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देह व्यापार के दलदल में नौनिहाल

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सेक्स व्यापार और वह भी बच्चों का, इस वीभत्स सच्चाई से आप आंख नहीं चुरा सकते. दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में तो बाकायदा यह एक कारोबार का रूप ले चुका है. गरीबी, आसानी से पैसा या फिर ब्रांडों की चकाचौंध जैसी बच्चों की कमजोरियों का फायदा उठाकर दलाल उन्हें अमीरों और विदेशियों को सप्लाई कर लाखों बना रहे हैं.

करीब आठ साल पहले चेन्नई में डच नागरिक विल हुएम की गिरफ्तारी ने पूरे देश को चौंका दिया. विल को  बच्चों का यौन-शौषण और इंटरनेट पर उन तस्वीरों को अपलोड करते हुए पकड़ा गया था. अब तक माना जाता था कि बीमार मानसिकता के ऐसे लोग सिर्फ विदेशों में बसते हैं, लेकिन टीएसआई की पड़ताल के मुताबिक भारत के कई शहरों में बच्चों के देह-व्यापार का जाल फैला हुआ है. हिंदुस्तान में भी ऐसे अमीरों की कमी नहीं है, जो इस तरह के व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं. इसी के चलते बिचौलियों के जरिए बाल देह का कारोबार पूरी तरह से फल-फूल रहा है.

दरअसल बच्चों का फायदा उठाना बहुत आसान है. गरीबी, आसानी से पैसा या फिर ब्रांडों की चकाचौंध-इस व्यापार में लिप्त दलाल बच्चों की इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाते हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इस व्यापार में गरीब परिवारों के ही बच्चे नहीं, बल्कि संपन्न परिवारों के बच्चे भी शामिल हैं. हमारी टीम ने जिन बच्चों से बात की, उनमें से ज्यादातर अपने मां-बाप से पढ़ाई, डांस क्लास या फिर इसी तरह का कोई दूसरा बहाना बना कर घर से निकले थे. ये बच्चे दलालों की भाषा बोलते हैं और एक पेशेवर सेक्स वर्कर की तरह बात करते हैं. इस मामले में और छानबीन करने के लिए हमारी विशेष जांच टीम ने फरीदाबाद, नोएडा, दिल्ली, मुंबई और गोवा जैसे शहरों के कई चक्कर लगाए.

मुंबई की क्राइम ब्रांच ने पीडोफीलिया से बच्चों को बचाने के लिए जो गाइडलाइन जारी किये हैं उसके मुताबिक इस रैकेट में शामिल लोग बच्चों को सेक्स की लत लगाते हैं. मसलन चैट, पोर्न साइट इत्यादि के जरिए बच्चों और टीएनजरों के मन में उत्तेजना पैदा करते हैं. फिर धीरे धीरे उन्हें घर से बाहर मिलने के लिए प्रेरित करते हैं. इस प्रकार बच्चों को सेक्स कारोबार का हिस्सा बना दिया जाता है.
सबसे पहले हमें सफलता मिली दिल्ली-एनसीआर में. हमें नोएडा में एक दलाल अंश के बारे में पता लगा. हमने एक आस्ट्रेलियाई अनिवासी भारतीय बन कर अंश से फोन पर संपर्क किया और दूसरे दिन नोएडा के एक कॉफी शॉप में मिले. हम समय से पहले पहुंच गए, यह देखने के लिए कि अंश के साथ और कौन-कौन  आता है. अंश एक लड़की और लड़के को लेकर वहां पहुंचा था. जब हम उस बच्चे से मिले तो उसने दावा किया कि वह 14 साल का है, हालांकि वह और भी छोटा लग रहा था. बच्चे के कपड़ों को देख कर लग रहा था कि वह अच्छे-खासे परिवार से ताल्लुक रखता है. बच्चे ने बताया कि उसके पिता रेलवे में बड़े अफसर हैं. उसकी बातचीत का लहजा देख कर लग रहा था कि वह इस व्यापार में काफी समय से है.

हमने पहले से तय कर रखा था कि अंश को यह बताएंगे कि उसका नंबर हमें एक अखबार के विज्ञापन से मिला. अंश ने हमें बताया कि उसने बॉडी मसाज के कई विज्ञापन अखबारों में डाले हैं. हमारी टीम ने अंश को बताया कि हम आस्ट्रेलिया से हैं लेकिन नोएडा में भी अपना घर है. हमारी कोशिश थी कि हम बच्चे से ज्यादा जानकारी जुटा लें. हालांकि अंश को यह अच्छा नहीं लग रहा था कि हम बच्चे से ज्यादा बातें करें. लेकिन हमारे आस्ट्रेलियाई एनआरआई के रुआब के आगे वह चुप पड़ गया. हमारी टीम ने बच्चे से बात की-बच्चे ने बताया कि वह 14 साल का है और दरियागंज के एक स्कूल में 12वीं की पढ़ाई कर कर रहा है, लेकिन वह अपना नाम बताने से बचता रहा. बच्चा इस व्यापार में इसलिए उतरा, क्योंकि उसे यामहा फेजर मोटरबाइक खरीदनी थी.vishesh01.jpg

बच्चा हमसे एक अनुभवी सेक्स वर्कर की तरह बातें कर रहा था.
बच्चा-आप आस्ट्रेलिया से हैं?
हम-हां हम आस्ट्रेलिया से हैं. वहां पर एमबीए फाइनेंस की पढ़ाई कर रहे हैं. तुम भी पढ़ते हो?
बच्चा-मुस्कुराता है.
हम- यहीं रहते हो?
बच्चा-हां, यहीं दिल्ली में.
हम-वाकई आश्चर्य है कि यहां पर यह सब होता है और इतनी आसानी से मिल भी जाता है.
बच्चा-हां, यहां पर सब कुछ वेस्टरनाइज हो रहा है. सब बाहर की कॉपी कर रहे हैं. यहां आपको सबकुछ मिल जाएगा.
हम-आप अंश को कैसे जानते हो?
बच्चा-मैं इनसे ई-मेल के जरिए मिला था.
हम-यह आपका पहली बार है.
बच्चा-नहीं, सातवीं- आठवीं बार.
हम-आप और भी लोगों के संपर्क में हो.
बच्चा-हां बहुत सारे.
हम-इस लाइन में आने की वजह?
बच्चा-मुझे मोटरबाइक खरीदनी है.
हम-कौन सी?
बच्चा-फेजर.
हम-किस कंपनी की है?
बच्चा-यामहा
हम-आपका बाकी ग्रुप से भी लिंक होगा?
बच्चा- नहीं, मेरा सिर्फ एक है और इनसे भी मैं हाल ही में मिला हूं.
हम-बहुत अजीब लगता होगा?
बच्चा-नहीं तो.
हम-मतलब, यहां शौक के लिए आए हो या फिर पैसे के लिए?
बच्चा-पैसे के लिए
हम-पहले भी किया है, कोई दिक्कत तो नहीं होती?
बच्चा- नहीं, कोई दिक्कत नहीं, पहले भी पांच- सात बार कर चुका हूं.

बच्चे से बात करने के बाद हमें लगा कि या तो अंश ने इसे अच्छी तरह से सिखा-पढ़ा दिया है या फिर वह खुद ही इतना अनुभवी हो गया है कि उसे मालूम है कि ग्राहकों से किस तरह और क्या बात करनी है.

बचपन खोते बच्चों के भविष्य के बारे सोचते हुए हम मुंबई के लिए रवाना हुए. वहां हमने करोड़पति आस्ट्रेलियाई एनआरआई बन कर कई दलालों से बात की. वहां पर एक रेस्टोरेंट में हमारी मुलाकात हुई मारिया से. मारिया काल गर्ल का रैकेट चलाती थी और हमें लड़कियां सप्लाई करना चाहती थी, लेकिन हमने साफ किया कि हमें सिर्फ छोटे लड़के चाहिए. उसने कहा कि पूरी कोशिश करूंगी कि कम उम्र के लड़के लाऊं लेकिन अगर नहीं मिले तो कम उम्र की लड़कियां तो मिल ही जाएंगी. दूसरे ही दिन मारिया ने हमें दो लड़कों से मिलवाया. उनमें से एक रूपेश तो बाकायदा सज-धज कर आया था. रूपेश डांस टीचर था और बच्चों को डांस सिखाता था. रूपेश के हाव-भाव को देख कर लगा कि वह भी दलाल है. हमने साफ किया कि हमारी सिर्फ छोटे बच्चों में दिलचस्पी है. रूपेश ने कहा कि वह हमारे लिए ऐसे बच्चों का इतंजाम कर देगा. उसने बताया कि वह अपने डांस के छात्रों को लेकर आएगा. अपने छात्रों के इस तरह के इस्तेमाल की बात ने हमें हिला दिया. मारिया ने हमसे पूछा कि बच्चों को लेकर जाओगे कहां? हमने उससे कहा कि हम बच्चों से बात करना चाहते हैं लेकिन उसकी मौजूदगी में नहीं. रूपेश ने हमें बताया कि बच्चे 10 से 12 साल के हैं और अपने आप कुछ करने की हालत में नहीं हैं. यानी इस व्यापार में बच्चों का यौन-शोषण भी खुल कर किया जाता है.

रूपेश उसी शाम को हमसे मिला और उसके साथ बच्चों को देख कर हम अवाक रह गए. उसने बताया था कि बच्चे 10 से 12 साल के होंगे, लेकिन उनमें से एक तो आठ साल का ही लगा. हालांकि बच्चे छोटे थे, लेकिन कोई भी बच्चा बात करने में हिचका नहीं. बच्चों ने बताया कि उनके साथ चार-पांच बच्चे और हैं और सब हिप-हॉप सीख रहे हंै. रूपेश का डांस देख कर बच्चों के मां-बाप ने डांस क्लास में बच्चों को डाला था. हम सोच रहे थे कि उन मां-बाप पर क्या बीतेगी जिन्हें पता चलेगा कि उनके बच्चों का डांस के नाम पर यौन-शोषण किया जा रहा है?

इस व्यापार में अगर मालदार आसामी फंस जाए तो दलाल कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं. रूपेश एक शातिर दलाल था. उसने ज्यादा पैसे वसूलने के लिए हमसे कहा कि ये बच्चों का पहली बार है, इसलिए पैसा भी ज्यादा लगेगा. उसने 25,000 रुपये की मांग की. साथ ही उसने हमसे कहा कि बच्चों को होटल के बजाय किसी दोस्त के घर ले जाना ज्यादा ठीक होगा. ऐसे में पुलिस रेड से बचा जा सकता है. हमारी टीम अपनी जानकारी जुटा चुकी थी और टालने के लिए हमने कहा कि हमारे पास कोई ऐसी जगह नहीं है. इसके अलावा हमें पुलिस से भी डर लगता है. इससे रूपेश नाराज हो गया और गुस्से में काफी बातें उगल गया. उसने बताया कि वह इस व्यापार में काफी समय से है और उसके ग्राहक सिंगापुर, पाकिस्तान, कनाडा, आस्ट्रेलिया और दुबई से आते हैं. रूपेश ने बताया कि ये बच्चे भी सब जानते हैं. ज्यादातर की गर्ल फ्रैंड हैं, जिनके साथ वे 'सब कुछ' पहले ही कर चुके हैं. रूपेश की बड़ी-बड़ी बातों ने हमारे मन में संदेह पैदा कर दिया. हम एक बार फिर मुबई पहुंचे और रूपेश से संपर्क किया. डांस क्लास में व्यस्तता की बात कर रूपेश हमसे दो-तीन दिन बाद मिला. इस बार उसने हमें दूसरे बच्चों से मिलवाया. रूपेश को देख कर लगा कि वह इस व्यापार का माहिर खिलाड़ी है. हमने उन बच्चों से बात की.

हम- सुनो बेटा, मां को क्या बोल कर घर से आए हो?
बच्चे-घूमने जा रहे हैं.
हम-कब से जानते हो?
बच्चे-पहले से जानते हैं.
हम-तुम्हें पता है कि क्या करना है?
बच्चे-हां
हम-पहले किया है?
बच्चे-नहीं
हम-अगर पहले नहीं किया तो कैसे पता है कि क्या करना है?
बच्चे-वह बताया है रूपेश ने
हम-क्या बताया है रूपेश ने?
बच्चे हंसते और खिलखिलाते हैं.
हम-शर्माओ नहीं,बताओ.
बच्चे-वही जो हमें करना है.
हम-इसके लिए कितने पैसे मिलते हैं?
बच्चे- हमें पैसे नहीं मिलते हैं.
हम-तुम्हें डर नहीं लगता?
बच्चे-पहली बार लगा था.

मजे की बात यह है कि बच्चों के घरवालों को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. स्थिति की विडंबना यह थी कि बच्चों को जिस रूपेश पर सौ फीसदी भरोसा था, वही उन बच्चों को देह व्यापार में ढकेल रहा था. इस बार हमने बच्चों से काफी देर तक बात की. हमें पता चला की रूपेश के पास ऐसे बच्चों की फौज है. और मुंबई शहर में रूपेश अकेला नहीं है जो कि इस तरह के काम से लगा है. यहां पर सिर्फ पैसे का लालच नहीं था, बल्कि ग्लैमर की चकाचौंध और लुभावने वादों ने न सिर्फ गरीब परिवार के बच्चों को इस तरफ ढकेला बल्कि संपन्न परिवार के बच्चे भी अपनी मर्जी से इस व्यापार में शामिल हो रहे हैं.

हमने अपनी जांच के दौरान करीब 10 दलालों से बात की. सारे दलाल हमारी मांगों को मनाने को तैयार हो गए थे. हालांकि ज्यादातर टोकन मनी की मांग करते रहे. हमने तय किया था कि हम किसी को भी पैसे नहीं देंगे. रूपेश और अंश ने पैसे की बात नहीं की. कई दलालों ने हमें नाबालिग लड़कियां सप्लाई करने का वादा किया. फरीदाबाद में लड़कियों की सप्लाई में शामिल ज्योति तो 16 साल की एक लड़की को लेकर भी आई थी. ऐसे ही मुंबई में एक दलाल 15 साल से कम उम्र की लड़कियों को लेकर हमारे पास आया था.

गोवा में तो ऐसे दलालों का पूरा नेटवर्क है. समुद्र तट पर बैठे हैं तो चाय-मूंगफली बेचने वालों की तरह दलाल भी आपसे पूछते चलते हैं. एक ऐसे ही दलाल ने हमें बताया कि इसकेलिए एक हफ्ते पहले बुकिंग की जाती है. ऐसे बच्चों के लिए उनका कोड वर्ड था-सिल्की पैक. दलालों के मुताबिक विदेशी तो बुकिंग पहले करवा कर आते हैं और पैसा उनके खाते में ट्रांसफर करा देते हैं. हालांकि वहां पर हम किसी बच्चे से बात नहीं कर पाए, क्योंकि दलाल एडवांस के तौर पर 10,000 रुपयों की मांग कर रहे थे. इस कहानी का सबसे दुखद पहलू यह है कि बाल अधिकारों की जानकारी के अभाव में बच्चों का शोषण बदस्तूर जारी है. 

Subscribe to comments feed Comments (15 posted):

Sanjay on 31 July, 2010 16:19;52
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behatrin story.
shri अभिषेक कुमार ka parichay???
ye visfotak story visfot vishesh honi chahiye.
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sanjiv on 31 July, 2010 22:36;37
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esse dukhad koi baat nhi ho skti ...
sun kar hi nafart hoti hai
log aisa bhi krte hain
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Dr Pawan kumar kurukshetra on 01 August, 2010 12:05;59
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Abhishek g thankyou this story is not less than social research ye sb padne k baad lagta h desh me law order and huminity name ki koi chiz nai h
i hope your article will create the awareness among gentle people of this country ,here i am also forwarding to my all friends.
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prashant on 01 August, 2010 15:36;25
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abhishek ji thanks samaj ko aina dikhane ke liye.. .
desh me kya ho raha hai .aur abhi kitna gark hoga iska koi andaja nahi laga sakta.
surat me hi yahi hall hai yanha par mobail clip dwra logo ko ladkiya batyi jati hai.. umra ka thikna nahi 12 t0 16 ki bhi ladkiya .
Isko dur karne ke kya Upay hai. .pls Send me rajpoot.prsingh23@gmail.com
Prashant rajpoot
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on 01 August, 2010 23:40;12
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its very important coverage
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amrita dalela on 02 August, 2010 10:14;19
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wonderful...people shud defntly go through this story. n its gud 2 c positive responses...Abhishek ji...aapne bahut badhiya kamm kiya hai!! all the best...
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vishes on 02 August, 2010 16:58;30
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अच काम किया
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Sanjeet Tripathi on 04 August, 2010 00:06;05
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bahut hi shandar rapat,

ek haqikat ko ek aur tarah se ujagar karne ke liye bdhai aur shubhkamnayein aapko...
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suneel joshi on 04 August, 2010 13:32;08
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you have shown this ugly truth. but do you think only to know is enough? either you have taken any action on agents? any judicial or police action is there? shame on society..
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anilreja on 04 August, 2010 17:18;30
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sir,visfot.com revealed the truth we as a father or common man always think possitively that our childrens are engaged in creative activity but after reading this article i would say " EYE-OPENER" article covered by visfot.com kudos to all team of this website. as we all know that there are plenty rules and regulations to check this kind of foul or evil prectice prevailing in our society but being a aprents we have to have a check on our childrens as we all know india's rule , cop and judgement if any of us go agaist this or individual then it is taking lots of risk . I request to visfot com that taking help of NGO's and other strong media personality this kind of racket and malpractices will come to know in front of people , society and leaders then media hype will work and pressure build up will takes place then serious action can be expected from senior police officers and concern ministy -regards-anil reja, mumbai
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