राज के खिलाफ ठाकरेगीरी करेंगे टैक्सीवाले
मुंबई। राज ठाकरे के लोगों के बढ़ते आतंक के खिलाफ मुंबई में कम करने वाले उत्तर भारतीय टैक्सी वाले एक जुट हो रहे हैं. मुंबई के जनता दल ( यू ) के अध्यक्ष राजकुमार सिंह की पहल पर इकठ्ठा हो रहे टैक्सी वालों में ख़ासा उत्साह है .
जबसे शिवसेना से अलग हो कर राज ठाकरे ने लोगों को धमकाने की राजनीति शुरू की है , उत्तर भारतीय बहुत परेशान हैं. राज ठाकरे के साथियों का सबसे आसान निशाना उत्तर भारतीय टैक्सी वाले ही रहे हैं. और अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे टैक्सी वालों ने मन बना लिया है कि अगर ज़रुरत पड़ी तो राज ठाकरे के साथियों को जवाब हिंसक तरीके से भी दिया जा सकता है .
जब से राज ठाकरे अपने चाचा से अलग हुए हैं , उन्होंने असंगठित वर्ग के लोगों को निशाने में लेने की मुहिम छेड़ रखी है .बिहार और उत्तर प्रदेश से आये लोग उनके लोगों की बदमाशी को सबसे ज्यादा झेल रहे हैं . लेकिन अब लगता है कि हालात बदलने वाले हैं. टैक्सी वालों के खिलाफ हो रही हिंसा के खिलाफ जनता दल ( यू) ने कुछ करने का फैसला किया है. पार्टी के मुंबई अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया कि उत्तर भारतीय टैक्सी वालों को एक मंच पर लाने की गंभीर कोशिश की जा रही है. दरअसल यह सब शुरू बहुत ही साधारण हालात में हुआ. राजकुमार सिंह अपनी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं से मिल कर टैक्सी में बैठ कर घर वापस लौट रहे थे. रास्ते में नशे में धुत एक व्यक्ति मिला जिसने अपनी गाडी इस तरह से पार्क कर रखी थी कि सड़क बंद हो गयी थी. श्री सिंह के टैक्सी वाले ने होर्न बजा दिया. जिससे नाराज़ होकर उस नशेड़ी ने टैक्सी चालक को मारना शुरू कर दिया. जब राजकुमार सिंह ने विरोध किया तो वह इनकी तरफ भी दौड़ा और बताया कि वह महाराष्ट्र नव निर्माण सेना का नेता है और कुछ भी कर सकता है. झगडा हुआ और राज कुमार सिंह ने उसकी बाकायदा धुनाई कर दी. जब वह घायल हो गया तो उसे अस्पताल पंहुचाने के लिए इंतज़ाम किया और घर चले आये. अपने टैक्सी वाले को समझाया कि अगर इन गुंडों से मुकाबला करना है तो एकता करनी पड़ेगी. अगले दिन वह टैक्सी वाला अपने कई साथियों के साथ श्री सिंह के घर पंहुचा गया. राजकुमार सिंह ने उन लोगों को समझाया कि अपनी इज्ज़त बचाने के लिए आप लोगों को गुंडई के खिलाफ संगठित होना पड़ेगा. यह लोग तैयार हो गए और अब पूरी मुंबई में इस संगठन की चर्चा शुरू हो गयी है.
बातों बातों में पूरे शहर में चर्चा हो गयी और अब कई इलाकों के टैक्सी वाले राजकुमार सिंह के संपर्क में हैं . श्री सिंह का कहना है कि अगले कुछ दिनों में टैक्सी वालों का एक ऐसा संगठन खड़ा हो जाएगाजो राज ठाकरे और उनकी तरह के अन्य लोगों की जोर-ज़बरदस्ती की राजनीति का जवाब उनकी भाषा में ही देगा. हालांकि वे अपने आन्दोलन को शुद्ध रूप से राजनीतिक रखना चाहते हैं लेकिन उनका दावा है कि अगर ज़रुरत पड़ी तो हिंसा को रोकने के लिए हिंसा का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
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THAKREGIRI.
RAJKUMAR SINGH TUM SANGHRSH KARO HAM AAPKE SATH HAIN
मैंने पूछा की एक इंसानी मर्यादा के साथ इमानदारी से और शान से अपनी रोटी रोजी कमाना चाहते हो ? जबाब मिला " कौन नहीं चाहता सर ? " मैंने कहा की सिर्फ चाहने से नहीं होता अपने अधिकार के लिए लड़ने का दम अगर रखते हो तो ऐसे और लोगों को लेकर आओ .
दूसरे दिन वह चार लोगों को ले आये .कई वारदातें सुनी और सब से कहा की वीडियो कैमरे पर कहो .कुछ झिझक के बाद वे तैयार हुए .मैंने कहा की जो और लोग पीड़ित हुए हों उनसे भी संपर्क कराओ .फिर कई लोगों की फोन पर बात करने के बाद मैंने ज्यादा सही यही समझा की सीधे उनकी बस्तियों में जा कर मिलूँ.ज्यादातर शिवडी ,गोवंडी ,जोगेश्वरी ,वडाला वगैरह की फटेहाल jhopadpattiyon में रहने वाले, एक एक कमरे में चार चार रहते और सुविधा के लिए दो दिन की शिफ्ट करते दो रात की .नारकीय जीवन जीते . महीने में कुल बचत ८ से बारह हजार तक सिमित ,नारकीय जिन्दगी जीते मेहनत कश लोग, आधे से ज्यादा कमाई ' घर परिवार ' भेजने वाले ताकि वहां परिवार भूखों न मरे और खुद परिवार हीन .मैंने दर्जनों ऐसे ' शिकार ' लोगों के बयान वीडियो कैमरे पर दर्ज किये और उन्होंने भी डरते डरते ही कहा .कईयों ने दास्ताँ तो बताई पर रिकार्ड करने से मना कर दिया ये कह कर की साहब आप तो टीवी सीबी पर दिखा चल दोगे हम पहचान में आ गए तो क्या होगा ? आप बचाने आओगे ? उलटे पुलिस ही परेशान करने लग जायेगी . मैं भी क्या जबाब देता ? लुब्बे लुबाब ये की .....
गाली गलौज मार पीट कर किराया देना तो दूर उलटे कमाई के पैसे छीन लेना और धमकी देना की " भईय्या समझ ले . मुलुक भाग जा . नहीं तो आगे क्या होगा तुझे मालूम नहीं. राज ठाकरे का नाम सुना है ? " खास कर रात पायली ( रात की सिफ्ट ) करने वालों के ये अनुभव आम थे . बताया गया की कई सारे लोगों ने इस जलालत के बजाय घर भाग जाना उचित समझा .
हाँ मैं हिंसा पर विश्वास नहीं करता न उसके लिए किसी को प्रेरित ही कर रहा हूँ . लेकिन आत्म रक्छार्थ कानून ने जो अधिकार किसी नागरिक को दिए हैं मैं उसके बारे में बता भी रहा हूँ और अपनाने की सलाह भी दे रहा हूँ . आप भी सलाह दे सकते हैं की ऐसे में मैं क्या कर सकता हूँ या कोई और चारा है ?
हाँ जहां सरकार और उसका यंत्र ही ऐसे गुंडा तत्वों के सर पर हाथ रखे हो ,फायदा तो नहीं होगा पर प्रतिवेदन के रूप में वह भी करूंगा पर लगता है की सड़क की लड़ाई सड़क पर ही लडनी पड़ेगी सीना तान कर . और मैं खुद भी तैयार हूँ और आम जन को भी तैयार कर रहा हूँ . आप को अधिकार है की इसे राजनीती माने , नागरिक कर्तव्य माने या जो भी . मैं तो इसे अराजनीतिक रखना चाहता हूँ और चाहता हूँ की इस अभियान में मानवीय कर्तव्य समझ हर अच्छा नागरिक जुड़े भले वह कोई राजनैतिक विचारधारा का हो .
Email :- rajpoot.prsingh23@gmail.com
raj sinh aapko bahut bahut badhai ,aaz aapne dhara ko ek turn diya he jo aage chalke meel ka patthar sabit hogi.
हाँ कुछ मित्र ( यही कहूँगा क्योंकि शुभेक्छु ही हैं ) की व्यावहारिक सलाह भी की क्यों जोखिम उठा रहे हो ? ये राजनीती है परेशानी को आमंत्रण दे रहे हो .ये लोग कुछ भी कर सकते हैं .
शायद सच हो . पर अब तो प्रतिबद्ध हो चुका हूँ . वही करूंगा .
और जो भी इसे सही मानते हैं हर संभव सहयोग दें .मेरे निश्चय को ताकत मिलेगी .
आप सभी का और विस्फोट का धन्यवाद !
THANKS.
मेरा मोबाईल नंबर है .....
०९०२ ९५० ९६३९
आपका आभारी रहूँगा .
आपका प्रयास वास्तव में सराहनीय है... लोग साथ ज़रूर आयेंगे लेकिन उनको एक सहारे की ज़रूरत थी जो आपके रूप में मिल गयी है ... हमारी शुभ कामनाएं आपके साथ है ... अपना भी ध्यान रखियेगा
कर्वी बाते बोलता हूँ और लिखता भी हूँ ! मेरा पूरा सहोग होगा आप लोगों के लिए!
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