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नवीन की राह पर नीतीश !

image भाजपा नेताओं के साथ नीतीश कुमार

पटना में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान पिछले चौबीस घंटों में जो कुछ हुआ है वह पूरे देश के राजनीतिक विश्लेषकों के लिए अप्रत्याशित है. आम तौर पर नीतीश सोबर पॉलिटीशियन माने जाते हैं और वे इतने उग्र कदम नहीं उठाते हैं. ऐसे में जिस तरह से उन्होंने गुजरात के विवादास्पद विज्ञापन को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है, उससे लगता है कि कहीं वे नवीन पटनायक की राह पर चलने का फैसला तो नहीं ले चुके.

गौरतलब है कि ओडिशा में पिछली सरकार भाजपा-बीजद गठबंधन की ही थी, मगर ऐन विधानसभा चुनाव से पहले नवीन पटनायक ने भाजपा से नाता तोड़ लिया और अपने दम पर सरकार बनाकर दिखा दिया. ऐसे में नवीन निश्चित तौर पर उन छोटे दलों  के रोल मॉडल हैं जो किसी न किसी राष्ट्रीय दल की मदद से राज्य की कमान संभाल रहे हैं. बिहार में भी नीतीश का गणित साफ है. महादलितों के 23 फीसदी वोटों पर जदयू अपना हक मान चुकी है और उसे लगता है कि अगर वह भाजपा से संबंध तोड़ लेती है तो मुसलमानों के 16 फीसदी वोटों में से अधिकांश उसके पाले में चले जायेंगे. ऐसे में अकेले अपने दम पर वे राज्य में सरकार बना सकते हैं. विश्लेषक भी मानते हैं कि नीतीश के व्यवहार में आई इस उग्रता की वजह यही है, मौका भी उन्हें सही मिल गया है.

बिहार की अस्मिता के नाम पर वे अगर संबंध तोड़ते हैं तो उन्हें इसका भी लाभ ही मिलेगा. ऐसे में माना जा रहा है कि ताजा प्रकरण बिहार में भाजपा और जदयू के बीच अलगाव करा कर ही दम लेगा. राज्य के भाजपा नेता भी इस बात से भिज्ञ हैं कि नीतीश संबंध तोड़ने पर उतारू हैं. अब तक भाजपा ने उनकी राय का ख्याल रख कर बिहार में मोदी और वरुण से परहेज करने की ही कोशिश की. मगर इस बार जिस तरह बिहार में मोदी को स्थापित करने की कोशिश की गई उससे लगता है कि भाजपा भी अब समझौते के मूड में नहीं है. सुना तो यहां तक जा रहा है कि भाजपा अब वरुण गांधी को भी मंच पर उतारने का मन बना चुकी है.

भाजपा की बिहार इकाई और राष्ट्रीय स्तर के कई नेता यह मानते हैं कि भाजपा ने बिहार में नीतीश के आगे जिस तरह आत्म समर्पण कर दिया है उससे भाजपा का नुकसान ही होगा, फायदा कुछ नहीं होना. पिछले पांच साल के बेहतर कामकाज का श्रेय नीतीश हमेशा खुद लेते रहे हैं और उन्होंने इस दौर खुद को ही ब्रांड के रूप में स्थापित किया, भाजपा नेताओं को इस बात का भी मलाल रहा है. ऐसे में चुनाव से पूर्व आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाजपा पहुंची ही थी इस योजना के साथ कि वे इस बार नीतीश को अहसास दिला देंगी कि वे गठबंधन की मर्यादा समझे. बिहार में चुनाव प्रचार कौन करेगा, कौन नहीं इस पर बोलने का हक उन्हें नहीं.

इसके लिए उन्होंने न सिर्फ वो विवादास्पद विज्ञापन छपवाया बल्कि पूरे पटना को मोदी के होर्डिगों से पाट दिया. जाहिर सी बात है नीतीश को भाजपा की यह कार्रवाई चुनौती की तरह मालूम हुई. लिहाजा उन्होंने विज्ञापन और कोसी की अस्मिता को मुद्दा बनाकर गठबंधन तोड़ने का इशारा कर डाला. वैसे भी बिहार में नंबर दो की लड़ाई है. भाजपा अगर नीतीश के खिलाफ जाती है तो उसका नंबर दो पर आना पक्का है और अगर साथ रहती है तो बहुत संभव है कांग्रेस इस स्लॉट पर कब्जा कर ले. ऐसे में भाजपा के रणनीतिकारों ने लगभग यह फैसला ले लिया है कि गठबंधन टूटे तो टूटे मगर वे अब नीतीश के आगे नहीं दबेंगे.

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वीरेन्द्र जैन on 13 June, 2010 23:14;12
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नीतीश में साहस का अभाव है अन्यथा उन्हें तो तुरंत ही विधान सभा चुनाव कराने की घोषणा कर देनी चाहिए व उसके पहले भाजपा से सारे सम्बन्ध तोड़ लेने चाहिए। अगर वह भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक के दौरान ऐसा करते तो उन्हें नवीन पटनायक जैसा लाभ मिल सकेगा।
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sandeep on 13 June, 2010 23:33;17
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बिहार में भाजपा काफी मजबूत है इस बात को नितीश को समझना चाहिए [आखिर गठबंधन जो रहा है अब तक [[वैसे भी अब भाजपा अब नितीश के आगे नही झुकेगी [आखिर झुके भी क्यों वरुण जैसा मजबूत जनाधार वाला नेता जो है भाजपा के पास [भाजपा को अब वरुण सुषमा और मोदी को बेझिझक बिहार के युद्ध में उतार देना चाहिए [भाजपा अकेले बहुमत हासिल करने का मादा रखती है और अगर वरुण और मोदी को आगे लाया गया तो भाजपा की सरकार जरुर सत्ता में आएगी
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aayush on 14 June, 2010 13:23;43
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Yadi main galat naheen hoon to Sandeep ji kisi bhram men hain, Varun, Modi jahan bhee jayenge vahan BJP ka nuksaan hee karenge. Modi apane rajya men to achchha shasan chala sakate hain lekin padosi rajyon men inake bhai aisa kar payenge ismen sandeh hai.
Modi jee pados men Gujrat ke sahyog (Madhya Pradesh ko bijali dene) ka wada to kar jate hain lekin baad men mana kar dete hain. Modi can only welfare of 5 crore Gujrati.
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Vikash Bhartiya on 20 June, 2010 13:39;02
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Kash Bhajpa ne jab party shuru aur usi shuruaat ke muddo per dati rehti to shayad aaj uska wo hal nahi hota jo aaj hai.
Jaise Jaise samaj me Padhe Likhe logo ka pratishat badhega waise waise bhajpa ka graph niche hota jayega.
BJP ne abhi tak kiya hua apna koi bhi vada nibhane me nakam rahi aur iske sabse bada sabut hai uska loksabha me aundhe muh girna. Nitish Ji ka ye kadam sarahniya hai. Kyoki Nitish ji un netao me hai jo janta aur party ke bich me maryada banakar chalte hai. Afzal ki fansi ho ya Ayodhya har jagah bhajpa asfal rahi hai.
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image Pushya Mitra मूलतः बिहार के पूर्णिया जिले का वासी. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से जनसंचार स्नातक. नवभारत, अमर उजाला, हिंदुस्तान अखबार और लोकायत पत्रिका और अंग भारत में कार्य. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत. सामाजिक मुद्दों से जुडाव. राजनीति और हार्डकोर खबरों पर टिपण्णी लिखना पसंद.
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