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धर्म के धंधें में मासूमों की बलि

image धर्म के धंधे में बुरे फंसे

आशाराम के आश्रमों में हो रही मासूमों की हत्या के तह में आप जाएंगे तो पायेंगे यहां भी कारण संपत्ति है. पूरी मानवता को मायामोह से मुक्ति का रास्ता बतानेवाले आशाराम खुद संपत्तिभोगी हैं. धर्म के धंधे में जितना माल कमाया तो उस माल को धीरे-धीरे व्यापार की शक्ल दे दिया. लेकिन उन्हें शायद यह नहीं मालूम था कि धर्म के नाम पर जो संपत्ति वे इकट्ठा कर रहे हैं एक दिन वही संपत्ति उन्हें ले डूबेगी.

आशाराम के पास अकूत संपत्ति है. हर शहर में जमीन जायजाद पर कानूनी गैर-काननी कब्जे हैं तो आश्रम भी कारखाने की तरह काम करता है. आयुर्वेद और जड़ी-बूटी के नाम पर मंजन पाउडर से लेकर दवाईयां तक सबकुछ बनाया और बेचा जाता है. इसमें न जाने कितना काला सफेद धन लगा हुआ है इसका किसी के पास कोई हिसाब नहीं है. लेकिन अब आशाराम की उम्र का चौथा पड़ाव है. सब जानते हैं कि अब उनके जीवन का वह दौर आ रहा है जहां वसीयत की जरूरत होती है. यहां से आश्रम में दो धड़े हो जाते हैं. एक धड़ा आशाराम के साथ है तो दूसरा धड़ा नारायण के साथ. ये नारायण कोई और नहीं आशाराम के बेटे हैं और आशाराम के स्वाभाविक उत्तराधिकारी होने का दावा करते हैं.

सूत्रों का कहना है कि नारायण भाई जो धर्म के धंधे में खुद भी शामिल हैं इस अकूत संपत्ति पर अपना दावा कमजोर नहीं होने देना चाहते. इसके लिए अंदर ही अंदर एक युद्ध चल रहा है. आश्रमों में जिन चार मासूमों की हत्याएं हुई हैं उनका आप विश्लेषण करेंगे तो तस्वीर और साफ हो जाती है. अथर्व की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहरीले तेल का अंश मिला है. यह जहरीला तेल कहां से आया और अथर्व को क्यों पिलाया गया? डाक्टरों ने आश्रम स्थित क्लिनिक की जांच की और "नीम" नाम के एक तेल को जहरीला पाया. यह वही तेल है जो अथर्व की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज है. अथर्व के माता-पिता आशाराम से मिलना चाहते थे. आशाराम उनसे नहीं मिले. 

वेदान्त की पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है कि उसकी पीठ पर दांत और नाखून के निशान है. कुछ और पैथालाजिकल टेस्ट हो रहे हैं इसलिए यह साफ नहीं हो पाया है कि उस बच्चे के साथ यौन दुराचार हुआ था या नहीं लेकिन आईजी एस के राऊत का कहना है कि वे नतीजे पर पहुंच चुके हैं और एक दो दिनों में ही वे उन दो नामों का खुलासा कर देंगे जो इन बच्चों के मौत के जिम्मेदार हैं. डीआईजी जबलपुर भी कुछ इसी तरह का दावा कर रहे हैं. छिंदवाड़ा आश्रम सील किया जा चुका है. कहते हैं दो लोगों को हिरासत में लिया गया है और वे दोनों मनोरोगी हैं. जिन दो लोगों को हिरासत में लिया गया है वे हैं ओमप्रकाश प्रजापति और मनोहर जायसवाल. दोनों से पूछताछ हो रही है एक दो और रिपोर्ट आने के बाद पुलिस पक्के तौर पर कुछ कहने की स्थिति में होगी.

बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम का सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह रहा कि मामूली सी घटना को जैम-बटर लगा कर पल-पल जनता को दिखा कर झकझोर करने वाला लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया दो दिन तक तो हाउं-हाउं करता रहा फिर अचानक इस घटना से मुंह फेर कर कोमा में चला गया। जनता का अंतर्मन हिल गया। आखिर बापू आसाराम से क्या भूल हो गयी जो समूचा टीवी मीडिया खामोश हो गया या नाराज हो गया कि जा बापू अब हम तेरा एक भी फूटेज दर्शकों को नहीं दिखाएंगे और हद तो तब हो गयी जब अचानक बापू टीवी पर रोते नजर आये तो मीडिया के किसी एंकर ने बापू से यह भी पूछा कि सार्वजनिक रूप से टीवी पर देश के सामने रोते हुए आप कैसा महसूस कर रहे हैं। क्या ये इतने बड़े संत का अपमान नहीं है? और इससे यह शंका बलवती हो गयी कि समूचे मीडिया ने बापू से दीक्षा ले कर समूचे झकझोर कर देने वाले प्रकरण से कन्नी काट ली जैसे कोई खास बात नहीं यह तो चलता है। आखिर जनता को सारे घटनाक्रम की सच्चाई जानने का पूरा हक है।

वो कहा से जानेगा लगता है टीवी मीडिया ने भी अपना सेंडिकेट बना लिया है। दिखावे में बाहर से भले एक दूसरे के प्रतिद्वदीं हों पर भीतर से सब एक हो गये हैं। इसका एक और ताजा उदाहरण है संसद में 22 जुलाई को हुए हंगामें की हकीकत की सीडी उसका निर्माता चैनल लोकसभा स्पीकर को सौंप देता है। तब दूसरे सभी चैनल वाले उस सीडी की हकीकत कुरेदने की बजाय लामबंद हो खामोश हो जाते हैं। क्या इन बातों से मीडिया आप जनता की नजरों में अपनी विश्वसनीयता नहीं खो बैठेगा? इधर-उधर से झन कर आ रहे धुंए से अटकलों का बाजार गर्म है। (हालांकि धुआं आग लगने पर ही उठता है।) कि बापू आशाराम की मुसीबतें यूं ही अचानक नहीं खड़ी हो गयी वरन एक सोची समझी पूर्व रणनीति के तहत उनका तख्तों ताज हिलाया गया है और अंदर के सूत्रों की बात माने तो बापू आसाराम के अपने ही लोगों का इसमें हाथ है और यह बड़ा हृदय विदारक है जिसके लिए चार मासूमों की जिन्दगी से खेला गया।

उन मासूमों को इन मुस्कराते मुंह में राम राम करते कुटिल लोगों के इरादों का भान तक नहीं हुआ और ये सब हुआ बापू आसाराम द्वारा अपने प्रवचनों व खरीदी गई अकूत संपत्ति मंजन से लेकर पापड़, चटनी, अचार, आयुर्वेदिक दवाइयां, धार्मिक पुस्तकें, प्रवचनों की कैसेटें व गुरूकुलों से कमाई बेताहासा दौलत उसके उत्तराधिकार की लड़ाई, बापू के प्यादों चव्वनी अठन्नी का खेल है। जिसकी हकीकत भी सामने आ जाएगी। आज बापू के संस्थानों से उनकी आमदनी किसी भी कार्पोरेट घराने से बढ़कर है। कार्पोरेट को तो तमाम तरह के टैक्सों का चुकारा करना पड़ता है। पर बापू आसाराम को धर्म के नाम पर सबकुछ फ्री पड़ता है। उन्हें कोई टैक्स नहीं देना पड़ता। तभी तो बापू हर जगह हर पंडाल में नाच गाकर हर समय जय राम जी की बोलना पड़ेगा कहते हैं। लेकिन विधि का विधान एकदम निष्पक्ष है उसके यहां देर है पर अंधेर नहीं। लेकिन अब बापू के तबेले में पलीता लग चुका है उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। दुनिया को ज्ञान बांटने वाला आज खुद अंधेरे में फूट-फूट कर रो रहा है.

(टीके मारवाह इंदौर से निकलनेवाले कालसूत्र साप्ताहिक के संपादक हैं. tkmqxy@gmail.com)

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MP Sinha on 03 August, 2008 20:40;35
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why we are commenting on Bapy jee's asharam, yes there might be problem but these types of problem exists with every religios institution, why we are giving so much importance to thses issues, when we know that police will not do any thing to solve the case. the biggest example is double murder mystry of Noida. First police then CBI they give clen chit to Dr Talwar but at the end say that what ever evidence they have got in the caseis through narco analysis which donot have any value in court. i will request your esteemed paper to go with the case till very end. Further, why we donot get any news on schools run by Wakf Board or Christanity institution.
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आलोक तोमर on 03 August, 2008 21:10;55
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MR. SINHA DONK MAKE IT A HINDU ISSUE AND DO NOT, PLEASE PRESUME TOO MUCH. ASARAM IS JUST A SUCCESSFUL PERFORMING ARTIST, LIKE, SAY RAJU SHRIVASTAV OR ANNU KAPPOR.
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shalabh bhadoria on 04 August, 2008 00:19;42
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alok ji,had ho gai,aap sai yah ummid nahin thi.tumahari comment par itna hi kah paraha hun.armbhik lekh mai jo kisi saptahik sai liya hai usme thode sudhae ki jarurat hai mp mai sk rauat dgp hain igp jabalpur nahin.aur jin do logon ko hirasat mai liya hai ve mano rogi nahin hai.aur un par ger iradtan hatya ka prakaran hai.achha hota kisi dusare sors ko bhi chulete.antim jankar ya akhri saty ham hi nahin bolte dosre bhi hain jo saty bolte hain,bus ab aur kya kahun?alok pls.koshish karna ab kisi ki bhavna ko desh na pahun che,har vyakti apne vishvas par jeeta hai.chahe vah dusaron k liye galat hi kyon na ho, kher aap khud samajhdar ho.thanx. shalabh bhadoria
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j on 04 August, 2008 01:12;16
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dosto,janch to ho hi rahi hai sach samne aa hi jayega.marwah ki is bat me dam hai ki sampatti ko lekar jhagde hote hai.santo ke sthan pr jab mahant virajte hai to yeh her jagah hota hai.lekin yeh bhi sochne aur janchne wali bat hai ki bapuke yahan do deaths hoti hai to dhoo dhoo kar ahamdabad jalne lagta hai jab ki serial blast me alag alag karke 50 se jyada bhartiya nagrik mare jate hai aur in sangthano me se kisi ko koi gussa nahi aata.kya sari bahaduri kewal ahinsa ke samrthako aur palko ke khilf hi dikhai ja sakti hai?marwah ji ne ek aur gambhir mudda uthaya hai ki ander se sab ek hai kyunki cd ke mamle per sab chuppi sadhe hai.fir bhi hame viswas hai ki kai bharat mata ke lal abhi bache hai jinhe kharida nahi ja sakta aur be waktvya v satya ko khoj kar napi tuli bhasa me hi denge.
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bharat sagar on 04 August, 2008 05:48;17
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Sri Marwah bilkul theek hain , Alok ji ka Asharam ki tulna Raju Srivastava se karna bara hi sateek laga.
Is tulna ke liye dhanyavad.
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विष्‍णु बैरागी on 04 August, 2008 22:16;35
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आसारामजी और नारायण सांई में मतभेद की बात पहली बार सामने आई है । मुमकिन है, यह सच हो लेकिन मुझे इस पर सन्‍देह है । आसारामजी का रतलाम आना-जाना बना रहता है और नारायण सांई भी आते रहते हैं । देखा गया है कि जहां आसारामजी नहीं पहुंच पाते हैं वहां नारायण सांई को भेजा जाता है । मुझे लगता है कि बाप-बेटे में विवाद वाली बात केवल नमक-मिर्ची की तरह वापरी गई है ताकि मामला चटखारेदार हो सके ।
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rajkumar on 04 September, 2008 00:59;23
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jas karani tas bhoghu data.
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