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राहुल गांधी ने दिखाया ठाकरे को ठेंगा

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राहुल गांधी ने शिवसेना का भ्रम तोड़ दिया। उन्होंने राज ठाकरे को भी उनकी औकात दिखा दी। कांग्रेस को राहुल गांधी के इस मुंबई दौरे का कितना फायदा हुआ, यह तो बाद समीक्षा के बाद हो पता चलेगा। जिस शिवसेना ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के मुंबई दौरे का विरोध करने का ऐलान किया था, उसी शिवसेना को राहुल ने मुंबई में खूब छकाया।

राहुल गांधी उसी दादर इलाके में लोकल ट्रेन से उतरे जहां शिवसेना का मुख्यालय है और उसका सबसे बड़ा दबदबा भी। शिवसेना का मुख्यालय भी दादर में ही है। लेकिन फिर भी शिवसेना के मुखिया बाल ढाकरे द्वारा लाखों शिवसैनिकों से राहुल गांधी के दौरे के विरोध के ऐलान का दादर में भी कोई असर नहीं था। बाल ठाकरे की बात उनके लाखों शिवसैनिकों ने नहीं मानी। कांग्रेस के इस युवा नेता को काले झंडे दिखाने के लिए लाकों के बजाय सिर्फ 346 शिवसैनिक ही पहुंचे। यह बाल ठाकरे के बूढ़े हो जाने का असर तो है ही। शिवसेना के बहुत कमजोर हो जाने की सबसे ताजा तस्वीर भी है। और मराठी अस्मिता के नाम पर जिस घाटकोपर इलाके में अपनी राजनीति की सबसे बड़ी दूकान चलाने वाले राज ठाकरे का भी कोई असर नहीं दिखा। घाटकोपर इलाके को राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अपना गढ़ बताती रही है। वहां के लोगों ने कांग्रेस महासचिव राहुल का जमकर स्वागत किया। राहुल को उन दलित बस्तियों में भी जबरदस्त सम्मान मिला, जिनके दम पर राज ठाकरे की पार्टी के लोग अक्सर अपनी धाक जमाने की कोशिश करते रहते हैं।

राहुल गांधी ने मुंबई की भीड़ भरी लोकल ट्रेन में भी सफर किया। राहुल ने अंधेरी स्टेशन पर आम लोगों के साथ लाइन में लगकर टिकट भी लिया। और ना केवल लोकल में सफर किया, बल्कि स्लो लोकल में सफर करने के बाद ट्रेन बदलकर उस विरार फास्ट में भी बैठे, जिसमें आम तौर पर नए लोग चढ़ने तक से भी बहुत डरते हैं। यह कांग्रेस के इस युवा नेता का मुंबई को एक खास किस्म का सरप्राइज था। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने शुक्रवार को यहां सुरक्षा इंतजामों की परवाह नहीं की।  वैसे कांग्रेस महासचिव के मुंबई दौरे के मद्देनजर शुक्रवार को यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। यह ताकि उन्हे कोई भी काले झंडे न दिखा सके। जुहू स्थित भाईदास हॉल से राहुल अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे। पूर्व कार्यक्रम के अनुसार उन्हे हेलीकॉप्टर से वहां पहुंचना था, लेकिन अचानक उसमें फेरबदल कर दिया गया। अंधेरी जाते वक्त उन्होंने अपने वाहन से ही लोगों का अभिवादन किया और जैसा कि वे आम तोर पर अपने हर दौरे में हर इलाके में करते रहते हैं, भीड़ में घुसकर कुछ लोगों के साथ हाथ भी मिलाया। अंधेरी स्टेशन पर राहुल ने विरार-दादर रेलगाड़ी के द्वितीय श्रेणी के डिब्बे में सवारी की। वह दोपहर 1.15 बजे दादर पहुंचे। रेलवे के अफसरों को भी राहुल ने चौंका दिया। उन बेचारों को राहुल गांधी के लोकल ट्रेन में सफर करने के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी।

राहुल सुबह करीब 11.20 बजे सांताक्रूज ओल्ड हवाई अड्डा पहुंचे और वहां से जुहू में भाईदास हाल रवाना हो गए, जहां । शिवसेना ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया था कि वे राहुल को काले झंडे दिखाएं, क्योंकि उन्होंने मराठी लोगों और महाराष्ट्र का अपमान किया है। सुरक्षाकर्मियों ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी व्यक्ति झंडा उठाए दिखाई न दे। इस दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मुंबई पुलिस के अलावा एनएसजी, रैपिड एक्शन फोर्स और बाकी सुरक्षा बलों के कमांडो तैनात किए गए थे। भाईदास हाल से कुछ दूर शिवसेना की महिला कार्यकर्ताओं के समूह ने सुरक्षा बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्हें हिरासत में ले लिया गया। निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए अंधेरी, विले पार्ले, जोगेश्वरी और घाटकोपर में कहीं – कहीं पर शिव सैनिक जमा भी हुए थे। लेकिन वे कुछ नहीं कर पाए।

मुंबई में यह पहला मौका था, जब शिवसेना के मुखिया बाल ठाकरे का ऐलान खाली गया। शिवसेना के मुखपत्र सामना में बाल ठाकरे के नाम से लिखा गया था कि लाखों शिवसैनिक अपने घरों से निकल कर मुंबई में राहुल गांधी को काले झंडे दिखा कर उनका विरोध करें। लेकिन बाल ठाकरे का ऐलान बिल्कुल बेअसर साबित हुआ। वजह दोनों में से कोई एक जरूर है कि राज ठाकरे के पार्टी छोड़कर जाने के बाद या शिवसेना में लाखों की तादाद में शिवसैनिक बचे नहीं, या फिर शिवसैनिकों ने अब अपने ‘साहेब’ का आदेश मानना बंद कर दिया है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस के युवराज के मुंबई दौरे ने मुंबई में बाल ठाकरे और भतीजे राज ठाकरे को अपना घर सम्हालने की चिंता में डाल दिया है।

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rajiv on 06 February, 2010 00:04;29
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niranjan ji
राहुल गांधी का मुंबई तमाशा
ko padh lo....aapke lekh ki sachchai pata lag jayegi aapko....phaltu mai chamchgiri wale lekh likhte ho.....
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Sadanand Joshi on 06 February, 2010 00:55;32
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आपने बहुत ही साफ साफ लिखकर शिवसेना के बाला साहेब और उनकी सेना की कमजार होती ताकत का बयान किया है। इससे पहले कोई भी सरकार ठाकरे की सेना पर रोक लगाने में नाकाम रही है। मतलब स्पष्ट है कि बाल ठाकरे का बोलना अब शायद आदेश नहीं रह गया है। सही है कि शिवसेना अब पहले जैसी ताकतवर नहीं रही है। राज ठाकरे ने बाल ठाकरे का उत्तराधिकार बाकायदा छीना है। जब बाल ठाकरे मुंबई में नफरत की आंधी चलवाते हैं तो एक तरह से वे राज ठाकरे की ताकत को हवा देते हुए राज ठाकरे से बराबरी करते दिखते है। सच यही है कि राहुल गांधी के दौरे में शिवसेना का कमजार स्वरूप सामने आया है। अपनी हालत सुधारने पर शिवसेना को ध्यान देना चाहिए।
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RAJ SINH on 06 February, 2010 16:14;03
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ये सब शेर , शिवसेना ,मनसे बनाये हुए तो कांग्रेस के ही हैं.इनका भी भिन्द्रन्वाले जैसा हस्र हो के रहेगा. लेकिन कांग्रेस का अभिशाप तो देश पर छाया ही है .
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Vicky G on 06 February, 2010 16:45;08
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वाह! आपने बहुत बढिया लिखा है. ऐसे ही लिखते रहें. कुछ साल बाद आपको कांग्रेस सरकार की तरफ़ से पद्मश्री अवार्ड तो मिल ही जाएगा. आपका लेख पढकर लगता है कि देश में चारण और भाटों की परंपरा अभी भी चल रही है और कुछ भाट किस्म के लोग तो अपने आप को पत्रकार भी कहने लगे हैं. जनाब, ज़रा यह बताइए कि जब मुंबई में यूपी और बिहार वालों को पीटा जा रहा था, तो आपके ये "साहसी" युवराज कहां थे? और जब अब बिहार में चुनाव आए हैं तो "शेर" बनकर ट्रेन में सफ़र कर रहे हैं!
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Chinmay on 06 February, 2010 23:53;39
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राहुल गाँधी को अपने दो कार्यक्रम स्थगित करने पड़े और ५ कि. मी. की दूरी हैलिकॉप्टेर से तय करनी पड़ी. सस्ती लोकप्रियता लूटने की खातिर स्पेशल लोकल ट्रेन से सफ़र किया और फोटूएँ खिंचवाई. राहुल गाँधी पर ठाकरे फोबिया का असर इतना गहरा था की मीडिया से भी मुखातिब नही हुए.
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shailendra kumar on 07 February, 2010 01:15;04
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ab ap ye to man hi rahe hai ki maharastra sarkar ki dhamak ke karan shivsainik bahar nikalne ki himmat nahi juta sake to ye sabit ho jata hai ki mumbai me uttar bhartiyo par hamala maharastra sarkar ke samarthan se hi sambhav hai. agar aap nispatch patrakar hai to jawab awasya dege.
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image निरंजन परिहार मीडिया में प्रभाष जोशी और एसपी सिंह के प्रति बेहद कृतज्ञ निरंजन परिहार ने पंद्रह साल तक प्रिंट और सन 2000 के बाद से टीवी की खबरों को जो धार बख्शी, वह मुंबई की पत्रकारिता के लिए मिसाल हैं। बेजान खबरें लिखे जाने की परंपरागत शैली को उलटकर रख देने वाले परिहार का सफर नवभारत टाइम्स से शुरू हुआ और जनसत्ता में एक दशक तक रहने के बाद दो साल तक प्रात:काल दैनिक के स्थानीय संपादक भी रहे। सहारा समय टीवी नेटवर्क में संपादकीय समन्वयक और आइटीएन टीवी में सीनियर एडीटर भी रहे। और डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाई। संपर्क: niranjanparihar@hotmail.com
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