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नहीं भाया माया का महामंत्र

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मायावती की बहुप्रचारित राष्ट्रीय रैली पूरी तरह से फ्लाप हो गयी है. मायावती के समर्थकों ने दावा किया था कि रैली में 20 से 25 लाख लोग आ सकते हैं लेकिन रैली में पांच से छह लाख लोग ही आ सके. इसमें भी उत्तर प्रदेश से ज्यादा लोग महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से आये. खबर है कि मायावती ने इस असफलता का संज्ञान लेते हुए समीक्षा करने का फैसला किया है.

कांशीराम के जन्मदिन के मौके पर आयोजित महारैली में दावा किया गया था कि देशभर से 20 से 25 लाख लोग आयेंगे. इस बात की भी खबर है कि रैली के आयोजन पर ही 200 से 250 करोड़ रूपये खर्च किये गये. रमाबाई अंबेडकर पार्क में आयोजन स्थल पर किये गये खर्च के अलावा परिवहन और प्रचार पर भी जमकर खर्च किया गया. मायावती प्रशासन द्वारा रैली को सफल बनाने के लिए पूरे प्रदेश को पंगु बना दिया गया था. सारे रास्ते रमाबाई अंबेडकर पार्क की ओर ही मोड़ दिये गये थे लेकिन आनेवालों की उदासी ने मायावती को मायूस कर दिया होगा. रैली में व्यवस्था का आलम यह था कि पार्टी के कार्यालय से रमाबाई अंबेडकर मैदान के बीच 12 किलोमीटर के बीच जमकर पुलिस तैनात की गयी थी. 12 किलोमीटर के बीच चार हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किये गये थे. इसी तरह दूसरी व्यवस्था भी की गयी थी लेकिन संख्या की कमी में सारी व्यवस्था धरी की धरी रह गयी.

खुद मायावती रैली में महज दो घण्टे के लिए ही आयी. रैली स्थल पर वे खुद 11.40 पर आयी और 1.45 पर वहां से रवाना हो गयीं. हालांकि रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने काँग्रेस ने अब बसपा के चुनाव चिन्ह हाथी को भी जब्त करने की साजिश रची है। हाथी चुनाव चिन्ह छीनने से पहले चुनाव आयोग को कांग्रेस व अन्य दलों के चुनाव चिन्ह भी प्रतिबंधित करने होंगे। महंगाई के मुद्दे पर भी काँग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए बसपा नेत्री मायावती ने ऐलान किया कि यदि कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई पर शीघ्र लगाम नहीं लगायी तो बसपा देशव्यापी आन्दोलन करेगी। महिला आरक्षण बिल में दलितों को अलग से आरक्षण नहीं देने के विरोध में बसपा आगामी 14 अप्रैल को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों व प्रदेश मुख्यालय में धरना प्रदर्शन करेगी। उन्होने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को ‘मनी, मीडिया और माफिया’ से सावधान रहने को कहा। मायावती ने कहा कि काँग्रेस पार्टी उन्हें केवल कोर्ट-कचेहरी के मामलों में उलझाकर रखना चाहती है इसलिए उनके ऊपर कई फर्जी मामले दर्ज किए गए हैं।

उन्होंने ऐलान किया कि इससे निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का एक विधि प्रकोष्ठ बनाया गया है और इसके मुखिया राज्यसभा सदस्य सतीश चन्द्र मिश्रा होंगे। उन्होंने सफाई दी कि सतीश चन्द्र मिश्र का पार्टी में कद छोटा नहीं किया गया है बल्कि उन्हें और जिम्मेदारियाँ दी गई हैं। साथ ही उन्होंने ब्राम्हण, क्षत्रिय व वैश्य समाज को पार्टी से जोड़ने के लिए कई और नेताओं के नामों की भी घोषणा की। पार्टी के महासचिव एवं राज्य सभा सदस्य सतीश चन्द्र मिश्र को नयी जिम्मेदारी सौंपने के बाद मायावती ने यह भी ऐलान किया कि उप्र में बसपा से ब्राम्हणों को जोड़ने का काम अब डा. ओ. पी. त्रिपाठी, गोपाल नारायण मिश्र तथा रामवीर उपाध्याय करेंगे। जबकि क्षत्रिय समाज को जोड़ने का काम ठाकुर जयवीर सिंह, धनंजय सिंह व बादशाह सिंह करेंगे। वैश्य समाज को डा. अखिलेश दास और नरेश अग्रवाल पार्टी से जोड़ेंगे। इसी तरह अन्य प्रदेशों में भी पार्टी के नेता विभिन्न जातियों को पार्टी से जोड़ेंगे।

बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक स्व. कांशीराम के जन्मदिन के अलावा आज ही बसपा की स्थापना का रजत जयंती भी मनाई गई। इस ऐतिहासिक क्षणों को यादगार बनाने के लिए आयोजित महारैली में मायावती ने कहा कि कांग्रेस का रवैया प्रारम्भ से ही दलित विरोधी रहा है। उन्होंने कहा कि जिस महिला बिल को लेकर आज राजीव गांधी और सोनिया गांधी का कांग्रेसी गुणगान कर रहे हैं, दरअसल महिलाओं को समान अधिकार सबसे पहले डा. अम्बेडकर ने ही दिया था। काँग्रेस को चचा-भतीजों की पार्टी की संज्ञा देते हुए मायावती ने कहा कि उनके नेताओं का दलितों के घरों में ठहरने के नाटक का भी अब पर्दाफाश हो चुका है। उन्होंने कहा कि विरोधी दल बसपा को बढ़ते हुए नहीं देख सकते हैं इसलिए वे विभिन्न प्रकार की साजिशें रचते रहे हैं। 

अपने डेढ़ घण्टे के भाषण के अंत में बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मनी, मीडिया और माफिया से सावधान रहने को कहा। उन्होंने आगाह किया कि विपक्षी दल उनके खिलाफ हर तरह के हथकण्डे अपना सकते हैं। योग गुरू बाबा राम देव का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि अब कुछ बाबा लोग भी राजनीतिक दल बनाने की बात करने लगे हैं। इस मौके पर मायावती ने कांशीराम के जीवन संघर्ष पर एक पुस्तक का विमोचन करने के साथ ही उन पर बनायी गयी एक घण्टे की फिल्म की सीडी का भी लोकार्पण किया। साथ ही बसपा के मूवमेंट पर पार्टी का एक कैलेण्डर भी उन्होंने जारी किया।

(साथ में लखनऊ से मुदित माथुर और एस ए अस्थाना)

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Ajit on 15 March, 2010 22:42;15
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रैली का फ्लॉप होना सिर्फ रैली का फ्लॉप होना नहीं है, ये फ्लॉप होना है मायामुर्ती की महत्वाकान्छाओं के, उनके प्रधानमंत्री बना इ के सपने का, उसकी जनता की खून छोस कर रैली और जन्मदिन मानाने वाली नीतियों का;
ये फ्लॉप होना है लोकतंत्र की हत्यारी सरकार का, ये फ्लॉप होना है नकली सोशल इंजिनीअरिंग का, और सबसे बड़ी और अच्छी बात ,ये फ्लॉप होना है उत्तर प्रदेश के दुर्भाग्य का
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ghakki on 15 March, 2010 23:25;54
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"मनी, मीडिया और माफिया से सावधान" कहे वाली मायावती से ये पूंछो की गले में पड़ा १००० के नोटों का हार क्या मणि नहीं है और पार्टी में कितने माफिया हैं | सूप बोले सूप बोले चलनी क्या बोले जिसमे ७२ छेद
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Jeet Bhargava on 16 March, 2010 03:31;17
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ये तो होना ही था. लेकिन इसमे मायावती के बाप का क्या गया. जो भी गया वो गरीबो का हक़ और धन ही बर्बाद हुआ है. काश इतना खर्च वह गरीबो पर करती. ये कैसी माया है??
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R K GUPTA on 17 March, 2010 16:20;57
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आप भी कमाल करते है क्या ४ - ५ लाख आदमियो की संख्या कम होती है. ये तो उनसे पूछिए की जिन्होंने रात दिन एक करके और अरबो रुपये खर्च करके इतने बेचारो को इकठ्ठा किया है इन्ही बेचारो ने (जिनके पास पहनने के लिए कपडे भी नहीं है ) करोडो की माला बनायीं थी बहन जी को पहनाने के लिए - है न कमाल भाई जी.
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