होगी जाति आधारित जनगणना
केन्द्र सरकार ने आजादी के बाद पहली बार जाति आधारित जनगणना कराने का फैसला किया है। यह जनगणना अगले वर्ष 2011 में अलग से जून से सितम्बर के बीच सम्पन्न कराई जाएगी। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा बाकी जातियों की गणना की जाएगी। पिछली बार 1931 में जाति आधारित जनगणना कराई गई थी।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमण्डल की बैठक में जाति आधारित जनगणना कराने का फैसला किया गया। बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने बताया कि सरकार ने (जनगणना) के मौजूदा कार्यक्रम को यथावत चलाने तथा जाति आधारित जनगणना अगले वर्ष जून से कराने का निर्णय लिया है। चिदम्बरम ने बताया कि सरकार ने जाति आधारित जनगणना अलग से कराने का फैसला इसलिए किया ताकि नियमित जनगणना में प्राप्त होने वाले आंकड़ों की विश्वसनीयता बनी रहे। उन्होंने कहा कि मंत्रिसमूह इस जनगणना पर होने वाले खर्च के बारे में निर्णय करेगा।
चिदम्बरम ने बताया कि विधि एवं न्याय मंत्रालय से सलाह करके जाति आधारित आंकडे एकत्र करने के लिए समुचित कानूनी व्यवस्था की जाएगी। भारतीय महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा यह जनगणना कराई जाएगी। इसके लिए विशेषज्ञों के दल बनाए जाएंगे जो जाति के आधार पर ब्योरे उपलब्ध कराएंगे।
आजादी के बाद देश में पहली बार जातिगत आधार पर जनगणना का निर्णय लिया गया है। इससे पहले 1931 में जाति आधारित जनगणना कराई गई थी। संसद में विपक्षी दलों ने 2010 की जनगणना में जाति आधारित ब्योरे भी एकत्र करने की मांग की थी जिस पर सरकार ने विचार करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में एक मंत्रिसमह गठित किया था। उसने सभी दलों से अलग-अलग राय लेने के बाद जाति आधारित जनगणना कराने की सिफारिश की है।



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जाति-धर्म के नाम पर, टुकङे-टुकङे देश. राजनीति ने दे दिये, घाव अनेक विशेष. घाव अनेक विशेष, मिल रहे आम जनों को. मूर्खता से स्वीकार हो रहे सभी जनों को. कह साधक कवि, गणना करो ना जाति-वर्ण पर. टुकङों में बट रहा देश, जाति-धर्म नाम पर.
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