भारतीयों में बढ़ रही है जानवरों से सेक्स करने की प्रवृति
चेन्नई में तीन सितंबर से पांच सितंबर तक सेक्सोलॉजी पर हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में कुछ ऐसी बातें सामने आईं जो भारतीयों की बदलती सेक्स प्रवृति की ओर इशारा कर रही हैं। सम्मेलन में ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं में भैंसों के साथ यौन क्रियाएं करने, महिलाओं द्वारा पालतू कुत्तों को सेक्स करना सिखाना और घुमंतू प्रवृत्ति के लोगों द्वारा सेक्स करने के लिए साथियों को खोजने जैसे मामले सामने आएं हैं।
हालांकि सम्मेलन में इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत गैर कानूनी अप्राकृतिक सेक्स सही है या गलत। डॉक्टर इस बारे में कोई ठोस राय व्यक्त नहीं कर सके। सम्मेलन में हुई चर्चा ने जवाबों से ज्यादा सवालों को जन्म दिया लेकिन ज्यादातर डॉक्टर इस बात से सहमत दिखे की भारतीयों में जानवरों के साथ सेक्स करने की प्रवृति बढ़ रही है।
चेन्नई के मशहूर सेक्सोलोजिस्ट और इंडियन एंड्रोपॉज सोसाइटी के अध्यक्ष डॉक्टर डी. नारायण रेड्डी ने अपने अनुभवों के आधार पर एक दंपति का उदाहरण देते हुए बताया कि पांच साल से शादीशुदा होने के बाद भी दंपति सेक्स नहीं कर पा रहा था। शुरुआती जांच में पता चला कि पुरुष का अंग सीधा होने में दिक्कत थी लेकिन जब मामले की गहनता से जांच की गई तो पता चला कि इस 29 वर्षीय पुरुष को भैंसों के साथ सेक्स करने की आदत थी। वो कई सालों से अपने गांव के अन्य लड़कों के साथ मिलकर भैंसों के साथ यौन संबंध बनाता रहा था। डॉ. रेड्डी ने एक अन्य महिला का उदाहरण देते हुए बताया कि उस महिला को हर बार अपने पति के साथ सेक्स करने के दौरान अपने पालतू कुत्ते को भी शामिल करने की आदत थी।
डॉ. रेड्डी ने कहा कि कई बार समाधान करना मुश्किल होता है लेकिन हमारी कोशिश रहती है कि अपने पास आने वाले मरीजों के वैवाहिक जीवन को बचा सकें। रेड्डी के अनुसार, इस तरह के मामले आते रहते हैं लेकिन अभी तक ऐसा कोई शोध नहीं किया गया है जो भारत में जानवरों के साथ सेक्स करने के सही-सही आंकड़े उपलब्ध करा सके। लेकिन ज्यादातर सेक्स विशेषज्ञों का मानना था कि जानवरों के साथ ज्यादा समय बिताने वाले लोगों और ग्रामिणों में इस तरह के मामले देखे जाते हैं। जो लोग जानवरों के साथ ज्यादा समय बिताते हैं उनमें भी जानवरों के साथ यौन क्रिया करने की प्रवृति जन्म ले लेती है।



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स्वाभाविक क्रम छोङकर, वैभाविक का चाव.
वैभाविक का चाव, है पशुता से भी बदतर.
मानवता शर्मिन्दा है, पशु इनसे बेहतर.
कह साधक नैसर्गिक फ़ल है भोगोन्माद का.
लाभोन्माद आधार बन रहा कामोन्माद का.
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