बारूद
मोदी को मिल गया नया गृहमंत्री
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिसे भी गृहमंत्री बनाया है वह किसी न किसी आफत में फंसा है. हरेन पांड्या की हत्या हो गयी थी, अमित शाह गिरफ्तार हैं और गोरधन झड़पिया गोधरा काण्ड में फंसे हैं. अब मोदी ने अपने मंत्रिमण्डल का विस्तार करते हुए गृहमंत्रालय तो अपने पास ही रखा है लेकिन गृहराज्यमंत्री का पद अपने मित्र प्रफुल्ल पटेल को सौंप दिया है.
फिर मर्द के हाथ में कपूर खानदान की कमान
बालीवुड की सुपर फैमिली कपूर खानदान की बागडोर पुनः एक मर्द के हांथो में आती दिख रही है.पिछले दो दशको से महिलाओं के भरोसे अपने अस्तित्व को बचाए इस खानदान को रणवीर कपूर के रूप में बहुत बड़ा संकट मोचन मिला है.वर्तमान में बालीवुड के सबसे उभरते सितारे के रूप में रणवीर ने जो जगह बनायीं है वह काबिले तारीफ है.
जनता के सामूहिक नरसंहार की योजना में सभी दल साथ हैं
इसे उदाहरण मानिए अपने लोकतंत्र का. साठ साल के गणतंत्र का. संसद में नागरिक परमाणु सुरक्षा विधेयक प्रस्तावित है. सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसी भी कीमत पर इस विधेयक पर संसद की मुहर लगवाए ताकि परमाणु कंपनियां परमाणु बिजलीघर बनाने की शुरूआत कर सकें. आपको याद हो, तो याद करिए पिछली यूपीए सरकार ने परमाणु विधेयक को पारित करवाने के लिए किस तरह से अमर सिह का इस्तेमाल करके समाजवाद को पूंजीवाद का पिछलग्गू बना दिया था. लेकिन बात अटकी हुई है. ...शहनवाज के इफ्तार में मनमोहन मुलायम
भारतीय जनता पार्टी के नेता शहनवाज हुसैन ने बुधवार को दिल्ली स्थित अपने आवास पर इफ्तार का आयोजन किया था. शहनवाज की इस इफ्तार पार्टी में भाजपा से अधिक कांग्रेस के नेताओं ने शिरकत की. शिरकत करनेवालों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल थे. ...भारत तो आजाद है हम आजाद कब कहलाएंगे?
यह 15 अगस्त हमें आजादी के 63वें वर्ष के द्वार पर ले आयी है। आजादी के उपरांत इतने लंबे वर्षों के सफर के बाद निसंदेह भारत की तस्वीर बदली है। पिछले दस साल से तो विकास की गति का भी अहसास किया जा रहा है व तरक्की की चमक दिखने भी लगी है। इसके साथ हमने बहुत कुछ खोया भी है। समाज का विभाजन। जाति-धर्म में बंटा हुआ भारतीय समाज। पिछड़ो व दलितों के उत्थान के लिए बने कानून व नियम निसंदेह बहुत पूजनीय हैं जिनके माध्यम से समाज के दबे हुए वर्गों को बराबरी का हक दिलवाने का माद्दा भी है पर क्या उनका ज्यादातर इस्तेमाल दलितों व पिछड़ों के नाम पर राजनीति करने वालों द्वारा हाईजैक नहीं हो गया? ऐसा दिखता तो है।...कूड़े में मायावती
यह माया राज है। वह माया जिसके खौफ से अधिकारियों को नींद नहीं आती थी। ख्वाबों में मुख्यमंत्री की दहशत नींद उड़ा देती थी, परंतु आज वहीं मुख्यमंत्री मायावती के होर्डिंग्स कूढ़े के ढेरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। गंदगी में जीने वाले जानवर इन होर्डिंग्स के साथ अठखेलियां कर रहे हैं। हद तो यह है कि सूबे के मुखिया की इस बेकदरी से प्रशासन पूरी तरह से बेखबर है।
सेक्स क्षमता बढ़ाने की गलतफहमी से गधों पर संकट
'दो बैलों की कथा' प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी है। कहानी की शुरुआत में प्रेमचंद गधा पुराण से करते हुए बताते हैं कि कैसे गधा चुपचाप मेहनत करता है और मालिक की मार खाता है। सच कहें तो गधे जैसा मेहनती कोई अन्य पशु नहीं। खैर बदले दौर में गदहों की उपयोगिता कम हो गई थी। लेकिन आधुनिक जमाने में गधों के प्रति फिर से एक नया समाजिक गलतफहली फैलने से इसकी उपयोगिता बढ़ गई है।
चर्च में जलाई जाएगी कुरान
खबर है कि फ्लोरिडा के एक चर्च में ११ सितंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुरान को जलाने (इंटरनेशनल बर्न ए कुरान डे) के दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। न्यूयॉर्क के समाचार पत्रों के अनुसार ११ सिंतबर २००१ को हुए आतंकी हमले की घटना की नौवीं बरसी पर चर्च ने यह कदम उठाने का फै सला लिया है। फ्लोरिडा के 'द डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर' में ९/११ की बरसी पर एक शोक सभा आयोजित की जाएगी। जिसके तहत इस्लाम को कपटी और बुरे लोगों का धर्म बताकर कुरान को जलाया जाएगा।
कश्मीर में न सही, दिल्ली में कश्मीर आजाद है
सात अगस्त की देर शाम…राजधानी के जंतर-मंतर स्थित पटेल भवन की चारदीवारी से सटे लोग हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। जाकिर हुसैन कॉलेज दिल्ली के प्रोफेसर एसआर गिलानी की अगुआई में कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों के अत्याचार और निर्दोष(प्रदर्शनकारियों की नजर में) लोगों के खून बहाने के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है। ये वही गिलानी हैं, जिन्हें संसद पर हमला मामले में सुप्रीम कोर्ट बरी कर चुका है। हालांकि बरी करते वक्त उसने कहा भी था कि इस मामले में गिलानी की भूमिका पर 'गंभीर संदेह' है, लेकिन पुख्ता सुबूत न होने की वजह से उन्हें बरी किया जा रहा है।
बीत गया एक जनमदिना रे!
7 अगस्त 2010. पहली बार जीवन में यह तारीख याद रही. क्यों याद रही कह नहीं सकते लेकिन याद रही और यह भी याद रहा कि इसी दिन मेरे भार से यह संसार बोझिल हुआ था. चौंतीस साल बाद यह तारीख याद भी रही तो ऐसे चौराहे पर खड़ा पाया कि याद रहना भी रहस्य हो गया.
परमाणु सुरक्षा पर बात करते वक़्त याद रखिए हिरोशिमा और नागासाकी
६५ साल पहले,६ अगस्त १९४५ के दिन एक अमरीकी हवाई जहाज़ ने जापान के हिरोशिमा शहर पर पहला परमाणु बम गिराया था . उसके बाद से ही दुनिया परमाणु बम की दहशत में जिंदा है. परमाणु बम गिराने के बाद अमरीका ने बाकी दुनिया से अपने आप को सुपीरियर साबित कर लिया था.जब अमरीका ने तबाही का यह बम जापानी शहर पर गिराया था तो उस वक़्त के अमरीका के राष्ट्रपति हैरी. एस. ट्रूमैन अटलांतिक महासागर में "आगस्ता" जहाज़ी बेड़े पर मौजूद थे और उन्होंने शेखी मारी थी कि इस एक बम के गिर जाने के बाद युद्ध के मानदंड बदल जायेगें.
दिमागी दिवालिएपन का शिकार ठाकरे परिवार
मुंबई पर मलेरिया का प्रकोप है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारी से लेकर स्थानीय नगर निगम तक मलेरिया के रोकथाम की कोशिशों में लगे हुए हैं. लेकिन इसी बीच ठाकरे परिवार के दो उत्तराधिकारियों ने अपने दिमागी दिवालियेपन का उदाहरण प्रस्तुत कर दिया है. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों ही कह रहे हैं कि मुंबई में मलेरिया के प्रकोप के लिए उत्तर भारत से आनेवाले लोग जिम्मेदार है. निरंजन परिहार की आपत्ति है कि...
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...




