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जनता दरबार

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तकलीफदेह क्यों हो तेलंगाना का तीर?

नए राज्यों के निर्माण से घबराने की जरूरत नहीं है। ज़रा याद करें कि 1956 में भाषा के आधार पर जब नए राज्य बने तो उनके विरूद्घ क्या-क्या तर्क दिए गए थे। जो नए राज्य बने, क्या उनमें एक भी विसर्जित हुआ? क्या एक भी राज्य ऐसा निकला, जो अपने पांवों पर खड़ा न हो सका? क्या एक भी सीमांत राज्य किसी विदेशी शक्ति का मोहरा बना? क्या किसी भी राज्य ने भारत से अलग होने में सफलता पाई?
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दादरी से दरबदर नहीं हुआ है रिलायंस

देशभर की मीडिया में छपे इन खबरों से आप रूबरू हो चुके होंगे कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अनिल अंबानी के दादरी पावर प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण को रद्द कर दिया है. लेकिन है उल्टा. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अम्बानी के बहुचर्चित दादरी पावर प्रोजेक्ट के लिए मुलायम सिंह यादव की सरकार हुए भूमि अधिग्रहण को रद्द नहीं किया है। तो क्या इलाहाबाद हाइकोर्ट के इस फैसले का मुकेश अंबानी समूह ने मीडिया के माध्यम से अनिल अंबानी के खिलाफ इस्तेमाल कर लिया?
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सूचना अधिकार पुरस्कार पर सवालिया निशान

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2 दिसंबर को सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करके जनहित में काम करनेवालों को पुरस्कृत किया गया. पुरस्कार भारत के उपराष्ट्रपति महामहीम हामिद अंसारी के हाथों प्रदान किया गया. लेकिन जैसे इस देश में सूचना के अधिकार कानून में अब कई तरह की धोखाधड़ी होने लगी है वैसे ही इस पुरस्कार पर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. ...
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माकपा की मेहरबानी से सफल रहा भाजपा का बंगाल बंद

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३० नवम्बर को भाजपा की आवाज पर बंगाल बंद रहेगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. लेकिन मोटे तौर पर कहा जा सकता है की सोमवार ३० नवम्बर को कमोबेश बंगाल पूरी तरह बंद रहा. जगह-जगह तोड़फोड़ हुई. हालाँकि बंद के दिन तोड़फोड़ की रश्म अब कम ही निभाई जाती है, क्यूंकि लोगबाग बंगाल बंद के किसी भी राजनैतिक दल के आह्वान के साथ ही अपना कारोबार बंद रखने का मन बना लेते हैं....
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सामाजिक मूल्यांकन से साँसत में सरपंचों की जान

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पचास साल पहले पंचायतीराज की स्थापना राजस्थान में हुई। स्वर्ण जयंती भी यही मनाई गई। सोशल आडिट (सामाजिक मूल्यांकन) भी यही से आरम्भ हुआ और अब सरपंच भी यहीं के परेशान है। उदयपुर में खुलेआम प्रदर्शन हो रहा है तो दूसरी जगहों से सरकार पर कागजी दबाब बनाया जा रहा है। आखिर क्यों ?...
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पूंजीवाद को पटखनी देने की कमजोर कोशिश

21 नवंबर को जिस वक्त भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अपने विशेष विमान द्वारा अमेरका के लिए उड़े तो वहां उन्होंने अगले चार दिनों तक ओबामा प्रशासन के साथ जो तालमेल किया वह भारत में गहराते पूंजीवाद को और मजबूती से धंसाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि भारत बिनाशक अमेरिका का रणनीतिक साझीदार है.
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27 नवंबर 2008: ऐसी सुबह कभी न आये

रात कैसे बीत गई पता ही नहीं चला...एक के बाद एक फोन आना, दफ्तर में अप़डेट देना, फोनो देना, वाक थ्रू करना, दूसरे रिपोर्टरों से कोर्डिनेट करना इतना सारा काम था कि घडी देखने का वक्त ही न मिला। काम में इतना मशगूल थे कि उस खतरनाक माहौल में भी गोली लगने की फिक्र न थी.. फिक्र थी तो सिर्फ एक ही बात की कि हम इस कवरेज में कमजोर न पडें।
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26 नवंबर की वह काली रात: एक रिपोर्टर की आंखो देखी

वक्त बीतता जा रहा था। हमें उम्मीद थी कि शायद कुछ देर में ही मुंबई पुलिस कमांडो एक्शन के जरिये होटल को आतंकवादियों से मुक्त करा लेगी। लगातार फोन पर सारे रिपोर्टरों से संपर्क में रहने, लाईव चैट में व्यस्त रहने और थोडी थोडी देर पर वाकथ्रू के जरिये अपडेट देने के कारण वक्त का ख्याल ही नहीं रहा। रिपोर्टर गणेश ठाकुर जो कि सीएसटी पर फायरिंग कवर कर रहा था एक टेप लेकर ताज होटल के पास ओबी वैन पर पहुंचा। गणेश ने बताया कि सीएसटी पर बडा बुरा हाल है। आतंकवादियों ने पहले मेल एक्सप्रैस ट्रेनों के प्लेटफॉर्म की ओर गोलियां बरसाईं और फिर लोकल ट्रेन के प्लेटफॉर्म की ओर आगे बढे।
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आतंक के 59 घंटे और एक रिपोर्टर का हलफनामा

पिछले साल मुंबई में हुए आतंकी हमले को समाचार चैनलों ने जिस तरह से रिपोर्ट किया था उस पर बाद में कई सवाल खड़े किये गये थे. लेकिन खुद एक रिपोर्टर ने उन 59 घण्टों में क्या महसूस किया? आतंक की उन घड़ियों को रिपोर्ट करते समय एक रिपोर्टर के ऊपर क्या बीता था? ऐसे ही एक रिपोर्टर थे जीतेन्द्र दीक्षित जो कि स्टार न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता के बतौर उस घटनाक्रम की रिपोर्टिंग कर रहे थे. साल भर बाद मुंबई हमलों की रिपोर्टिंग का अनुभव वे विस्फोट के पाठकों के साथ बांट रहे हैं.
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गिरवी हो गये गन्ना किसान

देश में किसान और किसानी के क्या हालात हैं इसे वर्तमान समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के आंदोलन को देखकर समझ सकते हैं. सरकार, मीडिया और समाज तीनों में हाशिये पर धकेल दिये गये किसानों के लिए बात करे भी तो आखिर कौन? पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के संकट के पीछे केन्द्र का ही एक काला कानून है लेकिन केन्द्र सरकार कच्ची रॉ सुगर मंगाकर खुश है इसलिए वह कानून में बदलाव नहीं करना चाहती. वह बदलाव करेगी भी क्यों? जिस देश में एक दशक से भी कम समय में दो लाख से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हों और सरकार विकास का डंका पीट रही हो उससे किसान उम्मीद भी रखे तो कैसे?
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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