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जनता दरबार

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राजनीति को गाली बनाते गडकरी

'बदनाम होंगे, तो क्या नाम न होगा।' वाजपेयी के बाद की बीजेपी कुछ साल से इसी फार्मूले पर चल रही है। अब नितिन गडकरी भी उसी परंपरा के वाहक। सो अध्यक्षी संभाले छह महीने ही बीते। पर जुबान ऐसी चली, अब तक छह विवाद भी खाते में जोड़ लिए। पहला विवाद तो कुर्सी संभालने के 25वें दिन ही हो गया। जब अप्रवासियों को महानगरों की समस्या बता गए। तो बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी जेडीयू ने गडकरी का पुतला फूंक सलामी दी थी।
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सूख गये संघर्ष के आंसू

नर्मदा पर बांधों की श्रृंखला की शुरुआत को 25 साल बीत गए हैं। इसके कारण 1.5 लाख से अधिक विस्थापित (जिनमें अधिसंख्य आदिवासी हैं) अब भी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं। अब तक की तमाम सरकारों ने इन लोगों के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया है। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय स्वतंत्र पीपुल्स ट्रिब्युनल के सदस्य के तौर पर जब मैंने मध्य प्रदेश के निमद क्षेत्र का दौरा किया तो इन गरीब और असहाय लोगों को देखकर सिर घूम गया था। 25 साल से वे अहिंसक संघर्ष कर रहे हैं और फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है।
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सतहत्तर की वापसी का संकेत

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इंडिया गेट के आस पास बनी सत्ता की कोठियों में आजकल एक बात बहुत ही जोर शोर से चर्चा के घेरे में आ गयी है. जिन नेताओं से भी मुलाक़ात हुई सबको लगता है कि देश में कांग्रेस के विरोध का माहौल बन रहा है. १९७७ वाला माहौल साफ़ नज़र आने लगा है. १९७७ के पहले भी बहुत ही मामूली मुद्दों पर गुजरात और बिहार में छात्रों ने आन्दोलन शुरू किया था जो बाद में इतना बड़ा हो गया कि हर वह शख्स जो कांग्रेस से किसी तरह से सम्बंधित था, सत्ता के बाहर फेंक दिया गया....
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मंहगाई मार जाएगी

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मंहगाई के विरोध में जिस प्रकार से समूचा विपक्ष एक साथ आ खड़ा हुआ है और यूपीए सरकार की आम आदमी विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष करता दिख रहा है वह प्रतीकात्मक ही सही लेकिन भारतीय राजनीति के लिए दूरगामी संदेश देता दिख रहा है. ऐसा नहीं है कि जो नेता मंहगाई के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं उनका चरित्र बहुत उज्ज्वल है. लेकिन भारत बंद ने सरकार को एक मौका जरूर दिया है कि वह अपनी नीतियों के बारे में एक बार फिर सोचे. शेष नारायण सिंह का विश्लेषण-...
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नीतीश कुमार की अतिवादी राजनीति

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2009 के आम चुनावों के आखिरी दौर के मतदान के ठीक बाद कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने जब नीतीश कुमार की प्रशंसा की थी, भारतीय जनता पार्टी से उनके अलगाव का अंदेशा उसी दिन लगाया जाने लगा था। यह बात और है कि जिस फोटो वाले विज्ञापन के नाम पर नीतीश कुमार नाराज होने का स्वांग कर रहे हैं, नरेंद्र मोदी के साथ हंसता हुआ वह फोटो उन्होंने पिछले आम चुनाव में एनडीए की लुधियाना रैली में खिंचवाए थे। ...
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कुछ तमाशा ये नहीं, कौम ने करवट ली है

महिलाओं के लिए संसद और विधान मंडलों में ३३ प्रतिशत आरक्षण के लिए औरतों ने मैदान ले लिया है .अब वे अपने हक को हर हाल में लेने के लिए संघर्ष के रास्ते पर चल पड़ी हैं .करीब २० हज़ार किलोमीटर की यात्रा करके महिलाओं के तीन जत्थे दिल्ली पंहुचे थे और जब यह उत्साही महिलायें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से उनके आवास पर मिलीं तो वे बहुत प्रभावित हुईं और उन्होने अपने आप को इनके मिशन से जोड़ दिया. लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि अभी लम्बी लड़ाई है.
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मर जाए ऐसा माओवाद

माओवादी इस सिद्धांत में भरोसा करते हैं कि 'सत्ता बंदूक से आती है.' भारतीय माओवादियों के सिद्धांत और व्यवहार से क्या यह नहीं लगता कि वे लोकतंत्र को और अधिक प्रभावशाली और परिवर्तनकारी बनाने तथा जनता के लोकतान्त्रिक अधिकारों को और अधिक सुदृढ बनाने की बजाय एक पार्टी की अधिनायकवादी सरकार स्थापित करना चाहते हैं. भारतीय लोकतंत्र की कमियों और समस्याओं से दुखी लोग माओवादियों की ओर आशा भरी नजर से कैसे देख सकते हैं? लोकतंत्र में अहिंसक माओवाद के लिए जगह तो है लेकिन माओवादी व्यवस्था में किसी अन्य विचार के लिए क्या कोई जगह दिखाई देती है?
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यूपीए सरकार के रिपोर्ट कार्ड की रिपोर्ट

यूपीए-2 के पहले साल की रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के चेहरे पर थोड़ी खुशी थी। खुशी का कारण वाजिब था। क्योंकि इस झूठे रिपोर्ट कार्ड को अगले दिन अखबारों ने पहले पेज की लीड बनानी थी। हुआ भी वही। अगले दिन अखबारों में फ्रंट पेज की लीड भी यही बनी। जनता ने इस रिपोर्ट कार्ड को पढ़ा जरूर, लेकिन बेमन से।
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महामहीम राष्ट्रपति के नाम सार्वजनिक चिट्ठी

डॉ ब्रह्मदेव शर्मा पूर्व नौकरशाह हैं लेकिन लंबे समय से वे अब आदिवासियों के बीच ही काम करते हैं. वर्तमान में नक्सलवाद के नाम पर आदिवासियों के उत्पीड़ने के खिलाफ उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एक चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने महामहीम राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि केन्द्रीय कानूनों का इस्तेमाल करके आदिवासियों के हितों की रक्षा की जा सकती है.
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कांग्रेस का हाथ कारपोरेट घरानों के साथ

अगर मंगलौर का विमान हादसा न हुआ होता तो देर शाम दिल्ली में क्या नजारा होता? यूपीए सरकार के एक साल पूरा होने के मौके पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक डिनर पार्टी का आयोजन किया था. आयोजन में मायावती और मुलायम सिंह दोनों को बुलाया गया था क्योंकि आपस में घोर विरोधी इन दोनों ही नेताओं ने संकट के वक्त हमेशा यूपीए सरकार का साथ दिया है.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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