जनता दरबार
नालंदा पर 'नकारा' सांसदों की ग्रेट डिबेट
आमतौर पर हम मानते हैं कि हमारी संसद और हमारे सांसद दोनों ही देश के सिर पर बोझ हैं. लेकिन नालंदा पर राज्यसभा में जो बहस हुई है उसे देख सुनकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि हमारे सांसद हमारे हैं ही नहीं. शुक्रवार को राज्यसभा में केन्द्र सरकार द्वारा बिहार के नालंदा में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के लिए विधेयक पेश किया गया. इस विधेयक पर जो बहस हुई वह इतनी उम्दा थी कि उपसभापति महोदय को भी कहना पड़ा कि बहस इतनी स्तरीय थी कि वे घड़ी देखना ही भूल गये.
एक खेल इंसानियत के खिलाफ
कॉमन वेल्थ गेम की तैयारियों में हुए भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए भावुकता और देशभक्ति का सहारा लिया जा रहा है। कांग्रेसी नेता राजीव शुक्ला कहते हैं कि 'भ्रष्टाचार की बात करने से पहले सबसे ज्यादा जरुरी है कि सब मिल जुल कर खेलों को कामयाब बनाने के लिए जुट जाएं। कॉमन वेल्थ गेम देश की इज्जत का सवाल है। खेल कामयाबी के साथ सम्पन्न हो जाएं तो फिर भ्रष्टाचार की बात भी होगी'।
खड्डे में जाए जनता, हवा में उड़ेगी सरकार
मध्यप्रदेश सरकार के फ़ैसलों को देखकर "अँधी पीसे - कुत्ते खाएँ" कहावत चरितार्थ होती दिखाई देती है। सत्ता के नशे में डूबी भाजपा को विपक्ष की निष्क्रियता ने निरंकुशता के पंख लगाकर भ्रष्टाचार के आसमान में लम्बी और ऊँची उड़ान भरने के लिये स्वतंत्र छोड़ दिया है। राज्य में राजधानी भोपाल की सड़कों से लेकर राजमार्गों तक की जर्जर हालत से लोगों का ध्यान हटाने के लिये अब हवाई सफ़र का सपना बेचा जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने निजी क्षेत्र के आपरेटर्स के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख शहरों को वायुसेवा से जोड़ने का निर्णय लिया है।...गैरसरकारी पर सवाल कितना जरूरी?
महात्मा गांधी ने ग्रामीण विकास में स्वयंसेवी प्रयासों की भूमिका को यह कहकर प्रोत्साहित करने का प्रयास किया था कि ‘राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक दायित्व’ भी आवश्यक है।’ हम भले ही राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल कर चुके हों, लेकिन विडंबना ही कहा जायेगा कि परोपकार का जो काम कभी भारतीय समाज में नैतिक जिम्मेदारी समझ कर किया जाता था आज वह संगठित जरूर है, लेकिन कई किस्म की विकृतियां उसमें घर गई हैं और अब इसमें सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। ...अनीति का शिकार छात्र राजनीति
जुलाई में देशभर के विश्वविद्यालय और कालेज खुल गए हैं और नए छात्रों के आगमन के साथ ही परिसरों में छात्र संघ चुनावों की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं. देश में एक धारणा बनने लगी है कि छात्र राजनीति और छात्र संघ गुंडागर्दी का पर्याय बनता जा रहा है इसलिए इसपर पाबंदी लगा देनी चाहिए। क्या इस धारणा में कोई सच्चाई है या फिर समाज के एक वर्ग विशेष द्वारा फैलाई गयी भ्रांति के अलावा कुछ नहीं है?...कूटनीति पर भारी पाकिस्तानी कुटिलता
पूरी दुनिया जानती है कि ओसामा बिन लादेन, मौलाना उमर, हाफिज सईद, उमर शेख, मसूद अजहर समेत दुनिया के क्रूरतम आतंकवादी उसी पाकिस्तान के प्रश्रय में पलते हैं जिस पाकिस्तान को देखकर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरान दांत पीसते हैं. उसी पाकिस्तान का विदेशमंत्री 26/11 की घटना में पाकिस्तान की सेना के शामिल होने के तमाम सबूतों के बावजूद अगर हिन्दुस्तानी विदेश मंत्री एस एम कृष्णा को मौन साधने पर मजबूर कर दे तो यह उसकी व्यावहारिकता का श्रेष्ठतम प्रदर्शन ही कहा जाएगा. हिन्दुस्तान तमाम अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद हमेशा अंतरराष्ट्रीय राजनय के मंच पर पाकिस्तानी हुक्मरानों से क्यों हार जाता है? क्या यह पराजय केवल एस एम कृष्णा तक ही सीमित है?
प्रभाष परंपरा का न्यास
पत्रकारिता में प्रभाष जोशी की असल परपंरा क्या मानी जाए यह वे निर्धारित करें जिन्होंने लंबे समय तक उनके साथ काम किया है, उन्हें जाना है, समझा है और उनके साथ अपने जीवन को साझा किया है. पत्रकारिता में हम जैसे नवागंतुक प्रभाष जी के बारे में आंकलन करें, उनके काम काज का विश्लेषण करें या फिर उनकी परंपरा का निर्धारण करें यह न तो सटीक होगा और न ही शोभा देता है.
स्वागत से शुरू हुई सुगबुगाहट
राजस्थान में इस बार 5 वर्षो के बाद छात्रसंघों के चुनाव होने जा रहे हैं। चुनावों को लेकर विधार्थियों से लेकर राजनैतिक दलों में सरगर्मियाँ तेज हो गई है। नवागुंतकों का जोर से स्वागत किया जा रहा है तो तमाम तरह की माँगे भी सरकार के सामने रखी जा रही है। राजनीति की पहली पाठशाला के हो रहे चुनावों की एक रिपोर्ट।
एक बम विस्फोट और इतने सारे मास्टर माइंड!
हेडलाइन्स टुडे ने 15 जुलाई को संघ, हिन्दू संगठनों और हिन्दुओं को आरोपित करने वाला स्टिंग आॅपरेशन दिखाया है। कुछ लोगों ने इसके खिलाफ हेडलाइन्स टुडे के मुख्य समाचार चैनल आजतक के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनकारियों में से कुछ ने तोड़-फोड़ कर दी। हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने तोड़-फोड़ की घटना को अनुचित बताते हुए यह कहा है कि संघ के कार्यकर्ता वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए गए थे।
चुप्पी में भी चैन से हैं अर्जुन सिंह
भोपाल गैस काण्ड फैसले के बाद अचानक सुर्खियों में आए पूर्व केन्द्रीय मंत्री अर्जुन सिंह पिछले सप्ताह रीवा आए। वे अपने घर संभाग में 5 दिन रहे। इस दौरान उनके अनेक रिश्तेदारों, पुराने एहसानमंद नेताओं और कुछ पत्रकारों ने उनसे मुलाकात की। पत्रकारों ने उनसे एक ही सवाल एंडरसन व गैस काण्ड के बारे में पूछा जिसके बारे में उन्होंने केवल इतना कहा कि समय आने पर इस सवाल का जवाब दूंगा।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...



