गुर्जर आरक्षण पर फिर गुर्राये बैंसला
"राजस्थान सरकार या तो सीधे तरीके से गुर्जर और आर्थिक रूप से पिछडे सवर्णो को 5 व 14 प्रतिशत आरक्षण दे दे वरना एक बार फिर से आन्दोलन का रास्ता अपनाना पडेगा. और इस बार समाज निर्णायक लडाई के मूड में है. इसके लिए मुझे सर्व समाज से एक लाख लोगों की आवश्यकता पडेगी. समय और स्थान में बता दूंगा. आप तो एक बार फिर से तैयार हो जाओ. ऐसा लग रहा है.एक बार फिर से हिन्दुस्तान गुर्जरों का आन्दोलन देखेगा."
कर्नल बैंसला इन दिनों प्रदेश भर की यात्रा कर गुर्जर समाज को फिर से आन्दोलन के लिए तैयार करने के साथ ही लोगों का मन भी टटोल रहे है. इस क्रम में उन्होंने भरतपुर के बयाना में एक सभा की . सभा में कर्नल बैंसला ने कहा कि राज्य सरकार ने यदि आरक्षण लागू किये बिना भर्ती प्रक्रिया आरम्भ की तो गुर्जर समाज को मजबूरन आन्दोलन का रास्ता अपनाना पडेगा. इसके लिए उन्होंने 26 मार्च तक की चेतावनी सरकार को दी है. गौरतलब है कि प्रदेश में आरक्षण व्यवस्था और आचार सहिंताओं के चलते कांगेस सरकार कोई भी नई भर्ती प्रकिया आरम्भ नहीं कर पाई है. हाल में ही शुरू की गई नर्सिग भर्तियों के लिए आवेदन की अन्तिम तिथि 26 मार्च है. ऐसे में कर्नल बैंसला चाहते है कि 26 मार्च से पहले सरकार गुर्जर के 5 और सवर्णों के 14 प्रतिशत आरक्षण पर अपना फैसला सुनाए.
इस मामले में नया मोड़ उस समय से आया है जबसे राज्य सरकार ने फरवरी में ये घोषणा कर दी कि गुर्जर अभी विशेष पिछडे वर्ग में न होकर पिछडे वर्ग में ही शामिल कर दिये गये है. ऐसा करके सरकार की मंशा प्रदेश में भर्ती प्रकिया को आरम्भ करना है. राज्य में सरकार बनने के एक साल से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी कोई नई भर्ती नहीं हो पाई है. गुर्जरों और सवर्णो को विशेष आरक्षण देने के बाद प्रदेश में आरक्षण की सीमा 50 से बढकर 68 प्रतिशत हो गया . जैसी की इस समझौते के प्रावधान के साथ ही आशंका थी कि ये फार्मूला न्यायालय की प्रकिया में फँस जायेगा. हुआ भी यही. 12 अक्टूबर और 4 नवंबर 2009 को राजस्थान उच्च न्यायालय ने जी शर्मा बनाम राजस्थान सरकार के मामले में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत ही रखने का फैसला दे दिया. गौरतलब है कि इस मामले में न्यायालय ने राजस्थान विश्वविधालय के एक छात्र के पत्र को ही याचिका मान लिया. इस मामले में कर्नल बैंसला के सहयोगी महेंन्द सिंह खेडला का कहना है कि इस नाम का कोई छात्र है ही नहीं. हमने उसकी सब तरह से छानबीन कर ली है. इस बिषय में उनका कहना है कि ये सब भी कोई चालबाजी ही है.
सरकार ने जैसे ही न्यायालय का निर्णय आने तक आरक्षण नियमों में अस्थायी संशोधन कर भर्ती प्रकिया को आगे बढाने का काम किया कर्नल बैंसला सकिय हो गये. कर्नल बार बार भर्ती प्रकिया को रोकने के लिए सरकार पर दबाब बनाने की कोशिश कर रहे है. दूसरी ओर लगता है सरकार अब और अधिक इंतजार करने के मूंड में दिखाई नही दे रही है. यही कारण है कि कर्नल बैंसला ने अपने अभियान को सकिय कर आखिर फिर से आन्दोलन की चेतावनी दे दी है. सभा में कर्नल बैंसला सहित वक्ताओं ने सर्व समाज से भी सहयोग मांगा. लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिला. अन्य समाजों की ओर से बोले इक्का दुक्का बक्ताओं ने सहयोग का आश्वासन तो दिया, लेकिन उनके तेवर गुर्जरों जैसे आकामक नहीं दिखे. गुर्जर समाज के वक्ताओं ने बार बार अपने 70 सपूतों की कुर्बानियों का हवाला देकर लोगों में जोश भरने की कोशिश जरूर की.
उधर सभा मंच और पाण्डाल को देखकर लग रहा था कि ये आयोजन भाजपा की ओर से किया गया है. सभा की अध्यक्षता से लेकर संचालन तक सब कुछ स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं के हाथों में था. लोगों की माने तो कर्नल 26 मार्च के बाद तो नहीं, मई महीने तक आरक्षण की रण भेरी फूंक सकते है. कारण साफ है. अभी तक के आन्दोलन भी इन्ही महीनों में होते रहे है. इसका एक बडा कारण और है. उस समय तक किसान खेत खलिहान के कामों से पूरी तरह मुक्त हो जाते है. यहां ध्यान देने योग्य बात ये है कि एक बार कर्नल बैंसला ने अक्टूबर महीने में जेल भरों आन्दोलन किया था. जिसका परिणाम काफी निराशाजनक रहा था.
सर्व समाज के नाम से रखी इस सभा में गुर्जर बक्ताओं ने कांगेस सरकार पर जम कर छीटाकशीं की. कर्नल बैंसला ने भी कहा कि गहलौत सरकार ‘डिले,डिफयूज,और डिनाय की रणनीति पर काम कर रही है.जिसके चलते वह न केवल आरक्षण देने में देरी कर रही है. मामले को लटका रही है. जिससे ऐसा लगता है कि वो आगे चलकर आरक्षण देने से मुकर भी सकती है. ऐसे में हमें अब अन्तिम आर पार की लडाई लडने का मानस बनाना पड रहा है.
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