह ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर मुलायम सिंह को धर्म संकट में डाल दिया। जिस परिवारवाद के आरोपों से समूचा विपक्ष मुलायम सिंह को घेर रहा था, उसी का आरोप उन्हीं के पार्टी से जुड़े एक कद्दावर नेता ने जो दे दिया था।

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Jeet Bhargava on 13 January, 2010 01:24;18
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Sahi Kahaa.
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marwah t k on 13 January, 2010 11:34;17
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अब कल कुछ भी हो रायता तो फेल ही चूका हे वेसे गिरगिट को अपना रंग बदलने मैं समय लगता हे पर इन राजनीतिज्ञों की हर अदा ही निराली हे
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sadhak ummedsingh baid on 14 January, 2010 11:10;20
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सङांध इतनी हो गई, सांसे भी दुश्वार.
राजनीति के मुर्दे को, गहरा गाङो यार.
गहरा गाङो यार, कोई नेता-दल-संस्था.
जिन्दा इसे ना कर पायेगी कोई संस्था.
कह साधक कविराय, अमर-मुलायम फ़ितनी.
राजनीति के मुर्दे, सङांध करते इतनी!
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image दिनेश शाक्य इटावा के रहनेवाले दिनेश शाक्य १९८९ से मीडिया में कार्यरत. १९८९ में पत्रिका हलचल से जुडे फिर साप्ताहिक चौथी दुनिया के बाद दिल्ली प्रेस प्रकाशन से जुडे,१९९६ से समाचार ए़जेसी वार्ता में २००३ मार्च तक इटावा में रिपोर्टर के रूप में काम किया, सहारा समय न्यूज चैनल में काम. उत्तर प्रदेश में विस्फोट.कॉम की ओर से स्पेशल स्टेट करेस्पांडेन्ट.
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