लद गये वामपंथ के दिन- राहुल गांधी
कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी का कहना है कि माकपा ने अपने शासनकाल के दौरान पश्चिम बंगाल को आर्थिक और सामाजिक रूप से दो हिस्सों में बांट दिया है. एक बंगाल है जो चमक रहा है जबकि दूसरा बंगाल गरीबी के बोझ तले दब गया है. उन्होंने कम्युनिस्ट विचारधारा को अप्रासंगिक भी करार दिया है.
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की आलोचना करते हुए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने माकपा पर गरीबों और पिछड़ों के उत्थान के केंद्रीय फंड के करोड़ों रुपये हड़पने का सोमवार को आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने कोलकाता में युवक कांग्रेस की रैली में कहा कि संप्रग सरकार सरकार नरेगा समेत विभिन्न योजनाओं के तहत राज्य को करोड़ों रुपये भेज रही है, लेकिन यह धनराशि माकपा के खजाने में पहुंच रही है। यह पिछले 33 वर्षो से हो रहा है।
उन्होंने अपने भाषण में कहा कि माकपा के शासनकाल में दो तरह के बंगाल है। एक माकपा के लिए है, जो चमक रहा है और दूसरा आपका यानी गरीबों का बंगाल है। माकपा को लताड़ लगाने पर केंद्रित राहुल के भाषण को भीड़ ने काफी सराहा। कोलकाता में अपनी अबतक की पहली जनसभा में कंाग्रेस महासचिव ने कहा कि राज्य के 45 प्रतिशत लोगों के पास राशनकार्ड नहीं हैं। चीन की अपनी पिछली यात्रा का जिक्र करते राहुल गांधी ने कहा कि चीन में भी कम्युनिस्ट पश्चिम बंगाल की माकपा के कामकाज पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कम्युनिस्टों की 70-80 साल पुरानी विचारधारा, जो शेष दुनिया में अप्रांसगिक हो गई है, अब भी यहां बनी हुई है और यह माकपा के लिए बनी हुई है, लेकिन यह आपके लिए नहीं है। उन्होंने सोवियत रूस में साम्यवाद की समाप्ति की चर्चा करते हुए कहा कि माकपा भी यह अहसास कर रही है कि पश्चिम बंगाल में वे दिन आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों के लिए अब गिनती के दिन रह गए हैं। उन्होंने कहा कि जब वह उत्तर प्रदेश में पार्टी को फिर से खड़ा करना चाह रहे थे तब लोगों ने उनसे कहा था कि उत्तर प्रदेश मत जाइए। क्योंकि कांग्रेस का वहां पुनरूद्धार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस में नई जान आ गई है।



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आने वाले दोनों चुनाव (बंगाल और केरल) बेहतरीन राजनैतिक उलटबांसियों और कॉमेडी से भरपूर होंगे… :) :)
वामपंथियों के पिछले बयान और अब राहुल बाबा-कांग्रेस के खिलाफ़ बयान कम्पेयर करने में बहुत मजा आयेगा…
केरल-बंगाल में तो भाजपा रेस में है ही नहीं, इसलिये दूर बैठकर बयानों का तमाशा देखना बहुत रुचिकर रहेगा…
जैन साब को गुसा क्यों आता है ?
ये तो सब को मालूम है|
मालूम है ना
अप्रासंगिक हो गया, अब तो पूरा तन्त्र.
भाजपा क्या काँग्रेस, बने तन्त्र के यन्त्र.
बन गये केवल यन्त्र, कट गये सरोकार से.
बदल गये आयाम, ठग रहे मगर प्यारसे.
कह साधक बेबसी का आलम सांगिक हो गया.
अब तो पूरा तन्त्र ही, अप्रासंगिक हो गया.
बामपंथी कभी उलटबांसी में भरोसा नहीं करते। वे अभी भी सोनिया गान्धी, राहुल गान्धी या कांग्रेस के वर्ग चरित्र के बारे में कोई गलतफहमी नहीं पालते रहे किंतु जब भी भाजपा या किसी दूसरे साम्प्रदायिक दल का सवाल आयेगा वे उसे सत्ता से दूर रखने के लिए धर्म निरपेक्ष दलों का समर्थन करेंगे। बामपंथियों ने न कभी कांग्रेस को क्लीनचिट दी है न देने का सवाल उठता है। बंगाल और केरल में वे पहले भी कांग्रेस के साथ टकराते रहे हैं और अभी भी वही करेंगे, इसमें नया क्या है। हाँ कांग्रेस जरूर पिछले लोकसभा चुनावों से ममता बनर्जी के आगे आत्मसमर्पण कर चुकी है।
अब्ब देखिये अपने ही देश के ५ करोड़ की जनता ने जिन्हें चुना, उन पे ज्योंही अमेरिका ने अपने यहाँ आने से मना किया कांग्रेसीओं की तो मनो किस्मत ही खुल गयी, क्योंकि वे आज भी खुद को विदेशिओं का गुलाम बनाना चाहतें है.
राहुलजी गुलामी की जंजीरों से बहार निकल के सोचिये, भारत अब्ब आजाद हो चुका है, और आजाद इन्सान की आजाद सोच होती है. कम से कम दुश्मन देश की सोच को अनुसरण करना तो कदापि नहीं. ये बात अलग है की जिस पार्टी ने आज़ादी दिलाने में complete तो नहीं मगर एक अहम् रोल अदा किया था उसी पार्टी को आप के परिवार ने गुलाम बना लिया.
आप चीन के गुलाम कब से बन गए?
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