पर्यावरण
जंगल काटकर 'फारेस्ट' का निर्माण
दिल्ली के दक्षिणी सिरे पर बसा हरियाणा का सूरजकुण्ड इलाका बिल्डरों की नयी पनाहगाह के रूप में उभरा है. दिल्ली के बड़े बिल्डर अपेक्षाकृत हरे भरे इस इलाके की हरियाली को करोड़ों में सौदा कर रहे हैं. सूरजकुण्ड से आगे फरीदाबाद के लिए चलते हैं तो सड़क के दोनों ओर जारी निर्माण कार्य देखकर आप हतप्रभ रह जाएंगे. जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है, पहाड़ों को मनमाने तरीके से तोड़ा जा रहा है और दिनभर सैकड़ों ट्रक यहां से निकलनेवाले "मलबे" को यहां से सूदूर फेंकने का काम कर रहे हैं. हरियाली को हटाकर खुशहाली का दावा करनेवाले बिल्डरों में ओमेक्स प्रमुख है जिसका बहुचर्चित फारेस्ट प्रोजेक्ट यहीं आकार ले रहा है.
मानसून की मार से याद आयी परंपरागत खेती
मानसून में देरी से हिली सरकार ने तमाम तरह के राहत इंतजामात का ऐलान किया है। लेकिन हकीकत ये है कि ये इंतजाम ना सिर्फ फौरी हैं, बल्कि लोकलुभावन ज्यादा हैं। किसी का ध्यान अपनी पारंपरिक और सतत विकास वाली खेती की ओर नहीं है।
खेती खेत रहे इससे पहले
समय आ गया है कि हम इस कथित वैज्ञानिक या आधुनिक खेती की सार्थकता पर फिर से विचार करें और देर होने से पहले भारत में हजारों साल से प्रचलित जैविक (देसी) खेती की ओर लौट चलें। भारत के संदर्भ में जब हम जैविक खेती की बात करते हैं तो इसका मतलब एक ऐसी कृषि व्यवस्था से है जो मोटे तौर पर आत्मनिर्भर रहा है जहां खाद-बीज से लेकर तमाम साधन स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो जाता है। चूंकि पारम्परिक खेती में बाजारू चीजों का उपयोग न के बराबर होता है इसलिए इसमें लागत भी कम आती है। ...पक्षियों के हिस्से का पानी पी गया इंसान
पानी की किल्लत हो तो इंसान बोतलबंद पानी खरीद सकता है या फिर सरकार को बाध्य कर सकता है कि व्यवस्था उनके लिए पानी की व्यवस्था करे. लेकिन पक्षियों का क्या? पानी तो पक्षियों को भी चाहिए. लेकिन मनुष्य की स्वार्थ बुद्धि कितनी जटिल हो गयी है कि उसने अपने अलावा प्रकृति में सबके लिए जीवन के दरवाजे बंद कर दिये हैं. राजस्थान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाला केवलादेव घना पक्षी विहार अब अपने अस्तित्व के लिए संधर्ष करता नजर आ रहा है इसके पीछे का कारण है पानी, जिस पर होने वाली राजनीति ने पक्षियों का स्वर्ग कही जाने वाली इस प्राकृतिक संपदा के समक्ष गम्भीर संकट खडा कर दिया है।...पानी नहीं पिला सकते तो सरकार भी नहीं चला सकते
28 अप्रैल को माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक आदेश दिया है जिसके तहत न्यायालय ने भारत सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा है कि सबको पानी नहीं पिला सकते तो फिर सरकार भी नहीं चला सकते. माननीय न्यायलय ने भारत सरकार से कहा है कि जल्द से जल्द बरसाती पानी को रोकने के लिए देशज और स्थानीय ज्ञान को प्रमुखता देते हुए योजना तैयार करे. न्यायालय ने जल को मौलिक अधिकार बताते हुए सबको पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। ...बाघ न बचाने की राजनीति
पन्ना में 22 बाघ हैं, पन्ना में सिर्फ दो बाघ हैं. दोनों ही बातें सही हैं. लेकिन यह कैसे मुमकिन है? देहरादून स्थित वाईल्डलाईफ इंस्टीच्यूट ऑफ इंडिया की हालिया रिपोर्ट में यह तथ्य स्वीकार किया गया है कि पन्ना में बाघों की संख्या में तेजी से कमी आई है. लेकिन वहीं मध्यप्रदेश सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है. वह अब भी पन्ना में 22 बाघ होनें की जिद पर अडा़ हुआ है. अब एक और बानगी देखिए. एक ट्रेवेल वेबसाईट घुमक्कड़.कॉम पर कुमकुम दासगुप्ता, पन्ना के बारे में अपना संस्मरण लिखने के दौरान यह बताना नहीं भूलते, “मुझे वहां कोई बाघ नजर नहीं आया और न ही मुझे यह लगा कि वहां कोई बाघ हो सकता है. तो आखिर क्या वजह है कि सरकार इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर रही है?”
हमारी ग्रीन पार्टी कहां है?
इस आमचुनाव में दो सवाल ऐसे हैं जिनके बारे में कोई जिक्र नहीं हो रहा है. पहला सवाल, ग्रीन पार्टी की बात हम कब करेंगे और दूसरा सवाल क्या पर्यावरण कभी चुनावी मुद्दा बन पायेगा? दोनों ही सवालों के जवाब एक सिरे से गुंथे हुए है. भारतीय लोकतंत्र और भारतीय पर्यावरण दोनों ही ऐसे विषय हैं जिनके बारे में एक साथ सोचने का वक्त आ गया है क्योंकि दोनों के सामने एक ही प्रकार की चुनौती है.
पेड़ भी करते हैं पिण्डदान
परिवार की परिभाषा के अनुसार अपने जनक को मुखाग्नि देने का अधिकार पुत्र का है। पुत्र ही तर्पण करता है। शास्त्रों ने इस मोक्षगामी तर्पण हेतु `तरूपत्रक´ का विधान दिया है और कहा है कि `पेड़ भी कर सकते हैं तर्पण'। पदम पुराण (सृष्टि खण्ड) में लिखा है कि वृक्ष, पुत्रहीन पुरुष को पुत्रवान होने का फल देते हैं, इतना ही नहीं वे अधिदेवता रूप में तीर्थों में जाकर वृक्ष लगाने वालों को पिण्डदान भी देते हैं।
झील की मौत पर जश्न की तैयारी
सूरज की तपिश बढ़ने के साथ ही भोपाल की बड़ी झील का आकार घटता जा रहा है । तालाब की बदहाली पर आँसू और गेंती-फ़ावड़ा लेकर श्रमदान में पसीना बहाने वाले तो कई मिल जाएँगे, लेकिन इन हालात के मूल कारणों को ना तो कोई जानना चाहता है और ना ही इन पर बात करना । जैसे - जैसे तालाब का अस्तित्व सिमट रहा है , झील की मौत का जश्न मनाने वालों की बाँछें खिलने लगी हैं ।
दामोदर का पानी मटमैला क्यों है?
रानीगंज कोलफील्ड पश्चिम बंगाल और झारखण्ड में फैले कोयलांचल का ही एक हिस्सा है. रानीगंज कोलफील्ड बर्दवान जिले के दो अनुमंडलों आसनसोल और दुर्गापुर में फैला है. इस इलाके में ९० कोईलरी और अन्य खदान परियोजनाएं चल रही हैं. कोयलांचल का ही प्रभाव है कि है इस इलाके में तीन बड़े इस्पात संयत्र काम करते हैं, चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, डीपीएल और डीटीपीएस के थर्मल पावर प्लांट के अलावा १८ से अधिक स्पंज आयरन, जूट, अल्युमिनियम, सीमेन्ट जैसी उत्पादक ईकाईयां हैं. कोईलरी को छोड़ दें तो उद्योग का विकास पिछले तीन दशक में ही हुआ है. तीन दशक के इस विकास ने आज इलाके के तीस लाख लोगों के जीवन को संकट में डाल दिया है.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...


