गौशाला में छिपाई गई लाशें, गंगा में भी बहाई गईं लाशें
प्रतापगढ़। मनगढ़ स्थित कृपालु महाराज आश्रम में मची भगदड़ के बाद अब राजनीतिक भगदड़ मची हुई है. स्थानीय अस्पताल से लेकर इलाहाबाद के स्वरूपरानी अस्पताल तक राजनीतिक लोगों का तांता लगा हुआ है लेकिन अभी भी कुछ तथ्य ऐसे हैं जिन्हें आश्रम प्रबंधन और प्रशासन मिलकर छिपा रहा है.
भगदड़ के बाद कितने लोग मारे गये? सबसे बड़ा सवाल यही है. स्थानीय निवासी अभी भी अपने परिजनों को खोज रहे हैं. इनके परिजनों की शिनाख्त न तो मृत लोगों में हो रही है और न ही घायलों की सूची में उनका कोई नाम है. फिर ऐसे लोग कहां गये? मनगढ़ और स्थानीय लोगों का मानना है कि मरनेवालों की संख्या उम्मीद से कही बहुत अधिक है लेकिन प्रशासन और आश्रम प्रबंधन जानबूझकर मृतकों की संख्या कम बता रहा है.
इस बीच आश्रम के बीच ही बनी दो मंजिला गौशाला में भी 15 से 20 लाशों के मिलने की खबर से हड़कम्प मचा हुआ है. इसके साथ ही ऐसी भी आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं कि कुछ लाशों को पास से बहने वाली गंगा नदी में भी प्रवाहित कर दिया गया है. उधर प्रशासन भी साफ तौर पर कृपालु महाराज की सुरक्षा करता नजर आ रहा है. कृपालु महाराज कहां हैं किसी को पता नहीं. प्रशासन ने हालांकि आश्रम प्रबंधन के खिलाफ 307 के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है.
मायावती सरकार द्वारा भगदड़ में मारे गये लोगों को मुआवजा न देने से मुख्यमंत्री की काफी फजीहत हो रही है. एक ओर जहां भाजपा ने उनकी कड़ी निंदा की है वहीं स्थानीय लोग भी मायावती के खिलाफ हैं. क्योंकि मरनेवाले अधिकांश दलित परिवार से ही हैं इसलिए भी मायावती का यह रुख बहुत चौंकानेवाला है. स्थानीय लोगों में आश्रम प्रबंधन और प्रशासन दोनों के खिलाफ ही जबर्दस्त गुस्सा है.
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