बेटी न होती तो कैसे पैदा होते पाकिस्तान के एयर चीफ मार्शल
बिल्कुल सही बात है लेकिन थोड़े गलत तरीके से कह दी गयी है. अगर यह भारत की बजाय पाकिस्तान सरकार का विज्ञापन होता तो कोई बात नहीं थी लेकिन भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बेटियों को बचाने की अपील करते हुए एक ऐसा विज्ञापन जारी कर िदया गया जिसमें पाकिस्तान के एक रिटायर्ड एयर चीफ मार्शल की फोटो लगा दी.
रविवार को अंग्रेजी के दैनिक टाईम्स आफ इंडिया को एक तरह से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किराये पर ही ले लिया है. अखबार में थोक के भाव में विज्ञापन और प्रायोजित सामग्री छपी है. ऐसा लगता है मानों मंत्रालय ने बेटियों को बचाने का सारा जिम्मा टाईम्स आफ इंडिया को ही दे िदया है. इन्हीं विज्ञापनों में एक विज्ञापन ऐसा भी है जिसमें यह बताया गया है कि अगर बेटियां न होती तो फिर भला ये महान लोगों कैसे पैदा होते?
इन महान लोगों के नाम पर मंत्री जी ने हरियाणा और दिल्ली के दो क्रिकेट खिलाड़ियों की फोटो प्रकाशित की है. इनके नाम हैं- कपिलदेव और वीरेन्द्र सहवाग. इसके अलावा प्रख्यात सरोद वादक उस्ताद अमजद अली की फोटो छपी है. विज्ञापन में सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कृष्णा तीरथ की फोटो भी छपी है. यहां तक तो ठीक है. लेकिन इस विज्ञापन में पाकिस्तान के रिटायर्ड एयरचीफ मार्शल तनवीर महमूद अहमद की फोटो भी छाप दी है. मंत्रालय की पाकिस्तान के प्रति यह दरियादिली भारी पड़ गयी और मीडिया ने इसे मुद्दा बना दिया जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय को हस्तक्षेप करना पड़ा.
प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने एक बयान में कहा है कि इस मामले की जांच करवायेगी. प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने बयान में कहा है कि भारत सरकार के विज्ञापन में पाकिस्तान के एयरचीफ मार्शल की फोटो छापने की घटना की आंतरिक जांच के आदेश दे दिये गये हैं और जो कुछ हुआ उसके लिए हम शर्मिंदा हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय को शर्मिंदा होने की क्या जरूरत? वैसे भी टाईम्स आफ इंडिया समूह पाकिस्तान और भारत के बीच पीस को बढ़ावा देने के कार्यक्रम आयोजित करवा रहा है. इस विज्ञापन का उसी दिशा में बेहतर इस्तेमाल िकया जा सकता है. क्यों? क्या ऐसा नहीं हो सकता?
हालांकि मंत्री जी कृष्णा तीरथ यह कहकर अपनी जान बचा रही हैं कि फोटो में कोई नाम नहीं लिखा गया है और विज्ञापन बनाने का जिम्मा डीएवीपी का होता है. अब देखते हैं डीएवीपी में कौन नपता है. लेकिन इस घटना से एक बात तो साफ हो गयी कि सरकार अपने कारिंदों को कसने के चाहे जितने उपाय कर ले वे रहेंगे सरकारी कर्मचारी ही.
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