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जनता दरबार

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माखनलाल कैंपस में महाभारत

पंडित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय एक मर्तबा फ़िर विवादों में है। अपने स्थापना से लेकर अब तक पत्रकारिता का यह तीर्थस्थल किसी ना किसी वजह से खबरों में रहा है। अपनी साख के संकट से जूझ रही यूनिवर्सिटी के कुलपति बी. के. कुठियाला की कार्यशैली ताज़ा असंतोष की वजह बन गई है। कुरुक्षेत्र से आए प्रोफ़ेसर कुठियाला के फ़ैसलों से पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कैंपस में "महाभारत" छिड़ गई है। असंतुष्ट खेमा कुलपति के खिलाफ़ मोर्चा खोल चुका है। सूचना के अधिकार के तहत हासिल जानकारियों ने आग में घी का काम किया है।
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कुठियाला पर 'सिंहों' का कुठाराघात

भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विभाग में आजकल हंगामा बरपा है। हंगामा दो ‘सिंहों’ - श्रीकांत सिंह और पुष्पेन्द्रपाल सिंह के कारण है। इसके लिए दोनों ने अपनी अक्ल और शक्ल का भरपूर फायदा उठाया। व्यक्तिगत स्वार्थ को साधने के लिए ‘बेचारे कर्मचारियों’ को बलि का बकरा बनाया गया। अध्यापक और अधिकारियों की लडाई में फंसे कर्मचारी अब तड़फड़ा रहे हैं, क्योंकि कुलपति प्रो. कुठियाला के खिलाफ आग भड़काने वाले पर्दे के पीछे से खेल खेल रहे हैं। अब कर्मचारी इस बात से छला महसूस कर रहे हैं कि उनके साथ विश्वासघात किया गया है।
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परमाणु हादसाग्रस्त न्यूक्लियर कामर्स

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मैक्सिको की खाड़ी में ब्रिटिश पेट्रोलियम के तेल कुएं से जो रिसाव हुआ था उसके लिए बहुराष्ट्रीय ब्रिटिश पेट्रोलियम को 34 अरब डॉलर का हर्जाना भरने के लिए कहा गया है. बीपी कंपनी केवल तैयार ही नहीं हुई है बल्कि उसने 20 अरब डॉलर (करीब 92,000 करोड़) रूपये का हर्जाना अदा भी कर दिया है. मैक्सिको की खाड़ी में हुए तेल रिसाव और किसी परमाणु रियेक्टर में भारी पानी के रिसाव में आप किसे ज्यादा खतरनाक मानेंगे? अगर परमाणु भट्टी में रिसाव को आप ज्यादा खतरनाक मानते हैं तो भला बताइये कि मैक्सिको खाड़ी में हुए तेल रिसाव से कितने गुने अधिक मुआवजा तय किया जाना चाहिए?...
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'आडवाणी के हत्या की योजना इसलिए असफल हो गई क्योंकि...'

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मुंबई, जेहादी आतकवादियों का पसंदीदा निशाना रहा है। आखिरकार यह देश की राजधानी जो है। दो वर्ष पूर्व से उन्होंने अपना ध्यान बंगलौर की तरफ किया है जो भारत का तेजी से विकसित हो रहा आई.टी.-सूचना प्रोद्योगिकी- का केन्द्र है। जुलाई, 2008 में इस शहर में श्रृंखलाबध्द बम विस्फोट हुए थे। ...
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नालंदा पर 'नकारा' सांसदों की ग्रेट डिबेट

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आमतौर पर हम मानते हैं कि हमारी संसद और हमारे सांसद दोनों ही देश के सिर पर बोझ हैं. लेकिन नालंदा पर राज्यसभा में जो बहस हुई है उसे देख सुनकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि हमारे सांसद हमारे हैं ही नहीं. शुक्रवार को राज्यसभा में केन्द्र सरकार द्वारा बिहार के नालंदा में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के लिए विधेयक पेश किया गया. इस विधेयक पर जो बहस हुई वह इतनी उम्दा थी कि उपसभापति महोदय को भी कहना पड़ा कि बहस इतनी स्तरीय थी कि वे घड़ी देखना ही भूल गये. ...
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एक खेल इंसानियत के खिलाफ

कॉमन वेल्थ गेम की तैयारियों में हुए भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए भावुकता और देशभक्ति का सहारा लिया जा रहा है। कांग्रेसी नेता राजीव शुक्ला कहते हैं कि 'भ्रष्टाचार की बात करने से पहले सबसे ज्यादा जरुरी है कि सब मिल जुल कर खेलों को कामयाब बनाने के लिए जुट जाएं। कॉमन वेल्थ गेम देश की इज्जत का सवाल है। खेल कामयाबी के साथ सम्पन्न हो जाएं तो फिर भ्रष्टाचार की बात भी होगी'।
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खड्डे में जाए जनता, हवा में उड़ेगी सरकार

मध्यप्रदेश सरकार के फ़ैसलों को देखकर "अँधी पीसे - कुत्ते खाएँ" कहावत चरितार्थ होती दिखाई देती है। सत्ता के नशे में डूबी भाजपा को विपक्ष की निष्क्रियता ने निरंकुशता के पंख लगाकर भ्रष्टाचार के आसमान में लम्बी और ऊँची उड़ान भरने के लिये स्वतंत्र छोड़ दिया है। राज्य में राजधानी भोपाल की सड़कों से लेकर राजमार्गों तक की जर्जर हालत से लोगों का ध्यान हटाने के लिये अब हवाई सफ़र का सपना बेचा जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने निजी क्षेत्र के आपरेटर्स के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख शहरों को वायुसेवा से जोड़ने का निर्णय लिया है।
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गैरसरकारी पर सवाल कितना जरूरी?

महात्मा गांधी ने ग्रामीण विकास में स्वयंसेवी प्रयासों की भूमिका को यह कहकर प्रोत्साहित करने का प्रयास किया था कि ‘राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक दायित्व’ भी आवश्यक है।’ हम भले ही राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल कर चुके हों, लेकिन विडंबना ही कहा जायेगा कि परोपकार का जो काम कभी भारतीय समाज में नैतिक जिम्मेदारी समझ कर किया जाता था आज वह संगठित जरूर है, लेकिन कई किस्म की विकृतियां उसमें घर गई हैं और अब इसमें सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है।
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अनीति का शिकार छात्र राजनीति

जुलाई में देशभर के विश्वविद्यालय और कालेज खुल गए हैं और नए छात्रों के आगमन के साथ ही परिसरों में छात्र संघ चुनावों की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं. देश में एक धारणा बनने लगी है कि छात्र राजनीति और छात्र संघ गुंडागर्दी का पर्याय बनता जा रहा है इसलिए इसपर पाबंदी लगा देनी चाहिए। क्या इस धारणा में कोई सच्चाई है या फिर समाज के एक वर्ग विशेष द्वारा फैलाई गयी भ्रांति के अलावा कुछ नहीं है?
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कूटनीति पर भारी पाकिस्तानी कुटिलता

पूरी दुनिया जानती है कि ओसामा बिन लादेन, मौलाना उमर, हाफिज सईद, उमर शेख, मसूद अजहर समेत दुनिया के क्रूरतम आतंकवादी उसी पाकिस्तान के प्रश्रय में पलते हैं जिस पाकिस्तान को देखकर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरान दांत पीसते हैं. उसी पाकिस्तान का विदेशमंत्री 26/11 की घटना में पाकिस्तान की सेना के शामिल होने के तमाम सबूतों के बावजूद अगर हिन्दुस्तानी विदेश मंत्री एस एम कृष्णा को मौन साधने पर मजबूर कर दे तो यह उसकी व्यावहारिकता का श्रेष्ठतम प्रदर्शन ही कहा जाएगा. हिन्दुस्तान तमाम अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद हमेशा अंतरराष्ट्रीय राजनय के मंच पर पाकिस्तानी हुक्मरानों से क्यों हार जाता है? क्या यह पराजय केवल एस एम कृष्णा तक ही सीमित है?
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ममता के दरबार में कांग्रेस की सरकार
पश्चिम बंगाल में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान और चूहे बिल्ली का खेल बढ़ता जा रहा है. इसका एक उदाहरण उस वक्त देखने को मिला जब कांग्रेस के युवा नेता और केन्द्रीय मंत्री सचिन पायलट पश्चिम बंगाल के दौरे पर गये. ...
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आतंकवाद की राजनीति और मीडिया
क्या आतंकवाद बौद्धिक स्तर पर इतना विकसित हो चुका है कि उसका राजनीतिक धरातल तैयार हो सके? इस जटिल प्रश्न का उत्तर सरल नहीं है. जो लोग अल-कायदा को आतंकी संगठन बताकर उसके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं वे भी शायद इसे इस्लामिक चरमपंथ कहना ज्यादा मुनासिब समझेंगे बनिस्बत कि आतंकवाद के दर्शन में निहित राजनीति को मान्यता प्रदान करें. लेकिन मुस्लिम देशों में आतंकी गतिविधियों के द्वारा दुनियाभर में थरथराहट पैदा करनेवाले इस्लामिक विद्वान इसे उस राजनीति की प्रतिक्रिया मानते हैं जिसके वैचारिक आक्रमण के कारण इस्लाम को खतरा पैदा हो गया है. शायद इसीलिए "जिहाद" जरूरी हो गया था. ...
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राजनीतिक हिन्दुत्व पर दिग्गी का दांव
हिन्दुओं का ठेकेदार बनने की आरएसएस और उसके मातहत संगठनों की कोशिश को चुनौती मिल रही है. भगवान् राम के नाम पर राजनीति खेलकर सत्ता तक पंहुचने वाली बीजेपी के लिए और कोई तरकीब तलाशनी पड़ सकती है क्योंकि कांग्रेस की नयी लीडरशिप हिन्दू धर्म के प्रतीकों पर बीजेपी के एकाधिकार को मंज़ूर करने को तैयार नहीं है. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने साफ़ कहा है कि हिन्दू धर्म पर किसी राजनीतिक पार्टी के एकाधिकार के सिद्धांत को वे बिल्कुल नहीं स्वीकार करते....
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कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्
भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।...
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हरिप्रसाद का लोकतंत्र 'हठ'
हरिप्रसाद को एक हफ्ते तक पुलिस हिरासत में रखने के बाद जमानत मिल गयी है. जेल से छूटने के बाद हैदराबाद पहुंचे हरिप्रसाद ने कहा है कि वे इस गिरफ्तारी से न झुकेंगे न टूटेंगे बल्कि ईवीएम मशीनों की धोखाधड़ी के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेंगे. हरिप्रसाद की यह दिलेरी और लोकतंत्र के प्रति हठ निश्चित रूप से काबिले तारीफ है. ...
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'हिंदुस्तान' ने पूर्णिया को शर्मसार कर दिया
उम्र-78 साल और ये उम्र मैंने अपने घर के बंद कमरों में नहीं काटी. पूर्णिया की तमाम साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से हर दिन का साबका रहा है. कचहरी चौक पर धरना-प्रदर्शन से लेकर छोटे-बड़े तमाम मंच पर सक्रिय रहा हूं. जानता हूं कि खबरें कैसे बनती हैं और कैसे छपती हैं. 'हिंदुस्तान', 'दैनिक जागरण', 'प्रभात खबर', 'राष्ट्रीय सहारा' और ऐसे ही तमाम अखबारों में छपता रहा हूं. पत्रकारिता को लेकर खट्टे-मीठे अनुभव रहे हैं. उम्र और अनुभव का तकाजा कुछ ऐसा रहा कि कभी शाबाशी में पत्रकारों की पीठ ठोंकी तो कभी उनकी तीखी आलोचना भी की, लेकिन पिछले दिनों शहर में घटी एक घटना के बाद से बेचैन हूं, दुखी हूं, शर्मिंदा हूं- समझ नहीं आ रहा कि कैसे मन की पीड़ा व्यक्त करूं?...
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सुखाड़ का शिकार हो गया बिहार
उत्तरी बिहार के कुछ इलाकों में आए बाढ़ के बारे में टीवी चैनल पर खबर देखने या फिर किसी सामाचार पत्र में खबर पढ़ कर यह अंदाजा मत लगाइए कि बिहार में इस साल भी खूब बारिश हो रही है। दरअसल बिहार के कुछ इलाकों में आई बाढ़, नेपाल की नदियों से बहकर आया पानी है जिसकी वजह से कुछ क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। लेकिन इस पानी से किसानों का भला नहीं होने वाला है।...
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टाटा-बिड़ला-अंबानी, पीयेंगे मध्य प्रदेश का पानी
वेतन-भत्तों और सुविधाओं के विस्तार को लेकर लगातार हाय तौबा करने वाले जनप्रतिनिधि अब जनता की बुनियादी ज़रुरतों से पल्ला झाड़कर औद्योगिक घरानों की ताल पर थिरकते दिखाई दे रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पानी,बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ जुटाने का ज़िम्मा सरकारों को सौंपा गया है। मगर सरकारें अब जनहित के कामों को छोड़कर एक के बाद एक योजनाओं को निजी हाथों में सौंपती चली जा रही है, फ़िर चाहे वो प्राकृतिक संसाधन हों, ज़मीन हो या आम जनता की सेवा से जुड़े मुद्दे हों। इसी कड़ी में अब नेताओं और उद्योगपतियों को पानी मुनाफ़े का सौदा नज़र आने लगा है।...
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प्रेस क्लब ने खाना नहीं खिलाया, नोटिस थमा दिया
चंडीगढ़ प्रेस क्लब की तानाशाही का एक और नमूना सामने आया है। दैनिक भास्कर चंडीगढ़ के ब्यूरो चीफ ब्रजमोहन सिंह को क्लब ने कार्रवाई संबंधी नोटिस भेज दिया गया है। दिलचस्प बात है कि क्लब के अंदर ब्रजमोहन सिंह को दो घंटे तक खाना के आर्डर के बावजूद खाना नहीं देकर पहले बेइज्जति की गई और उसके बाद जब ब्रजमोहन सिंह ने शिकायत की तो उन्हें नोटिस दिया थमा दिया गया।...
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असफल गृहमंत्री का सफल 'आतंकवाद'
हमारे केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदबरम ने पुलिस प्रमुखों के समेलन में ''भगवा आतंकवाद'' का नया शगूफा छोड़ दिया। वैसे इस केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई मंत्री बयानों के मामले में शूरवीर की प्रसिद्धी प्राप्त कर चुके है। पी. चिदबरम भी ऐसे ही मंत्री हैं जो अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं. आतंकवाद का मामला हो, नकसलवाद का मामला हो, कश्मीर समस्या का मामला हो, या देश में घटित कोई भी अन्य महत्वपूर्ण मामला हो उनके आतंकवाद की थ्योरी भले ही सफल हो रही हो लेकिन बतौर गृहमंत्री वे असफल साबित हो रहे हैं....
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पाँचना से फोन पर पानी पहुँचा घना
घना पक्षी विहार को इस बर्ष पानी मिल गया है। करौली जिले के पाँचना बाँध से छोडा गया पानी अब भरतपुर की सीमा में पहुँच गया है। इस पानी के बाद संभावना है घने का ताज बच जाये। पानी से रिक्शा चालकों से लेकर होटल मालिक सब प्रसन्न है, लेकिन इस पानी पहुँचने के कारणों में भरतपुर सांसद का करौली कलक्टर को फोन करना चर्चा का विषय बना हुआ है।...
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तिगड्डे में फंसा किसान
वोट बैंक की राजनीति जो ना कराए वो कम है। कल तक अलीगढ़ में अपनी जमीन के मुआवजे के लिए एक महीने से लड़ रहे किसानों के साथ कोई नहीं था। लेकिन जैसे ही पुलिस की गोलीबारी में तीन किसानों की मौत हुई तो वहां नेताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। क्या कांग्रेस, क्या बीजेपी, क्या सपा और क्या बसपा। किसी ने यह मौका नहीं छोड़ा कि वे ही किसानों के सबसे बड़े हिमायती हैं यह इतना दुखदायी और पीड़ादायी है कि बताया नहीं जा सकता।...
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कांग्रेस पर सत्ता संघर्ष भारी, अब राहुल गांधी की बारी
एक अजीब से घटना है। जिस दिन राहुल गांधी अपने आपको उड़ीसा में आदिवासियों के सिपाही घोषित करते है, उसके अगले दिन ही एक खबर छपती है। खबर अखबार के पहले पन्ने की लीड है, जिसमें कहा गया है कि भारत युवाओं का देश है, पर प्रधानमंत्री बुजुर्ग है। साथ ही दुनिया के कई देशों का उदाहरण दिया गया है, जिसमें युवा लोग प्रधानमंत्री के तौर पर विराजमान है। ये एक सामान्य घटना कहेंगे या एक संयोग या एक राजनीतिक खेल? जो युवराज अभी तक कारपोरेट है, वही एकाएक आदिवासियों के सिपाही हो जाते है।...
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17 अक्टूबर से हो सकते हैं बिहार में चुनाव
बिहार विधानसभा चुनावों की घोषणा होनेवाली है. चुनाव आयोग और राज्य सरकार की मशीनरी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बिहार में दुर्गापूजा के बाद 17 अक्टूबर से चुनावों की घोषणा की जा सकती है. ऐसी संभावना है कि बिहार में चार चरणों में मतदान पूरा किया जाएगा और जल्द ही तिथियों की घोषणा कर दी जाएगी. ...
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साथी की शोकसभा के लिए भी संपादक के पास समय नहीं
29 अगस्त 2010. भागलपुर में एक पत्रकार के लिए शोकसभा का आयोजन. 29 जून को ट्रेन से गिरकर पत्रकार की मौत हो गयी थी. शोकसभा का आयोजन थोड़ी देर से किया गया था लेकिन किया गया. लेकिन खुद अखबार के संपादक ही शोकसभा में नहीं आये और बहाना बनाया कि वे मीटिंग में हैं. मीटिंग में तो संपादक महोदय नहीं आये, लेकिन आश्चर्य का ठिकाना तब नहीं रहा जब अगले अखबार ने अपने ही दिवंगत साथी की शोकसभा को एक कालम की खबर का भी दर्जा नहीं दिया. ...
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