Home | बड़ी खबर | तस्करी का धंधा फिर से शबाब पर है, मगर कलम खामोश है!

तस्करी का धंधा फिर से शबाब पर है, मगर कलम खामोश है!

image पत्रकार कमलेश के परिजन

उत्तर प्रदेश के इस पूर्वी इलाके में पत्रकार कमलेश की मौत महज एक हादसा नहीं बल्कि वो हकीकत है जिससे शायद ही कोई सुविधाभोगी पत्रकार रूबरू होना चाहेगा. कमलेश की मौत को सप्ताहभर बीत गया और जैसे जैसे उनके बारे में सच्चाई सामने आ रही है, सिर शर्म से झुकता जा रहा है. क्या समाज में हम संवेदनशील लोगों के साथ यही व्यवहार करते हैं? कमलेश की मौत से हम दुखी हो न हो वे तस्कर जरूर खुश हैं जिनका कारोबार कमलेश की कलम के कारण चौपट हो रहा था.

कमलेश की लाश जहाँ पड़ी थी वहां की जमीन पर पड़ा खून अब जम गया है ,हमारा खून भी ये सुनने के बाद जम जाता है जब हमें गाँव वाले बताते हैं कि कलेश लाश को पुलिस ट्रेक्टर के हल पर रखकर ले गयी थी, उसके पूर्व लगभग ८ घंटों  तक जानकारी के बावजूद उसकी लाश को थाने ले जाने के बजाय सड़क से उठाकर बीच जंगल में कुत्तों और भेडियों को खाने के लिए छोड़ दिया गया था। कमलेश अपने जेब के पैसे खर्च करके बनियों के अखबार के चाकरी करने वाले देश के उन हजारों अखबारनवीसों में से एक था जिनकी पहचान उनके गाँवों कस्बों में ही सिमट कर रहा जाती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में पिछले एक सप्ताह से जारी धरना प्रदर्शन और गिरफ्तारियों के बावजूद पुलिस की तहकीकात का नतीजा सिफर है।

कमलेश की पिछली ३१ को हुई मौत के बाद मिले तमाम फोर्नेसिक सबूत जाने अनजाने में नष्ट कर दिए गए हैं। घटनास्थल से बरामद शीशे के टुकड़े पीयूसीएल के विकाश शाक्य कहते हैं ये क्या कम आश्चर्यजनक बात है कि एक पत्रकार की लाश का पोस्टमार्टम कराने में पुलिस को २० घंटे लग गए वहीँ पंचनामा भी पूरी तरह से फर्जी भरा गया। पुलिस को सड़क पर लाश पड़े होने की सूचना लभई के ग्राम प्रधान ने रात को १२.१५  बजे ही दे दी थी लेकिन  किन परिस्थितियों में पुलिस ने अपने रिकार्ड में अगले दिन ७.३० बजे का समय दर्ज किया इसका जवाब पुलिस के किसी भी अधिकारी के पास न था। सिर्फ इतना ही नहीं उसकी लाश के एक पैर में ही जूता और मोजा मिला, दूसरे पैर का जूता दूर पड़ा मिला लेकिम मोजा गायब था इसका भी जिक्र कहीं नहीं किया गया। कमलेश की लाश को पुलिस के आदेश पर बीच जंगल में छोड़ने वाला ट्रैक्टर ड्राइवर कमल बताता है हमने साहब लोगों से कहा कम से कम उन्हें जीप में डाल लीजिये, मगर वो मुझे धमकाकर ट्रेक्टर से ही लाश ले जाने को बोले। ग्रामीण बताते हैं कि पुलिस ने उस वक़्त जब उनके जेब से कागज़ निकाला तो उसमे मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार और सीमा पर हो रही सागौन की तस्करी को लेकर पुलिस के खिलाफ कुछ बातें लिखी थी,उस वक़्त एक सिपाही ने कहा भी कि साहब ये शायद कोई पत्रकार है लेकिन दरोगा ने उसकी बात अनसुनी कर दी।

जब हम उत्तर प्रदेश- छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित सोनभद्र के बैधन इलाके में पहुँचते हैं तो बेशकीमती अवैध लकड़ियों से लदे ट्रकों से पुलिस की खुलेआम वसूली का नजारा साफ़ दिखाई देता है। कमलेश यहीं का रहने वाला था। वहां उसने माफियाओं और पुलिस के गठजोड़ के खिलाफ लगातार कलम चलायी, इसका खामियाजा उसे बार बार उठाना पड़ा था। गाजियाबाद के वर्तमान एसएसपी रघुबीर लाल जो कि उस वक़्त सोनभद्र में थे ने उसका मुंह बंद करने के लिए हर संभव कोशिश की थी,जब उसने एफ सी आई के गोदाम से लाखों टन अनाज को गायब कर गैरकानूनी बिक्री किये जाने के खिलाफ कई एपिसोड छापे थे। उत्तर प्रदेश के बैधन इलाके में बिजली अभी पिछले साल ही पहुंची है ,सीमा पर नक्सलियों द्वारा लगातार वारदातें किये जाने के बाद से ही शाम को गाड़ियों का परिवहन रुक जाता है ,पगडंडियों से होकर जब हम कमलेश के घर पहुँचते हैं तो चारों ओर गरीबी चीखती नजर आती है ,शोकाकुल महिलाएं हमें देखते ही बरबस रो पड़ती हैं ,दो भाई उपेन्द्र जिनमे से एक अंडे की रेहड़ी लगता है और दूसरा जो राजेंद्र  कि ठेके पर छोटा मोटा काम करते हैं कहते हैं कि देखिये एक साल पहले हमारे एक भाई को  मारकर तालाब में फेंक दिया था और अब कमलेश को मार दिया ,क्या हमें कभी न्याय मिलेगा? भाई बताते हैं कि उसका मोबाइल और पैसे हमें मौके से नहीं मिले .वो घर से हिंडाल्को अपने भतीजे के मृत्यु की खबर सुनकर निकला था, लेकिम खुद मारा गया। भाभी बताती हैं उस दिन वो बहुत रो रहा था ,बहुत प्यार करता था वो उसको ,हम समझ नहीं पाए वो अपने भाई के घर से लगभग 10 किमी आगे कैसे पहुँच गया? भाई बताते हैं बाहर वालों के लीए कितना साहसी क्यूँ न हो ,लेकिन वो तो अकेले सोने में भी डरता था।

बातचीत के दौरान परिजन कमलेश की एक व्यक्तिगत डायरी ले आये। डायरी के पन्नों पर कमलेश की लिखावट में लिखी इबारत “दरोगा ने व्यक्तियों को पांच दिन के लीए थाने में रखा फिर छोड़ दिया, जबकि वही व्यक्ति कहीं न कहीं से मेरे भाई लाला की मौत के जिम्मेदार हैं” पुलिस के प्रति उसकी निराशा को साफ़ दिखला रही थी। कमलेश के साथी पत्रकार बताते हैं वो हम लोगों की ताकत था, यहाँ कोई वन माफियाओं और लकड़ी के तस्करों के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश नहीं करता अगर कमलेश नहीं होता। शायद इसी वजह से वो सबकी आँखों की किरकिरी बना हुआ था, अब हम अकेले पड़ गए हैं। सीमा पर तस्करी का धंधा फिर से शबाब पर है ,कलम खामोश है |

Subscribe to comments feed Comments (3 posted):

anju singh on 10 August, 2010 11:37;12
avatar
पत्रकार कमलेश के साथ जो हुआ वो वाकई अफ़सोस करने लायक है, इस खबर को पढकर शायद सभी लोग ऐसे ही बोलेंगे ... पर ऐसे बोलने से होगा क्या...! इस आजाद भारत मे "कलम" और "कमलेश" जैसे भी तो आजाद नहीं ...ऐसे कलम के सिपाही कलम की ताकत से सभी बुराई को खत्म करना चाहते है... पर ऐसा होता नहीं... आज पैसा और चालबाजी के तहत देश मे बहुत बुराइयाँ पैदा हो गयी है... आज आजाद हैं तो बस अपराध. इस गैरजिम्मेदार आजादी का ही नतीजा है की "अपराधी आजाद है अपराध करने के लिए और आम जनता पूरी तरह आजाद है हर सितम झेलने के लिए...!" कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस तरह के हालात न तो बदले थे और न बदलेंगे... एक और झूठी ख़बरें पत्रकारिता मे बिकती रहेंगी और दूसरी और जहा कलम वाकई बदलाव के साथ सुधार करना चाहेगी उसे ठीक "कमलेश की कलम" की तह चुप करा दिया जायेगा...
Thumbs Up Thumbs Down
0
Himanshu Dabral on 10 August, 2010 13:18;25
avatar
इस देश के यही दुर्भाग्य है की यहाँ सच्चे पत्रकार के लिए अब कोई जगह नही है...पैसा कमाने की ललक ने पत्रकारों को अँधा कर दिया है...आवाज़ उठाओ तो कमलेश की तरह मारे जाओगे...यहाँ सब जिंदा लाश है...इनसे किसी तरह की उम्मीद मत रखियेगा...
भगवान कमलेश की आत्मा को शांति दे...
Thumbs Up Thumbs Down
1
Abdul Rashid (Journalist) on 10 August, 2010 22:54;04
avatar
कमलेश की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं बल्कि पत्रकारिता की निष्पक्ष छवि पे बाजारू पत्रकारिता का नंगगा नाच है जो एक इमानदार पत्रकार की मौत व मौत के बाद मीर्तशारीर के साथ किया गया वर्ना जब हुक्मरानों की तख्ता केवल शब्दों से बदल जाती थी आज यदि ऐसी पत्रकारिता होती तो क्या एक शिपाही जानने के बाद क्या पार्थिव शारीर के साथ बेहुरमती करने की हिम्मत कर सकता था शायद नहीं.अब पत्रकारों को गंभीरता से इस विषय पे विचार करना होगा नहीं तो नजाने और कितने कमलेश की बलि चढ़ा दे ये बनिया पत्रिकारिता .
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 3 | displaying: 1 - 3

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image awesh tiwari मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है | विगत २ वर्षों से लखनऊ और इलाहाबाद से प्रकाशित 'डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट ' में ब्यूरो प्रमुख। awesh29@gmail.com
Rate this article
0
More from बड़ी खबर
Previous
image
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
image
सलवा जुड़ुम की खामोश विदाई
नक्सल समस्या से जूझने के लिए तैयार की गयी सलवा –जुडूम नाम की सामाजिक दीवार का इस तरह धीरे-धीरे धसक जाना बहुत ही निराशा-जनक है। यदपि यह भी सत्य है की ,इसकी बुनियाद बहुत ही कमजोर थी। अधिकृत रूप से सन२००५ में सरकार द्वारा शुरू किये जाने के बाद से ही ये विवादास्पद रही है और ये विवाद ही इसको सतत रूप से कमजोर करते रहें, जबकि ये प्रयास निसंदेह अच्छा था।...
image
राम की नहीं है जन्मभूमि
हिन्दुओं का यह विश्वास है कि अयोध्या राम जन्मभूमि है, किन्तु यह बात संदेह उत्पन्न करती है क्योंकि हिन्दू धर्म के किसी प्राचीन ग्रंथ में इसका कोई ऐसा वर्णन नहीं मिलता है जिसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। हिन्दुओं के किसी भी धर्मग्रंथ में ऐसा नहीं लिखा गया है कि अयोध्या में अमुक स्थान पर राम का जन्म हुआ था, वहां जाकर आराधना करनी चाहिए। ...
image
बेटे को ही टिकट नहीं दिला सके तो किस बात के पार्टी अध्यक्ष
डॉ चन्द्र प्रकाश ठाकुर जब बिहार भाजपा के अध्यक्ष बनाये गये थे तभी कई तरह की आशंकाएं जताई गयी थीं कि आखिर इस उम्र में वे क्या कर पायेंगे? हुआ भी वही. पार्टी ने बतौर अध्यक्ष उनको कितनी मान्यता दी इसका अंदाज इसी से लग जाता है कि वे अपने ही बेटे को टिकट नहीं दिला सके, जो कि पार्टी में पसरते परिवारवाद के कारण उनका नैतिक हक बनता था, सो इस्तीफा दे दिया. ...
image
सभी दलों को साधने में सफल रहे मुंडा
झारखण्ड में सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने पहला मंत्रिमण्डल विस्तार किया है. पहले विस्तार में उन्होंने नौ मंत्रियों को शामिल किया है. जैसा कि समझा जा रहा था कि मंत्रिमण्डल विस्तार के बाद उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन मुंडा ने सीधे विधायकों का चयन करने की बजाय पार्टी अध्यक्षों पर नाम सुझाने का जिम्मा छोड़ दिया जिसके कारण उनकी परेशानी कम हो गयी....
image
सरकार रहे या जाए, नींद पूरी आये
कर्नाटक में भाजपा सरकार संकट में है. हालात इतने बदतर हो रहे हैं कि सरकार बचाना मुश्किल है. भारतीय जनता पार्टी के "क्राइसिस मैनेजर" मीडिया में खबरें चलवा रहे हैं कि उनके रातों की नींद हराम हो गयी है और किसी भी कीमत पर वे लोग कर्नाटक की सरकार को बचा लेना चाहते हैं. लेकिन हकीकत यह नहीं है. ...
image
कर्नाटक में राज्यपाल रूल
हंसराज भारद्वाज कर्नाटक के राज्यपाल बनाकर क्यों भेजे गये? क्या कांग्रेस दक्षिण में भाजपा के प्रवेश को कर्नाटक में ही छिन्न भिन्न कर देना चाहती थी? शायद नहीं. हंसराज भारद्वाज को दिल्ली से दरबदर इसलिए किया गया क्योंकि क्वात्रोच्चि की आलोचना करके वे दस जनपथ के विश्वासपात्र नहीं रह गये थे. न्यायालयों में जजों की नियुक्तियों पर पक्षपात के आरोप भी लगे थे, शायद इसीलिए यूपीए-2 में उन्हें मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिली. ...
image
आदिवासी और अल्पसंख्यक नेता की खोज में है राहुल गाँधी
मध्य प्रदेश की राहुल गाँधी की तीन दिवसीय यात्रा राहुल के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और सिमी की समानता के बयान से सरगर्म रही, तो वही राहुल द्वारा कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश से दस आदिवासी और दस अल्पसंख्यक नेता की खोज का ऐलान भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। सिमी से तुलना के बयान ने तो कल भोपाल में भा.जा.पा. प्रदेश कार्यकारीणी के बैठक में अन्य मुद्दों को पीछे छोड़ दिया सबने ने राहुल के बयान की निंदा को प्राथमिकता दी और साथ मुख्य –मंत्री शिवराज से ये सवाल भी पूछा गया की राहुल को राज्य अतिथि का दर्जा क्यों?...
image
एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सभा में गूंजी हिन्दी
बहुत साल बाद संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी भाषा में जोरदार तरीके से भारत की बात को हिन्दी में कहा गया. संयुक्त राष्ट्र में भारत के डेलीगेशन के सदस्य के रूप में पूर्व भाजपा अध्यक्ष, राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर अपना हिन्दी में भाषण दिया जिसे सुनकर वहां मौजूद पुराने लोगों को अटल बिहारी वाजपेयी का करीब ३२ साल पहले दिया गया वह भाषण याद आ गया जो उन्होंने विदेश मंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट में दिया था ....
image
भारत के साथ हमारा मिलन अधूरा-उमर
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कश्मीर समस्या के राजनीतिक हल पर जोर देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का भारत संग पूर्ण विलय नहीं हुआ है। हमारा सशर्त अर्धमिलन हुआ है। इस समस्या का हल विशिष्ट तरीके से ही निकाला जा सकता है, जो राज्य के तीनों क्षेत्रों के लोगों के साथ भारत-पाक को भी मान्य हो।...
image
खेल तो हो रहा है पर देखनेवाला कोई नहीं
राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ी धुआंधार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनकी जीत पर जश्न मनाने वाले दर्शक नदारद हैं. जिस सुरक्षा व्यवस्था को अखबारों ने दिल्ली का दम बताया था वही सुरक्षा व्यवस्था अब खेलों के लिए मुसीबत बन गया है. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, दूरदराज स्टेडियमों और टिकट संबंधी मामलों की वजह से स्टेडियम नहीं पहुंच पा रहे हैं।...
image
कर्नाटक में फिर शुरू हुई किट-किट
कर्नाटक में बीजेपी का नाटक फिर शुरू हो गया। दक्षिण भारत में पहली बार किला फतह किया पर कुनबे में ऐसी कलह मची, दो साल में ही किले की चारदीवारी दरकने लगी है। अब बीजेपी के डेढ़ दर्जन एमएलए बगावत पर उतर आए हैं। इन बगावती विधायकों ने गवर्नर को चिट्ठी लिख समर्थन वापसी का एलान कर दिया है तो येदुरप्पा ने भी चार असंतुष्ट मंत्रियों को फौरन केबिनेट से बर्खास्त कर दिया है।...
image
राहुल बाबा की नजर में जैसे सिमी वैसे ही आरएसएस
राहुल गांधी ने नया सुर्रा छोड़ दिया है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी और आरएसएस को एक ही तराजू में तोल दिया। दो दिन पहले मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में राहुल ने कांग्रेस में आने वाले लोगों से बेहिचक कह दिया था। आरएसएस और सिमी की विचारधारा छोड़कर आने वालों को ही कांग्रेस में जगह मिलेगी। बुधवार को भोपाल में जब राहुल के बयान का मतलब पूछा गया तो राहुल ने कह दिया- आरएसएस और सिमी दोनों ही कट्टरवादी संगठन। वैचारिक कट्टरता की दृष्टि से इनमें कोई फर्क नहीं।...
image
बाबरी विध्वंस को फैसले से न जोड़े कांग्रेस
भाजपा ने कहा है कि अयोध्या में स्वामित्व मामले के फैसले को कांग्रेस बेवजह बाबरी मस्जिद ढांचा ढहाए जाने से जोड़ रही है जबकि वह अलग आपराधिक मामला है जिसकी कानूनी प्रक्रिया जारी है। पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने नई दिल्ली में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘जहां तक अभी के निर्णय का सवाल है तो उच्च न्यायासय ने कुछ दीवानी मामलों पर यह फैसला सुनाया है और इसका हम स्वागत करते हैं।‘‘ उन्होंने कहा कि ये दीवानी मामले कभी भी बाबरी मस्जिद ढहाए जाने से संबंधित नहीं थे। कांग्रेस दोनों मामलों को जोड़ने का प्रयास कर रही है, जिसका कोई तुक नहीं है।...
image
कांग्रेस के लिए कठिन साबित हो रहा है अयोध्या पर फैसला
अयोध्या पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ का फैसला कांग्रेस को न उगलते बन रहा न निगलते। मुलायम के बाद मा‌र्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी [माकपा] की तरफ से फैसले पर हुई राजनीति ने कांग्रेस की अल्पसंख्यक वोटों की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी इन दलों की तरह फैसले पर प्रतिक्रिया भी नहीं जता सकती। ऐसे में उसने अदालत के बाहर इस विवाद के निपटारे की पैरवी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील करके अपनी खाल बचाने की कोशिश की है। यही नहीं, 1992 में विवादित ढांचा गिराने के लिए भाजपा पर जोरदार हमला बोलकर उसने दूसरे दलों से लंबी लकीर खींचने की कोशिश भी की है।...
image
मुसलमानों ने कहा: माहौल बिगाड़ रहे हैं मुलायम
अयोध्या विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की टिप्पणी मुसलमानों और विशेष रूप से मुस्लिम धर्मगुरुओं को नागवार गुजरी है। अधिकांश मुस्लिम उलमा का कहना है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर किसी को भी ऐसी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए जो राजनीति से प्रेरित हो और जिससे माहौल बिगड़ने की आशंका हो।...
image
शिवराज के राज में राहुल राजकुमार
राजनीतिक अदावत अपनी जगह लेकिन राज्य का आतिथ्य सबसे ऊपर. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राहुल गांधी के मध्य प्रदेश में प्रस्तावित दौरे के दौरान उनके स्वागत सत्कार में कोई कमी नहीं रखना चाहते इसलिए उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है. ...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2