Home | बड़ी खबर | धरती की लाश पर कोसी सवार

धरती की लाश पर कोसी सवार

image

कोसी के कहर को भोपाल गैस कांड या हिरोशिमा-नागासाकी जैसी आपदा कहना थोड़ी जल्दीबाजी है और अतिरंजना भी, पर यह हादसा कोसी को ´बिहार का शोक´ ठहराकर उसे बांधने की दिशा में हुए कामों का परिणाम है, इसमें कोई संदेह नहीं। कोसी ने अभी उस बराज को ध्वस्त नहीं किया है जो उसकी धारा को लंबवत रोकती है या फिर उस प्रस्तावित हाईडैम को नहीं तोड़ा जिसे बनाने की तैयारी में पचास साल पहले बराज व तटबंधों के संजाल खड़ा किए गए थे। नदी ने बस एक हल्की करवट ली है और बराज के उपर नदी के किनारे बने पूर्वी नियंत्रण बांध में आई दरार लगातार चौड़ी होती चली गई है।

इतने में ही समूचा सरकारी और गैर-सरकारी इंतजाम ध्वस्त हो गया। सारी सामाजिक व्यवस्थाएं चरमरा गईं। इस घटना को नमूना मानकर टिहरी बांध या कोसी के बराह क्षेत्र में पचास साल से प्रस्तावित बड़ा बांध से जुड़े खतरे को समझ सकते हैं। यह प्राकृतिक आपदा नहीं है और न ही अचानक आई ऐसी विपत्ति जिसका अनुमान नहीं लगाया जा सका हो। जिस स्थान पर नियंत्रण बांध टूटा है, बराज के उपर बारहवें किलोमीटर पर उस जगह 1987 से ही पानी का दबाव बना रहा है। ठोकर (स्पर)बनाकर धारा को दूर ठेलकर रखने की कवायद तभी से चलती रही है। इसबार उस ठोकर की मरम्मत करने में लापरवाही भी हुई। (बराज के उपर अभयारण्य होने से आवागमन ऐसे भी सरल नहीं होता) लेकिन बताते हैं कि मरम्मत करने गए इंजीनियरों को नेपाली गांवों के स्थानीय लोगों ने भगा दिया। स्थानीय मजदूरों ने अनाप-शनाप मजदूरी की मांगकर अचानक काम बंद कर दिया। नेपाल सरकार पर सुरक्षा मुहैया नहीं कराने के आरोप लगाए जा रहे है। काठमांडू बराह क्षेत्र में बड़ा बांध बनाने के पक्ष में माहौल बनाने के लिए काठमांडू में तैनात बिहार सरकार के अधिकारी अवकाष पर थे, इसलिए यह मामला भारतीय दूतावास के जरीए नेपाल सरकार के ध्यान में नहीं लाया जा सका और नेपाल में नई सरकार के गठन की राजनीतिक जोड़तोड़ की व्यस्तता में शायद इस ओर ध्यान देना संभव भी नहीं था।

नियंत्रण बांध के टूटने के इतने सारे कारण बता दिए गए हैं, जिसमें कोसी की धारा में बराज के उपर सिल्ट की मोटी परत जम जाने से धारा की चौड़ाई बढ़ने की प्राकृतिक वास्तविकता को छिपाया जा रहा है। यह आंकड़ा जरूर मिला है कि अभी तटबंध टूटने से बनी नई धारा में करीब सवा लाख क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा है जबकि बराज वाली पुरानी धारा में मुश्किल से 24 हजार क्यूसेक पानी जा रहा है। प्रवाह में पांच गुना फर्क इसलिए है क्योंकि तटबंध के बाहर की धरती बराज वाली धारा की धरती से काफी ऊंची हो गई है। इसे समझाने के लिए किसी इंजीनियरिंग ज्ञान की जरूरत नहीं कि पानी सदा गहराई की ओर ही प्रवाहित होगा। उसे जबरन ऊंचाई की ओर बहाना अप्राकृतिक, कष्टसाध्य और हानिकारक प्रमाणित होना है। कोसी तटबंधों के भीतर फंसे 380 गांव और उसके सटे बाहर के अनगिनत गांव इसे झेलते रहें हैं। लेकिन इन सारी बातों का समय यह नहीं है। यह समय उन लोगों के लिए मातम मनाने का भी नहीं है जिनकी जानें चली गई हैं, बल्कि उन मनुष्यों और पशुओं की जान बचाने में सहायक होने का है जो नदी के करवट फेरने और विदेषी चाल-चलन के अभ्यस्त होने से घोर विपत्ति में फंसे हैं और प्रषासनिक निकम्मेपन, भ्रष्टाचार व गैर जिम्मेवार राजनेताओं के दांवपेंच को झेलने के लिए अभिशप्त हो गए हैं।

vishesh01.jpg

अफसोस तो इसका है कि देश के कुछ प्रमुख समाचार माध्यमों में समय की नजाकत की पूरी अनदेखी कर नियंत्रण बांध की मरम्मत करने और धारा को फिर पुरानी राह बहाने की चर्चा छेड़ दी गई है। इसके लिए हेलिकॉप्टरों से सिमेंट की सिल्लियां डालने और लोहे की जाली से उन्हें बांधने के पुख्ता इंतजाम करने के रोमांचक सपने परोसे जा रहे है। बाढ़ में फंसे अपने रिपोर्टरों की आपबीती छापने की मजबूरी के बावजूद इन अखबारों में अभी तक यह खबर नहीं आई कि सरकार अभी तक इस प्रलय से बचाए गए लोगों को आश्रय देने के लिए तीन मेगा शिविर बनाने की बात ही कर रही है। दो सप्ताह गुजर गए हैं और 2530 लाख लोगों के इस प्रलय के प्रकोप में पड़े होने का आंकड़ा सामने है। अभी डेढ़-दो लाख लोगों को बचाकर सुरक्षित जगहों पर ले जाना शेष है। जिन पांच लाख लोगों को बचाने का दावा किया जा रहा है, उन्हें कैसी जगहों पर किन इंतजामों के साथ रखा गया है। इसका उत्तर किसी से मांगने की जरूरत नहीं क्योंकि महज दो-पौने दो सौ राहत शिविर खोलने का आंकड़ा सामने है और जिन्हें बिहार सरकार के कामकाज का थोड़ा ज्ञान है उनके सामने यह साफ है कि शिविरों का यह आंकड़ा उन जगहों के बारे में है जहां बैठकर सरकारी अधिकारी व कर्मचारी राहत सामग्री का बंटवारा करते हैं। बचाव कार्यों की हकीकत भी यही है कि आपदाग्रस्त क्षेत्र में संचालित नावों का आंकड़ा डेढ़ हजार को पार नहीं कर पाया है। इसमें सेना, राज्य सरकार और गैर सरकारी स्तर पर संचालित सभी नावें शामिल हैं। हेलिकॉप्टरों की संख्या जरूर दो से बढ़ते-बढ़ते पंद्रह पहुंच गई है। लेकिन कोसी क्षेत्र में आज भी सबेरे कोहरा छाया रहता है और दोपहर बाद धूल भरी आंधिया चलती हैं। हेलिकॉपटर की कौन कहे, नावें भी शाम में जल्दी ही बंद हो जाती हैं। स्थानीय नाविक भले मौसम से संघर्ष करने के अभ्यस्त होते हैं, पर सेना के जवान इसका साहस नहीं कर सकते। और स्थानीय लोगों के देशी ज्ञान को बराज व तटबंधो ने कोसी को बांधने के साथ ही निर्वासन दे दिया था। फिर भी हठी कोसी की तरह उसके बालू में जितने हठी लोग बचे रह गए हैं, उनके अथक प्रयास ही काम आ रहें हैं। सर्वषक्तिमान सरकार और बड़बोले गैर-सरकारी प्रयास तामझाम के इंतजाम पड़े रह गये हैं। कहने की जरूरत नहीं कि महज एक तटबंध टूटने से समूची सरकार असहाय हो गई है और उसके नियंता भयभीत शिकारी की तरह असहाय लोगों का हक मारने में बर्बरता के साथ जुट गए हैं।

राहत और बचाव कार्यों की हकीकत बताने कथाकार गौरीनाथ अपनी जान बचाकर दिल्ली आ गए हैं। जिलाधिकारी से लेकर अंचलाधिकारी तक नावों की व्यवस्था के लिए दौड़ लगा चुके गौरीनाथ के पास आफत में पड़े लोगों को बचाने के बदले धन वसूली में लगे जवानों और दबंगों की कथाएं हैं। अर्थात जितनी नावें पहुंची है, दबंगो के कब्जे में है और लूटपाट तथा वर्षों में एकत्र कमाई का आखिरी कतरा भी गंवाने की मजबूरी उत्पन्न कर रही हैं। कोसी के दूसरे तट पर स्थित फूलपरास के लोगों ने एक नाव लेकर पीड़ित क्षेत्र में पहुंचने का साहस दिखाया, तो राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री नीतिष मिश्र की ओर से फोन करके उनपर यह दबाव डाला गया कि उनके गांव बलुआ बाजार में फंसे अमुक-अमुक लोगों को पहले बचाया जाए। वह व्यक्ति उन स्वयं सेवकों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है जो सरकारी हैसियत के व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए बदनाम बिहारी सत्ताधीशों के ऐसे खानदान से आता है जिसकी सारी संपन्नता कोषी को बांधने की महायोजना से निकलकर आई है। वह प्रक्रिया जारी है। इस बलूआ बाजार में अगर खाद्य पदार्थों के तीन सौ पैंसठ पैकट गिराए गए तो पड़ोस के गांवों को पैंसठ भी शायद ही नसीब हो पाए है।

इस हादसे की सीख को स्वीकार करते हुए सरकारी कामकाज के तौर तरीकों में कुछ बुनियादी बदलाव करने होंगे। विज्ञान का अवैज्ञानिक प्रयोग कर महज कुछ लोगों के हाथों में सारे संसाधन समेट देने की बेवकूफी को छोड़कर प्रकृति के स्वभाव को समझने, समाज के ज्ञान को बढ़ाने और संघर्ष क्षमता को शक्तिषाली बनाने के इंतजाम करने होंगे। कोषी की जिन बाइस धाराओं को अवरूद्ध कर एक धारा में प्रवाहित करने की कोशिश नाकाम हो गई है, उन सभी धाराओं को जीवित और विकसित करते हुए जनजीवन की स्वाभाविकता को पुर्नस्थापित करने के विकल्प पर सोचना होगा। यह सारा काम इन 25 या 30 लाख लोगों के पुर्नवास के साथ-साथ होना है। एक अनिवार्य काम इन इलाकों में नावों की संख्या बढ़ाना और उनको ठीक से रखने के लिए जल क्षेत्रों का प्रावधान करना होगा ताकि भविष्य में लोग अपना बचाव अपने प्रयासों से अधिक बेहतर ढंग से कर सकें।

Subscribe to comments feed Comments (3 posted):

Himwant on 08 September, 2008 13:47;17
avatar
जल संशाधन हमारे लिए वरदान है, लेकिन आज यह अभिशाप बना हुआ है । कौन है दोषी इसके लिए ? जब भी जल संशाधनो के व्यवस्थापन की बात चलती है, नेपाल के छद्म राष्ट्रवादी और भारत मे मेघा पाटकर सरीखे लोग विरोध शुरु कर देते है । भारत में अटल जी के समय बाढ की समस्या से छुटकारा पाने के लिए नदीयों को जोडने की बात चली थी तो मेघा पाटकर नेपाल पहुंच गई और लोगो को भारत की योजना के विरुद्ध भडकाने लगी । नेपाल मे भारत जब भी तटबन्ध निर्माण या मरम्मत की कोशिश करता है तो नेपाल मे भारत विरोधी ईसे नेपाल की राष्ट्रिय अस्मिता से जोड कर अंनर्गल दुष्प्रचार शुरु कर देते है ।

नेपाल मे भारत द्वारा तटबन्ध के मरम्मत मे अडचन एवम असहयोग भी प्रमुख कारक रहा है तराई की इस त्रासदी के लिए । नेपाल मे तटबन्धो मे पत्थरो को बांधने वाले गैबिन वायर (तार) तक चुरा लिए गए थे । नेपाल सरकार तटबन्धो की सुरक्षा के प्रति गम्भीर नही थी । तटबन्ध के टुटने के कई कारणो मे पत्थरो को बांधने वाले तारो की चोरी भी प्रमुख कारण है ।

जो भी हो, कोशी के इस कहर से सब को सबक लेना जरुरी है । भारत और नेपाल के बीच जल सन्धि को मजबुत किया जाना चाहिए । जल संशाधनो के विकास मे अविश्वास के वातावरण को समाप्त किया जाना चाहिए । नेपाल के नव निर्वाचित प्रधानमंत्री प्रचण्ड ने बिना सोचे समझे कोशी नदी के सम्झौते को एतिहासिक भुल तक कह डाला, एसे बयानो से अविश्वास बढेगा यो दोनो देशो के लिए प्रत्युपादक है ।

काठमांडौ मे भारत के राजदुत हर महिने नेपाल के प्रधानमंत्री से मिलते थे, लेकिन कोशी के तटबन्ध की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता मे नही होती थी । वे तो महारानी सोनिया को खुश करने के लिए प्रधानमंत्री को ईस बात के लिए मनाते है की हिन्दु राष्ट्र समाप्त कर धर्म निर्पेक्ष बनाया जाए नेपाल को । नेपाल मे भारत के राजनयिको को राजनैतिक गतिविधियो की बजाए जन सरोकार के विषयों मे अधिक ध्यान केन्द्रित करना चाहिए ।
Thumbs Up Thumbs Down
0
satyendra prasad srivastava on 08 September, 2008 14:06;27
avatar
गौरीनाथ जी के हवाले से आपने जो खुलासा किया है,वो जानकर हैरान रह गया। ऐसी ख़बरें पहले से आ रही थी लेकिन जब गौरीनाथ ही भुक्तभोगी हैं तो फिर इसमें संदेह की गुंजाइश ही नहीं रह जाती। क्या मानवता बिल्कुल खत्म हो गई है?
एक सवाल ये भी उठता है कि बंधी हुई कोसी बिहार के लिए अच्छी है या आज़ाद? इस पर भी विचार किए जाने की जरूरत है और उसी हिसाब से कदम उठाया जाना चाहिए
Thumbs Up Thumbs Down
0
ajit kumar on 18 September, 2008 16:20;25
avatar
Sir,
Your down to earth reporting created very clear clarification situated at Koshi region.
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 3 | displaying: 1 - 3

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Rate this article
5.00
More from बड़ी खबर
Previous
image
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
image
सलवा जुड़ुम की खामोश विदाई
नक्सल समस्या से जूझने के लिए तैयार की गयी सलवा –जुडूम नाम की सामाजिक दीवार का इस तरह धीरे-धीरे धसक जाना बहुत ही निराशा-जनक है। यदपि यह भी सत्य है की ,इसकी बुनियाद बहुत ही कमजोर थी। अधिकृत रूप से सन२००५ में सरकार द्वारा शुरू किये जाने के बाद से ही ये विवादास्पद रही है और ये विवाद ही इसको सतत रूप से कमजोर करते रहें, जबकि ये प्रयास निसंदेह अच्छा था।...
image
राम की नहीं है जन्मभूमि
हिन्दुओं का यह विश्वास है कि अयोध्या राम जन्मभूमि है, किन्तु यह बात संदेह उत्पन्न करती है क्योंकि हिन्दू धर्म के किसी प्राचीन ग्रंथ में इसका कोई ऐसा वर्णन नहीं मिलता है जिसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। हिन्दुओं के किसी भी धर्मग्रंथ में ऐसा नहीं लिखा गया है कि अयोध्या में अमुक स्थान पर राम का जन्म हुआ था, वहां जाकर आराधना करनी चाहिए। ...
image
बेटे को ही टिकट नहीं दिला सके तो किस बात के पार्टी अध्यक्ष
डॉ चन्द्र प्रकाश ठाकुर जब बिहार भाजपा के अध्यक्ष बनाये गये थे तभी कई तरह की आशंकाएं जताई गयी थीं कि आखिर इस उम्र में वे क्या कर पायेंगे? हुआ भी वही. पार्टी ने बतौर अध्यक्ष उनको कितनी मान्यता दी इसका अंदाज इसी से लग जाता है कि वे अपने ही बेटे को टिकट नहीं दिला सके, जो कि पार्टी में पसरते परिवारवाद के कारण उनका नैतिक हक बनता था, सो इस्तीफा दे दिया. ...
image
सभी दलों को साधने में सफल रहे मुंडा
झारखण्ड में सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने पहला मंत्रिमण्डल विस्तार किया है. पहले विस्तार में उन्होंने नौ मंत्रियों को शामिल किया है. जैसा कि समझा जा रहा था कि मंत्रिमण्डल विस्तार के बाद उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन मुंडा ने सीधे विधायकों का चयन करने की बजाय पार्टी अध्यक्षों पर नाम सुझाने का जिम्मा छोड़ दिया जिसके कारण उनकी परेशानी कम हो गयी....
image
सरकार रहे या जाए, नींद पूरी आये
कर्नाटक में भाजपा सरकार संकट में है. हालात इतने बदतर हो रहे हैं कि सरकार बचाना मुश्किल है. भारतीय जनता पार्टी के "क्राइसिस मैनेजर" मीडिया में खबरें चलवा रहे हैं कि उनके रातों की नींद हराम हो गयी है और किसी भी कीमत पर वे लोग कर्नाटक की सरकार को बचा लेना चाहते हैं. लेकिन हकीकत यह नहीं है. ...
image
कर्नाटक में राज्यपाल रूल
हंसराज भारद्वाज कर्नाटक के राज्यपाल बनाकर क्यों भेजे गये? क्या कांग्रेस दक्षिण में भाजपा के प्रवेश को कर्नाटक में ही छिन्न भिन्न कर देना चाहती थी? शायद नहीं. हंसराज भारद्वाज को दिल्ली से दरबदर इसलिए किया गया क्योंकि क्वात्रोच्चि की आलोचना करके वे दस जनपथ के विश्वासपात्र नहीं रह गये थे. न्यायालयों में जजों की नियुक्तियों पर पक्षपात के आरोप भी लगे थे, शायद इसीलिए यूपीए-2 में उन्हें मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिली. ...
image
आदिवासी और अल्पसंख्यक नेता की खोज में है राहुल गाँधी
मध्य प्रदेश की राहुल गाँधी की तीन दिवसीय यात्रा राहुल के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और सिमी की समानता के बयान से सरगर्म रही, तो वही राहुल द्वारा कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश से दस आदिवासी और दस अल्पसंख्यक नेता की खोज का ऐलान भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। सिमी से तुलना के बयान ने तो कल भोपाल में भा.जा.पा. प्रदेश कार्यकारीणी के बैठक में अन्य मुद्दों को पीछे छोड़ दिया सबने ने राहुल के बयान की निंदा को प्राथमिकता दी और साथ मुख्य –मंत्री शिवराज से ये सवाल भी पूछा गया की राहुल को राज्य अतिथि का दर्जा क्यों?...
image
एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सभा में गूंजी हिन्दी
बहुत साल बाद संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी भाषा में जोरदार तरीके से भारत की बात को हिन्दी में कहा गया. संयुक्त राष्ट्र में भारत के डेलीगेशन के सदस्य के रूप में पूर्व भाजपा अध्यक्ष, राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर अपना हिन्दी में भाषण दिया जिसे सुनकर वहां मौजूद पुराने लोगों को अटल बिहारी वाजपेयी का करीब ३२ साल पहले दिया गया वह भाषण याद आ गया जो उन्होंने विदेश मंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट में दिया था ....
image
भारत के साथ हमारा मिलन अधूरा-उमर
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कश्मीर समस्या के राजनीतिक हल पर जोर देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का भारत संग पूर्ण विलय नहीं हुआ है। हमारा सशर्त अर्धमिलन हुआ है। इस समस्या का हल विशिष्ट तरीके से ही निकाला जा सकता है, जो राज्य के तीनों क्षेत्रों के लोगों के साथ भारत-पाक को भी मान्य हो।...
image
खेल तो हो रहा है पर देखनेवाला कोई नहीं
राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ी धुआंधार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनकी जीत पर जश्न मनाने वाले दर्शक नदारद हैं. जिस सुरक्षा व्यवस्था को अखबारों ने दिल्ली का दम बताया था वही सुरक्षा व्यवस्था अब खेलों के लिए मुसीबत बन गया है. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, दूरदराज स्टेडियमों और टिकट संबंधी मामलों की वजह से स्टेडियम नहीं पहुंच पा रहे हैं।...
image
कर्नाटक में फिर शुरू हुई किट-किट
कर्नाटक में बीजेपी का नाटक फिर शुरू हो गया। दक्षिण भारत में पहली बार किला फतह किया पर कुनबे में ऐसी कलह मची, दो साल में ही किले की चारदीवारी दरकने लगी है। अब बीजेपी के डेढ़ दर्जन एमएलए बगावत पर उतर आए हैं। इन बगावती विधायकों ने गवर्नर को चिट्ठी लिख समर्थन वापसी का एलान कर दिया है तो येदुरप्पा ने भी चार असंतुष्ट मंत्रियों को फौरन केबिनेट से बर्खास्त कर दिया है।...
image
राहुल बाबा की नजर में जैसे सिमी वैसे ही आरएसएस
राहुल गांधी ने नया सुर्रा छोड़ दिया है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी और आरएसएस को एक ही तराजू में तोल दिया। दो दिन पहले मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में राहुल ने कांग्रेस में आने वाले लोगों से बेहिचक कह दिया था। आरएसएस और सिमी की विचारधारा छोड़कर आने वालों को ही कांग्रेस में जगह मिलेगी। बुधवार को भोपाल में जब राहुल के बयान का मतलब पूछा गया तो राहुल ने कह दिया- आरएसएस और सिमी दोनों ही कट्टरवादी संगठन। वैचारिक कट्टरता की दृष्टि से इनमें कोई फर्क नहीं।...
image
बाबरी विध्वंस को फैसले से न जोड़े कांग्रेस
भाजपा ने कहा है कि अयोध्या में स्वामित्व मामले के फैसले को कांग्रेस बेवजह बाबरी मस्जिद ढांचा ढहाए जाने से जोड़ रही है जबकि वह अलग आपराधिक मामला है जिसकी कानूनी प्रक्रिया जारी है। पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने नई दिल्ली में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘जहां तक अभी के निर्णय का सवाल है तो उच्च न्यायासय ने कुछ दीवानी मामलों पर यह फैसला सुनाया है और इसका हम स्वागत करते हैं।‘‘ उन्होंने कहा कि ये दीवानी मामले कभी भी बाबरी मस्जिद ढहाए जाने से संबंधित नहीं थे। कांग्रेस दोनों मामलों को जोड़ने का प्रयास कर रही है, जिसका कोई तुक नहीं है।...
image
कांग्रेस के लिए कठिन साबित हो रहा है अयोध्या पर फैसला
अयोध्या पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ का फैसला कांग्रेस को न उगलते बन रहा न निगलते। मुलायम के बाद मा‌र्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी [माकपा] की तरफ से फैसले पर हुई राजनीति ने कांग्रेस की अल्पसंख्यक वोटों की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी इन दलों की तरह फैसले पर प्रतिक्रिया भी नहीं जता सकती। ऐसे में उसने अदालत के बाहर इस विवाद के निपटारे की पैरवी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील करके अपनी खाल बचाने की कोशिश की है। यही नहीं, 1992 में विवादित ढांचा गिराने के लिए भाजपा पर जोरदार हमला बोलकर उसने दूसरे दलों से लंबी लकीर खींचने की कोशिश भी की है।...
image
मुसलमानों ने कहा: माहौल बिगाड़ रहे हैं मुलायम
अयोध्या विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की टिप्पणी मुसलमानों और विशेष रूप से मुस्लिम धर्मगुरुओं को नागवार गुजरी है। अधिकांश मुस्लिम उलमा का कहना है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर किसी को भी ऐसी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए जो राजनीति से प्रेरित हो और जिससे माहौल बिगड़ने की आशंका हो।...
image
शिवराज के राज में राहुल राजकुमार
राजनीतिक अदावत अपनी जगह लेकिन राज्य का आतिथ्य सबसे ऊपर. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राहुल गांधी के मध्य प्रदेश में प्रस्तावित दौरे के दौरान उनके स्वागत सत्कार में कोई कमी नहीं रखना चाहते इसलिए उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है. ...
Next
Tags
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2