Home | पर्यावरण | पाँचना से फोन पर पानी पहुँचा घना

पाँचना से फोन पर पानी पहुँचा घना

image गंभीर नदी के रास्ते पक्षी विहार पहुँचता पानी

घना पक्षी विहार को इस बर्ष पानी मिल गया है। करौली जिले के पाँचना बाँध से छोडा गया पानी अब भरतपुर की सीमा में पहुँच गया है। इस पानी के बाद संभावना है घने का ताज बच जाये। पानी से रिक्शा चालकों से लेकर होटल मालिक सब प्रसन्न है, लेकिन इस पानी पहुँचने के कारणों में भरतपुर सांसद का करौली कलक्टर को फोन करना चर्चा का विषय बना हुआ है।

राजस्थान के पूर्व में स्थित भरतपुर जिले के घना पक्षी विहार को विश्व प्राकृतिक धरोहर का दर्जा प्राप्त है। ये पक्षी विहार साईबेरियन सारसों को लेकर प्रसिद्व रहा है। आज वो साईबेरियन सारस तो यहां नहीं आते। देशी परिंदों ने भी इससे मुंह मोड़ लिया है। यही कारण है कि पिछले कुछ समय से लगातार उसे ये चेतावनी दी जा रही है कि यदि पानी की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई तो उसका ये ताज छिन जायेगा। रियासत काल से लेकर आज तक राजनेताओं ने भले ही चुनावों में घने के पानी के नाम पर वोट मांगे हों पर इस ओर किसी का कोई ध्यान नहीं गया। घना पक्षी विहार के लिए पानी का स्थायी बंदोवस्त कभी नहीं हो पाया। यही कारण है कि इस पक्षी अभ्यारण्य का स्वरूप दिनों दिन बिगडता ही चला गया। अब तो नौबत ये आ गई कि आखिरी चेतावनी भी जारी हो गई।

ऐसे में आखिर भरतपुर के पूर्व सांसद महाराजा विश्वेन्द्र सिंह को ही इस बाबत चिंता करनी पडी। और करौली कलक्टर नीरज के पवन को उन्होंने 26 अगस्त को एक फोन किया। उस फोन के दूसरे दिन ही 27  अगस्त को कलक्टर साहब से पांचना बांध के गेट पर खडा होकर पानी को हरी झंडी दिखा दी। करौली से भरतपुर गंभीर नदी के रास्ते पानी आखिर भरतपुर पहुंच गया। घना पक्षी विहार को पानी मिल जायेगा। परिंदों की किलकारियां फिर से गूंज उठेगी। झीलों में जीवन आवाद हो जायेगा। लेकिन इस बीच एक सवाल लोगों को परेशान कर रहा है ‘ क्या कलक्टर सहाब इस एक फोन का ही इंतजार कर रहे थे’। क्या उन्हें फोन के बाद ही लगा कि घने को पानी की सख्त जरूरत है।

पांचना बांध बनने के बाद से ही करौली और भरतपुर के बीच पानी का ये मुददा बार बार उठता रहा है। इस बांध के बाद से ही गंभीर नदी बेजान हो गई है। कभी बरसात के मौसम में क्षेत्र भर को जीवन देने वाली गंभीर नदी अब सूखी पडी रहती है।इस नदी के आस पास बसे गांवों के लोग पांचना बांध से पानी की मांग हमेशा ही करते चले आ रहे है। बीते समय कई बार ये मांग जोर शोर से उठी भी मगर राजनैतिक उदासीनता के चलते ऐसा नहीं हो पाया। घना पक्षी विहार के लिए प्रतिवर्ष 550 एमसीएफटी पानी की जरूरत होती है। इस क्षेत्र में लगभग एक दशक से कम बर्षा के चलते पक्षी विहार को पानी नहीं मिल पा रहा है। बर्ष 2008 में भी एक बार घना के लिए पानी की माँग उठी थी। उस समय भी बर्षा कम होने के चलते घना के जीबन को ग्रहण लग गया था। इस बार भी अनेकों देशी विदेशी परिंदों ने उत्तर प्रदेश के आगरा के पास की कीठम झील की ओर पलायन करना आरम्भ कर दिया। यही कारण रहा कि घने को लेकर लोगों की चिंताऐं उभर कर सामने आई।

सरकार ने भी पानी छोडकर एक पंथ से कई काजों की पूर्ति की है। एक ओर करौली जिले के लोगों को गुडला लिफट परियोजना के तहत इंटैक वैल बनाने के लिए पानी छोडना जरूरी बताकर संतुष्ट किया है वही भरतपुर जिले के लोगों को घने के लिए पानी छुडवा देने की बात कहकर संतुष्ट कर दिया है। इतना ही नहीं पूर्व सांसद और अब कांगेसी नेता महाराजा विश्वेन्द्र सिंह को उनके फोन पर पानी छुडवाकर संतुष्ट करने की कोशिश की हैं। वैसे पानी पर सरकारों और उनके कारिंदों की ये राजनीति कोई बहुत अच्छी बात नहीं है।

27 अगस्त को पानी को हरी झंडी दिखाने के बाद कलक्टर ने भरतपुर की यात्रा की। कलक्टर नीरज के पवन वैसे तो भरतपुर आते रहते है मगर इस बार नजारा कुछ बदला हुआ था। लोगों ने जगह जगह उनका माला और फेंटों से स्वागत किया। नीरज के पवन वैसे प्रशिक्षण काल में भरतपुर रहे है। उनका यहाW रहना कोई आम अधिकारी का रहना नहीं रहा। वो अपने काम करने के तरीकों और शैली को लेकर खासें चर्चित माने जाते है। लोगों की माने तो सांसद के फोन और पानी के छूटने के पीछे की सच्चाई प्रशासनिक से व्यक्तिगत राज है। पूर्व सांसद से नीरज के पवन की अंतरगता और उनके भरतपुर आने के कयासों में भी सच्चाई है। सूत्रों की माने तो बहुत जल्दी ही आईएसएस अधिकारियों की तबादला सूची आने वाली है। इस तबादला सूची में नीरज के पवन भरतपुर के कलक्टर होगें ऐसे कयास बेमानी नहीं कहे जा रहे है।

 

Subscribe to comments feed Comments (0 posted):

total: | displaying:

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image राजीव शर्मा राजीव शर्मा राजस्थान में रहकर मुक्त पत्रकारिता कर रहे हैं.इससे पूर्व कइ अखवारों के लिए रिपोटिंग कर चुके हें। राजनीति के अलावा पानी-पर्यावरण के मुद्दे पर संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए प्रयासरत। विस्फोट के लिए राजस्थान से नियमित लेखन और रिपोर्टिंग. rsmediaraj@gmail.com
Rate this article
0
More from पर्यावरण
Previous
image
चिकित्सक के अभाव में बागी 'शेरा' मौत के कगार पर
लखनऊ प्राणि उद्यान से आए गजराज सुमित की अव्यवस्थाओं और समुचित उपचार के अभाव में विगत माह जुलाई में हुई असमय लाचारी और बेबसी वाली दर्दनाक मौत दुधवा नेशनल पार्क के इतिहास का काला अध्याय बनी ही साथ में दुधवा की व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह भी लगाया। इसके बाद भी दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने ऐसा लगता है कि कोई उससे सबक नहीं लिया है। शायद इसी का परिणाम है कि मेरठ से लाए गए बागी हाथी 'शेरा' के जिन्दगी की जीवन की डोर भी धीरे-धीरे संकुचित होने लगी है।...
image
पाँचना से फोन पर पानी पहुँचा घना
घना पक्षी विहार को इस बर्ष पानी मिल गया है। करौली जिले के पाँचना बाँध से छोडा गया पानी अब भरतपुर की सीमा में पहुँच गया है। इस पानी के बाद संभावना है घने का ताज बच जाये। पानी से रिक्शा चालकों से लेकर होटल मालिक सब प्रसन्न है, लेकिन इस पानी पहुँचने के कारणों में भरतपुर सांसद का करौली कलक्टर को फोन करना चर्चा का विषय बना हुआ है।...
image
यमुना में पानी बढ़ा है, बाढ़ नहीं आयी!
24 अगस्त 2010. पुरानी दिल्ली के इलाके में पुराने लोहेवाले पुल के आस पास टीवी चैनलों के ओवी वैन की लंबी कतारें खड़ी हैं. हर बड़े चैनल की ओवी वैन वहां मौजूद हैं और उन वैन में लगे हुए जनरेटर पूरी क्षमता से चल रहे हैं. संकेत साफ है कि लाइव वगैरह भी किया जा रहा है. कुछ ओवी वैन में भले ही ड्राइवर सीट पर ही सो रहे थे लेकिन रिपोर्टर और कैमरामैन दिल्ली में आयी "बाढ़" को कवर करने के लिए पूरी तत्परता से तैनात थे. ...
image
मुंबई के पर्यावरण का डूबता जहाज
मुंबई के समुद्री तट के पास जवाहरलाल नेहरु पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) से करीब 5 (नॉटिकल) समुद्री मील की दूरी पर अरब सागर में 7 अगस्त शनिवार की सुबह 9.30 बजे पनामा के दो मालवाहक जहाज एमएससी चित्रा और एमवी खलिजिया की जोरदार टक्कर हुई इस हादसे में जहाज में सवार 33 क्रू मेंबरों को बचा लिया गया किन्तु इस टक्कर से एमएससी चित्रा के ईंधन टैंक में दरार आ जाने से जहाज (एमएससी चित्रा) डूब रहा है....
image
मानसून की टेढ़ी चाल
मानसून की टेढ़ी चाल से भारत में सभी हतप्रभ हैं। पिछले कुछ वर्षो से जिस तरह से मानसून दगा दे रहा है वो भारत जैसे कृषि प्रधान देश में भारी चिंता का विषय हैं। सामान्यतः मानसून शब्द का उपयोग भारी वर्षा के पर्याय के रूप में होता है, लेकिन वस्तुतः यह हवा कि दिशा बदलने का प्रतीक है, जिससे वर्षा कि सम्भावनाएं ज्ञात होती है।...
image
गिद्ध के बाद अब सारस पर संकट
सारस पक्षी पर आया संकट एक तरह से गिद्ध पर आये संकट से किसी मायने मे कम नही लग रहा है. इस बात को वन अधिकारियों के अलावा पर्यावरणीय संस्था से जुड़े हुए लोग भी मानने लगे है.सारस पक्षी की गणना को लेकर कई लोग सवाल उठाने लगे है कि जब सारस के संरक्षण की हकीकत मे जरूरत थी उस वक्त वन अमले ने कोई काम नही किया अब लकीर पीट कर दिखवा करने की कोशिश की जा रही है. ...
image
अरावली में अवैध खनन का गोरखधन्धा
राजस्थान की पहचान वैसे तो रेगिस्तान से है। लेकिन अरावली की श्रृखलाऐं भी उसके बहुत बडे हिस्से में फैली हुई है। अभी तक अरावली की इन श्रृखलाओं को हरा भरा करने के नाम पर देश और विदेशी मदद के पैसे को अकेला वन विभाग हडप करता रहा। अब इन श्रृखलाओं से पत्थर और लकडी का दोहन सरकार के दर्जनों विभाग और उनकी आड़ में खुद सरकारें कर रही है। राजस्थान के भरतपुर जिले में अवैध खनन के गोरखधंधे की पडताल करती एक रिपोर्ट। ...
image
पन्ना के बाघों का वंशनाश
पन्ना नेशनल पार्क के जंगल का गहरा भूरा रंग अब मानसून की आहट के साथ हरे रंग में बदल गया है, यहां का धुंधवा पहाड़ बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन और उसके नवजात 4 बच्चों की अठखेलियों से पुन: पुलकित हुआ था और पार्क के फील्ड डायरेक्टर व डीएफओ हर्ष व्यक्त कर पत्रकारों को मिठाइयां भी खिला चुके हैं पर वास्तव में पन्ना क्षेत्र की जनता को फिलहाल कोई विशेष हर्ष नहीं है। उनके लिये दु:ख की बात यह है कि हमारे इलाके के जन्मजात बाघ समाप्त हो गये हैं। अब जो भी बाघ-बाघिन हैं, वे बाहर से लाये जा रहे हैं।...
image
किस दिन मनाएं हम अपना पर्यावरण दिवस?
पर्यावरण दिवस का आयोजन 1972 के बाद शुरू हुआ। 5 से 15 जून 1972 को स्वीडन की राजधानी स्टाकहोम मेें मानवी पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन हुआ। जिस में 113 देश शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन की स्मृति बनाए रखने कि लिए 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस घोषित कर दिया गया। सवाल तो यह है कि पर्यावरण दिवस के इस दिन का हमारे से क्या रिश्ता? क्या 1972 के बाद लगातार पर्यावरण दिवस मना लेने से हमारा पर्यावरण ठीक हो रहा है? या फिर ठिकाने लगाया जा रहा है? यह विवेचना आप करिए।...
image
जान का दुश्मन बना इलेक्ट्रानिक कचरा
आज के इस आधुनिक युग में जब संचार क्रांति के परिणाम परिलक्षित हो रहे हैं। ऐसे समय में यह ध्यान देना और सोचना भी बहुत आवश्यक है कि, क्या यह संचार क्रांति के अत्याधुनिक उपकरण कहीं मानव जीवन से खिलवाड़ तो नहीं कर रहे, कहीं ऐसा न हो कि आधुनिकता की दौड़ में भागते-भागते हमारा दम निकल जाए ।...
image
संकट में है सुजान गंगा
राजस्थान के भरतपुर जिले में एक सुजान गंगा है. ऐतिहासिक महत्व की ये नहर अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष के साथ लोगों के लिए मुसीबत बन गई है. अब एक बार फिर न्यायालय ने सुजान गंगा के उद्धार के लिए हस्तक्षेप किया है. देखना ये है कि कोर्ट की फटकार के बाद सरकारी अमला कुछ करता है या फिर वो ही ढाक के तीन पात वाली बात होकर रह जायेगी....
image
रिहंद का होना, रिहंद का रोना
इधर गर्मी का पारा चढ़ रहा है उधर रिहंद का कंठ सूख रहा है. रिहंद बांध जलाशय जिसे गोविन्द वल्लभ पंत जलाशय भी कहते हैं पिछले कुछ सालों से संकट का शिकार है. रिहंद का पानी विषैला हो चुका है. रिहंद का पानी पीने के लिए रोक लगा दी गयी है. दुर्भाग्य देखिए कि जिन बिजलीघरों के कारण रिहंद का पानी विषाक्त हुआ अब उन्हीं बिजलीघरों के लिए रिहंद का विषाक्त पानी भी सूखने लगा है. लगभग 15,000 मेगावाट के बिजलीघरों के लिए प्राणवायु कहे जाने वाले रिहंद बाँध की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि आने वाले दिनों में रिहंद के पानी पर निर्भर बिजलीघरों में उत्पादन ठप्प हो सकता है और उत्तर भारत में संभावित बिजली संकट की वजह बन सकता है. ...
image
यूरोप में उठे धुएं के गुबार की चुनौती
15 अप्रैल गुरूवार को ”अयाजाफजलाजोकुल” ग्लेशियर के नीचे स्थित ज्वालामुखी विस्फोट ने यूरोप सहित सारे विश्व को चिंता और परेशानी में डाल दिया है । यूरोप में आईसलैंड जैसे छोटे से टापूनुमा देश में स्थित यह ज्वालामुखी एक महीने से कम समय के अंतराल में दूसरी बार फटा है, और इस दूसरे विस्फोट से जो लावा निकला है, उसकी तीव्रता से सभी अचंभित और आश्चर्यचकित हैं। ...
image
हमें चाहिए नयी जमीन, नया जीवन
धरा को वसुंधरा बनाये रखने के लिए हमें व्यापक बदलाव की ओर कदम उठाना होगा. दुनिया के नीति निर्धारकों को यह सोचना होगा कि मनुष्य की हर समस्या का समाधान आर्थिक अधिनायकवाद में निहित नहीं है. व्यक्ति की स्वतंत्रता, उसकी मूल जरूरत इस आर्थिक अधिनायकवाद के भरोसे पूरी नहीं की जा सकती. हमें नयी जमीन चाहिए. हमें नया जीवन चाहिए. हमें वसुधा को कुटुंब स्वरूप चाहिए जिसमें हम सब साथ मिलकर अपना जीवन जी सकें. ...
image
गैंडो के सिर पर प्रशासन की आफत
यूपी के एकमात्र दुधवा नेशनल पार्क में चल रही विश्व की अद्वितीय गैंडा पुनर्वास परियोजना अफसरों की लापरवाही एवं उदासीनता का शिकार होकर कुप्रवन्धन की पर्याय बन गयी है । अब्यवस्थाओं के कारण उर्जाबाड़ से संरक्षित वनक्षेत्र में रहने वाले तीस सदस्यीय गैंडा परिवार के पांच सदस्य करंटयुक्त फैंसिंग तोड़कर बाहर जा चुके हैं। यह बात जानकर भी पार्क प्रशासन के अफसर गैंडों की सुरक्षा की कोई पुख्ता दीर्घकालिक व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। इससे उनके जीवन पर संकट मंडराता रहता है। इसके अतिरिक्त एक ही नर गैंडा की संतानों का परिवार होने से उनके ऊपर अनुवांषिक प्रदूषण यानी अन्तःप्रजनन के खतरे की तलवार भी लटक रही है।...
image
ग्रीन कोर्ट में भी बाघ बहादुर को न्याय नहीं
बाघों के गणना का कार्य जारी है। गणना कार्य के लिए जुटाये गए संकेतों के समग्र अध्ययन के आधार पर ठोस निष्कर्ष निकालने से पहले ही किसी क्षेत्र में कम तो किसी क्षेत्र में ज्यादा बाघ होने की खबर भी आ रही है। तरह-तरह के कयास हैं। कोई कह रहा है, बाघों की संख्या वर्तमान संख्या 1411 से कम होगी। ...
image
पर्यावरण के लिए हिन्दी चीनी भाई-भाई
बीते सप्ताह भारत और चीन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैश्विक तापमान के विरूद्ध की जा रही लड़ाई में शामिल होने का ऐलान शायद इस संघर्ष में अब तक की सबसे बड़ी सफलता है । निःसंदेह भारत और चीन दुनिया की दो बड़ी अर्थ व्यवस्थाओं में शामिल हैं । आर्थिक विकास सीधे-सीधे औद्योगिकरण से जुड़ा है, और यह औद्योगिकरण ही दुनिया भर में वैश्विक तापमान को बढ़ाने वाली ग्रीन हाऊस गैसों का प्रमुख जनक है।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2