पत्नी के चुनाव की खातिर माँ को ही 'मार' दिया
मेरे पास माँ है. हिन्दी सिनेमा का ये डायलाग आज भी लोगों को भलीभाँति याद है. लेकिन लगता है समय के साथ माँ का महत्व कम हो रहा है. आम तौर पर सरकारी कर्मचारी अपने स्थानांतरण के आवेदनों में बूढे माँ बाप के सेवा की बाते करते है. लेकिन यहाँ तो पत्नी के चुनाव के लिए एक सरकारी कर्मचारी ने अपनी चुनाव डयूटी कटवाने के लिए ‘माँ’ को ही मार डाला है.
राजस्थान भर में इन दिनों पंचायतीराज के चुनावों का माहौल चल रहा है. इन चुनावों के लिए कर्मचारियों की डयूटी लगाई जाती है. कर्मचारी पंचायतीराज के चुनावों से आम तौर पर बचना चाहते है. स्थानीय स्तर पर होने के कारण इन चुनावों में झगडों की संभावनाऐ अधिक रहती है. इस बार चुनाव तीन चरणों में कराये जा रहे है. ऐसे में एक ही चुनाव पार्टी को तीन चरणों के चुनाव पूर्ण करने होगें. चुनावों में कर्मचारियों के अपने परिजन भी भाग ले रहे है. ऐसे में कर्मचारी अपनी चुनाव डयूटी से बचना चाह रहे है. कुछ को तो अपने ‘जुगाड’ से मदद मिल रही है तो कुछ अलग अलग तरीके अपना रहे है. शिक्षा विभाग के एक व्याख्याता ने तो अपनी पत्नी के चुनाव के लिए माँ को ही मार डाला. हाँ ये सच है कि माँ दो साल पहले ही इस दुनिया से रूख्सत कर गई है.
राजस्थान के भरतपुर जिले में एक मामला प्रकाश में आया है. शिक्षक भगोलीराम मीणा की पत्नी पंचायत समिति सदस्य के लिए चुनाव लड रही है. ये चुनाव 2 अप्रेल को होना है. भगोलीराम मीणा की चुनावों में डयूटी लग गई. इधर पत्नी चुनाव लड रही है. मीणा ने इस बीच चुनाव डयूटी कटवाने की भरसक कोशिश की. जब सफलता नही मिली तो उन्होने 10 जनवरी को चुनाव कराने का पीठासीन अधिकारी के रूप में प्रथम प्रशिक्षण तो ले लिया. इसके बाद अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य के हस्ताक्षर से प्रमाणित कराकर एक प्रार्थना पत्र जिला निर्वाचन अधिकारी को दिया. जिसमें 11 जनवरी को अपनी माँ के असामयिक निधन की जानकारी दी गई. जिला निर्वाचन अधिकारी ने शिक्षक की बात पर भरोसा कर उसकी चुनाव डयूटी हटा दी.
उधर साथी शिक्षकों को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने निर्वाचन शाखा तक सच्चाई पहुँचा दी. जिला निर्वाचन अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से तहसीलदार से जाँच कराकर सच्चाई का पता लगा लिया. जिसमें पता चला कि शिक्षक की माँ का स्वर्गवास तो 2 बर्ष पहले ही हो गया है. वो तो अपनी पत्नी के चुनाव लड़ने की वजह से ड्यूटी कटवाना चाहता है. सच्चाई सामने आते ही जिला कलक्टर ने उक्त शिक्षक को चुनाव ड्यूटी देने के लिए सख्ती से पावंद कर दिया है. साथ पीठासीन स्तर के इस कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही के साथ लोकप्रतिनिधित्व अधिनियमों के प्रावधानों के तहत सख्त कार्यवाही करने निर्देश जारी कर दिये है. इसके साथ ही स्कूल के प्रधानाध्यापक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही करने के आदेश दे दिये है.
इस मामले के प्रकाश में आते ही लोगों की प्रतिक्रियाऐं सामने आ रही है. लोगों की माने तो शिक्षक से उन्हें ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं थी. दूसरी तरफ ये भी सच्चाई है कि चुनाव डयूटी पर शिक्षकों को तमाम तरह की परेशानियों से दो चार होना पडता है. तो कुछ शिक्षक अपने तिकडम ,जुगाड और लेन देन के रास्तों से हमेशा चुनाव डयूटी से बचते भी रहते है .
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