Home | बड़ी खबर | टाटा-बिड़ला-अंबानी, पीयेंगे मध्य प्रदेश का पानी

टाटा-बिड़ला-अंबानी, पीयेंगे मध्य प्रदेश का पानी

image

वेतन-भत्तों और सुविधाओं के विस्तार को लेकर लगातार हाय तौबा करने वाले जनप्रतिनिधि अब जनता की बुनियादी ज़रुरतों से पल्ला झाड़कर औद्योगिक घरानों की ताल पर थिरकते दिखाई दे रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पानी,बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ जुटाने का ज़िम्मा सरकारों को सौंपा गया है। मगर सरकारें अब जनहित के कामों को छोड़कर एक के बाद एक योजनाओं को निजी हाथों में सौंपती चली जा रही है, फ़िर चाहे वो प्राकृतिक संसाधन हों, ज़मीन हो या आम जनता की सेवा से जुड़े मुद्दे हों। इसी कड़ी में अब नेताओं और उद्योगपतियों को पानी मुनाफ़े का सौदा नज़र आने लगा है।

मध्यप्रदेश में अब कॉर्पोरेट सेक्टर को जलग्रहण मिशन से जोड़ा जा रहा है। विज्ञापनों की सरकारी मलाई खाकर अपनी ही मस्ती में डूबा मीडिया प्रदेश सरकार के इस कदम को अभिनव पहल बताने में जुट गया है। भारतीय संस्कृति में जल संरक्षण सामाजिक और सामुदायिक ज़िम्मेदारी है। स्टील, टेलीकॉम, बिजली, सीमेंट, मोटर गाड़ी जैसे क्षेत्रों में मुकाम बना चुके टाटा, रिलायंस, बिड़ला जैसे औद्योगिक घराने खबर है कि मध्यप्रदेश के गाँवों में जल प्रबंधन की कमान संभालेंगे। सूत्रों के मुताबिक अब तक नौ कंपनियाँ जलग्रहण मिशन में काम करने की सहमति दे चुकी हैं। इनमें टाटा, रिलायंस, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, आईटीसी, ग्रेसिम, रामकी, रामकृष्ण एग्रो प्रोसेसिंग, ओरियंटल पेपर मिल और इंडिया ट्रेसीविलिटी सिस्टम लिमिटेड शामिल हैं ।

इन कंपनियों को परियोजना लागत का न्यूनतम दस फीसदी खर्चा ही उठाना होगा। साथ ही ब्लॉक मुख्यालय में ऑफिस बनाकर विशेषज्ञों की तैनाती भी करनी होगी। प्रोजेक्ट की अवधि पाँच साल रखी गई है। कंपनियों को पाँच हजार हेक्टेयर के क्लस्टर में काम करने दिया जाएगा । इसमें होने वाले काम उपयोगकर्ता दल, स्व-सहायता समूह और वाटरशेड कमेटी तय करेगी। परियोजना में सिंचित क्षेत्र, जलस्तर, आजीविका के साधन बढ़ाने के साथ वनों का विकास भी करना होगा । कॉर्पोरेट घराने परियोजना के पर्यवेक्षण के साथ निगरानी की जिम्मेदारी भी निभाएँगे। साथ ही वाटरशेड समितियों को प्रशिक्षण भी देंगे। जल संरक्षण परियोजनाओं में ग्रामीण विकास विभाग पहली बार स्व-सहायता समूह और वाटरशेड समितियों के साथ आउटकम एग्रीमेंट करेगा ।

बेशक जल संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। सरसरी तौर पर योजना में कोई खामी नज़र नहीं आती, लेकिन यह भी समझना होगा कि जल केवल व्यावसायिक नीति नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक जिम्मेदारी भी है। भारतीय जीवन दर्शन पानी जैसी जीवन की अनिवार्य वस्तु को समाज की साझा संपत्ति मानता आया है, न कि निजी मुनाफे की वस्तु। पानी की बिक्री और नगर में पेयजल व्यवस्था के प्रबंध के बहाने बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ पानी जैसी अनिवार्य और नायाब वस्तु पर अपना कब्जा जमा रही हैं। देश के अनेक भागों में पानी की बढ़ती माँग और घटती उपलब्धता एक बड़ी समस्या बन चुकी है। ऎसे में कॉर्पोरेट जगत की पानी के संरक्षण में बढ़ती दिलचस्पी नये किस्म के संकट की ओर संकेत करती है । हर काम को नफ़े-नुकसान के तराज़ू पर तौलने वाले औद्योगिक घराने एकाएक प्राकृतिक संसाधनों को लेकर भला इतने गंभीर क्यों नज़र आ रहे हैं ? कहीं ये कोई अंतरराष्ट्रीय साज़िश की दस्तक तो नहीं ? क्या ये प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का नेताओं, सरकारी तंत्र और कंपनियों की साँठगाँठ का नया नुस्खा है ?

घटते जल स्रोतों के बीच लोगों की मानसिकता में भी तब्दीली आ रही है । उपभोक्तावादी संस्कृति की गिरफ़्त में आ चुके लोगों में बोतलबंद पानी के इस्तेमाल का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है। जिसकी जेब में  पैसा हो वह पानी पिए–इस दर्शन के पीछे विश्व बैंक की प्रस्तावित जल योजना है। यह शिगूफ़ा ज़ोर पकड़ रहा है कि शुद्ध पानी वह पिए जिसकी जेब में उसका दाम चुकाने की क्षमता हो। पानी के निजीकरण से 40 करोड़ डॉलर के बाजार पर गिद्धों की निगाह है।  पानी की मिल्कियत को लेकर देश-देश में झगड़े शुरु हो गए हैं। कनाडा की प्रांतीय सरकार ने जन आक्रोश के दबाव में ब्रिटिश कोलम्बिया से पानी का निर्यात रोक दिया तो निर्यात करने वाली अमेरिका की सन बेल्ट वाटर कारपोरेशन ने कनाडा सरकार पर हर्जाने का मुकदमा ठोंक दिया। बोलिविया में पानी के बढ़ते दाम के खिलाफ जनता ने रास्ते जाम कर दिए। विशाल जनांदोलन के बाद उन्हें बैक्टेल कंपनी से मुक्ति मिल सकी। दक्षिण अफ्रीका में जल प्रबंधन तथा जल निकास सेवाओं को फ्रांसीसी कंपनी को दिए जाने के विरुद्ध संघर्ष जारी है।

भारत में भी कई शहरों की जलापूर्ति व्यवस्था पर विदेशी कंपनियों ने कब्जा जमाना शुरू कर दिया है। राजधानी भोपाल में भी पिछले दो सालों से पानी की आपूर्ति दिनोंदिन घटती जा रही है और शुल्क में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है। राजधानी वासियों को एक दिन छोड़कर औसतन पाँच सौ लीटर पानी दिया जा रहा है, जबकि नगर निगम ने मासिक शुल्क साठ रुपए से बढ़ाकर एक सौ अस्सी रुपए कर दिया है। दो साल पहले की पेयजल आपूर्ति से तुलना की जाये तो भोपाल के लोग कम पानी की कई गुना ज़्यादा कीमत चुका रहे हैं। विदेशी कंपनी की मदद से अब तो चौबीस घंटे पानी देने की स्कीम लाई जा रही है । इसमें महीने में औसतन पचास हजार लीटर पानी खर्च करने पर लगभग पांच सौ रुपए अदा करने होंगे। देश में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा के साथ भी यही किया गया।  सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बेड़ा गर्क करने के बाद अब पानी भी वर्ग भेद की भेंट चढ़ने जा रहा है। अमीरों और गरीबों के स्कूलों तथा अस्पताल तो पहले ही अलग-अलग हो चुके थे, अब बँटवारा हो रहा है, अमीर - गरीब के पानी में। पानी की उपलब्धता और शुद्धता के सामूहिक दायित्व से जो समाज हाथ खींच रहा है, वह यह जान ले कि पानी के धंधे से बढ़कर भ्रष्टाचार और कहीं नहीं है।

मसला ये है कि जनता की बुनियादी ज़रुरतों को पूरा करने में सरकारों की दिलचस्पी ही खत्म होती जा रही है। ऐसे में बुनियादी सवाल खड़ा होता है कि जनहित के मुद्दों से दूर होते जनता के नुमाइंदों के भरोसे जम्हूरियत  कितने वक्त तक ज़िन्दा रह पायेगी ? जल, जंगल और ज़मीनों को ठेके पर देती जा रही सरकारें लोकतंत्र को ही बेमानी साबित कर रही हैं । औद्योगिक घरानों से नेताओं की जुगलबंदी का आलम यही रहा तो वो दिन दूर नहीं जब संसद और विधानसभाओं की कुर्सियों को भी निजी हाथों के हवाले करने का कोई नुस्खा नये दौर के गज़नवी ढ़ूँढ़ ही निकालेंगे ।

Subscribe to comments feed Comments (1 posted):

वीरेन्द्र जैन on 02 September, 2010 00:20;09
avatar
बहुत बुनियदी सवाल है। अगर सरकारें सारे काम इसी तरह प्राइवेट हाथों में दे देंगी तो क्या उनका काम केवल उद्योगपतियों के साथ फाइव स्टार होटलों में बिजनैस मीट आयोजित करना और केन्द्र सरकार से रोज रोज भीख मांगना या उधार माँगना भर है। हम प्रति वर्ष छह हजार करोड़ का ब्याज चुका रहे हैं और उद्योयगपति लाभ लूट कर रफूचक्कर हो जाते हैं। अगर नुकसान हो रहा हो तो बीच में ही छोड़ कर चले जाते हैं।
Thumbs Up Thumbs Down
1
total: 1 | displaying: 1 - 1

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image सरिता अरगरे संघर्ष को पत्रकारिता से जोड़नेवाली सरिता अरगरे भोपाल में रहती हैं और पारिवारिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी पत्रकारिता के प्रति पूरी तरह से समर्पित. विस्फोट के अलावा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेखन और दूरदर्शन में अंशकालिक पत्रकार के बतौर कार्यरत.
Rate this article
3.50
More from बड़ी खबर
Previous
image
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
image
सलवा जुड़ुम की खामोश विदाई
नक्सल समस्या से जूझने के लिए तैयार की गयी सलवा –जुडूम नाम की सामाजिक दीवार का इस तरह धीरे-धीरे धसक जाना बहुत ही निराशा-जनक है। यदपि यह भी सत्य है की ,इसकी बुनियाद बहुत ही कमजोर थी। अधिकृत रूप से सन२००५ में सरकार द्वारा शुरू किये जाने के बाद से ही ये विवादास्पद रही है और ये विवाद ही इसको सतत रूप से कमजोर करते रहें, जबकि ये प्रयास निसंदेह अच्छा था।...
image
राम की नहीं है जन्मभूमि
हिन्दुओं का यह विश्वास है कि अयोध्या राम जन्मभूमि है, किन्तु यह बात संदेह उत्पन्न करती है क्योंकि हिन्दू धर्म के किसी प्राचीन ग्रंथ में इसका कोई ऐसा वर्णन नहीं मिलता है जिसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। हिन्दुओं के किसी भी धर्मग्रंथ में ऐसा नहीं लिखा गया है कि अयोध्या में अमुक स्थान पर राम का जन्म हुआ था, वहां जाकर आराधना करनी चाहिए। ...
image
बेटे को ही टिकट नहीं दिला सके तो किस बात के पार्टी अध्यक्ष
डॉ चन्द्र प्रकाश ठाकुर जब बिहार भाजपा के अध्यक्ष बनाये गये थे तभी कई तरह की आशंकाएं जताई गयी थीं कि आखिर इस उम्र में वे क्या कर पायेंगे? हुआ भी वही. पार्टी ने बतौर अध्यक्ष उनको कितनी मान्यता दी इसका अंदाज इसी से लग जाता है कि वे अपने ही बेटे को टिकट नहीं दिला सके, जो कि पार्टी में पसरते परिवारवाद के कारण उनका नैतिक हक बनता था, सो इस्तीफा दे दिया. ...
image
सभी दलों को साधने में सफल रहे मुंडा
झारखण्ड में सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने पहला मंत्रिमण्डल विस्तार किया है. पहले विस्तार में उन्होंने नौ मंत्रियों को शामिल किया है. जैसा कि समझा जा रहा था कि मंत्रिमण्डल विस्तार के बाद उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन मुंडा ने सीधे विधायकों का चयन करने की बजाय पार्टी अध्यक्षों पर नाम सुझाने का जिम्मा छोड़ दिया जिसके कारण उनकी परेशानी कम हो गयी....
image
सरकार रहे या जाए, नींद पूरी आये
कर्नाटक में भाजपा सरकार संकट में है. हालात इतने बदतर हो रहे हैं कि सरकार बचाना मुश्किल है. भारतीय जनता पार्टी के "क्राइसिस मैनेजर" मीडिया में खबरें चलवा रहे हैं कि उनके रातों की नींद हराम हो गयी है और किसी भी कीमत पर वे लोग कर्नाटक की सरकार को बचा लेना चाहते हैं. लेकिन हकीकत यह नहीं है. ...
image
कर्नाटक में राज्यपाल रूल
हंसराज भारद्वाज कर्नाटक के राज्यपाल बनाकर क्यों भेजे गये? क्या कांग्रेस दक्षिण में भाजपा के प्रवेश को कर्नाटक में ही छिन्न भिन्न कर देना चाहती थी? शायद नहीं. हंसराज भारद्वाज को दिल्ली से दरबदर इसलिए किया गया क्योंकि क्वात्रोच्चि की आलोचना करके वे दस जनपथ के विश्वासपात्र नहीं रह गये थे. न्यायालयों में जजों की नियुक्तियों पर पक्षपात के आरोप भी लगे थे, शायद इसीलिए यूपीए-2 में उन्हें मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिली. ...
image
आदिवासी और अल्पसंख्यक नेता की खोज में है राहुल गाँधी
मध्य प्रदेश की राहुल गाँधी की तीन दिवसीय यात्रा राहुल के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और सिमी की समानता के बयान से सरगर्म रही, तो वही राहुल द्वारा कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश से दस आदिवासी और दस अल्पसंख्यक नेता की खोज का ऐलान भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। सिमी से तुलना के बयान ने तो कल भोपाल में भा.जा.पा. प्रदेश कार्यकारीणी के बैठक में अन्य मुद्दों को पीछे छोड़ दिया सबने ने राहुल के बयान की निंदा को प्राथमिकता दी और साथ मुख्य –मंत्री शिवराज से ये सवाल भी पूछा गया की राहुल को राज्य अतिथि का दर्जा क्यों?...
image
एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सभा में गूंजी हिन्दी
बहुत साल बाद संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी भाषा में जोरदार तरीके से भारत की बात को हिन्दी में कहा गया. संयुक्त राष्ट्र में भारत के डेलीगेशन के सदस्य के रूप में पूर्व भाजपा अध्यक्ष, राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर अपना हिन्दी में भाषण दिया जिसे सुनकर वहां मौजूद पुराने लोगों को अटल बिहारी वाजपेयी का करीब ३२ साल पहले दिया गया वह भाषण याद आ गया जो उन्होंने विदेश मंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट में दिया था ....
image
भारत के साथ हमारा मिलन अधूरा-उमर
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कश्मीर समस्या के राजनीतिक हल पर जोर देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का भारत संग पूर्ण विलय नहीं हुआ है। हमारा सशर्त अर्धमिलन हुआ है। इस समस्या का हल विशिष्ट तरीके से ही निकाला जा सकता है, जो राज्य के तीनों क्षेत्रों के लोगों के साथ भारत-पाक को भी मान्य हो।...
image
खेल तो हो रहा है पर देखनेवाला कोई नहीं
राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ी धुआंधार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनकी जीत पर जश्न मनाने वाले दर्शक नदारद हैं. जिस सुरक्षा व्यवस्था को अखबारों ने दिल्ली का दम बताया था वही सुरक्षा व्यवस्था अब खेलों के लिए मुसीबत बन गया है. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, दूरदराज स्टेडियमों और टिकट संबंधी मामलों की वजह से स्टेडियम नहीं पहुंच पा रहे हैं।...
image
कर्नाटक में फिर शुरू हुई किट-किट
कर्नाटक में बीजेपी का नाटक फिर शुरू हो गया। दक्षिण भारत में पहली बार किला फतह किया पर कुनबे में ऐसी कलह मची, दो साल में ही किले की चारदीवारी दरकने लगी है। अब बीजेपी के डेढ़ दर्जन एमएलए बगावत पर उतर आए हैं। इन बगावती विधायकों ने गवर्नर को चिट्ठी लिख समर्थन वापसी का एलान कर दिया है तो येदुरप्पा ने भी चार असंतुष्ट मंत्रियों को फौरन केबिनेट से बर्खास्त कर दिया है।...
image
राहुल बाबा की नजर में जैसे सिमी वैसे ही आरएसएस
राहुल गांधी ने नया सुर्रा छोड़ दिया है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी और आरएसएस को एक ही तराजू में तोल दिया। दो दिन पहले मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में राहुल ने कांग्रेस में आने वाले लोगों से बेहिचक कह दिया था। आरएसएस और सिमी की विचारधारा छोड़कर आने वालों को ही कांग्रेस में जगह मिलेगी। बुधवार को भोपाल में जब राहुल के बयान का मतलब पूछा गया तो राहुल ने कह दिया- आरएसएस और सिमी दोनों ही कट्टरवादी संगठन। वैचारिक कट्टरता की दृष्टि से इनमें कोई फर्क नहीं।...
image
बाबरी विध्वंस को फैसले से न जोड़े कांग्रेस
भाजपा ने कहा है कि अयोध्या में स्वामित्व मामले के फैसले को कांग्रेस बेवजह बाबरी मस्जिद ढांचा ढहाए जाने से जोड़ रही है जबकि वह अलग आपराधिक मामला है जिसकी कानूनी प्रक्रिया जारी है। पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने नई दिल्ली में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘जहां तक अभी के निर्णय का सवाल है तो उच्च न्यायासय ने कुछ दीवानी मामलों पर यह फैसला सुनाया है और इसका हम स्वागत करते हैं।‘‘ उन्होंने कहा कि ये दीवानी मामले कभी भी बाबरी मस्जिद ढहाए जाने से संबंधित नहीं थे। कांग्रेस दोनों मामलों को जोड़ने का प्रयास कर रही है, जिसका कोई तुक नहीं है।...
image
कांग्रेस के लिए कठिन साबित हो रहा है अयोध्या पर फैसला
अयोध्या पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ का फैसला कांग्रेस को न उगलते बन रहा न निगलते। मुलायम के बाद मा‌र्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी [माकपा] की तरफ से फैसले पर हुई राजनीति ने कांग्रेस की अल्पसंख्यक वोटों की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी इन दलों की तरह फैसले पर प्रतिक्रिया भी नहीं जता सकती। ऐसे में उसने अदालत के बाहर इस विवाद के निपटारे की पैरवी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील करके अपनी खाल बचाने की कोशिश की है। यही नहीं, 1992 में विवादित ढांचा गिराने के लिए भाजपा पर जोरदार हमला बोलकर उसने दूसरे दलों से लंबी लकीर खींचने की कोशिश भी की है।...
image
मुसलमानों ने कहा: माहौल बिगाड़ रहे हैं मुलायम
अयोध्या विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की टिप्पणी मुसलमानों और विशेष रूप से मुस्लिम धर्मगुरुओं को नागवार गुजरी है। अधिकांश मुस्लिम उलमा का कहना है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर किसी को भी ऐसी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए जो राजनीति से प्रेरित हो और जिससे माहौल बिगड़ने की आशंका हो।...
image
शिवराज के राज में राहुल राजकुमार
राजनीतिक अदावत अपनी जगह लेकिन राज्य का आतिथ्य सबसे ऊपर. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राहुल गांधी के मध्य प्रदेश में प्रस्तावित दौरे के दौरान उनके स्वागत सत्कार में कोई कमी नहीं रखना चाहते इसलिए उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है. ...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2