गंगा बचाने की राजनीति
गंगा की राजनीति फिर गर्म है । गंगा को बचाने और शुद्ध रखने की राजनीति ने कई सवाल खडे कर दिए हैं। गंगीय राजनीति के इस श्वर में उत्तरप्रदेश की मुख्यमन्त्री मायावती, भाजपा नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी, योग गुरु बाबा रामदेव और विहिप सुप्रीमो अशोक सिंघल पर सवाल उठाये जा रहे हैं। सवाल आस्था और नीयत पर है, इसलिए गंगा के प्रश्नों का फिलहाल कोई समाधान होता नहीं दिख रहा है।
18 सितम्बरको कानपुर में विहिप के वरदहस्त वाले गंगा रक्षा मंच के बैनर तले बाबा रामदेव ने गंगा के निर्मलीकरण का अभियान षुरु किया तो 20-21 सितम्बर को बनारस में संघ के ही कुछ दिग्गजों के प्रश्रय में षुरु किए गए गंगा महासभा ने गंगा मुक्ति महासंगम का आयोजन किया। कानपुर में बाबा रामदेव के साथ विहिप से जुडे तमाम साधु सन्त और अनेक धार्मिक संगठन के प्रतिनिधि थे तो बनारस में गंगा महासभा के साथ राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि और पानी और नदी का काम करने वाले जमीनी लोग। गंगा मुक्ति महासंगम में स्वदेशी विचारक के एन गोविंदाचार्य, सपा सांसद अमर सिंह, कांग्रेस के सांसद डॉ राजेश मिश्र और जमुई, बिहार के विधायक अभयं सिंह के साथ जमीनी काम करने वाले टिहरी बांध विरोधि माटू संगठन के विमल भाई, पंजाब में कालीबेइ नदीको पुनर्जीवित करने वाले संत सिंचेवाल के प्रतिनिधि, कोसी नदी के विशेषज्ञ दिनेश मिश्र, जल बिरादरी के अरविन्द कुशवाहा सहित लगभग 200 संगठनों के प्रतिनिधि जुटे।गंगा महासभा के केन्द्रीय मार्गदर्शक के एन गोविन्दाचार्य ने पत्रकारों के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि टिहरी बांध के सवाल पर डॉ मुरली मनोहर जोशी अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते। डॉ जोशी पर गोविन्दाचार्य के हमले
से राजनीति गर्म हो गई। कारण भी साफ है। डॉ जोशी बनारस से भाजपा के सम्भावित प्रत्याशी हैं। गोविन्दाचार्य जैसे नेता के सामने आने के बाद भाजपा के भीतर और बाहर जोशी विरोधी सक्रिय हो गए। ऐसे ही लोगों ने युवा गंगा भक्त सभा बनाकर 22 सितम्बर को भारत माता मन्दिर पर जोशी समिति के रिपोर्ट का सार्वजनिक दाह किया। सभा के अध्यक्ष नन्दकुमार कहते हैं कि किसी भी गंगा विरोधी व्यक्ति को बनारस से चुनाव जीत कर संसद में नहीं पहुंचने देंगे। भक्त सभा के पीछे भाजपा के ही विधायक अजय राय खडे दीखते हैं। राय भी बनारस संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशियों की कतार में थे। लेकिन डॉ जोशी की वजह से उनका पत्ता साफ हो गया। गोविन्दाचार्य ने जो कहा वह 17 जून को बाबा रामदेव के पतंजलि योग पीठ में गंगा रक्षा मंच के निर्माण के समय कहे गए की अगली लाइन है। वहां भी गोविन्दाचार्य ने नीयत पर सवाल खड़ा किया था। उन्होंने कहा था कि गंगा का कार्य करते हुए हमारा एकमात्र लक्ष्य गंगा की मुक्ति और शुद्धि होनी चाहिए। ऐसा न हो कि हम एक आंख से गंगा की ओर और दूसरी से दिल्ली की गद्दी की ओर देखें। उनका इशारा तब भी विहिप सुप्रीमो और योग गुरु की ओर था और अब भी है। यहां पर भी उन्होंने नीयत पर ही प्रश्न खडा किया। हां इतना जरूर हुआ कि पत्रकारों के पूछने पर उन्होंने टिहरी बांध के सवाल पर डॉ जोशी को भी जिम्मेदार माना।
इस पूरे जलसे में सपा सांसद अमर सिंह का आना चौंकानेवाला था. लेकिन वे यहां गंगा मुक्ति महासंगम में आते हैं और गंगा एक्सप्रसवे के मुद्दे पर मुख्यमन्त्री मायावती की जमकर आलोचना करते हैं. असल में अमर सिंह को कोई भी मौका चाहिए जिससे वे मायावती पर हमला बोल सकें. एक्सप्रेस वे के बहाने अमर सिंह मायावती पर हमलावर तो थे ही उन्होंने कांग्रेस को भी आडे हाथों लिया। उन्होंने मायावती को किसान विरोधी और किसानों के मुंह का निवाला छिनने वाला बताया तो केन्द्र सरकार को भी दोषी माना। राज्यपाल को घसीटते हुए उन्होंने कहा कि चार साल तक सपा सरकार के खिलाफ रिपोर्ट बनाने वाले राज्यपाल को बसपा सरकार की करतूतें नहीं दिखाई दे रहीं हैं। उन्होंने पूछा कि क्या यह जिम्मेदारी राज्यपाल की नहीं है कि किसानों की जमीन एक उद्योगपति को किस तरह दी जा रही है इसकी जांच कराएं? और रिपोर्ट केन्द्र सरकार को भेजें। महासभा के लोगों से सपा सांसद ने वादा किया कि एक्सप्रेस वे से गंगा को बचाने के लिए जरूरत पडी तो केन्द्र से समर्थन वापस भी ले लेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार ने हमारी मांगो पर ठीक से विचार नहीं किया तो केन्द्रीय पर्यावरण विभाग के बाहर धरना दिया जाएगा।
गंगा महासभा का गंगा मुक्ति महासंगम सफल माना जा रहा है। महासभा के राष्ट्रीय महामन्त्री आचार्य जितेन्द्र कहते हैं कि हमारी कोशिश थी कि गोमुख से गंगासागर तक जमीनी काम करने वाले व्यक्तियों व संगठनों को संगम में बुलाया जाए। गंगा के किनारे के सभी जन प्रतिनिधियों को भी बुलाया जाए। लोग आए और अब हम आगे इस लडाई को और तेज करेंगे। जिस तरह गंगा कानपुर में पूरी तरह मलिन होकर प्रयाग होते हुए बनारस पहुंचती हैं उसी तरह गंगा की राजनीति भी कानपुरी कचरे की तरह बनारस पहुंची। गंगा बचेंगी और शुद्ध रहेंगी कि नही? यह तो राजनीति के गर्भ में है। लेकिन गंगा की राजनीति के कुछ नए झण्डाबरदार खडे हो गए हैं जो अमर सिंह जैसे लोगों को साथ में लेकर गंगा बचाने का सपना पाल रहे हैं वह भी तब जब पुराने गंगा महारथियों की पोल खुलने लगी है। [rupeshpandey1973@gmail.com]
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Digg
Patrakarita ek Sadhana hai jo jeevan me samaj ki pratyaksha sewa karke ke oon ke hriday ki bhavanao ko aatmsat kar shabdo me prawahit hoti hai..! Is lekha se ye to sidha hota hai ki aap ne pratyaksha ganga ji ke is vibhits swarup ko nahi dekha hai . Ganga ke liye jab tak aap swayam kuchha nahi karenge tab tak aap ke lekhani ke prawah me yathartha ewam satyata ka aabhaw rahega . aap sach me agar samaj ko koi vaicharik chintan dena chate hai to aapni jado ki taraf dekhe aaor hindu sangathano aur Ramdev ji aur Ma. Singhal ji Jaise Santo par prashna chinaha lagana choda dijiye..
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