दफन हो गया प्रमोद महाजन हत्याकाण्ड का रहस्य
प्रवीण महाजन की मौत हो गयी. 12 दिसंबर 2009 को उन्हें ठाणे के ज्युपिटर अस्पताल में ब्रेन हैमरेज के बाद दाखिल करवाया गया था. जब उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ तो प्रवीण महाजन पेरोल पर जेल से बाहर अपने परिवार वालों से मिलने के लिए आये थे. जिस दिन उन्हें वापस जेल जाना था उसके कुछ घण्टे पहले ही उन्हें ब्रेन हैमरेज का अटैक हुआ और उन्हें ज्युपिटर अस्पताल में भर्ती करवाया गया. प्रवीण महाजन की मौत सामान्य मौत नहीं है. उनकी मौत से उन कारणों की भी मौत हो गयी जिसके चलते उन्होंने प्रमोद महाजन की हत्या की थी.
प्रमोद महाजन की हत्या के आरोप में पुलिस के पास खुद चलकर पहुंचे प्रवीण महाजन ने अपने बड़े भाई को मारने जैसा अदम्य दुस्साहस क्यों किया इसका जवाब न कल किसी के पास था और न आज किसी के पास है. प्रवीण महाजन की मौत के बाद तो प्रमोद महाजन हत्याकाण्ड के पीछे छिपे रहस्यों पर सदा सर्वदा के लिए पर्दा पड़ गया. प्रमोद महाजन की हत्या के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा था कि आखिर प्रवीण महाजन ने ऐसा क्यों किया? खुद प्रवीण महाजन ने जो कारण बताए थे उस पर शायद ही किसी को कभी यकीन हो. बाकी जो भी अफवाहें हैं उनमें कितनी सच्चाई है, कहना मुश्किल है. कोई कहता है कि उनको प्रमोद महाजन की किसी राजनीतिक विरोधी ताकत ने इस्तेमाल किया तो कोई कहता है कि निजी पारिवारिक मामलों का विवाद इतना बढ़ गया था कि प्रवीण महाजन बेकाबू हो गये. लेकिन ये ऐसे मामले हैं जो एक दिन में पैदा नहीं हुए होंगे. फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि 3 मई 2006 को अचानक सुबह की पहली किरण के साथ ही वह प्रमोद महाजन के घर पर पहुंच गये और प्रमोद महाजन पर गोलियां बरसा दीं. प्रमोद महाजन को नजदीक से जाननेवाले भी मानते हैं कि प्रवीण को पालने पोसने का काम प्रमोद महाजन ने ही किया था. प्रमोद महाजन का स्वभाव था कि वे पूरे परिवार की चिंता करते थे जिसमें प्रवीण महाजन भी शामिल थे. खुद प्रवीण महाजन चाहे जितने 'नालायक' रहें हों लेकिन प्रमोद महाजन के सामने हमेशा अदब में ही रहते थे.
कुछ लोग कहते हैं प्रवीण महाजन प्रमोद महाजन के बेटे के बारे में बात करने गये थे. प्रमोद महाजन के बेटे यानी, राहुल महाजन जो कि अपनी शादी के बाद अब टीवी पर शादी रचाने की तैयारी कर रहे हैं. भतीजे ने कुछ ऐसा किया था जिसने चाचा को अंदर से व्यथित कर दिया था. इस तरह की बातों को थोड़ा बल तब और मिला जब राहुल महाजन का लंपट स्वभाव सार्वजनिक होने लगा. गर्द और पुड़िया (ड्रग्स) के शौकीन राहुल महाजन जब बीमारी की अवस्था में दिल्ली के अपोलो अस्पताल ले जाए गये तो प्रवीण महाजन ने आश्चर्यजनक रूप से अपनी खुशी को छिपाने की भी कोशिश नहीं की थी. प्रमोद महाजन की हत्या के बाद प्रवीण महाजन ने सार्वजनिक रूप से कारण को स्वीकार करते हुए कहा था कि वे प्रमोद भाई से "कुछ" बात करना चाहते थे लेकिन प्रमोद उन्हें समय नहीं दे रहे थे. उस दिन भी जब प्रवीण महाजन बड़े भाई प्रमोद के फ्लैट पर पहुंचे तो शुरू में दोनों के बीच जमकर झड़प हुई. और अचानक प्रवीण महाजन ने रिवाल्वर निकाली और प्रमोद महाजन पर गोलियां दाग दी. यह बात तो सामने आयी कि दोनों में झड़प हुई लेकिन यह कभी सामने नहीं आया कि उन दोनों में किस बात पर झड़प हुई यह कभी सामने नहीं आया और अब शायद कभी आयेगा भी नहीं. प्रमोद महाजन हत्याकाण्ड के बाद प्रवीण महाजन ने खुद जाकर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इसके बाद भी प्रवीण महाजन को जिसने भी कभी सार्वजनिक रूप से देखा हो उसने प्रवीण महाजन के चेहरे पर कभी अपराध बोध नहीं पाया होगा. हां, प्रवीण के चेहरे पर चिंता साफ झलकती थी जो इस बात का संकेत थी कि यह न होता तो अच्छा रहता.
प्रवीण महाजन ने अपने बड़े भाई प्रमोद महाजन की हत्या की इसे सब जानते हैं. लेकिन प्रवीण महाजन ने ऐसा क्यों किया इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं है. प्रमोद महाजन समकालीन भारतीय राजनीति के सबसे बुलंद सितारे थे. उनकी हत्या कोई सामान्य घटना नहीं थी भले ही उसके कारण कुछ भी रहे हों. प्रवीण महाजन की मौत से उन कारणों पर अब सदा सर्वदा के लिए पर्दा पड़ गया है.
प्रवीण महाजन द्वारा प्रमोद महाजन की हत्या का असल कारण जिस प्रकार रहस्य बना रहा उससे भी बड़ा रहस्य प्रवीण महाजन की मौत बन गयी. 27 नवंबर 2009 को उन्हें पेरोल पर रिहा किया गया. 12 दिसंबर को उन्हें दोबारा जेल में हाजिरी देनी थी लेकिन उसी दिन उन्हें भीषण मानसिक आघात हुआ और वे अस्पताल पहुंच गये. अस्पताल में उन्हें सघन चिकित्सा कक्ष में वेंटिलेटर पर रखा गया. अस्पताल ने उस दिन शाम को जो बुलेटिन जारी किया उसमें बताया था कि उनकी हालत बहुत नाजुक है. अगले कुछ दिनों तक अस्पताल यही कहता रहा कि उनकी हालत बहुत नाजुक है. बाद में लोगों ने खोज खबर लेना छोड़ दिया. लेकिन इस बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ. प्रवीण की पत्नी सारंगी महाजन ने कहा कि क्योंकि प्रवीण अपना पेरोल का वक्त पूरा कर चुके थे इसलिए अस्पताल का बिल प्रशासन भरेगा. इस पर राज्य सरकार ने कहा कि वे तकनीकि रूप से इसकी विवेचना करेंगे. सरकार ने तकनीकि रूप से इसकी विवेचना की और पाया कि राज्य सरकार बिल भरने के लिए उत्तरदायी नहीं है क्योंकि अगर वे जेल पहुंच गये होते तो फिर सरकार की जिम्मेवारी बनती. दो दिन पहले ही सरकार ने यह घोषणा की और घोषणा के बाद अस्पताल प्रशासन ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. सवाल अस्पताल प्रशासन पर भी उठता है कि क्या उसने प्रवीण महाजन को कोमा की हालत में वेंटिलटर पर सिर्फ इसलिए जिंदा रखा क्योंकि उसका बिल कौन भरेगा यह तय नहीं हो पा रहा था? और जैसे ही राज्य सरकार ने बिल भरने से मना किया प्रवीण महाजन को मृत घोषित कर दिया गया. सवाल और भी हैं जो प्रमोद महाजन की हत्या के बहुत पहले से उठने शुरू होते हैं और प्रवीण महाजन की मौत के बाद भी उठते रहेंगे. लेकिन प्रमोद और प्रवीण के इस प्रकरण में भारतीय राजनीति और समाज व्यवस्था की ऐसे त्रासद सवालों की पोटली छिपी नजर आती है जिसका जवाब शायद ही कभी कोई खोज सके. प्रमोद महाजन केवल भारतीय जनता पार्टी के लिए ही वरदान नहीं थे बल्कि भारतीय राजनीति में वे कई सारी अद्भुद क्षमताओं के सम्मिश्रण थे. लेकिन उनका अंत एक ऐसा त्रासद अध्याय साबित हुआ है जो प्रमोद महाजन की सारी क्षमताओं को शून्य कर देता है. पूरा प्रकरण बेहद दुखद, क्षुब्ध करनेवाला है. प्रमोद महाजन और प्रवीण महाजन के के साथ ऐसा न होता तो अच्छा होता.
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