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चाराचोर लालू जमीनखोर लालू

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चारा खाने वाले लालू अब चारा नहीं सीधे जमीन ही खा रहे हैं. वे देश के राजनीतिक इतिहास में घोटाले की नयी कहानी लिख रहे हैं. और तरीका भी ऐसा कि अच्छे से अच्छा जांचकर्ता भी कानूनी रूप से उलझाने में खुद उलझ जाए. वे रेलवे में नौकरी देने और दूसरे काम करवाने की एवज में पैसा नहीं बल्कि जमीन का रजिस्ट्री पेपर लेते हैं, वह भी अपने नहीं बल्कि अपने परिवार के किसी सदस्य या रिश्तेदार के नाम. इस काम में उनके दामाद से लेकर मैनेजर प्रेम गुप्ता तक सभी शामिल हैं.

कोई साल भर पहले की बात है. राजद की नेता कांति सिंह ने अपने आका लालू प्रसाद को अपनी संपत्ति दान कर दी. इस घटना ने एक पत्रकार को चौंकाया कि क्या ऐसा भी हो सकता है कि कोई नेता अपने आका को जमीन जायदाद उपहार में देना शुरू कर दे. आईबीएन7 में काम करनेवले सुकेश रंजन ने तभी से इस विषय में खोजबीन शुरू की. नेता तो कांति सिंह और रघुनाथ झा जैसे लोग ही थे जिन्होंने लालू को जमीन दान किया है लेकिन खोजबीन में जो बात सामने आयी वह यह कि लालू के गांव के लोगों ने भी उन्हें जमीन दान की है. फिर ये बातें भी खुलकर सामने आने लगीं कि राज्य में लालू राज के दौरान भी उन्होंने अपनी जमीन-जायदाद में काफी बढ़ोत्तरी की है. सुकेश के पास दो कागजात हैं वे बताते हैं कि रेलवे में नौकरी देने के नाम पर लालू ने अपने सगे-संबधियों के नाम पर काफी जमीन बटोरी है. किशुनदेव राय के परिवार के कई लोगों को रेलवे में नौकरी मिली है. कई ऐसे हैं जो रेलवे में नौकरी पाने की आस लगाये बैठे हैं. उनकी रेलवे में नौकरी की यह गारंटी निराधार नहीं है. उन्होंने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी के नाम अपनी जमीन का एक टुकड़ा लिख दिया. रजिस्ट्री हुई और 4 लाख 21 हजार रूपये किशुनदेव को अदा कर दिया गया. अब क्योंकि लालू जमीनी आदमी हैं इसलिए उन्होंने यह पैसा चेक इत्यादि से देने की जहमत नहीं उठायी. जैसा कि लालू ने सुकेश से कहा "उन्होंने किशुनदेव को यह पैसा नकद दिया है." जाहिर सी बात है नकद पैसे का कोई प्रमाण नहीं हो सकता.

5 फरवरी 2008 को इसी परिवार के संजय राय, धर्मेन्द्र राय और रविन्द्र राय ने भी अपने हिस्से की जमीन राबड़ी देवी के नाम कर दिया. कीमत फिर वही 4 लाख 21 हजार रूपये. एक बार फिर पैसा कैसे दिया गया इसका जिक्र नहीं है. सुकेश का दावा है कि उनके पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक 21 फरवरी, 2006 को मनोज कुमार, राजेश कुमार, विनोद कुमार, गोपी कृष्ण, सुशीला देवी ने करीब ढाई कट्ठा जमीन लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव के नाम लिखी। इस परिवार के एक सदस्य को भी रेलवे में नौकरी मिल चुकी है। 

इसी तरह पटना के रहने वाले योगेन्द्र नारायण के बेटे को रेलवे में नौकरी मिल गई है। योगेंद्र ने 28 जनवरी 2008 को12061 वर्ग फीट जमीन ए के इंफो सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को बेची। पटना से सटी इस जमीन को 17 लाख 60 हजार रुपए में बेचा गया। 28 जनवरी को ही योगेंद्र के भाई वीरेंद्र नारायण ने भी अपनी 5954 वर्ग फीट जमीन ए के इंफो सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को 8 लाख 60 हजार रुपए में बेच दी। वीरेंद्र के बेटे भी भारतीय रेल का हिस्सा बन चुके हैं।  रही बात ए के इंफो सिस्ट्मस प्राइवेट लिमिटेड की तो ये कंपनी दिल्ली में रजिस्टर्ड है और लालू यादव के दामाद शैलेष यादव इस कंपनी में पार्टनर हैं। 

लालू यादव ने घोटाले की यह नयी विधा विकसित की है.  जब देश के बड़े-बड़े उद्योगपति जमीन पर कब्जा कर रहे हों तो गरीबों के मसीहा और समाजवाद के स्वयंभू जनक लालू यादव कैसे पीछे रहते. यहां मामला एकदम साफ है. अब वे कैश पैसा नहीं लेते बल्कि जमीन-जायदाद अपने और रिश्तेदारों के नाम करवा लेते हैं. जो रजिस्ट्री होती है उसके नकद पैसे के भुगतान का जिक्र होता है. यह पैसा दिया जाता है या फिर इसके बदले रेलवे में नौकरी देकर कीमत अदा कर दी जाती है यह ऊपर दिये गये उदाहरणों से स्पष्ट हो जाता है. 

हमने आईबीएन सेवेन के संवाददाता सुकेश से ही जानने की कोशिश की कि क्या आपके पास कोई जानकारी है कि लालू के पास कितनी जमीन होगी? सुकेश ने कहा कि इसका कोई आंकड़ा खोज पाना मुश्किल है. क्योंकि अधिकांश जमीने रिश्तेदारों और संबंधियों के नाम पर ली गयी है. लालू यादव ने सुकेश से कहा कि उन्होंने जो जमीन ली है उसका पूरा भुगतान किया है. उन जमीनों के रजिस्ट्री पेपर उनके पास हैं. लेकिन इस सवाल का जवाब तो लालू के पास भी नहीं है कि 2002 में पट्टा पानेवाले उनके श्वसुर ने राबड़ी देवी को 20 एकड़ जमीन उपहार में कहां से दे दी? जवाब तो इस सवाल का भी लालू के पास नहीं है कि उन्हीं लोगों को रेलवे में नौकरी कैसे मिल गयी जिन लोगों ने लालू के किसी रिश्तेदार के नाम जमीन लिखी है? लालू कहते हैं "रेलवे में नौकरी देना भर्ती बोर्ड का काम है हमारा नहीं. यह संयोग भी हो सकता है कि जिन लोगों ने जमीन की रजिस्ट्री की उनके परिवार में से किसी को रेलवे में नौकरी भी मिल गयी." अगर यह संयोग है तो बहुत खूबसूरत संयोग है जो लालू जैसे लोगों के साथ ही होता है. 

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Pakdu on 13 August, 2008 15:51;24
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लालू यादव चाराचोर
लालू यादव भूमीचोर
लालू यादव सत्ताखोर
लालू याद कुर्सी छोड़!
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B.K.S. on 13 August, 2008 15:52;41
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Yeh to hona tha char chor ab Jameen Hadap raha hai. Lekin koi kanoon unka kuch nahi kar payega.
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Shiv Kumar Mishra on 13 August, 2008 15:55;22
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लालू जी सचमुच जमीन से जुड़े नेता हैं भाई.
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अनिल रघुराज on 13 August, 2008 16:32;58
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शिवकुमार जी की टिप्पणी के क्या कहने!!! वाकई लालू ने साबित कर दिया कि वे ज़मीन से जुड़े नेता हैं।
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अरूण on 13 August, 2008 16:51;18
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बुरा बात है . जमीन का मामला काहे उठाते हो भाई , बुडबक ससुरा
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amit on 13 August, 2008 19:11;11
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chor chorim se jata hai magar hera-pheri se nahi
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सुरेश चिपलूणकर on 13 August, 2008 21:44;03
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भारतीय रेल के साथ-साथ खुद लालू भी बहुत फ़ायदे में चल रहे हैं… आईडिया तो एकदम नया लाये हैं… यही तो है उर्वर दिमाग का कमाल… जय हो, जय हो… मेरा भारत महान यूं ही नहीं बन गया है…
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Kumar on 14 August, 2008 22:03;14
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ye lalu jaise netao ka ho kamal hai ki wo kuchh bhi kar sakte hai.ek corrupt officer ko apne rail bhavan me bitha kar rail ko profit me lane ka jo natak kar rahe hai,uska koi pol kyo nahi khol raha...e ladkawa sukeshwa ko kya ho gawa...pahle to bada chamchagiri kya,,ab naya story le aaya..lagta hai ki laluji ne use chara dalna band kar diya hai...waise sukesh jaasan balk journalism ke liya sudhar raha to achhi bat hai..sukesh ko badhaiya,good reporte or achha bihari banne ke liye...lalu jaisan log desh ki rajniti ke liye kalank hai...pata nahi media walo ko kya ho gaya...ka kare bhai,sabko mal ki jaroorat bate na...lalu ki mahima aprampar hai...unke mal manager P C Guptaji ka na ro koi jor hai na hi koi tor....money manager ho to guptaji jaise aur cutting-pasting manager ho to chotu ustad sudhir babu jaisan...jai ho gantantra ki,jai hi money mantra ki.....
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mrityunjay on 16 August, 2008 01:43;03
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बहुत अच्छा आईये हम सब इस महान देश के देश भ्क्त लोग मिलकर तालियाँ बजाएँ जय हिंद!!!!!!!!!!!!!!????????????????????
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अतुल राय on 21 August, 2008 13:35;53
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कोई माई का लाल पत्रकार यह क्यों नहीं बताता कि स्वर्गीय राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी के मायके वालों ने कितनी संपत्ति बनाई। सुब्रहमण्यम बताते हैं तो कोई छापता नहीं। सब जमीनी नेता लालू और मुलायम सिंह यादव और मायावती के पीछे पड़े हैं।
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