खबर छापने के लिए जागरण ने मांगा था पैसा - लालजी टंडन
भाजपा के नेता और अब लखनऊ से सांसद लालजी टंडन ने कहा है कि चुनावों के दौरान दैनिक जागरण ने उनसे पैसे की मांग की थी. बदले में जागरण ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी खबरें खूब प्रकाशित की जाएंगी.
दिल्ली से प्रकाशति एक पाक्षिक पत्रिका "प्रथम प्रवक्ता" से बातचीत में लालजी टंडन ने यह स्वीकारोक्ति की है. लालजी टण्डन ने कहा है कि "चुनाव के दिनों में कुछ लोग मिलने आये थे. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आप भी कुछ कर दें तो आपकी भी खबरें खूब छपेगीं. लेकिन मैं इस भ्रष्टाचार में शामिल नहीं हुआ. उलटे मैंने इसे मुद्दा बनाया."
लालजी टण्डन ने दैनिक जागरण से खुली नाराजगी जताते हुए कहा है कि "जागरण के अलावा किसी ने उनसे पैसा नहीं मांगा." लालजी टंडन ने दैनिक जागरण के ऊपर किये गये अपने अहसानों के बारे में बोलते हुए कहा है "कानपुर में स्वर्गीय नरेन्द्र मोहन के नाम पर पुल का नामकरण उस समय हुआ जब मैं उत्तर प्रदेश में मंत्री था. उनके मल्टीप्लेक्स को जमीन हमारे समय में दी गयी. जागरण का जो स्कूल चलता है उसका जहां दफ्तर चल रहा है वे जमीनें हमारे समय में मिलीं. लेकिन यह सब मैंने किसी अपेक्षा में नहीं बल्कि अपना मित्र धर्म निभाने के लिए किया था. फिर भी दैनिक जागरण ने मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया." टंडन कहते हैं कि उनके खिलाफ छपने वाली खबरों का खण्डन तक नहीं छापा गया.
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने इसकी शिकायत प्रेस काउंसिल से क्यों नहीं की? टंडन का कहना है कि मैंने इसकी शिकायत सीधे जनता की अदालत में की जिसका असर यह हुआ है कि लखनऊ में न केवल दैनिक जागरण की विश्वसनीयता घटी है बल्कि बहुत सारे लोगों ने दैनिक जागरण पढ़ना बंद कर दिया है. टंडन का आरोप है कि दैनिक जागरण ने केवल उनके साथ ही ऐसा नहीं किया बल्कि पूरे प्रदेश में उसने उन्हीं लोगों की खबरें प्रकाशित की जिसने उनको पैसा दिया.
लालजी टण्डन का कहना है कि बीते आमचुनाव में मीडिया ने जैसा व्यवहार किया उससे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ होने की सारी मर्यादाएं टूट गयीं. टंडन मानते हैं कि प्रिंट मीडिया में यह बदलाव हाल के दिनों में आया है, जिस पर इलेक्ट्रानिक मीडिया का असर साफ दिखाई देता है.



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