सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी.
कभी संघ के करीबी रहे सुब्रमण्यम स्वामी लंबे समय से सोनिया गांधी के पीछे पड़े हुए हैं और बार बार यह आरोप लगाते रहे हैं कि सोनिया गांधी केजीबी की एजंट रही हैं. स्विट्जर इलस्ट्रेट के नवंबर 1991 के हवाले से स्वामी साबित करते हैं कि सोनिया गांधी के पिता माइनो केजीबी एजंट थे और सोनिया गांधी की राजीव गांधी से शादी हो जाने के बाद माइनो भारत सोवियत रिश्तों के तहत कई डील को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सोनिया के केजीबी कनेक्शन पर "स्टेट विदिन स्टेट: द केजीबी इन सोवियत यूनियन" में येगिना एल्बर्ट्स ने भी कुछ रोचक तथ्य सामने रखे हैं जो कि येल्सिन द्वारा गठित उस पैनल की सदस्य रही हैं जिसने केबीजी के कामकाज की समीक्षा की और उन फाइलों को देखा है जिसमें माइनो के केजीबी से जुड़े होने का साक्ष्य मिलता है.
स्वामी ने इन्हीं आधारों पर 2001 में दिल्ली हाइकोर्ट में याचिका दायर करके सोनिया गांधी के केजीबी कनेक्शन की सीबीआई जांच की मांग की थी. उस वक्त केन्द्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी. अदालत ने बहुत बाद में याचिका खारिज कर दी लेकिन उस वक्त कैबिनेट में सीबीआई का प्रभार देख रहीं वसुंधरा राजे ने जांच का आदेश दिया था. इसके बाद संसंद में इतना हंगामा हुआ कि अटल बिहारी वाजपेयी ने जांच के आदेश को खारिज कर दिया.
इसलिए अब अगर सुदर्शन कह रहे हैं कि सोनिया गांधी सीआईए की एजंट हैं तो निश्चित रूप से गलतबयानी कर रहे हैं. कम से कम स्वामी तो यही कहेंगे.



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