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ठाकरे भभकी के जवाब में राहुल की गांधीगीरी

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राहुल गांधी ने अपनी मुंबई यात्रा से साबित कर दिया है कि उनमें जन नेता बनने की वही ताकत है जो उनके पिताजी के नाना जवाहर लाल नेहरू में थी। जवाहरलाल नेहरू के बारे में बताते हैं कि वे भीड़ के अंदर बेखौफ घुस जाते थे। राहुल गांधी ने उससे भी बड़ा काम किया है। उन्होंने मुंबई में आतंक का पर्याय बन चुके ठाकरे परिवार और उनके समर्थकों को बता दिया है कि हुकूमत और राजनीतिक इच्छा शक्ति की मजबूती के सामने बंदर घुड़की की राजनीति की कोई औकात नहीं है।

आज मुंबई में राहुल गांधी उन इलाकों में घूमते रहे जो शिवसेना के गढ़ माने जाते हैं लेकिन शिवसेना के आला अधिकारी बाल ठाकरे के हुक्म के बावजूद कोई भी शिवसैनिक उनको काले झंडे दिखाने की हिम्मत नहंीं जुटा पाया। अपनी मुंबई यात्रा के दौरान राहुल गांधी के व्यवहार से एक बात साफ हो गई है कि अब मुंबई में शिवसेना का फर्जी भौकाल खत्म होने के मुकाम पर पहुंच चुका है। सुरक्षा की परवाह न करते हुए राहुल गांधी ने उन इलाकों की यात्रा आम मुंबई कर की तरह की जहां शिवसेना और राज ठाकरे के लोगों की मनमानी चलती है। लेकिन राहुल गांधी ने साफ बता दिया कि अगर सरकार तय कर ले तो बड़ा से बड़ा गुंडा भी अपनी बिल में छुपने को मजबूर हो सकता है।

मुंबई में राहुल गांधी कार्यक्रम एसपी.जी. की सुरक्षा हिसाब से बनाया गया था। सांताक्रज हवाई अड्डे पर उतरकर उन्हें हेलीकोप्टर से जुहू जाना था जहां कालेज के कुछ लड़कों-लड़कियों के बीच में उनका भाषण था। यहां तक तो राहुल गांधी ने सुरक्षा के हिसाब से काम किया। कालेज में भाषण के बाद राहुल गांधी को फिर हेलीकाप्टर से ही घाटकोपर की एक दलित बस्ती में जाना था लेकिन उन्होंने इस कार्यक्रम को अलग करके मुंबई की लोकल ट्रेन से वहां पहुंचने का फैसला किया। जुहू से अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे, वहां एटीएम से पैसा निकाला, फिर वहां से चर्चगेट की फास्ट लोकल पकड़ी। दादर में उतरे और पुल से स्टेशन पार किया जैसे आम आदमी करता है। दूसरी तरफ जाकर सेंट्रल रेलवे के दादर स्टेशन से घाटकोपर की ट्रेन पर बैठे और आम आदमियों से मिलते जुलते अपने कार्यक्रम में पहुंच गए। शिवसेना वाले अपने मालिक के हुक्म को पूरा नहीं कर पाए और शहर में कहीं भी काले झंडे नहीं दिखाए गये।

राहुल गांधी की हिम्मत और बहादुरी के यह चार घंटे भारत में गुंडई की राजनीति के मुंह पर एक बड़ा तमाचा है। अजीब इत्तफाक है कि इस देश में गुंडों को राजनीतिक महत्व देने का काम राहुल गांधी के चाचा, स्व. संजय गांधी ने ही शुरू किया था। और अब गुंडों को राजनीति के हाशिए पर लाने का बिगुल भी नेहरू के वंशज राहुल गांधी ने ही फूंका है। जो लोग मुंबई का इतिहास भूगोल जानते हैं, उन्हें मालूम है कि अंधेरी से लोकल ट्रेन के जरिए घाटकोपर जाना आप में एक कठिन काम है। जिन रास्तों से होकर ट्रेन गुजरती है वह सभी शिवसेना के प्रभाव के इलाके हैं और वहां कहीं भी कोई भी आम आदमी राहुल गांधी के खिलाफ नहीं खड़ा हुआ। इससे यह बात साफ है कि मुंबई महानगर में भी कुछ कार्यकर्ताओं के अलावा बाल ठाकरे और राज ठाकरे के साथ कोई नहीं है।

हालांकि यह मानना भी नहीं ठीक होगा कि सुरक्षा एजेंसियों ने राहुल गांधी की हर संभव सुरक्षा का पक्का इंतजाम नहीं किया होगा लेकिन मुंबई में शिवसेना और महाराष्टï्र नवनिर्माण सेना के मुकामी दादाओं  के आतंक के साए में रह रहे लोगों का यह मुगालता जरूर टूटेगा कि शिवसेना वालों को कोई नहीं रोक सकता। राहुल गांधी की मुंबई यात्रा से यह संदेश जरूर जायेगा कि अगर हुकूमत तय कर ले तो कोई भी मनमानी नहीं कर सकता। पता चला है कि पुलिस ने शिवसेना के मुहल्ला लेवेल के नेताओं को ठीक तरीके से धमका दिया है और आने वाले वक्त में वे जोर जबरदस्ती करने से पहले बार बार सोचेंगे। कुल मिलाकर राहुल गांधी ने शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के फर्जी भौकाल पर लगाम लगाकर आम मुंबईकर को यह भरोसा दिलाया है कि सभ्य समाज और बाकी राजनीतिक बिरादरी भविष्य में उसे शिवसेना वालों के रहमोकरम पर नहीं छोड़ेगी।

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NANDAN on 05 February, 2010 21:54;47
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AAPNE LIKHA HAI JO KI EKDAM ATYA HAIलेकिन राहुल गांधी ने साफ बता दिया कि अगर सरकार तय कर ले तो बड़ा से बड़ा गुंडा भी अपनी बिल में छुपने को मजबूर हो सकता है।

AUR YE BAAT SABIT KARTI HAI KI MUMBAI ME JO UTTAR-BHARTIYON PER HAMLA HUA VAH CONGRESS PARTY PRAYOJIT THA.
AUR ISI KE AGLI KADI ME MAHARASHTRA CM NE TAXI CHALKON KE LIYE MARATHI JANNE KI BAAT CHEDI, AUR PHIR KHANDAN KIYA, YANI JINKO MSG DENA THA UN TAK BAT PAHUNCH GAYI.
YANI JAB TAK CONGRESS CHAHEGI UTTAR-BHARTIYA PITATE RAHENGE.
KYONKI SARKAR CONGRSS KI HAI NA KI THAKRE & CO JAISE TUCHHE NETAON KI
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sandeep on 05 February, 2010 23:10;56
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nandan aapne bilkul sahi kaha.....maharashtra mai jo ho raha hai uske liye keval congress hi jimmedar hai....agar uttar bhartiye pitenge nahi to....bihar mai election ke liye mudde kahan se aayenge......aaj hero ban raha hai....gundai ke khilaf aawaj....jab tak maharastra mai election nahi hue.....tab tak kuch dhayan nahi tha...he is doin just cheap polotics...aur lag raha hai sheshnarayan ji bhi gandhiyon ke bhakt hai...jo itna badha chada kar likh rahe hai.........rahul ghandi aaj mumbai gaye thik...but he say anything related the current problem of country and what.....its just a cheap vote politics..jaise uske bade karte aaye hai
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शेष नारायण सिंह on 06 February, 2010 06:02;09
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राहुल गाँधी ने कोई क्रान्ति नहीं किया है . बस इतना साबित किया है कि अगर महाराष्ट्र सरकार की कृपा न हो तो मुंबई में कोई भी आदमी बदमाशी नहीं कर सकता. दुनिया जानती है कि महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकारें आँखे बंद करके शिव सेना को तरजीह देती रही हैं . मुंबई के मराठी मानूस भी तो शिव सेना के साथ नहीं हैं. शिव सेना की मनमानी के खिलाफ एक धमाकेदार स्टेटमेंट है राहुल गाँधी की यात्रा . इस से ज्यादा कुछ नहीं. हालांकि शिव सेना और उस से किसी भी रूप में जुड़े लोगों को यह स्वीकार करने में दिक्क़त होगी लेकिन सही बात यह है इस औकातबोध के बाद शिव सेना का मुकामी रंग फीका होगा और झोपड़ पट्टी में रहने वाला आम आदमी उनसे डरना बंद कर देगा.
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Adil on 06 February, 2010 13:52;52
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Rahul Gandhi ki BOMBAY Yatra zaroor Bhartiya manoos ki vijay hai Sheshji aur Bal Thackeray jaise ghundey ke muh pe ek zordaar tamacha hai jiski goonj se wo shayad ab apni bil mein hi ghusa rahega. Issey ek baat aur saabit hoti hai, ki har marathi bolne wala manoos is gundagardi ki rajniti ke saath nahin hai. Kal Bombay ki khamoshi aam marathi ki sabse buland awaaz thi. Aapke lekh se main kaafi hadd tak sahmat hoon. Shayad ab hum chetrawad se uthkar bharatwaad par dhyaan de sakengey aur Mumbai ko uska purana muqaam wapas dila sakengey jahan desh ke har prant, har dharam aur har jaati ke logon ke sapne pooray hotey hain. Bas is baat ki zarurat hai ki Congress sarkaar apne is nishchay ko qaayam rakhey aur in gundon ko daba ke rakhey. Jai Bharat!
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RAJ SINH on 06 February, 2010 16:28;55
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संजय तिवारी जी ,
आपके घोषित उद्देश , निर्भीक पत्रकारिता के चलते ही विस्फोट से जुडाव हुआ और वही आदर का कारन भी था. लेकिन इसी आलेख पर की गयी मेरी टिप्पणी को निकाल कर आपने मेरा भ्रम तोड़ दिया है. मेरे लिखे पर हिम्मत थी तो शेषनारायण जी जबाब दे सकते थे.
कहीं ' विस्फोट ' भी तो प्रभाष जोशी और यस पी सिंह का नाम और काम का गुण गान ओढ़ प्रायोजित पत्रकारिता के गिरोह में तो नहीं शामिल हो गया .अब इस साईट पर आने के पहले सोचना पड़ेगा .
बता दूं की अपने लिखे एक एक शब्द के पीछे मैं नैतिक , सामाजिक ,कानूनी और भारतमाता के सरोकारों के साथ अटल खड़ा हूँ.
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संजय तिवारी on 06 February, 2010 17:48;34
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राज जी, यह आप क्या कह रहे हैं. हमने तो कोई टिप्पणी हटाई नहीं है. आप अपना क्रोध बरकरार रखते हुए दोबारा उस टिप्पणी को लिख दीजिए. कहीं ऐसा तो नहीं है कि आपने प्रेम शुक्ला वाले लेख पर टिप्पणी लिखी और उसे यहां खोज रहे हैं? चेक कर लीजिए. नहीं तो दोबारा लिखने में क्या हर्ज है?

नये मीडिया माध्यम में टिप्पणीकर्ता भी लेखक ही होता है. लेखक सिर्फ विषय प्रवर्तन करता है. उसे पूरा तो टिप्पणीकर्ता ही करता है.
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shailendra kumar on 07 February, 2010 01:58;12
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kalidas ki kahani to apne suni hi hogi sheshji use vidyotma se behtar kaise sabit kiya gaya. ye to taya hai ki rahul ko dekhne ka akarshana janata mein hai jaise kuch saal pehle tak soniya ko dekhne ke liye bhid jutati thi aur congress ke chatukaro dwara unhe hi shrestha bataya jata tha kuch saal baad rahul ka bhi akarshana khatma ho jayega tab tak intjar kijiye. ye to congress ne sabit kar hi diya hai ki maharastra mein ab tak jo hora tha aur ho raha hai wo rajya sarkar ki maun sahmati se hi ho raha hai. congress kabhi kisi bhi samasya ka samadhan nahi khojati uska to siddhanta hi madyamarga ka hai matalab do ke beech mein teesre ka fayada. meri yaddasta mein ek bar apne hi paida kiye hue bhindarawale ko mar kar sahi kam kiya aur isse sabit ho gaya ki deshdroha ko daman se hi door kiya ja sakta hai yahi siddhata kashmir, assam aur maharastra me bhi lagu hota hai. ummid hai ki aap jawab jaroor denge
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RAJ SINH on 07 February, 2010 03:16;27
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प्रिय संजय जी ,
आप पर अविश्वास करने के पहले सौ बार सोचूंगा .अतः गर आप कह रहे हैं की टिप्पणी हटाई गयी नहीं तो आपकी सदाशयता पर यकीन है.लेकिन मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ की टिप्पणी इसी लेख पर की थी और छपी भी देखी थी.
संभावनाओं की तलाश करें की कहीं सत्ता के दलाल तकनीकी रूप से टिप्पणियां आपकी साईट से अपहरण तो नहीं कर रहे .
हाँ शेष नारायण जी के लिखे पर यही कह सकता हूँ की यह लेख पत्रकारिता पर कलंक है और शायद अज्ञान ,पूर्वाग्रह या सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा जिस तरह मीडिया को खरीद कर पत्रकारिता को कोठा बना दिया गया है और जिसके दल्ले पत्रकारिता को जनाभिमुख नहीं बल्कि राजनैतिक सत्ता के भड़ुओं के रूप में जनद्रोही पत्रकारिता कर रहे हैं वह आपकी sayyit पर छापना एक नेहरु-गांधी परिवार वाद की नौटंकी के घटिया ,गलिच्छ ,दुर्गंधित और देश द्रोही चरित्र का भौंडा विज्ञापन ही है.

भोंदू युवराज की प्रशस्ति करने वाले शेष जी जैसे तमाम तथाकथित पत्रकार को यह ज्ञान तो होगा ही की ६८ में इंदिरा की ही शह पर कमुनिष्टों का गढ़ तोड़ने की खातिर ही बाल ठाकरे जैसे चूहे को शेर बना दिया था .वही चीज राज ठाकरे के साथ की गयी थी , कांग्रेस सत्ता के धन बल और सरकार बल के पूरे समर्थन से इस छुद्र चूहे को जो उपद्रव करने दिए गए उसकी झंडी सोनिया ने ही दी थी और विलासराव देशमुख,कृपाशंकर सिंह और अहमद पटेल की तिकड़ी ने न सिर्फ पैसे साधनों और नपुंसक चरित्र नहीं बल्कि सोची समझी रणनीति के तहत सरकार को इस चूहे को शेर बना दिया . वर्ना पुलिस का एक अदना सिपाही भी इसे इसकी औकात बता देता .शेष जी पता करें की कांग्रेस नेत्रित्व ने २००७-०८ के दिनों में क्या तो किया और मुंह ही नहीं खोला .
वह खेल था कांग्रेस का सोचा समझा और पूर्ण समन्वित .फायदा ले लिया और अब यूं पी बिहार में फायदा लेने की यह सोची समझी रणनीति है.
बिकी मीडिया ने इस खेल में खूब पार्ट निबाहा और उसी के तहत भडुए पत्रकारों ने पूरी मदद भी की .मुझे इस भाषा पर खेद है पर इसके सिवा अपना प्रयोजन स्पष्ट करने का मेरे पास साधन भी नहीं था.
शेष जी आपने चाहे जिस महान नामों से पत्रकारिता सीखी पर आपका लेखन तथाकथित लोहियावादियों की राजनैतिक गिरावट का पत्रकारिता का संस्करण है . चारण भाटों के लेखन का स्मरण दिलाती आपकी पत्रकारिता जनद्रोही देशद्रोही चरित्र का दस्तावेज है.

इस नौटंकी बाज़ घराने के नए जोकर को जन नायक न सिर्फ आप ही बता सकते हैं बल्कि बीके हुओं की पूरी टीम ही मीडिया बन गयी है.
लगे रहिये शायद किसी दिन राज्यसभा ,पद्मश्री मिल जाये.वर्ना दाल रोटी तो चल ही जायेगी .

लेकिन भारतीय जनता के चरित्र की ताकत पर भरोसा है तो किसी दिन देशद्रोह और बीके हुए लोगों के अपराध में जन अदालत के मुजरिम ही होंगे आप जैसे लोग .
और आप सहित सभी पत्रकारों के लिए यह आवश्यक हो गया है की उनकी आय ,जीवन स्तर और संपत्ति का हिसाब भी सूचना अधिकार के ही तहत लाया जाये.ताकि बिकने बेचने का कुछ अंदाज़ लगे,पहले चौथे खम्भे की गंगोत्री पवित्र हो.
ताकि जनता चौथे खम्भे की कुछ तो विश्वसनीयता जाने .
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शेष नारायण सिंह on 07 February, 2010 08:22;40
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राज सिंह जी की भाषा उनके मानसिक और बौद्धिक स्तर के बारे में सब कुछ पूरी तरह से प्रकाशित कर देती है . मैं किसी भी हालत में ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता और न ही सभ्य समाज को करना चाहिए .

जहां तक उनकी कही गयी बात का सवाल है कि शिवसेना को कांग्रेस ने ही शुरू करवाया और आगे बढ़ाया , अगर मेरे लेख पर गौर करें तो किसी भी साफ़ नज़र आएगा कि मैंने भी यही बात कही है कि बाल ठाकरे को कांग्रेस ने ही पैदा किया है और उसी की कृपा से वह चल रहे हैं . राहुल गाँधी ने केवल यह किया है कि उन्होंने कांग्रेसी मुख्य मंत्री को सत्ता की ताक़त को इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया है . यह बात किसी की समझ में आ जानी चाहिए.

एक बात और..राज सिंह नाम के इस लेखक ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है मैं उसकी निंदा करता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि सभ्य समाज में इनकी दल्ला, कोठा जैसे शब्दों को इस्तेमाल करने की हिमाकत की चौतरफा निंदा की जाए. वेब पत्रकारिता में लेखक को बहुत ज़्यादा स्वतंत्रता मिली हुई है और बहुत अच्छा काम भी हो रहा है लेकिन कुछ लोग इसकी लोकप्रियता से परेशान भी हैं और वे इस माध्यम की निंदा करने में कोई कसर नहीं रख रहे हैं . अगर इस लेखक की कोठा और दल्ला मानसिकता को हमने महत्व दिया तो वेब माध्यम का नुकसान हो जाएगा. एक बार मैं सभ्य समाज का फिर से आवाहन करता हूँ कि इस तरह की गटर वाली भाषा के खिलाफ लामबंद हों और इस तरह की कोठा और दल्ला मानसिकता वालों की छिछोरपन वाली भाषा पर लगाम लगाएं . क्योंकि अगर इन लोगों को फ़ौरन भाषा की मर्यादा में रहने को मजबूर न किया गया तो वेब पत्रकारिता की क्रान्ति का नुकसान हो जाएगा..
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RAJ SINH on 07 February, 2010 15:14;37
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शेष जी आप जैसों की निंदा मेरे लिए प्रमाण पत्र है ,मेरी दृष्टी , दृढ़ता और सच कहने के साह्स का.

ऐसी भाषा लिखना मेरे जैसे संस्कारित व्यक्ति के लिए शर्म है.पर देश हित के सामने वह भी बलिदान मानता हूँ की आप और आप जैसे बिके लोगों की पत्रकारिता उद्देश ,धंधा सब जग जाहिर हो चुका है ,और प्रबुद्ध जन पत्रकारों को आगे आना होगा .
हिन्दी पत्रकारिता की थू थू हो रही है .जिसमे आप जैसे टुटपुंजिया छाप पत्रकारों से लेकर बड़े घराने के मालिक संपादक तक न जाने कितने बिके हैं और न जाने कितने बिकने की कतार में लगे हैं ,बिकने को .
अगर पत्रकारिता को आप भी धर्म मानते हैं , धंधा नहीं तो आप सब के लिये यही भाषा उचित है क्योंकि मेरी हिन्दी गरिमा और शब्द सौष्ठव की सीमा आप जैसे पत्रकारों के लिए कुछ और नहीं लिख पायेगी क्योंकि कथ्य भाषा से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है और कभी कभी जन भाषा के बिना आप जैसों का दोगलापन बयां ही नहीं किया जा सकता .चाटुकारिता और पत्रकारिता में फर्क है.

आप का लेख मैंने ठीक से पढ़ा है और ठाकरे वाली सफाई का अर्धसत्य सम्पूर्ण झूठ से भी ज्यादा खतरनाक है.और आप जैसे शब्दों के घोलमाल से निर्दिष्ट कह देने के लिए जिस तरह ट्रेन किये जाते हैं ,वह भी जानता हूँ .

और यह सिर्फ आप पर ही नहीं लागू है .दिल्ली से गल्ली तक आप जैसों की पूरी फौज खडी है और हर पार्टी के भोंपू बिकाऊ पत्रकार फैले हैं .और सब के सब जन द्रोही और भारत द्रोही हैं.

इस ' व्यक्ति ' राज सिंह के बारे में ठीक से जानेंगे तो खुद को नंगा ही नहीं बहुत बौने नज़र आयेंगे, पाएंगे.मैंने बंद कमरे से और बिकी लेखनी से नहीं बल्कि भारत और अमेरिका तथा संयुक्त राष्ट्र में सड़क से अदालत तक लम्बा और अनथक विजयी संघर्ष किया है . लाठी डंडा जेल तक भी जिसमे शामिल है.मैं डॉ. लोहिया का शिष्य हूँ और भ्रम में तथाकथित सत्ताजीवी ,लोहिया का लबादा ओढ़ सत्ता सुखवादी न समझ लीजियेगा.
और जानकारी जानना ही चाहते हों और नेट के खोज इंजनो के बारे में जानते हों तो हजारों पेज मिल जायेंगे .अपने बारे में खुद कहना पसंद नहीं करता लेकिन चाहें तो जान जायेंगे.
राज ठाकरे के गुंडों की गुंडागिरी को सड़क पर भी देखा है और मुकाबला भी किया है .और उन भयंकर दिनों में भले लगा हो की मैं उत्तर भारतीयों के साथ खड़ा हूँ पर मैं सिर्फ भारत के साथ और भारत के लिए खड़ा होता हूँ. मैं मुम्बईकर भी हूँ .यहाँ क्या नाटक हो रहा है सड़क से संसद तक देख रहा हूँ.लड़ भी रहा हूँ.और आज की पत्रकारिता और पत्रकारों को भी खूब जनता हूँ .
पत्रकार नहीं हूँ स्वतंत्र टिप्पणी कार हूँ अकाट्य सत्यों के साथ .और दिल्ली,मुंबई के प्रेस क्लबों और पत्रकारों का चरित्र और असलियत जानता हूँ.

काश प्रभाष जी होते तो वह भी ऐसा ही कुछ कहते.हाँ उनके शब्द संस्कार तो हैं मेरे पास पर जन धर्म की ड्यूटी के लिए यह लिखना मेरा धर्म है और असंस्कृत होने की शर्म भी बहुत कष्ट के साथ दुखी मन के साथ वहन कर रहा हूँ .
आपके मन को दुखाने के लिए छमा पर देश के लिए कर्तव्य है मेरा के आप जैसे चरित्रों को उनकी औकात बता दूं साफ़ साफ़ .
और भी टिप्पणियां हैं यहीं पर ,संभ्रांत .उनको उत्तर दे दीजिये .
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image शेष जी शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
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राहुल बाबा की नजर में जैसे सिमी वैसे ही आरएसएस
राहुल गांधी ने नया सुर्रा छोड़ दिया है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी और आरएसएस को एक ही तराजू में तोल दिया। दो दिन पहले मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में राहुल ने कांग्रेस में आने वाले लोगों से बेहिचक कह दिया था। आरएसएस और सिमी की विचारधारा छोड़कर आने वालों को ही कांग्रेस में जगह मिलेगी। बुधवार को भोपाल में जब राहुल के बयान का मतलब पूछा गया तो राहुल ने कह दिया- आरएसएस और सिमी दोनों ही कट्टरवादी संगठन। वैचारिक कट्टरता की दृष्टि से इनमें कोई फर्क नहीं।...
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बाबरी विध्वंस को फैसले से न जोड़े कांग्रेस
भाजपा ने कहा है कि अयोध्या में स्वामित्व मामले के फैसले को कांग्रेस बेवजह बाबरी मस्जिद ढांचा ढहाए जाने से जोड़ रही है जबकि वह अलग आपराधिक मामला है जिसकी कानूनी प्रक्रिया जारी है। पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने नई दिल्ली में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘जहां तक अभी के निर्णय का सवाल है तो उच्च न्यायासय ने कुछ दीवानी मामलों पर यह फैसला सुनाया है और इसका हम स्वागत करते हैं।‘‘ उन्होंने कहा कि ये दीवानी मामले कभी भी बाबरी मस्जिद ढहाए जाने से संबंधित नहीं थे। कांग्रेस दोनों मामलों को जोड़ने का प्रयास कर रही है, जिसका कोई तुक नहीं है।...
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कांग्रेस के लिए कठिन साबित हो रहा है अयोध्या पर फैसला
अयोध्या पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ का फैसला कांग्रेस को न उगलते बन रहा न निगलते। मुलायम के बाद मा‌र्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी [माकपा] की तरफ से फैसले पर हुई राजनीति ने कांग्रेस की अल्पसंख्यक वोटों की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी इन दलों की तरह फैसले पर प्रतिक्रिया भी नहीं जता सकती। ऐसे में उसने अदालत के बाहर इस विवाद के निपटारे की पैरवी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील करके अपनी खाल बचाने की कोशिश की है। यही नहीं, 1992 में विवादित ढांचा गिराने के लिए भाजपा पर जोरदार हमला बोलकर उसने दूसरे दलों से लंबी लकीर खींचने की कोशिश भी की है।...
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मुसलमानों ने कहा: माहौल बिगाड़ रहे हैं मुलायम
अयोध्या विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की टिप्पणी मुसलमानों और विशेष रूप से मुस्लिम धर्मगुरुओं को नागवार गुजरी है। अधिकांश मुस्लिम उलमा का कहना है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर किसी को भी ऐसी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए जो राजनीति से प्रेरित हो और जिससे माहौल बिगड़ने की आशंका हो।...
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शिवराज के राज में राहुल राजकुमार
राजनीतिक अदावत अपनी जगह लेकिन राज्य का आतिथ्य सबसे ऊपर. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राहुल गांधी के मध्य प्रदेश में प्रस्तावित दौरे के दौरान उनके स्वागत सत्कार में कोई कमी नहीं रखना चाहते इसलिए उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है. ...
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