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पर्यावरण

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ताल नहीं सूख रहा है भोपाल

`जब तक भोपाल ताल में पानी है, तब तक जियो।´ आशीर्वाद देते समय इन शब्दों का प्रयोग बड़े-बूढे करते रहे हैं। क़रीब एक हज़ार साल पुराने `भोपाल ताल´ का जिक्र लोगों की इस मान्यता का गवाह है कि बूढ़ा तालाब कभी सूख नहीं सकता। लेकिन शहर की गंदगी, कचरे और मिट्टी जमाव के कारण बूढ़ा तालाब 31 वर्ग किलोमीटर के विशाल दायरे से सिमटकर महज 7 वर्ग किलोमीटर में रह गया है। आज भोपाल ताल के सूखने से मानों हर भोपाली सूख रहा है।
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वरूणा की करूणा

विश्व की सांस्कृतिक राजधानी प्राच्य नगरी वाराणसी को पहचान देने वाली वरूणा नदी तेजी से समाप्त हो रही है। कभी वाराणसी व आसपास के जनपदों की जीवनरेखा व आस्था की केन्द्र रही वरूणा आज स्वयं मृत्युगामिनी होकर अस्तित्वहीन हो गयी है।
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संकट में भी शुतर्मुर्गी रवैया

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पिछले महीने (दिसंबर 2008) कोई एक सप्ताह मैंने पोनान में बिताए. वहां क्लाईमेट चेंज को लेकर एक बैठक थी. वहां मैंने अनुभव किया कि दुनिया संकट में है यह सभी जानते हैं लेकिन दुनिया के संकट से बड़ा संकट यह है कि अभी भी लोग सीधे तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार करने से भाग रहे हैं. इस संकट से निपटने की कोशिश तो अभी भी बहुत दूर की कौड़ी नजर आ रही है. सब स्वीकार करते हैं कि क्लाईमेट चेंज वास्तविकता है....
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तमनार की मार

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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और तमनार जिले के कुछ हिस्से बिजली की बड़ी कीमत चुका रहे हैं. लेकिन कीमत चुकाने वाले कभी खबर नहीं बनते, खबर बनती है कंपनी. पिछले महीने जिंदल पावर लिमिटेड की एक खबर बनी थी कि वह अगले पांच सालों में तमनार पावर प्लांट में १००० मेगावाट से ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं करेगी. इस एक हजार मेगावाट की वृद्धि के बाद तमनार पावर प्लांट की हैसियत बढ़कर ३४०० मेगावाट हो जाएगी. जिंदल पावर के मालिक और सासंद नवीन जिंदल ने तब कहा था कि इस सब पर कोई पांच हजार करोड़ रूपये का निवेश आयेगा. ...
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प्रकृति की आहें, फिर भी सूनी हैं राहें

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भरतपुर लुट गया है. यह लूट यहां के विश्व प्राकृतिक धरोहर की है. हालांकि विश्व प्राकृतिक धरोहर के अपने तमगे को एक बार फिर से भले ही भरतपुर स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान ने कुछ समय के लिए बचा लिया हो लेकिन इस साल न पक्षियों ने इधर का रुख किया है और न ही उन्हें देखने आनेवाले सैलानियों ने. इससे ऐसा आभास होना वेमानी नही रह जाता कि यदि बहुत जल्दी इस दिशा में सार्थक और कारगर कदम नही उठाये गये तो पक्षियों के स्वर्ग कही जाने वाली यह विरासत केवल अपने नाम तक ही सिमट कर रह जाऐगी जिसके दुष्परिणाम पर्यटन के लिहाज से भरतपुर ही नही पूरे प्रदेश को भुगतने पडेंगे । ...
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उत्तराखण्ड में बढ़ी तेंदुओं की तादात

वन्य प्राणियों को चाहने वालों के लिए उत्तराखण्ड की वादियां अपने आप ही आकर्षित कर रही हैं वहीं गजराजों व विभिन्न जातियों के जंगली जानवरों के साथ गुलदारों को देवभूमि का जंगल भा गया है. तभी तो एक वर्ष में करीब 70 तेंदुओं के मरने के बावजूद इनके कुनबे में करीब साढ़े तीन सौ का इजाफा हुआ है। पिछले साल के अंत में कराई गई गणना के मुताबिक प्रदेश में तेंदुओं की संख्या 2343 हो गई है।
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गिद्ध लौट आये हैं

पर्यावरण के खिलाफ लगातार मिलती बुरी खबरों के बीच यह एक अच्छी खबर है कि गिद्ध लौट आये हैं. भरतपुर के इस बयाना इलाके में वे दुर्लभ गिद्ध दिखाई दे रहे हैं जो कोई दशक भर पहले यहां से गायब हो चुके थे. मानवीय अपराधों के शिकार गिद्धों के इस इलाके में दोबारा लौट आने से प्रकृति प्रेमियों ही नहीं सामान्य पशुपालकों में भी आशा की नयी उम्मीद जागी है. गिद्धों का लौट आना सबके लिए शुभ संकेत है.
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यह पर्यावरण किसका है?

कनाडा स्थित इटीसी ग्रुप ने कल एक रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट का नाम है- हू ओन्स नेचर? ४८ पन्नों की यह रिपोर्ट कई तरह के सवाल खड़े करती है. रिपोर्ट जो सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है वह यह कि यह पर्यावरण किसका है? हमारे आस-पास जो प्राकृतिक संसाधन हैं उस पर किसका हक है? वहां निवास करनेवाले निवासियों का या फिर दूर-दराज बैठी किसी कंपनी का?
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मां गंगा! अब तुम राष्ट्रीय नदी हो

आखिरकार, भारत सरकार ने महसूस कर लिया कि गंगा को राष्ट्रीय नदी मान लेना चाहिए. राष्ट्रीय होने के लिए जो जरूरी सरकारी उपाय हैं वे पूरे किये जाएंगे और किसी दिन धूमधाम से फाईलों में गंगा की बजाय नेशनल रीवर गंगा लिखा नजर आने लगेगा. लेकिन राष्ट्रीय होने की यह चिंता इतनी देर से क्यों हुई जब यह भविष्यवाणी की जा रही है कि सन २०२५ तक गंगा का पानी सूख जाएगा.
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फूलों की घाटी पर घास का संकट

उत्तराखण्ड की फूलों की घाटी में फूलों से ज्यादा ऐसी घास उग आयी है कि इसके कारण यहां उगने वाले फूलों के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। वैसे तो पूरी की पूरी भ्यूंडार घाटी इस घास से परेशान है लेकिन फूलों की घाटी जिसका अंर्तराष्ट्रीय महत्व है, को लेकर पर्यावरणविद से लेकर वन विभाग तक के आला अधिकारी इसके कारणों को खोजने में लगे हैं।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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