सड़ रहा है 6600 मीट्रिक टन अनाज
शरद पवार साहब का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया जा सकता. अनाज भले ही सड़ जाए लेकिन उसे मुफ्त में गरीबों को देना संभव नहीं है. शरद पवार कितने संवेदनशील हैं यह उनके इस बयान से ही पता चलता है लेकिन भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में अनाज किस बेकदरी से सड़ाए जा रहे हैं इसका नमूना इटावा के इस गोदाम पर आकर पता चलता है. भारतीय खाद्य निगम की इटावा गोदाम का जायजा ले रहे हैं दिनेश शाक्य-
एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) की गोदाम में दो वर्ष से निकासी की प्रतीक्षा में अटके 5703 मीट्रिक टन गेहूं घुन खाये जा रहा है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक ए ग्रेड वाले गेहूं की निकासी एक वर्ष तक नहीं हुई तो बी ग्रेड में आ जायेगा। यह गोदाम पिछले सप्ताह तब सुर्खियों में आया था, जब उप खाद्य निरीक्षक रवि वर्मा ने गोदाम प्रभारी रतीराम निषाद के खिलाफ लैब में सैंपल फेल होने पर मुकदमा दर्ज कराया था। जिलाघिकारी गौरीशंकर प्रियर्दर्शी ने गेंहू सडाने के मामले मे दर्ज कराये गये मुकदमे मे अभियोजन को चलाने की अनुमित देकर भारतीय खाद निगम के अधिकारियो मे हडकंव मचा दिया है।
महेरा चुंगी स्थित निगम की इटावा डिपो की 13 हजार 60 मीट्रिक टन क्षमता वाली तीन गोदामों में वर्तमान में 6617 मीट्रिक टन खाद्यान्न रखा गया है। इसमें 5703 मीट्रिक टन गेहूं और 914 मीट्रिक टन चावल है। निकासी न होने से यह खाद्यान्न अगस्त 2008 से भंडारित है। प्रबंधक तकनीकी एआर दास कहते हैं कि खाद्यान्न के रखरखाव की कवायद दो वर्ष से जारी है। सुरक्षा के सभी उपाय अपनाये जा रहे हैं। घुन का ट्रीटमेंट करा दिया जायेगा। उनका कहना है कि सैंपल स्वीपिंग से लिया गया था। जो उचित नहीं है। जिस समय सैंपल लिया गया उस समय जिम्मेदार अधिकारी नही थे।
मौके पर किये गये सर्वे में पाया गया अधिकांश बोरों में घुन लग गया है। बोरों पर सफेद लेयर पड़ गयी है। गोदाम से खाद्यान्न का लदान बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आसाम राज्यों को होता है। डिपो प्रबंधक कालीचरण बताते हैं कि भंडारण और निकासी के लिए मजदूरों की ठेका प्रथा पर रोक लगा दी गयी है। वर्षो से जुड़े मजदूर नियमित किये जाने की मांग को लेकर आंदोलित हैं। उनका मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। कोर्ट और विभागीय उच्चाधिकारियों के आदेश मिलने तक निकासी नहीं करायी जा सकती। एक ओर जहां जहां देश में भूख से हो रही मौतों पर स्वतंत्रता दिवस पर ही प्रधानमंत्री चिंता जता रहे हैं। सरकारी गोदामों में सड़ रहे गेंहू के बारे में उच्चतम न्यायालय को यह तक टिप्पणी करने के लिए बाध्य होना पड़ा कि यह गेंहू गरीबों में बांट दिया जाए मगर इससे विलग उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के एफसीआई गोदाम में महज विभागीय अधिकारियों और मजदूरों के मध्य चल रहे विवाद में गेंहू सड़ने को मजबूर है। आश्चर्यजनक यह है कि जो गेंहूं विभागीय जांच की सेप्लिंग में सड़ा हुआ पाया गया है उसे एफसीआई के अधिकारी स्वीकार नहीं पा रहे हैं। जबकि इस मामले में इकदिल थाने में एक विभागीय अधिकारी के विरूद्व मामला तक दर्ज किया जा चुका है। अब देखना होगा कि सरकारी गोदामों में सड़ रहा गेंहू गरीबों को पेट भर पाएगा, इस सवाल का जबाब फिलहाल अधर में ही लटका है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए संबोधन में साफ समझा जा सकता है कि वह देश में हो रही भूख से मौत पर कितने चिंतित है। यह पीड़ा सिर्फ प्रधानमंत्री की ही नहीं हैं बीते दिनों देश की सर्वोच्च न्यायालय ने भी सरकारी गोदामों में सड़ रहे अनाजों पर चिंता जताते हुए इस अनाज को गरीबों में वितरित किए जाने के निर्देश दिए, परंतु इसका आज तक पालन नहीं हो पा रहा है। ताज्जुब की बात यह है गोदाम में रखे जिस गेंहू को लखनऊ स्थित प्रयोगशाला ने 12.09 फीसदी डैमेज स्वीकारते हुए इसे खाने योग्य नहीं माना गया है. इस रिपोर्ट के बाद गंभीर हुए जिलाधिकारी ने इकदिल थाने में एफसीआई के रतिराम निषाद के विरूद्व मामला दर्ज कराया था उस गेंहू को एफसीआई के अधिकारी अब भी खराब स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। यहां तक कि स्थानीय अधिकारी इस प्रयोगशाला की रिपोर्ट को ही गलत करार दे रहे हैं।
इटावा के एफसीआई गोदाम में तेरह हजार मीट्रिक टन सिर्फ इसलिए सड़ रहा है क्योंकि यहां कर्मचारियों और मजदूरों के मध्य विवाद चल रहा है। विवाद की बजह चाहे जो हो परंतु इसकी चपेट में वह अनाज आ रहा है जिससे हजारों भूखों को भोजन मिल सकता है। इससे अलग कर्मचारियों और मजदूरों के मध्य यह विवाद इस मोड़ पर आ गया है जिसमें भुखमरी से बचने के लिए मजदूर धरने पर बैठने को मजबूर हो गए। बेशर्मी की बात यह है कि जिस गेंहू को एफसीआई के उच्चाधिकारी ही जांच में सड़ने का दावा करने के बाद एक अधिकारी के विरूद्व मामला दर्ज करा चुके हैं उसे एफसीआई के स्थानीय क्वालिटी कंट्रोलर स्वीकारने को तैयार नही है और दावा करते हैं कि वर्ष 2008 में भंडारित किया गया गेंहू पूरी तरह से सही है। वहीं मजदूरों का आरोप है कि अधिकारी गोदाम को बंद करना चाहते हैं। सवाल यह है कि आखिर इस गेंहू को गरीबों में वितरित करने की बजाय सड़ाने में इन अधिकारियों को क्या लाभ है?
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- सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
- सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
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- अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
- अपने होने पर ही हैरान
- भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
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अगर अनाज मुक्त रूप से बाज़ार में आने दिया गया तो कीमतें कम हो जाएंगी. जिससे अनाज व्यापारियों का मुनाफा घटेगा, शेयर बाज़ार मंदा पड़ने के बाद सारे सट्टेबाज़ और देशी-विदेशी निवेश कम्पनियां भी एमसीएक्स और एनसीडेक्स के मार्फ़त अनाज में पैसा फंसाए हुए हैं. नेताओं, उद्योगपतियों, मीडिया-संचालकों और अफसरों के भी काफी हित इस सट्टेबाजी से जुड़े हुए हैं.
सोनिया मैडम की पार्टी इन सबका नुकसान कैसे होने देगी?
प्रिय दिनेशजी,
आज आपकी न्यूज़ पढ़ी. एक बारफिर हिलाने वाली खबर है.
भूख देश का मुद्दा बन रहा है और इसमें आपका बहुत बड़ा योगदान है. देश आपकी इस सेवा को याद रखेगा. एक बार फिर बहुत-बहुत धन्यवाद.
कांग्रेस सब को ब्लेकमेल करती है और इन्होने कांग्रेस को ही ब्लेकमेल किया हुआ है. इसलिए कांग्रेस पार्टी से और सोनिया दरबार के दरवान मनमोहन से इस बारे में कोई भी कदम उठेगा उम्मीद करना ही बेकार है.
कोई गरीब ही या उसकी ओलाद ही शरद को जूता मारे, और थोडा मीडिया में हल्ला हो तब शायद इनको कुर्सी छोडनी पड़े,
वैसे भी कांग्रेस गद्दारी पे उत्तर आयी ही, शरद पंवार को आगे रख के गरीबों से रोटी छीन रही है, ममता को आगे रख के मओवादिओं को बढ़ावा दे रही है.
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