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चर्च पर हमलाः शक का हक बनता है

image मंगलौर में पुलिस द्वारा एक प्रदर्शनकारी पर हमला

मंगलौर सहित पूरे दक्षिण कर्नाटक में चर्च पर हुए हमले बहुत सारे सवाल पैदा करते हैं. हिन्दू चरमपंथी इन हमलों के लिए जिम्मेदार हैं. इन सवालों को देखने के बाद भी क्या हम चर्च पर हुए हमलों को जायज ठहरा सकते हैं? मेरे सामने ऐसे 12 कारण और सवाल हैं जो मुझे हिन्दू चरमपंथियों पर शक का हक देते हैं.

1. कर्नाटक के भाजपाई मुख्यमंत्री बीएस येदुयेरप्पा कहते हैं कि चर्च पर हमला धर्मांतरण की प्रतिक्रियास्वरूप हुआ है. लेकिन क्या इस बात से इंकार किया जा सकता है कि भाजपा ने जैसे ही कंधमाल में ईसाई चर्चों पर हमले को जायज हठराया उससे बल पाकर हिन्दू चरमपंथी पूरे दक्षिण कर्नाटक में उपद्रव पर उतारू हो गये?

2. जिस न्यू लाईफ फेलोशिप के ऊपर आपत्तिजनक सामग्री वितरण का आरोप लग रहा है वह हिन्दुओं, मुसलमानों यहां तक कि ईसाईयों के भी खिलाफ दशकों से अपना प्रचार अभियान चला रहा है. लेकिन हमला उन कैथोलिक इसाईयों पर किया गया जिनका कि न्यू लाईफ फेलोशिप से कुछ लेना-देना नहीं है. और आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि हमले में उन कैथोलिक ईसाई नन्स को निशाना बनाया गया है जो कि अपने दायरे से बाहर कभी निकलती ही नहीं. इसलिए इस तर्क में कोई खास दम नजर नहीं आता कि ये सारे लोग धर्मांतरण के ही काम में लगे हुए हैं. लेकिन हमले में गिरिजाघरों के पवित्र स्थानों को तहस-नहस किया गया, सेंट फ्रांसिस और सेंट जोसेफ की मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया. खबर है कि हमलावरों ने मदर मेरी की मूर्तियों को भी तोड़ने की कोशिश की लेकिन संयोग से मदर मेरी की मूर्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है. क्या यह सब धर्मांतरण रोकने के लिए किया गया?

3. कैथोलिक संस्थानों के सामने पिछले कई दिनों से हिन्दू चरमपंथियों द्वारा ईसाईयों और कैथोलिकों के खिलाफ हैंडबिल, पम्पलेट और दूसरी सामग्री बांटी जा रही थी. ये लोग किसी और पर यह आरोप कैसे लगा सकते हैं जबकि वे खुद वही काम कर रहे हैं.

4. क्या इस पूरे अभियान को सरकार का समर्थन प्राप्त है? यहां एक अंग्रेजी अखबार कहता है कि एक पुलिसवाले ने उनके प्रतिनिधि से बात करते हुए माना कि उनके हाथ बंधे हुए है.

5. इस तरह की भी खबरें आ रही हैं कि पुलिस खुद ही अपनी गाड़ियों को तोड़ रही है, जिससे कैथोलिकों पर लाठीचार्ज और आंसूगैस छोड़ने का मौका मिल सके. कई दफा शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे कैथोलिकों पर पुलिस ने जानबूझ कर हमला बोला है.

6. खबर यह भी है कि पुलिस जबरी पेरमन्नूर चर्च के अंदर जा घुसी और वहां से लोगों को बाहर जाने के लिए कहा. जब अनुयायियों ने ऐसा करने से मना कर दिया तो पुलिस ने उनके साथ जोर-जबर्दस्ती की जिनमें औरतों और बच्चों पर भी जुल्म शामिल है.

7. ऐसे हालात में भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री यही कह रहे हैं कि कर्नाटक में जबर्दस्ती धर्मांतरण रूकना चाहिए जबकि आज तक वे कैथोलिक समाज द्वारा एक भी जबर्दस्ती धर्मांतरण को प्रमाणित नहीं कर पाये हैं. यहां यह भी जान लीजिए कि चर्च हुए हमलों की जांच करने की बजाय मुख्यमंत्री जो जांच का आदेश दिया है वह है कि चर्च को मिलनेवाले विदेशी पैसे का स्रोत क्या-क्या है?

8. कर्नाटक के कैथोलिक चर्च पर हुए हमलों के बारे में कर्नाटक सरकार कह रही है कि केवल न्यूलाईफ फेलोशिप के प्रेयर हाल को ही हमलावरों ने निशाना बनाया है. यह सिर्फ मीडिया को भ्रम में डालने की कर्नाटक सरकार की चाल है. मुख्यमंत्री खुद यहां आये थे और उन्होंने अपनी आंख से देखा था कि कैसे कैथोलिक चर्चों को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया है. 

9. चरमपंथी संगठन सीधे तौर पर हमलों की जिम्मेदारी ले रहे हैं. यहां के दैनिक अखबारों में प्रमुखता से ऐसी खबरे छप रही हैं. लेकिन यहां के स्थानीय भाजपा विधायक कृष्ण पालीमार कह रहे हैं कि उन्हे इसके बारे में कुछ पता नहीं है. तो क्या कर्नाटक सरकार यह साबित करना चाहती है कि न्यू लाईफ फेलोशिप के प्रार्थना हालों पर जो हमले हुए हैं वही हिन्दू चरमपंथियों ने किये हैं बाकी के हमलों के लिए कोई और जिम्मेदार है?

10. कर्नाटक के मुख्यमंत्री और यहां के कलेक्टर दोनों ने कहा था कि आज (16 सितंबर) को किसी भी संस्था द्वारा बंद को इजाजत नहीं दी जाएगी. लेकिन आज यहां सभी स्कूल, संस्थान बंद रहे. क्या मुख्यमंत्री और डीसी बताएंगे कि ऐसा क्यों हुआ?

11. बड़ा सवाल यह है कि इतना सब होने के बावजूद अभी तक मुख्यमंत्री ने चरमपंथी हिन्दू संगठनों के इस कृत्य की निंदा भी नहीं की है. अगर यह मान भी लें कि न्यू लाईफ फेलोशिप ने आपत्तिजनक सामग्री वितरित की जिससे हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची तो क्या और सारे रास्ते बंद हो गये थे जो उन्होंने हिंसा का यह रास्ता चुना? उन्होंने कानून को अपने हाथ में क्यों लिया? सरकार ने प्रमोद मुताईक के खिलाफ अभी तक कोई एक्शन क्यों नहीं लिया जो कि खुलेआम कह रहे हैं कि आतंकवाद से निपटने के लिए एक सेना का गठन किया गया है जिसमें अब तक सात सौ लोगों की भर्ती की जा चुकी है. आगे यह संख्या बढ़ाकर सालभर में पांच हजार करने की योजना है. क्या ऐसी निजी सेनाओं के गठन के बाद कानून व्यवस्था सरकार के हाथ में रह पायेगी?

12. इन सब बातों को जानने के बाद क्या इस बात का शक नहीं होता कि दक्षिण कर्नाटक में शांतिप्रिय इसाईयों पर जो हमले हो रहे हैं वह एक दक्षिणपंथी पार्टी की सोची समझी रणनीति है?

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sangita puri on 17 September, 2008 20:29;51
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यदि ऐसा हो रहा है , तो वास्तव में बहुत ही गलत हो रहा है।
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अफ़लातून on 17 September, 2008 21:00;20
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सवालों से सूचनाएं भी मिलीं । जवाब देने की स्थिति में कोई है ? विस्फोट के प्रति आभार ।
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suresh chiplunkar on 17 September, 2008 22:17;37
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"शांतिप्रिय ईसाइयों" पर(???), "पुलिस वाले खुद ही अपनी गाड़ियां फ़ोड़ रहे हैं"(?) हाल में यह कुछ ज्यादा ही चल रहा है, पुलिस वाले खुद ही गाड़ियां फ़ोड़ रहे हैं, बजरंग दल वाले खुद ही हिन्दुओं के इलाके में बम फ़ोड़ रहे हैं, भाजपा वाले खुद ही आतंकवाद फ़ैला रहे हैं… ब्ला-ब्ला-ब्ला-ब्ला-ब्ला भाजपा, संघ, विहिप के अलावा जो भी अन्य धर्मों के लोग हैं सभी सद्भाव की प्रतिमूर्ति हैं, दूध के धुले हैं, सच्चाई के अवतार हैं, सिर्फ़ भाजपा वाले पागल हो गये हैं… यही कहना चाहते हैं शायद सभी सेकुलर मिलकर… धर्मान्तरण झूठ है, मुस्लिम आतंकवाद गलत है, बांग्लादेश से घुसपैठ मात्र प्रचार है… आदि-आदि… सेकुलर लोग कितना ही प्रचार कर लें, संघ वाले भी उनका मुकाबला जोरदार तरीके से करेंगे… भले ही अभी मीडिया संघ के साथ नहीं हो, लेकिन कभी न कभी उनको भी अकल आयेगी और वे भी मानेंगे कि भाजपा जो कहती है उसमें काफ़ी सच्चाई है, और यह बात कश्मीर में साबित हो चुकी है…
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umeshawa on 18 September, 2008 02:08;48
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इस दुनिया मे चार प्रकार के आतंकवाद है। पहला और सबसे ताकतवर है हरा आतंकवाद जो बाघ की तरह है। दुसरा लाल आतंकवाद जो एक दलाल की तरह है। तिसरा सफेद आतंकवाद जो दिमक की तरह है। चौथा है केसरीया आतंकवाद जो खरगोस की तरह है। सबसे खतरनाक वह सफेद आतंकवाद है जो दिखाई न देते हुए भी दिमक की तरह सारे घर को चाट कर खोखला कर देता है। धर्मानंतरण और राष्ट्रानतरण मे कोई फरक नही है।
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संजय बेंगाणी on 18 September, 2008 11:08;01
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"शांतिप्रिय ईसाई" यह थोड़ा अटपटा लगा.


खैर. मेरा सदा से मानना है कि हिन्दु संगठनो को ईसाईयों से बहुत कुछ सीखना चाहिए. बीना हिंसक मार्ग के अपने लक्ष्य प्राप्त करना, चुपचाप. भारत को अन्दर ही अन्दर मारा जा रहा है, मगर रोकथाम के "अंहिसक तरीके" हिन्दु संगठन सीखे, ऐसी कामना है.
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parshuram on 18 September, 2008 16:13;54
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i think "Visfot" has been taken over by the seculerist. And these are attacking on hindus. Rightly said by "suresh chiplunkar" Ji that if every thing is done by hindu in hindustan for hindus then no need to say any thing. "Last Ulta chor kotwal ko datan"
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pankaj on 18 September, 2008 18:41;30
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hindus arn't doing anything wrong,but they should not adopt violent methods.
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y on 19 September, 2008 01:12;11
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mr Vikas
aap cylinder khol kar gas ghar m bhare aur bijli ka khatka dabane bale ko dosi batayen . yeh kaun sa insaf hai mere bhai.
kya sach bolna gunah hai jo aap yedurappa ko kath ghare me khada karne ki kosis kar rahe hai.
pandey ji aap to hindu ghar mai paida hue hain. kya aap aapne mitro sahkarmio me se ek bhi nam aaisa bata sakte hai jisne dharma ke nam per kabhi kisi pr aakraman kiya ho.
aachchha hoga aap kandhmal ka daura kar aayen.
aapne jaise aarop lagaye hain , kash aaisa hindu kar pate to aap yeh kahne ki himmat hi nahi juta pate.
jara terrorism ke master minds ke khilf likhne ki himmat bhi jutaieye
subh kamnaye
hinduo pandey ji se kuchh sikho
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Chandan on 20 September, 2008 13:04;27
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Jhooti Khabar Hai Saram Karo Kuch Apne Aap.

Yese Article Likhne Balo par Thooo Hai
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image विकास पाण्डेय इलाहाबाद में अध्ययन के दौरान ही अख़बारो मे लिखना शुरू किया. इसके बाद टाईम्स आफ इंडिया में रहे. वर्तमान में न्यूज़ एजेन्सी द प्रेस एसोसिएशन में मंगलूर में कार्यरत. आप उन्हें सीधे संपर्क कर सकते हैं- vikasatiijnm@gmail.com
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