ममता के दरबार में कांग्रेस की सरकार
पश्चिम बंगाल में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान और चूहे बिल्ली का खेल बढ़ता जा रहा है. इसका एक उदाहरण उस वक्त देखने को मिला जब कांग्रेस के युवा नेता और केन्द्रीय मंत्री सचिन पायलट पश्चिम बंगाल के दौरे पर गये.
पश्चिम बंगाल में युवा कांग्रेस कांग्रेस का पैर जमाने के लिए अग्रिम पंक्ति के सेना की कमान संभाले हुए है और वहां कांग्रेस के कुछ नेता लगातार दौरे कर रहे हैं. इसी कड़ी में सचिन पायलट ने भी वहां दो रैलियां की. इन रैलियों और तैयारियों का एक मकसद राहुल गांधी का प्रस्तावित पश्चिम बंगाल दौरा भी है क्योंकि छह सितंबर को राहुल गांधी पश्चिम बंगाल जा रहे हैं और उनका यह दौरा सफल साबित हो इसके लिए युवा नेता आवाजाही कर रहे हैं.
लेकिन इन दौरों और तैयारियों के बीच ममता बनर्जी भी अपने दांव चलने से बाज नहीं आ रही है. हुआ यह कि सचिन पायलट ने ममता बनर्जी से मिलने का समय मांगा और क्योंकि दोनों दल पश्चिम बंगाल में मिलकर विधानसभा चुनाव लड़नेवाले हैं इसलिए उनका मिलना एक औपचारिकता का निर्वहन भी था. लेकिन ममता ने इस औपचारिक मुलाकात को भी कांग्रेस की मजबूरी साबित कर दिया. ममता बनर्जी से मिलकर सचिन पायलट वापस तो आ गये लेकिन अगले दिन अखबारों में सुर्खियां बनी कि कांग्रेसी मंत्री भी ममता बनर्जी के दरबार में दस्तक लगा रहे हैं. अब कांग्रेस के उत्साही और नौजवान नेता ममता की इस चाल से तिलमिला गये हैं.
लेकिन कांग्रेस के नौजवान नेताओं की मजबूरी यह है कि वे चाहकर भी ममता बनर्जी के खिलाफ कुछ बोल नहीं सकते क्योंकि कांग्रेस में ममता बनर्जी को लेकर खुद ही दो खेमा बना हुआ है. बुजुर्ग कांग्रेसी सत्ता का छींकरा देख रहे हैं इसलिए नौजवानों को सब्र रखने की सलाह दे रहे हैं जबकि नौजवान कांग्रेसी ममता को छोड़कर अपने दम पर मैदान में उतर जाने की भी सलाह दे रहे हैं. भले ही केन्द्र में कांग्रेस की सरकार हो और ममता बनर्जी यहां कांग्रेस के जूते में अपना पैर रखने के लिए मजबूर हों लेकिन पश्चिम बंगाल में वे यही दिखाना चाहती हैं कि वहां कांग्रेस से वे नहीं बल्कि कांग्रेस उनसे कमतर है. अब राहुल गांधी की यात्रा के वक्त ममता बनर्जी क्या राजनीतिक दांव चलती है इसे देखने के िलए कम से कम राहुल के दौरे तक इंतजार तो करना ही होगा.



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छाई है बँगाल में, ममता क्या ही खूब.
माँ बनने से पूर्व ही,ममता बनी अनूप.
ममता बनी अनूप,विवशता काँग्रेस की.
कर बाँधे जाते हैं सचिन,रैली राहुल की.
कह साधक कवि, राजनीति के लग्गू-भग्गू.
छोङ जायेंगे कल, जो आज बने पिच्छलग्गू.
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