कांग्रेस अधिवेशन को सफल बनाने में जुटी अकाली भाजपा सरकार
चंडीगढ़ में कांग्रेस का मिनी अधिवेशन होने जा रहा है जिसमें कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से सहित प्रधानमंत्री, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मौजूद रहेंगे. 27 सितंबर को होने वाले कांग्रेस के मिनी अधिवेशन को अकाली-भाजपा सरकार सफल बनाना चाहती है। इसके लिए सरकार में ऊपरी स्तर से सूबे के प्रमुख औद्योगिक घरानों को पंजाब कांग्रेस की मदद करने के आदेश जारी किए गए हैं।
लुधियाना व मोहाली के कुछ उद्योगपतियों को एक वरिष्ठ अकाली नेता ने मिनी अधिवेशन में कांग्रेस की मदद करने को कहा है। इन उद्योगपतियों को राज्य के 3-4 वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं का नाम देकर कहा गया है कि यह नेता शिविर के लिए लग्जरी गाडि़यों, शामियाने, खान-पान की सामग्री और होटलों में कमरों की बुकिंग आदि को लेकर जैसी मदद चाहें, उन्हें मुहैया कराई जाए। मालूम हो कि इस मिनी अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्रियों के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और दिल्ली राज्यों के मुख्यमंत्री व मंत्रियों सहित करीब 6000 से ज्यादा प्रतिनिधि भाग लेंगे।
सूत्रों के अनुसार पंजाब कांग्रेस के इस शो को कामयाब बनाने के लिए राज्य सरकार ने जानबूझ कर मदद के आदेश दिए हैं। सरकार इसे सफल बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर उन नेताओं के हाथ मजबूत बनाना चाहती है जो इस समय प्रदेश कांग्रेस पर काबिज हैं। 17 सितंबर को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान होना है लेकिन माना जा रहा है कि मिनी अधिवेशन के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान होगा। अकाली-भाजपा सरकार का मानना है कि मौजूदा प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को अभी फायदा देना भविष्य में उसके लिए फायदे का सौदा साबित होगा। वह इसलिए क्योंकि यदि यह अधिवेशन सफल रहा तो पार्टी हाईकमान की नजर में मौजूदा कमजोर नेतृत्व की साख बढ़ेगी और यही अकाली-भाजपा सरकार चाहती भी है। हालांकि इस बारे में कांग्रेस हल्कों में भी दबी जुबान में चर्चाएं शुरू हो गई हैं लेकिन खुलकर न कांग्रेसी बोल रहे हैं और न ही उद्योगपति। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह मदद सरकार ने खुद दी है अथवा इसके लिए प्रदेश कांग्रेस की ओर से ही किसी मध्यस्थ के जरिए संदेश भेजा गया था।



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चोर चोर मौसेरे भाई जो ठहरे|
एक तन्त्र के पुर्जे हैं, काँग्रेस-भाजपा. लङे-मिलें, फ़िर लङ पङें, बुद्धू बनती जनता. जनता बुद्धू बनती है, मजबूरी उसकी. बारी-बारी करनी पङे, हूजूरी इनकी. कह साधक कवि, नेता कब हुये हैं किनके? काँग्रेस-भाजपा पुर्जे एक तन्त्र के.
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