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सीबीआई का इस्तेमाल, सुप्रीम कोर्ट ब्लैकमेल

image कांग्रेस मुख्यालय, 24 अकबर रोड

देश की दो स्वायत्त संस्थाओं का कांग्रेस पूरी तरह से राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है. सोहराबुद्दीन मामले में अमित शाह की न्यायिक हिरासत कांग्रेस की ऐसी सोची समझी रणनीति है जिसमें उसने न केवल सीबीआई का अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया बल्कि उसने सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा के साथ भी खिलवाड़ किया और भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे एक न्यायाधीश को सीबीआई के ही जरिए मैनेज करके सोहराबुद्दीन मामले को सीबीआई के पास भिजवा दिया. प्रेम शुक्ल की पड़ताल-

शोहराबुद्दीन मुटभेड़ काण्ड को लेकर गुजरात और उसके मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को कटघरे में खड़ा करने का हर संभव प्रयास जारी है. सेन्ट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन के अधिकारी गुजरात को उक्त मुदकमा चलाने के लिए भी उपयुक्त राज्य मानने को तैयार नहीं है. सीबीआई की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में आवेदन किया गया है कि उक्त मामले को राज्य के बाहर सुनवाई के लिए स्थानांतरित किया जाए. मामले की चार्जशीट अभियुक्तों के पास पहुंचने से पहले ही मीडिया को उपलब्ध कराई जा चुकी है. गुजरात के पूर्व गृहराज्यमंत्री अमित शाह सलाखों के पीछे पहुंचाए जा चुके हैं. सीबीआई ने जिस अंदाज में आईपीएस अधिकारी गीता जौहरी एवं पीसी पाण्डेय से पूछताछ की है और उसके बाद जैसी खबरें प्रसारित की गयी है उसके अनुसार मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी भी सीबीआई के चंगुल में फंस सकते हैं. मामला कुछ इस तरह पेश किया जा रहा है मानो सोहराबुद्दीन शेख कोई अत्यंत मासूम न्यायप्रिय नागरिक रहा हो. सोहराबुद्दीन को किसी भी तरह मार गिराने का आदेश स्वयं नरेन्द्र मोदी ने जारी किया हो लेकिन जब इस काण्ड की तह में जाते हैं तो समझ में आता है कि सोनिया गांधी के नेतृत्व में सत्तारूढ़ कांग्रेस और उसके इशारों पर चलनेवाली सीबीआई किस तरह के फर्जीवाड़ों के आधार पर नरेन्द्र मोदी को निशाना बना रही है. कांग्रेस नरेन्द्र मोदी को सलाखों के पीछे भेजकर गुजरात के दंगों से आहत मुस्लिम कौम का वोट बैंक अपनी तिजोरी में डालना चाहती है. बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनाव नजदीक हैं. दोनों राज्यों में कांग्रेस की सत्ता आने का कोई संकेत नहीं है. पश्चिम बंगाल में वह तृणमूल कांग्रेस पार्टी की जूनियर सहयोगी बनकर चुनाव लड़ने जा रही है. बिहार में यदि राष्ट्रीय जनता दल और लोकजनशक्ति पार्टी के साथ उसका कोई चुनावी गठबंधन नहीं बनता तो कांग्रेस चुनावी राजनीति में हाशिये पर रहेगी. बावजूद इसके यदि मुस्लिम वोट बैंक उसके साथ आ जाता है तो बिहार और बंगाल के बाद पूरे देश में मुस्लिम वोट बैंक पर कांग्रेस का एकाधिकार स्थापित हो जाएगा.

जब 2014 में कांग्रेस राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का घोषित उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतरेगी तब उसके वोट काटने के लिए न वाममोर्चा सलामत रहेगा, न लालू-मुलायम, नीतीश कुमार, शरद यादब, चंद्रबाबू नायडू, नवीन पटनायक, देवेगौड़ा इत्यादि की चुनौती शेष रहेगी. कांग्रेस को अपने बूते पर सामान्य बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचाने के लिए मुस्लिमों का एकतरफा वोट चाहिए. मुस्लिमों का एकतरफा वोट कांग्रेस की झोली में तभी जा सकता है जब वे किसी एक व्यक्ति को मुस्लिम कौम का खलनायक साबित कर सकें. 2002 के गुजरात दंगों को कांग्रेस 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में भुना चुकी है. पिछले दो चुनावों की अपेक्षा 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रति मुस्लिमों की कड़वाहट में कमी आ सकती है. कांग्रेस यह बर्दाश्त नहीं कर सकती. इसलिए येन केन प्रकारेण कांग्रेस ने नरेन्द्र मोदी को सलाखों के पीछे भेजने का व्यापक षण्यंत्र तैयार किया है. शोहराबुद्दीन का मामला इस रणनीति का सबसे अहम मामला है. शोहराबुद्दीन के फर्जी मुटभेड़ के मामले में गुजरात की सीआईडी लंबे से जांच कर रही थी. पूर्व आईपीएस डीजी बंजारा, एन के अमीन समेत कई पुलिस अफसरों को उस मामले में सीआईडी ने ही गिरफ्तार किया था. पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी से कांग्रेस का कोई राजनीतिक हित नहीं सधता है इसलिए शोहराबुद्दीन के भाई को सर्वोच्च न्यायालय भेजा गया इस मांग के साथ कि सीआईडी निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है सो सीबीआई जांच आवश्यक है.
अब तक तो नरेन्द्र मोदी और भाजपा की ओर से सीबीआई के राजनीतिक दुरुपयोग का मामला उछाला गया है लेकिन जस्टिस चटर्जी के कोण पर नजर दौड़ाने के बाद मामला भाजपा के आरोपों से कहीं ज्यादा गंभीर नजर आता है. कांग्रेस ने अपनी सियासी चाल को सफल बनाने के लिए सीबीआई के जरिए सर्वोच्च न्यायालय के कान उमेठकर उसे ब्लैकमेल करने का भी पाप किया है.
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला आया जस्टिस तरुण चटर्जी की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ के समक्ष. जस्टिस चटर्जी के समक्ष जब यह मामला आया तब वे खुद सीबीआई जांच के घेरे में थे. सर्वोच्च न्यायलय में नियुक्ति के पूर्व जस्टिस चटर्जी 31 जनवरी 2003 से 27 अगस्त 2004 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद पर थे. उन्हीं के कार्यकाल में गाजियाबाद के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के न्यायालयीन कर्मचािरयों के भविष्य निधि में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ जिसे गाजियाबाद प्रोविडेड फण्ड स्कैम के नाम से जाना जाता है. इस मामले की सीबीआई जांच शुरू हुई. सीबीआई जांच में 47 न्यायाधीशों पर आरोप लगाये गये थे. सीबीआई की प्राथमिक जांच में 24 न्यायाधीशों को दोषी पाया गया था जिसमें सबसे ऊपर थे जस्टिस तरुण चटर्जी. पूर्व मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन के समक्ष एक आवेदन पेश कर सीबीआई ने जस्टिस चटर्जी से पूछताछ करने की अनुमति प्राप्त की. जिस समय सोहराबुद्दीन की हत्या के मामले को सीबीआई जांच के लिए सौंपने की याचिका जस्टिस चटर्जी के समक्ष आयी उस समय स्वयं उनके सिर पर सीबीआई जांच की तलवार लटक रही थी. न्यायिक नैतिकता के आधार पर ऐसे समय जस्टिस तरुण चटर्जी को इस मामले की सुनवाई ही नहीं करनी चाहिए थी. जो न्यायाधीश स्वयं सीबीआई जांच के समक्ष हो, वह अन्य मामले में सीबीआई जांच का निर्णय निष्पक्ष रूप से कैसे ले सकता है? लेकिन जस्टिस तरुण चटर्जी को तो अपनी जान बचानी थी. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं प्रख्यात कानूनविद राम जेठमलानी का आरोप है कि सीबीआई ने निश्चित तौर पर जस्टिस तरुण चटर्जी को दबाव में लाया होगा. उस दबाव के परिणाम स्वरूप जस्टिस चटर्जी को सीबीआई के मनमाफिक फैसला सुना दिया. गौरतलब है कि जस्टिस तरुण चटर्जी 12 जनवरी 2010 को सोहराबुद्दीन शेख के भाई की याचिका पर उक्त मामले की जांच सीबीआई को सुपुर्द करते हैं और 14 जनवरी 2010 को वे सेवानिवृत्त हो जाते हैं. छह माह के भीतर सीबीआई गाजियाबाद पीएफ स्कैम में जो चार्जशीट पेश करती है उसमें वह जस्टिस चटर्जी को क्लीन चिट दे देती है. सीबीआई यह मानती है कि 2001 से 2008 के बीच कर्मचारी प्रोविडेड फण्ड से विभिन्न न्यायाधीशों ने 34.56 करोड़ राशि का गबन किया. वह यह भी मानती है कि तरुण चटर्जी ने प्रोविडेड फण्ड का दुरुपयोग किया लेकिन उनके इस दुरुपयोग को गैर इरादतन करार देकर वह उन्हें मामले से बरी कर देती है.

न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़नेवाले प्रख्यात कानूनविद प्रशांत भूषण सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय खण्डपीठ के समक्ष प्रार्थना करते हैं कि सीबीआई की प्रथम दृष्टया जांच को सार्वजनिक किया जाए. प्रशांत भूषण की इस याचिका अस्वीकार कर दिया जाता है. मुंबई उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हास्बेट सुरेश कहते हैं कि तरुण चटर्जी का सीबीआई की चार्जशीट में नाम न होना आश्चर्यजनक है. सुरेश हास्बेट का प्रश्न है कि मुख्य न्यायाधीश होने के चलते जस्टिस चटर्जी की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है. फिर आरोपपत्र से उनका नाम गायब कैसे हुआ? जस्टिस सुरेश होसबेट कोई नरेन्द्र मोदी समर्थक नहीं हो सकते. जस्टिस सुरेश होसबेट पीपुल्स युनियन फार सिविल लिबर्टी से जुड़े रहे हैं जो नरेन्द्र मोदी का समर्थक कभी नहीं हो सकती. सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा भी कहते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय इस देश का सबसे पवित्र न्याय संस्थान है. इसलिए यदि उसके किसी न्यायाधीश पर कोई भी आरोप उछलता है तो संस्था की पवित्रता को बचाये रखने के लिए उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. कांग्रेस सरकार जस्टिस तरुण चटर्जी को जांच से तो बचाती ही है उन्हें सरकारी आयोग देकर उपकृत भी करती है. मतलब साफ है तुम हमारा काम करो, हम तुम्हें बचाएंगे. 

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virendra on 01 August, 2010 20:16;13
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ये कांग्रेसी सब अपनी आत्मा इतालियन लोंडिया के आगे बेच चुके है. नरेन्द्र मोदी का बाल भी बांका नहीं कर पाएंगे. नरेन्द्र मोदी वो शेर है जब दहाड़ लगता है तो सोनिया की नानी मरने लगती है. कांग्रेसी एक बाप की ओलाद है ही नहीं, सब साले दोगले है.
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agarwalcs on 01 August, 2010 23:13;30
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sahi kaha, ye cangresiyo me desh ke liya koi mohabbat nahi hai. abhi bhi inki atma gulam hi hai
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वीरेन्द्र जैन on 01 August, 2010 23:44;06
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अपना परिचय छुपा कर गाली गलोज की भाषा का प्रयोग करने वाले प्रतिक्रिया [कमेंट्स] की सुविधा का दुरुपयोग कर रहे हैं कृप्या इनके लिए माडरेशन लागू करें
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madanmohan on 02 August, 2010 11:34;48
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@वीरेंदर जैन,
जो गाली दे रहे है वो तो गलत है ही मगर जो १३० करोड़ के पूज्यनीय लोकतंत्र की माँ बहन एक कर रहे है , उनको तो चोराहे पे लटका के मरना नहीं चाहिए.
गुजरात के न्यायालय को अन्यायालय बताते है, भोपाल के आरोपी को इज्ज़त से बहार भागातें है, सिखों को मरवातें है, उनको गलियां नहीं देनी चाहिए , बल्कि उनको और उनके समर्थकों को सरे आम गोलियों से भुन देना चाहिए,
सोहराबुद्दीन, अफजल गुरु के रिश्तेदार है ये congressi
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pawan kuruklshetra on 02 August, 2010 12:07;31
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virender ji or common peple kar bhi kya sakta h vote bank k liye ye log is desh ko bhi bech denge modi ne kya bigada h desh ka gujraat ki development dekho or soharabuddin ka sach desh jaan chuka h ye sab congress ka stunt h
ye CBI ki jaanch anderson k liye kyo nahi kashmiri pandito k liye kyo nahi
ye sonia desh k gaddaro k sath milkar hinduo ko khatam karna chahti h pehle to sonia hindi sikhna nay chahti thi gulammo ki bhasa batakar ab raj karne k liye hindi bhi sikh li or jab election me rally karke vote mangti thi to ab mahangai ka jwab sansad me dene kyo nahi jati
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वीरेन्द्र जैन on 02 August, 2010 12:38;35
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@ मदन मोहन

@पवन कुल्श्रेष्ठ

अन्धता किसी भी तरह की हो वह बुरी होती है वह कुछ भी देखने नहीं देती। आप लोगों के साथ भी यही दिक्कत है या फिर आप सच जानते हुये भी अपने निहित स्वार्थ या अन्ध भावुकता में गलत के समर्थन पर उतर आते हैं। मैंने केवल इतना कहा था कि जो लोग गाली गलोज की भाषा स्तेमाल करने की बहादुरी दिखाते हैं उन्हें चेहरा और परिचय छुपाये बिना यह करना चाहिए जिससे यह पता तो चल सके कि वे वास्तव में अस्तित्व में भी हैं या हत्यारों का गिरोह बिभिन्न झूठे नामों से जनमत को धोखा देने की कोशिश कर रही है।

2- आजकल संघ परिवार के वकीलों के लिए सीबीआई, मीडिया, मानव अधिकार आयोग, अर्धसैनिक बल आदि सभी संस्थाएं बेकार हो गयी हैं जिनका यथावत उपयोग वे अपने शासन काल में करते आ रहे थे। यह कुछ नया नहीं है पहले पहले हर अपराधी अपराध से इंकार करता है और दुनिया भर के आवरणों से उन्हें ढकने की कोशिश करता है या पुलिस पर ही भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाने लगता है।
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Satish Tripathi on 02 August, 2010 14:49;58
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अगर सोहराबुद्दीन जैसे लोगो को फर्जी मुठभेंड करके मारा भी गया तो कोइ गलत नहीं है क्योकि एक न एक दिन कोइ हेडली ऍफ़ बी आई को बताएगा ही की सोहराबुद्दीन का संबंध आई एस आई और लश्कर से था जबकि हमारे देश की सी बी आई और कांग्रेस आज उसे मातम गाँधी के जैसा धर्मनिर्पेक्स और आदर्श नागरिक मान रही है
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prashant on 02 August, 2010 16:34;14
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narendro modi kepiche psdoge to maroge
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vivek on 02 August, 2010 17:27;43
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वीरेंदर जैन जी आपकी बात आप पर भी लागू होती है लगता है आप शायद BJP के अंधविरोध और कांग्रेस के अंध समर्थन में लिख रहे है मोदी ने जो किया है उसका परिणाम यह होगा की अब अगले दस बरस तक गुजरात में मुस्लमान दंगा नहीं करेंगे. उदहारण के तौर में मेरठ में हर साल दंगे होते थे पर मलियाना के बाद दंगे होने बंद हो गए. जैन साहेब ये समझ लो जब हिन्दू सशक्त होगा तोही ये देश बचा रहेगा इसलिए मोदी और बीजेपी का अंध विरोध छोड़ कर हिन्दू सशक्तिकरण में जुट जाओ
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madan moha on 02 August, 2010 18:00;30
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vivek bjp ka dalla hai bhai. iski baato ko ghambhirta se mat lena.
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image प्रेम शुक्ल मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक. संपर्क - premshukla@rediffmail.com
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