समाजवादी से राष्ट्रवादी होना चाहते हैं अमर सिंह
अमर सिंह के इस्तीफे की जब गूंज उठी तो घर की लड़ाई घर-घर की कहानी बन गई. किसी ने कहा कि अमर सिंह ने सही फैसला लिया तो किसी ने कहा ये तो होना ही था.समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अमर सिंह के साथ ही महाराष्ट्र से पार्टी विधायक अबू आजमी समाजवादी पार्टी का दामन छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते है.
ऐसी खबरें आज से चल निकली है,अब हर किसी राजनैतिक और गैर राजनैतिक के जुबान पर यही चर्चा है कि क्या अब अमर सिंह को मुलायम मनाने में कामयाब होगें या फिर अमर सिंह का इस्तीफा स्वीकार करके अमर सिंह को किसी नये दल की सेवा करने का अवसर प्रदान करेगें.
इस मसले पर समाजवादी नेता अबू आजमी व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता तारिक अनवर से सहारा मीडिया के एडिटर इन चीफ संजीव श्रीवास्तव ने विस्तृत फोनवार्ता की. खबर के मुताबिक राकांपा में अमर सिंह राष्ट्रीय नेता के तौर पर जुड़कर उत्तर प्रदेश की कमान संभालेंगे. महाराष्ट्र के नेता व विधायक अबू आजमी भी इसी फार्मूले पर चलकर समाजवादी पार्टी छोड़कर राकांपा में शामिल हो सकते हैं.जाहिर है दो बड़े नेताओं के एक साथ पार्टी छोड़ने से पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को बड़ा झटका लग सकता है.
अमर सिंह को लेकर आ रही खबरों में बताया जा रहा है कि अमर सिंह का राकांपा में शामिल होना लगभग तय है. इसी क्रम में राकांपा नेता तारिक अनवर से उन्होंने जानना चाहा कि अमर सिंह के उनकी पार्टी में आने से क्या राकांपा को मजबूती मिलेगी? सवाल के जवाब में श्री अनवर ने इस पूरे मसले पर कोई जानकारी नहीं होने की बात कही. सपा नेता अबू आजमी के बारे में भी इस तरह की बातें उडी है कि वे भी अमर सिंह के साथ पार्टी को अलविदा कहेंगे. जब इस सिलसिले में आजमी से उनका मन टटोला गया तो आजमी का जवाब था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि समाजवादी पार्टी में चल रहे अंदरूनी विवाद जल्द ही सुलझा लिए जाएंगे और अमर सिंह पार्टी के एक महत्वपूर्ण नेता के रूप में बने रहेंगे. अपने बारे में पार्टी छोड़ने के सवाल पर उनका कुछ इस तरह से था जैसे तीन बार तलाक के दौरान बोला जाता है ठीक उसी तरह से आजमी बोले कि - नेवर,नेवर....नेवर.
अबू आजमी ने साफ कहा कि वह कांग्रेस और राकांपा में कतई नहीं जाएंगे. वहीं राकांपा नेता तारिक अनवर ने बातचीत में कहा कि अमर सिंह को समाजवादी पार्टी में मनाने की कोशिशें जारी हैं और वह उनके मुताबिक इस बारे में फिलहाल कुछ कहना जल्दबाजी होगा. गुरुवार को अमर सिंह के इस्तीफे के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने भी माना कि पार्टी के अंदर कुछ मतभेद हैं,जिन्हें पार्टी फोरम में सुलझा लिया जाएगा. श्री यादव शायद श्री सिंह के इस्तीफे पर हैरान और परेशान नहीं हैं. वह मानते है कि घर के चार बर्तनों में खनखनाहट हुई है लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आंगन में दीवार खड़ी हो जाए. अमर सिंह फिलहाल दुबई में हैं और जब वह भारत लौटेंगे तो सभी कयासों से पर्दा उठा सकते हैं.
अमर सिंह उन नेताओं में से हैं, जो राजनीति को संभावनाओं का खेल समझते है, इसलिए आश्चर्य नहीं कि उनके इस्तीफे में भी लोगों को कोई खेल नजर आ रहा है. अमर सिंह का कहना है कि डॉक्टर ने उन्हें आराम करने का मसविरा दिया है,इसलिए स्वास्थ्य लाभ के लिए वह पार्टी की अहम जिम्मेदारियों से दूर रहना चाहते हैं. लेकिन इसी के साथ वह यह भी कह रहे हैं कि राजनीति से उनका मन दुखी हो गया है.पर वह यह बताने से भी नहीं चूक रहे कि अगर मुलायम सिंह यादव काम का सही बंटवारा करेंगे तो वह तय सीमा में पार्टी का काम करते रहेंगे.
अमर सिंह की दोहरी बातो में कुछ ना कुछ तो चल ही रहा है इसीलिये अमर सिंह के बारे में नये दलो में शामिल होने को लेकर हो रही चर्चाओ पर हर कोई घ्यान दे रहा है.अमर सिंह हमेशा अपने बयानों में राजनीतिक विश्लेषकों के लिए कोई ना कोई नया संकेत छोड़ देते हैं और इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया है.समाजवादी पार्टी के पर्याय बन चुके अमर सिंह को यह कदम उठाना पड़ा है, तो यह निश्चय ही पार्टी के एक बड़े संकट का सूचक है. पार्टी में उनके खिलाफ माहौल तो बहुत पहले से बन रहा था, लेकिन फिरोजाबाद में मुलायम सिंह की बहू की हार के बाद अमर सिंह के विरोधी काफी मुखर हो गए हैं.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डा.रामगोपाल यादव के हाल के बयान में इसकी एक झलक देखने को मिलती है. फिरोजाबाद में हार से मुलायम सिंह समेत अनेक वरिष्ठ नेताओं को अहसास हो रहा है कि पार्टी का परंपरागत यादव वोट बैंक भी सिर्फ अमर सिंह के कारण छिटकने लगा है. कई पुराने समाजवादी यह बात बार-बार उठा चुके हैं कि अमर सिंह ने पार्टी को अपनी बुनियादी जमीन से भटका दिया है. इसलिए पार्टी में अब अपने मूल आधार को तलाशने की मांग तेज हो रही है. ऐसे में अमर सिंह को अलग-थलग होने की आशंका सता रही है. अपने इस्तीफे से वह दबाव भी बना रहे हैं और खुद को परख भी रहे हैं.
दरअसल वह अपनी जगह फिर से तलाश रहे हैं -पार्टी के भीतर भी और संभवत बाहर भी. समाजवादी पार्टी के महासचिव के रूप में उनकी एक अहम भूमिका रही है, लेकिन गठबंधन की राजनीति ने अमर सिंह को एक खास हैसियत और पहचान दी. अमर सिंह के हुनर का लाभ केवल उन्हीं की पार्टी को नहीं बल्कि कई अन्य दलों को भी मिला है लेकिन जमीनी राजनीति की जमीन अब भी खत्म नहीं हुई है. बल्कि हर दल उसे नए सिरे से खोजना चाह रहा है. ऐसे में राजनीति के मैनेजर अमर सिंह की वाकई कितनी जरूरत है, यह देखना दिलचस्प रहेगा. अमर सिंह के इस्तीफे के बाद भले ही सपा के हर छोटे बडे नेता अपनी ओर यह सफाई देते हुये घूम रहे है कि मुलायम सिंह यादव अमर सिंह को मनाने में कामयाब हो जायेगे और सब कुछ पहले की हि तरह हो जायेगा.
Title :
Body
- सुदर्शन का (कु) दर्शन
- सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
- सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
- नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
- अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
- अपने होने पर ही हैरान
- भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
- एनसीपी के 'दादा' का दांव
- पीएमओ वाले पृथ्वीराज
- गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?



del.icio.us
Digg
Post your comment