अरावली में अवैध खनन का गोरखधन्धा
राजस्थान की पहचान वैसे तो रेगिस्तान से है। लेकिन अरावली की श्रृखलाऐं भी उसके बहुत बडे हिस्से में फैली हुई है। अभी तक अरावली की इन श्रृखलाओं को हरा भरा करने के नाम पर देश और विदेशी मदद के पैसे को अकेला वन विभाग हडप करता रहा। अब इन श्रृखलाओं से पत्थर और लकडी का दोहन सरकार के दर्जनों विभाग और उनकी आड़ में खुद सरकारें कर रही है। राजस्थान के भरतपुर जिले में अवैध खनन के गोरखधंधे की पडताल करती एक रिपोर्ट।
नमक का दरोगा मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्व ऐतिहासिक कहानी है। स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर में जब देश में नमक जैसी ईश्वरप्रदत्त वस्तु के व्यापार पर प्रतिबंध था। लेखक ने मुंशी बंशीधर जैसे चरित्र का सृजन किया जो रात के अधेरें में अपनी डयूटी का निर्वहन बडी ही इमानदारी के साथ करता है। वही दूसरा चरित्र पण्डित अलोपदीन का है जो लक्ष्मी के बलबूते अपना राज्य चलाते थे,उनकी मान्यता थी कि धरती तो क्या स्वर्ग में भी लक्ष्मी का ही राज है। एक दिन पं अलोपीदीन की लक्ष्मी और बंशीधर के धर्म के बीच जंग होती है, धर्म हार जाता है। कहानी का नायक बंशीधर घर से नौकरी करने के लिए जाता है तो पिता समझाते है वेटा वेतन तो पूर्णिमा का चाँद होता है उपरी आय बहता हुआ स्त्रोत है। वेतन मनुष्य देता है उपरी आय ईश्वर देता है। कहानी के नायक मुंशी बंशीधर की समझ में पिता की ये शिक्षा नहीं आती है और वो रात के अंधेरें में डयूटी करते हुये लक्ष्मी से बैर मोल ले लेता है।
राजस्थान के भरतपुर जिले के अवैध खनन क्षेत्रों में भी कई विभागों के आला अधिकारी रात को डयूटी कर रहे है लेकिन अब वो प्रेमचंद के नायक की तरह लक्ष्मी से बैर मोल नहीं ले रहे है। उनकी रात की डयूटी ही वो काम है जिसमें वो प्रकृति के साथ खुले आम खिलबाड कर रहे है। पहाडों का अस्तित्व संकट में डाल रहे है। हरे पौधों को खून के आँसू रोने को मजबूर कर रहे है। एक ओर प्रदेश में भले ही ‘हरित राजस्थान’ जैसा अभियान चल रहा हो मगर यहाँ तो सैकडो पेड अवैध खनन के साथ रोजाना काटे जा रहे है। वन संरक्षित क्षेत्र वीरान नजर आ रहे है। प्रकृति रो रही है पहाडों से पत्थर के रास्ते पैसा नीचे से उपर तक मानों बह रहा है। बहती नदी में सब नहा रहे है। प्रकृति के आँसूओं से उन्हें क्या पडी, उन्हें तो पैसे की बरसात के स्नान में आनन्द आ रहा है। देखते ही देखते बीते दस सालों में कई पहाडों का अस्तित्व मिट सा गया है तो कुछ सैकडों फीट गहरे गडडों में तब्दील हो गये
2 जून वुधवार. प्रदेश के एक प्रमुख दैनिक समाचार पत्र में भरतपुर जिले के रूदावल कस्बे से एक खबर छपी. जिसका मजमून कुछ इस तरह से है.‘‘ रूदावल थाना क्षेत्र में से अवैध खनन कर निकाले जाने वाले इमारती पत्थर,लकडी से भरे वाहनों से रात को कार्यवाही के नाम पर अवैध बसूली की जा रही है. कार्यवाही का शिकार हुये लोगों का शक है कि रात को आने वाली इस जीप में उपखंड क्षेत्र के एक दो सरकारी कर्मचारी है जो मोटी बसूली करते है.खबर में आगे लिखा है, मजेदार बात ये है कि क्षेत्र में स्थित सफेद पत्थर की खानों से निकलने वाले बेशकीमती अवैध पत्थर को 15 किलोमीटर दूर बयाना स्थित रीको क्षेत्र तक पहुँचाने में कई विभागों की निर्धारित वसूली के बाद भी ये अंजान लोग रात को वसूली करने में जुटे हुये है.
इस पूरी खबर में अंजान लोगों की इस वसूली से भी अधिक दो बातें महत्वपूर्ण है. जिनसे जानबूझ कर अंजान बनने की कोशिश की गई है. 1‘‘ अवैध खनन कर निकाले जाने वाल बेशकीमती इमारती पत्थर 2. अवैध पत्थर को 15 किलोमीटर दूर बयाना स्थित रीको क्षेत्र तक पहुँचाने में कई विभागों की निर्धारित वसूली के बाद भी ’’. इसका सीधा सा मतलब है कि क्षेत्र में पत्थर का अवैध खनन हो रहा है और उसके होने के पीछे की सच्चाई ये है कि सरकार के जिन विभागों के मजबूत कंधों पर उसे रोकने की जिम्मेदारी है. वन क्षेत्र का संरक्षित कर उसे और अधिक हरा भरा बनाकर पर्यावरण को सुखद करने का काम है वो ही उसे कराने की कीमत बसूल रहे है. इन दो बातो को तो अखबार ने सीधे सीधे ही कह दिया है.
3 जून दिन गुरूवार. संभाग मुख्यालय पर हाँल ही में नियुक्त कमिश्नर मधुकर गुप्ता जिले भर के आला अधिकारियों की एक बैठक कर अवैध खनन को लेकर सख्त निर्देश देते है. बकौल गुप्ता अधिकारी खनिज संपदा के महत्व को समझें और अपने दायित्व का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें. साथ में लापरवाही पाये जाने पर सख्त कार्यवाही करने की हिदायत भी दे देते है. जिसके अनुसार पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से उच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेशों की पालना सुनिश्चित करने की बात भी की गई. संभाग कमिश्नर ने बैठक में गाँव के पटवारी,वन विभाग के रेंजर, थाना अधिकारी सहित आला अधिकारियों की जिम्मेदारी नियत कर दी गई. वैसे ऐसे निर्देश और मीटिंग यहाँ आम प्रकि्रया का ही एक हिस्सा है. इस पूरे गोरखधंधे से जुडे लोगों की माने तो आने वाला हर अधिकारी प्रकिया का हिस्सा बनने से पहले उसकी गहराई को इसलिए समझ लेना जरूरी समझता है कि उसमें उसका हिस्सा क्या है और वो कहीं उसके स्तर से कम तो नहीं है।
14 जून दिन सोमवार. रूपवास थाना क्षेत्र की घाटौली पुलिस चौकी के पास एक पत्थरों से भरा ट्रक माँ बेटे को कुचल देता है। तीस बर्षीय बबीता और उसके चार बर्ष के बेटे मनु की मौके पर ही मौत हो जाती है। आको्शित ग्रामीण पुलिस चौकी को घेर कर पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट करते है। ग्रामीणों का आरोप था कि यह हादसा पुलिस वालों की पत्थर भरे ट्रक से अवैध वसूली के कारण हुआ। पुलिस वालों ने ट्रक में भरे अवैध पत्थर पर अवैध वसूली के लिए रोका था। दोनों के बीच लेन देन करे लेकर कहासुनी हुई। ऐसे में ड्राइवर ट्रक को स्टार्ट कर भगा ले जाने के चक्कर में गलत साईड में चला गया जहाँ उसने माँ बेटे को कुचल दिया।
घटना का दूसरा दिन 15 जून मंगलवार. पुलिस,प्रशासन और वन विभाग से सामूहिक रूप से छापे की एक बडी कार्यवाही को अंजाम दिया.अवैध खनन क्षेत्र के मजबूत मोबाईल नेटवर्क के बाबजूद या कहें इस दबाब में कि उपर से आदेश है कुछ तो जब्त करना ही पडेगां,आधा दर्जन मशीनों को जब्त कर लिया। जिसमें तीन वारसों मशीन, एक जैनरेटर,एक कम्प्रेशर और एक टैक्टर ट्राली को जब्त कर लिया। इस घटना के बीच एक बडा बाकया और घटित हुआ। उपखंड अधिकारी रूपवास को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने जब्त सामान में आग लगाने के मौके पर आदेश दे दिये। इतने में एक पीपा कैरोसीन भी मौके पर मंगा लिया गया। ग्रामीणों के आक्रोशित होकर विरोध करने और साथ उपस्थित अधिकारियों की समझाईश पर उन्हें ऐसा करने से रोका जाना संभव हुआ। यहाँ एक बडा सवाल ये पैदा होता है कि उपखंड अधिकारी को इतना गुस्सा क्यों आया? लोगों की माने तो रात में अवैध वसूली की बात सामने आने के बाद से उपखंड अधिकारी का मूड कुछ उखडा हुआ है।
16 जून दिन वुधवार. संभाग कमिश्नर मधुकर गुप्ता रात को जिले की वैर तहसील क्षेत्र में जाते है. वहाँ उन्हें क्रेशर उधोग से गिटटी भरकर ले जाते कुछ ओवरलोड वाहन नजर आते हैं. मौके पर ही 17 वाहनों को जब्त करा दिया जाता है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि क्षेत्र में अवैध खनन और ओवरलोडिग कर वाहनों के चलने की शिकायतें मिली थी. ओवर लोड वाहनों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी. वाहन और खनन माफियाओं द्वारा राजस्व की चोरी कर पहाडियों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। यहाँ गौर करने लायक बात ये है कि वैर,भुसावर दोनों थाने सडक के किनारे स्थित है. ऐसे में ये ओवरलोड वाहन,अवैध खनन का पत्थर उन्हें रोजाना नजर नहीं आता क्या? जो कमिश्नर महोदय को वहाँ जाना पडा. आता तो है जनाब पर वो प्रेमचंद के मुंशी बंशीधर नहीं है. उन्हें लक्ष्मी से जंग नहीं लडनी. उसे उल्टे उपने पास आने देना है। अब पत्थर के अवैध खनन की कहानी,विभागों की चौथ वसूली और रीको के बढते पत्थर व्यवसाय को तफसील से समझने की कोशिश करते है।
भरतपुर जिले में 7 विधानसभा क्षेत्र है. जिनमें से 4 में तो पत्थर के अवैध खनन का कारोबार अपने चरम पर चल रहा है . यही कारण है इन जगहों पर आने के लिए प्रदेश भर के बाबू से लेकर आला आफसरान तक होड मची रहती है. जिन्हें इन क्षेत्रों में आने और रूकने का अवसर मिल जाता है वो खुद को धन्य भाग महसूस करते है। जिसमें भी सबसे अधिक चर्चाओं में बयाना-रूपवास,वैर क्षेत्र बना हुआ है. सूत्रों की माने तो मई माह में रूदावल एस एच ओ के लिए चार ने राज्यादेश करा लिए. जिन क्षेत्रों में पत्थर की लूट मची हुई है उनमें वाणासुर की ऐतिहासिक नगरी बयाना, कृष्ण के कामवन के लिए प्रसिद्व कांमा,इतिहास में विद्वानों के कारण प्रसिद्व रही लघु काशी वैर,जल महलों की नगरी डीग और रूपवसंत नगरी रूपवास है. इन सभी में सर्वाधिक चर्चित क्षेत्र रीको बयाना के चलते रूपवास -बयाना ही है। जहाँ से बेशकीमती सैण्डस्टोन,पिंक स्टोन और सफेद पत्थर निकाला जाता है।इस व्यवसाय से जुडे लोगों की माने तो विगत 20 बर्षो में देश में कहीं भी कोई बडी सरकारी इमारत,भवन,मन्दिर होटल,पार्क और अन्य किसी भी प्रकार को कोई निर्माण कार्य रहा हो जिसमें सफेद,सैण्डस्टोन और पिंक स्टोन के नाम से मशहूर पत्थर यदि लगा है तो वो यही ये गया है. ऐसे निर्माण कार्यो में राजस्थान प्रदेश की अपनी विधानसभा,मायावती के पार्क ,मूर्तिया,निवास, दिल्ली का अक्षरधाम मन्दिर और हजारों इसी प्रकार के निर्माण कार्य है जिनमें ये पत्थर लग कर उनकी शोभा में चार चाँद लगा रहा है. ये काम आज भी उसी स्तर पर जारी है.
रूपवास तहसील में बंशी पहाडपुर के पास एक गाँव है सिर्रोद. जहाँ खनिज विभाग की कुछ लीज है. इसके अलावा महलपुर चूरा और बसई मोड पर एक दो लीज जारी है. इन वैध क्षेत्रों में लाल पत्थर निकलता है जिसे निकाला ही नहीं जाता है. इस क्षेत्र के सफेद,सैण्डस्टोन और पिंक स्टोन की माँग है जो पूरा क्षेत्र वन विभाग के अधीन है. बंध वारैठा जीव अभ्यारण्य भी इसी अवैध खनन के क्षेत्र में आता है। रूदावल से पहाडपुर के बीच रेल्वे का 22 नंबर फाटक है. वैसे ये फाटक पहाडपुर गाँव जाने का रास्ता है. लेकिन अब ये रास्ता पूरी तरह से बंद रहता है. गेट मैन से जब हमने कारण जानने की कोशिश की तो उसने बताया कि इधर पत्थर की खाने है और ये केवल उन्हीं साधनों के लिए खोला जाता है जिनमें पत्थर जाता है. पास ही अपने पशुओं को चरा रहे एक युवक का कहना था ‘ उनके लिए कौन मुफत में खुल जाता है हर एक साधन को निकालने का चढावा चढाया जाता है. गेट संख्या 22 के अन्दर जहाँ तक भी नजर जाती है पत्थर के पहाड नजर आते है. इस प्रतिबंधित क्षेत्र में सफेद पत्थर की 180 के करीब खाने है. जिनमें से पत्थर को निकाला जाता है. इस बावत जब वन विभाग की अपनी आफिस में तख्त पर लेटे फौरेस्टर सूर्यपाल सिंह से हमने सच्चाई जानने की कोशिश की तो उनका कहना था कि ‘‘गेट संख्या 22 के अन्दर का क्षेत्र वन रक्षित है उसमें खनन हो रहा है हम कर भी क्या सकते है हमारे पास संसाधन ही नही हैं’’ उनसे जब लेन देन के बारे में पूछा तो उन्होने खुद को पाक साफ बताते हुये इतना तो स्वीकार कर ही लिया कि बिना आग के धुआँ दिखाई नहीं देता है’’। रैंजर ईश्वर सिंह मीणा का कहना था कि‘‘ अवैध खनन करने वाले लोग इस काम को सामूहिक रूप से अंजाम देते है कई बार स्थिति हमारे लिए भी जान लेवा हो जाती है। हमारे लिए भी सुरक्षा का खतरा बना रहता है फिर भी हम लोग कार्यवाही करने का प्रयास करते है।स्थानीय पुलिस का सहयोग हमें कम ही मिल पाता है। गार्डो की मिली भगत से रेल्वे का फाटक 22 बंद रखा जाता है जिससे जब भी कोई कार्यवाही हो तो उसकी सूचना खनन कर्ताओं को मिल जाये’’।
इस अवैध खनन से किसको क्या,कितना मिल रहा हैं।
अवैध खनन हो रहा है इस सच्चाई को कोई नहीं नकार रहा है. लेकिन ये खनन हो क्यों और कैसे रहा है इसे जानना जरूरी है. पत्थर बेशकीमती है जिसकी बाजार में जबरदस्त माँग है. ये अवैध खनन विल्कुल नीचे से बहुत उपर तक सबको उनका हिस्सा मिल रहा है। फर्क इतना है कि नीचे लेने वाले लोगों को दिख रहे है। क्षेत्र में इस काम से जुडे लोगों को कहना है कि एक ट्रेक्टर खान से रीको बयाना तक पहुँचने के बीच में चौथ पार्टियों की लंबी फेहरिस्त है जो रात भर नमक के दरोगा की तरह जागकर अपनी डयूटी को अंजाम देते है। केवल धन और धर्म की लडाई नहीं होने देते है। यहाँ लक्ष्मी को धर्म से लडना नहीं पडता। पहले से जो तय हो जाता ड्राइवर उसे बाँटता चला आता है और ये नमक के दरोगा इसी उगाई के लिए जागकर रखवाली करते है. राशि का बँटवारा कुछ इस प्रकार से लोगों ने बताया. 200 रूप्ये रैंजर बयाना,100 थाना रूदावल,100 वन विभाग पहाडपुर,100 थाना बयाना,50 सैल टैक्स नाका रूदावल,50 खनिज नाका, 50 खेरिया मोड चौकी और पचास रूप्ये पुलिस गस्त पार्टी बयाना. इन सब के अलावा कुछ ताकत भर बाहुबली भी इसी अवैध खनन को लेकर अपनी दुकान चला रहे है। इस अवैध खनन के भरोसे ही देखते देखते कुछ ही दिनों में बयाना रीको क्षेत्र में करीब 400 विशालकाय पत्थर कटिंग की ईकाईयाँ स्थापित हो गई है जो रात दिन चलकर माँग की पूर्ति कर पा रही है. एक इकाइ की स्थापना खर्च लगभग एक करोड बताया जाता है. इतना ही नहीं अवैध खनन में लगी मशीनों से मासिक चौथ की बसूली की जाती है. इस खनन क्षेत्र में करीब 60 क्रेन,10 एलएनटी और 100 कम्प्रेशर दिन रात काम कर रहे है। इन संसाधनों से भी विभागीय चौथ निर्धारित है।जो पाँच से दस हजार के बीच बताई। इस क्षेत्र से करीब 300 से अधिक ट्रेक्टर रात दिन अवैध ईमारती पत्थर को ढोने में लगे रहत है। इन के अलावा ट्रक और गाडियाँ भी कहाँ पीछे है।
जन प्रतिनिध क्यों नहीं उठाते है विधानसभा में मुददा
पिछले विधानसभा सत्र में स्थानीय विधायक ने अपनी आवाज जम कर बुलंद की। अपनी महावर काWलौनी की बिजली की समस्या रही हो,रसद विभाग के शुद्व के लिए युद्व में भ्रष्टाचार का मुददा या फिर विधानसभा क्षेत्र की खस्ता हाँल सडको को लेकर बबाल मचाया हो। लेकिन क्षेत्र के अवैध खनन को लेकर कोई आवाज नहीं सुनाई दी। इसे लेकर लोगों में खूब चर्चा है। लोग तो यहाँ तक कहते है कि अपने घर के सामने से आते जाते रात दिन सैकडों पत्थर से लदे ट्रक ट्रेक्टर उन्हें दिखाई क्यों नहीं देते है। बयाना रूपवास विधायक का आवास रीको क्षेत्र के बिल्कुल ही सन्निकट है।
पत्थर के इस धंधे में है साइलेंट पार्टनरों का जोर पत्थरों के अवैध खनन से लेकर बडी बडी मशीनों की स्थापना तक इस धंधें में पैसे की मोटी लागत है। क्रेशर हो या फिर गेंगसा। किसी की भी लागत एक करोड से कम नहीं बताई जाती है। ऐसे में कई सवाल सामने आते है। इतनी लागत कहाँ से और कैसे लगाई जा रही है। बैंक का लोन एक बहाना भर है। जानकारी में ये बात सामने आई कि इस धंधे में साइलेंट पार्टनर बहुत है। वो उची पहुँच और रसूख वाले लोग है जो केवल उपर के मामले देखते है। कुछ ने पैसा लगाकर खुद को पर्दे के पीछे कर रखा है तो कुछ केवल रसूखों के चलते पार्टनर है। पत्थर के इस पूरे अवैध धंधो में उन पैसों की चर्चा सुनाई पडती है जिन्हें भारत सरकार ने भी चलने से रोक दिया है। कोई चार पैसे का पार्टनर है तो किसी का हिस्सा दस पैसे है। कोई अठन्नी का हिस्सेदार है तो किसी समूह में सब एक समान चवन्नी का मालिकाना हक रखते है। जिनमें से अधिकांश साइलेंट और कुछ सामने नजर आते है।
अवैध खनन,रीको क्षेत्र के मुकदमें नहीं होते दर्ज
ये मानना ही अपने आप में बेमानी होगा कि इतने बडे स्तर,संख्या में चल रहे इस पत्थर के गोरखधधे में दुर्घटनाऐं न होती हों। हाँ जरूर होती है। लेकिन आपको उनका पुलिस में मुकदमा दर्ज नहीं के बराबर ही होता है। पहले तो पुलिस ही दिलचस्पी नहीं लेतीं। दूसरा बडा कारण सौदेबाजी का है। इन क्षेत्रों में ऐसे लोगों का एक सक्रिय समूह है जो दुर्घटना या उसमें हुई मौत के बाद सौदेबाजी के लिए मौके पर तुरंत ही पहुँच जाता है।
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- सुदर्शन का (कु) दर्शन
- सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
- सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
- नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
- अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
- अपने होने पर ही हैरान
- भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
- एनसीपी के 'दादा' का दांव
- पीएमओ वाले पृथ्वीराज
- गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?



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जिन्दा लोगों की तलाश! मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!
काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग भी मिल सके कि तो कम नहीं होगा।
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उक्त शीर्षक पढकर अटपटा जरूर लग रहा होगा, लेकिन सच में इस देश को कुछ जिन्दा लोगों की तलाश है। सागर की तलाश में हम सिर्फ सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है।
आग्रह है कि बूंद से सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो निश्चय ही विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।
हम ऐसे कुछ जिन्दा लोगों की तलाश में हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो, लेकिन इस जज्बे की आग से अपने आपको जलने से बचाने की समझ भी हो, क्योंकि जोश में भगत सिंह ने यही नासमझी की थी। जिसका दुःख आने वाली पीढियों को सदैव सताता रहेगा। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।
इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।
अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।
अतः हमें समझना होगा कि आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।
शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदशोर्ं को सामने रखकर 1993 में स्थापित-ष्भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थानष् (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-
सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, राष्ट्रीय अध्यक्ष
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