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लेने नहीं, देने का दिन बना बहनजी का जन्मदिन

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मुख्यमन्त्री मायावती ने अपना जन्मदिन मनाने की शैली बदल दी है। इस बार न तो उन्होने केक काटा न ही तोहफे कबूल किए। आगन्तुकों ने उन्हें बहुरंगी फूल दे कर अपनी शुभकामनाओं की अभिव्यक्ति की। इस साल से उन्होंने अपने जन्मदिन पर पार्टी के लिए अपने कार्यकर्ताओं से आर्थिक सहयोग लेना भी बन्द करा दिया है।

उनको जन्मदिन पर नकद नारायण भेंट करने के बहाने उनके एक विधायक ने इटावा में एक इंजीनियर की बर्बरतापूर्वक हत्या कर दी थी जिससे उनके विरोधियों को उन पर राजनीतिक हमले करने का मौका मिल गया था। अब बहुजन समाज पार्टी ने उनके जन्मदिन को जन कल्याणकारी दिवस के रूप में मनाने की प्रथा शुरू की है। अब तक अपने जन्मदिन पर महंगे तोहफे कबूल करने वाली मुख्यमन्त्री मायावती ने पहली बार अपने 54वें जन्मदिन के अवसर पर जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के तहत सर्वसमाज के ऐसे प्रत्येक गरीब, बेसहारा व कमजोर वर्गों के लोगों के आंसू पोछने का काम किया है, जो अभी तक किसी भी सरकारी पेंशन योजना अथवा सस्ते दर की खाद्यान्न योजना से वंचित रहे हैं। यानि जो गरीबी की रेखा से भी नीचे रह कर जिन्दगी जी रहे हैं उन्हें हर महीने 300 रूपये की सीधी आर्थिक मदद (उ0प्र0 मुख्यमन्त्री महामाया गरीब आर्थिक मद्द योजना) के माध्यम से मिलेगी।

इस योजना के तहत उनके बैंक खातों में साल में दो बार छमाही किश्तों के रूप में जमा की जाएगी। उन्होंने कहा कि सीधे नकद धनराशि उपलब्ध कराने का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक गरीब आदमी को आवश्यकतानुसार अपनी रोजमर्रा की हर मौलिक जरूरतों को सरलता से पूरा कराना है। इस योजना के तहत हर ग्राम सभा के स्तर पर आपत्तियां प्राप्त कर के पात्र परिवारों के लाभार्थियों की अन्तिम चयन सूची उप जिलाधिकारी/जिला स्तरीय अधिकारी की उपस्थिति में ग्राम सभा की खुली बैठक में बनेगी। इसके अलावा उन्होंने 26 हजार से अधिक ऐसे कैदियों को छोड़ने की घोषणा की जो विचाराधीन हैं.

मुख्यमन्त्री मायावती ने कहा कि उनकी सरकार के सत्ता में आते ही उन्होंने राज्य के आर्थिक विकास के लिए प्रधानमन्त्री से मिलकर 80 हजार करोड़ रूपयों के विशेष आर्थिक सहायता पैकेज दिये जाने का अनुरोध किया था लेकिन आज तक केन्द्र सरकार द्वारा एक रूपये की भी धनराशि मंजूर नहीं की गई।  मुख्यमन्त्री मायावती ने लगभग 7 हजार 3 सौ बारह करोड़ रूपये की 264 परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण भी किया, जिसमें लखनऊ में मानवाधिकार आयोग भवन तथा अरबी फारसी विश्वविद्यालय भवन के शिलान्यास के साथ ही राजधानी में कैसरबाग बस स्टेशन के नवनिर्मित भवन तथा चिकित्सा विश्वविद्यालय के शताब्दी अस्पताल के भवन का लोकार्पण उल्लेखनीय है। 

मायावती ने अपने जन्मदिन पर समाज के वंचित और शोषित वर्ग को देने की नयी परिपाटी शुरू की है जो कि अब तक पार्टी के लिए चंदा जुटाने की परिपाटी से बिल्कुल अलग है. ऐसा नहीं है कि उन्होंने सिर्फ प्रदेश के गरीबों और असहायों के लिए ही घोषणाएं की हैं. राज्य और राज्य से बाहर की मीडिया को भी उन्होंने खुश कर दिया है. दो-तीन दिनों तक लगातार मायावती के जन्मदिन से जुड़े पूरे पेज के विज्ञापन छपते रहे हैं. अब मीडियावाले भी बहनजी से शिकायत नहीं कर सकते कि बहनजी ने उनकी उपेक्षा की है. मायावती का यह जन्मदिन उनकी उस कवायद का हिस्सा नजर आता है जिसमें वे अपनी एक राष्ट्रीय छवि उभारना चाहती हैं. वे इसमें सफल हुई हैं या असफल यह कहना अभी मुश्किल है. और बातों के अलावा वे अपने लेखन से भी यह बात साबित करना चाहती हैं. शायद इसीलिए उनके जन्मदिन पर उनकी अपनी लिखी हुई पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया जो उनके संघर्ष के सफरनामें पर आधारित है.

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काजल कुमार on 16 January, 2010 19:44;47
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लेकिन बड़ा मुश्किल है...ब्लैक को व्हाइट करने में एक साल का इंतज़ार करना बड़ा मुश्किल रहता है
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randhirsinghsuman on 16 January, 2010 20:37;58
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nice
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image मुदित माथुर राजनीति, समाज, न्याय प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था को केन्द्र में रखकर पिछले बीस सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं. अपनी पत्रकारिता के दौरान नवभारत टाईम्स में लंबे समय तक काम किया और कई चर्चित स्टोरी की. मुख्यरूप से समाज के निचले तबकों के हित में लिखने के अलावा सामाजिक और कानूनी पहल करने से भी नहीं चूकते हैं. अब विस्फोट.कॉम से नियमित जुड़ाव और लेखन के अलावा स्वतंत्र लेखन और सामाजिक सक्रियता.
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