Home | राजनीति | समाजवादी से राष्ट्रवादी होना चाहते हैं अमर सिंह

समाजवादी से राष्ट्रवादी होना चाहते हैं अमर सिंह

image

अमर सिंह के इस्तीफे की जब गूंज उठी तो घर की लड़ाई घर-घर की कहानी बन गई. किसी ने कहा कि अमर सिंह ने सही फैसला लिया तो किसी ने कहा ये तो होना ही था.समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अमर सिंह के साथ ही महाराष्ट्र से पार्टी विधायक अबू आजमी समाजवादी पार्टी का दामन छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते है.

ऐसी खबरें आज से चल निकली है,अब हर किसी राजनैतिक और गैर राजनैतिक के जुबान पर यही चर्चा है कि क्या अब अमर सिंह को मुलायम मनाने में कामयाब होगें या फिर अमर सिंह का इस्तीफा स्वीकार करके अमर सिंह को किसी नये दल की सेवा करने का अवसर प्रदान करेगें.

इस मसले पर समाजवादी नेता अबू आजमी व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता तारिक अनवर से सहारा मीडिया के एडिटर इन चीफ संजीव श्रीवास्तव ने विस्तृत फोनवार्ता की. खबर के मुताबिक राकांपा में अमर सिंह राष्ट्रीय नेता के तौर पर जुड़कर उत्तर प्रदेश की कमान संभालेंगे. महाराष्ट्र के नेता व विधायक अबू आजमी भी इसी फार्मूले पर चलकर समाजवादी पार्टी छोड़कर राकांपा में शामिल हो सकते हैं.जाहिर है दो बड़े नेताओं के एक साथ पार्टी छोड़ने से पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को बड़ा झटका लग सकता है.

अमर सिंह को लेकर आ रही खबरों में बताया जा रहा है कि अमर सिंह का राकांपा में शामिल होना लगभग तय है. इसी क्रम में राकांपा नेता तारिक अनवर से उन्होंने जानना चाहा कि अमर सिंह के उनकी पार्टी में आने से क्या राकांपा को मजबूती मिलेगी? सवाल के जवाब में श्री अनवर ने इस पूरे मसले पर कोई जानकारी नहीं होने की बात कही. सपा नेता अबू आजमी के बारे में भी इस तरह की बातें उडी है कि वे भी अमर सिंह के साथ पार्टी को अलविदा कहेंगे. जब इस सिलसिले में आजमी से उनका मन टटोला गया तो आजमी का जवाब था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि समाजवादी पार्टी में चल रहे अंदरूनी विवाद जल्द ही सुलझा लिए जाएंगे और अमर सिंह पार्टी के एक महत्वपूर्ण नेता के रूप में बने रहेंगे. अपने बारे में पार्टी छोड़ने के सवाल पर उनका कुछ इस तरह से था जैसे तीन बार तलाक के दौरान बोला जाता है ठीक उसी तरह से आजमी बोले कि - नेवर,नेवर....नेवर.

अबू आजमी ने साफ कहा कि वह कांग्रेस और राकांपा में कतई नहीं जाएंगे. वहीं राकांपा नेता तारिक अनवर ने बातचीत में कहा कि अमर सिंह को समाजवादी पार्टी में मनाने की कोशिशें जारी हैं और वह उनके मुताबिक इस बारे में फिलहाल कुछ कहना जल्दबाजी होगा. गुरुवार को अमर सिंह के इस्तीफे के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने भी माना कि पार्टी के अंदर कुछ मतभेद हैं,जिन्हें पार्टी फोरम में सुलझा लिया जाएगा. श्री यादव शायद श्री सिंह के इस्तीफे पर हैरान और परेशान नहीं हैं. वह मानते है कि घर के चार बर्तनों में खनखनाहट हुई है लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आंगन में दीवार खड़ी हो जाए. अमर सिंह फिलहाल दुबई में हैं और जब वह भारत लौटेंगे तो सभी कयासों से पर्दा उठा सकते हैं.

अमर सिंह उन नेताओं में से हैं, जो राजनीति को संभावनाओं का खेल समझते है, इसलिए आश्चर्य नहीं कि उनके इस्तीफे में भी लोगों को कोई खेल नजर आ रहा है. अमर सिंह का कहना है कि डॉक्टर ने उन्हें आराम करने का मसविरा दिया है,इसलिए स्वास्थ्य लाभ के लिए वह पार्टी की अहम जिम्मेदारियों से दूर रहना चाहते हैं. लेकिन इसी के साथ वह यह भी कह रहे हैं कि राजनीति से उनका मन दुखी हो गया है.पर वह यह बताने से भी नहीं चूक रहे कि अगर मुलायम सिंह यादव काम का सही बंटवारा करेंगे तो वह तय सीमा में पार्टी का काम करते रहेंगे.

अमर सिंह की दोहरी बातो में कुछ ना कुछ तो चल ही रहा है इसीलिये अमर सिंह के बारे में नये दलो में शामिल होने को लेकर हो रही चर्चाओ पर हर कोई घ्यान दे रहा है.अमर सिंह हमेशा अपने बयानों में राजनीतिक विश्लेषकों के लिए कोई ना कोई नया संकेत छोड़ देते हैं और इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया है.समाजवादी पार्टी के पर्याय बन चुके अमर सिंह को यह कदम उठाना पड़ा है, तो यह निश्चय ही पार्टी के एक बड़े संकट का सूचक है. पार्टी में उनके खिलाफ माहौल तो बहुत पहले से बन रहा था, लेकिन फिरोजाबाद में मुलायम सिंह की बहू की हार के बाद अमर सिंह के विरोधी काफी मुखर हो गए हैं.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डा.रामगोपाल यादव के हाल के बयान में इसकी एक झलक देखने को मिलती है. फिरोजाबाद में हार से मुलायम सिंह समेत अनेक वरिष्ठ नेताओं को अहसास हो रहा है कि पार्टी का परंपरागत यादव वोट बैंक भी सिर्फ अमर सिंह के कारण छिटकने लगा है. कई पुराने समाजवादी यह बात बार-बार उठा चुके हैं कि अमर सिंह ने पार्टी को अपनी बुनियादी जमीन से भटका दिया है. इसलिए पार्टी में अब अपने मूल आधार को तलाशने की मांग तेज हो रही है. ऐसे में अमर सिंह को अलग-थलग होने की आशंका सता रही है. अपने इस्तीफे से वह दबाव भी बना रहे हैं और खुद को परख भी रहे हैं.

दरअसल वह अपनी जगह फिर से तलाश रहे हैं -पार्टी के भीतर भी और संभवत बाहर भी. समाजवादी पार्टी के महासचिव के रूप में उनकी एक अहम भूमिका रही है, लेकिन गठबंधन की राजनीति ने अमर सिंह को एक खास हैसियत और पहचान दी. अमर सिंह के हुनर का लाभ केवल उन्हीं की पार्टी को नहीं बल्कि कई अन्य दलों को भी मिला है लेकिन जमीनी राजनीति की जमीन अब भी खत्म नहीं हुई है. बल्कि हर दल उसे नए सिरे से खोजना चाह रहा है. ऐसे में राजनीति के मैनेजर अमर सिंह की वाकई कितनी जरूरत है, यह देखना दिलचस्प रहेगा. अमर सिंह के इस्तीफे के बाद भले ही सपा के हर छोटे बडे नेता अपनी ओर यह सफाई देते हुये घूम रहे है कि मुलायम सिंह यादव अमर सिंह को मनाने में कामयाब हो जायेगे और सब कुछ पहले की हि तरह हो जायेगा.

Subscribe to comments feed Comments (3 posted):

सरिता अरगरे on 09 January, 2010 20:58;18
avatar
जिस तरह धीरु भाई अंबानी ने चाँदी और सोने के जूते का इस्तेमाल कर राजनीति के गलियारों को चकाचौंध कर लोकतंत्र के मौजूदा स्वरुप की बुनियाद डाली,उसी तरह "राजनीतिक अड़ीबाज़" अमरसिंह को सत्ता की दलाली का नया दौर लाने का श्रेय जाता है । मुलायम सिंह को तो छोड़िये,मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी भी राजनीति के इस "क्वात्रोचि" से खौफ़ज़दा रहते हैं । आखिर हों भी क्यों ना देखते ही देखते अमरसिंह का कद अंतरराष्ट्रीय हो चला है ।
Thumbs Up Thumbs Down
2
Jeet Bhargava on 09 January, 2010 23:40;10
avatar
अमरसिंह का कोई भरोसा नहीं यह जहा भी जाएगा उस पार्टी को डुबोयेगा.और अगर पार्टी नहीं डुबो पाए तो यह देश को डूबोयेंगे. सरिता अरगरे से बिलकुल सहमत हूँ.
Thumbs Up Thumbs Down
2
sunita anil reja on 10 January, 2010 07:36;41
avatar
sir, Aamar singh jee is great politician so any thing can be prected about him. but now a days every party wanted to join the ruling government party whomsoever it is? if Amar singh jee may join ncp then it is not a matter of surprise as ncp is tied up with Maharasra and centre government too so it is all power game. nothing is impossible in politics . thnaks-regards-sunita anil reja, mumbai
Thumbs Up Thumbs Down
-1
total: 3 | displaying: 1 - 3

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image दिनेश शाक्य इटावा के रहनेवाले दिनेश शाक्य १९८९ से मीडिया में कार्यरत. १९८९ में पत्रिका हलचल से जुडे फिर साप्ताहिक चौथी दुनिया के बाद दिल्ली प्रेस प्रकाशन से जुडे,१९९६ से समाचार ए़जेसी वार्ता में २००३ मार्च तक इटावा में रिपोर्टर के रूप में काम किया, सहारा समय न्यूज चैनल में काम. उत्तर प्रदेश में विस्फोट.कॉम की ओर से स्पेशल स्टेट करेस्पांडेन्ट.
Rate this article
1.00
More from राजनीति
Previous
image
ठाकरे परिवार में कौन बनेगा सरकार?
महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले विधानसभा चुनाव में जो नहीं हुआ वह एक महानगरपालिका के चुनाव में हो रहा है. शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे अपने ही भतीजे से उलझ गये हैं. कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका चुनाव में जैसे ही राज ठाकरे ने बाल ठाकरे पर छींटाकसी की, बाल ठाकरे ने पलटकर ऐसा वार किया कि महाराष्ट्र की राजनीति गर्म हो गयी. चुप रहने की बजाय राज ठाकरे ने फिर जवाब दिया और आपसी ठसक परिवार की चौखट से निकलकर राजनीतिक के अखाड़े की जंग बन गयी. ...
image
नहीं, राहुल जेपी नहीं हो सकते!
दो दिन पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता मोहन प्रकाश ने राहुल गाँधी द्वारा छात्रों और युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता देने और उनसे संवाद करने की वजह से उनकी तुलना जवाहरलाल नेहरु, एपीजे अब्दुल कलाम और जेपी से की तो इसकी आलोचना भाजपा और रामविलास पासवान ने की. मोहन प्रकाश के बयान को देखें तो पता चलेगा कि उन्होंने जेपी के व्यक्तित्व और राजनीति से नहीं, युवाओं से उनकी संवाद-शैली कि तुलना की है. उनका पूरा बयान इस प्रकार है, " (जवाहरलाल) नेहरु के बाद कलाम (पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम) थे जिन्होंने बच्चों को संबोधित किया. इसीप्रकार, जयप्रकाश नारायण के बाद, राहुल गाँधी हैं जिन्होंने युवाओं की जरूरतों, आकाँक्षाओं और देश में उनके भविष्य को संबोधित किया है."...
image
बादल के घर गरजा बादल
सताधारी अकाली दल की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अब बगावत घर में है। पहले बगावत घर से बाहर होती थी। प्रकाश सिंह बादल अपने राजनीतिक जीवन के सबसे गंभीर संकट को झेल रहे है। इस संकट से होने वाला नुकसान उन्हें पता है। उनके चेहरे पर इसके नुकसान की छाया दिख रही है। चेहरा उतरा हुआ है और आवाज में अब वो दमखम नहीं है।...
image
बिहार की राजनीति में मायावती का प्रवेश क्रांतिकारी
बिहार चुनाव में एक और आयाम जुड़ गया है . बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावाती ने बुधवार को बिहार में अपना पहला चुनावी दौरा करके यह साबित कर दिया है कि वे बिहार को अपनी पार्टी की राजनीतिक प्राथमिकताओं में बहुत ऊपर रख कर चल रही हैं. इसके बाद भी मायावती बिहार में चुनाव प्रचार करने जायेगीं और हर दौर के पहले कुछ चुनिन्दा विधानसभा क्षेत्रों में लोगों से वोट मागेगीं....
image
राजनीति के समंदर में धनतंत्र के धुरंधर
ग्राम से सेवाग्राम यात्रा के लिए आयोजित पत्रकार सम्मेलन में महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष माणिकराव ठाकरे और प्रदेश के पूर्व मंत्री सतीश चतुर्वेदी के बीच रैली के लिए धन उगाही की प्रक्रिया पर चर्चा जिस अंदाज में स्टार माझा पर प्रसारित हुई उसने भले ही महाराष्ट्र कांग्रेस की राजनीति में भूकंप नहीं लाया हो लेकिन राजनीतिक दलों के संचालन में धनतंत्र की भूमिका को जरूर बेनकाब किया है. गौरतलब है कि स्टार माझा समेत तमाम चैनलों पर कांग्रेस की बखिया उधेड़ने के कार्यक्रम के बावजूद कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण और प्रदेश अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे की पीठ को थपथपाने का काम करके इस बवंडर को खत्म करने की चतुराई दिखाई है. ...
image
सब्सिडी की राजनीति पर संकट के बादल
पंजाब के प्रभावशाली बादल परिवार में शुरू हुए राजनीतिक गृहयुद्ध ने कई चर्चाएं शुरू कर दी है। क्या क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की राजनीति जब परिवार के गृह युद्व में उलझ जाती है तो कुल की राजनीति करने वाला राजनीतिक दल जल्द ही समाप्त हो जाता है? क्या क्षेत्रीय राजनीतिक दल परिवार से ऊपर उठ कर राज्य के हित में नहीं सोच सकते? फिर सता में बने रहने के लिए क्या छोटे राजनीतिक दल लोकलुभावनी योजनाओं को बढ़ावा ही देते रहेंगे? पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत सिंह बादल को अकाली दल से निलंबित किए जाने के बाद अब देश के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की राजनीति को लेकर नयी बहस छिड़ चुकी है। चूंकि नई बहस इसलिए कि इस विवाद में एक गंभीर आर्थिक मसला है, जो अभी तक क्षेत्रीय दलों में हुए पारिवारिक युद्व से अलग है। वह गंभीर मसला है, राज्य की खराब होती आर्थिक स्थिति और सब्सिडी की राजनीति।...
image
दिल्ली शिफ्ट हुआ कर-नाटक
अब दिल्ली शिफ्ट हो गया कर-नाटक। सोनिया-आडवाणी के घर फैसलाकुन बैठकों का दौर चला। राष्ट्रपति राज के खौफ में बीजेपी ने अपने 105 एमएलए दिल्ली बुला लिए ताकि राष्ट्रपति के सामने परेड करा राजनीतिक मुद्दे को धार दे सके पर तेल की धार देख कांग्रेस ने खुद को फिसलने से बचा लिया। बिहार, झारखंड, गोवा जैसी जल्दबाजी नहीं की, गवर्नर हंसराज भारद्वाज तो बेनकाब हो चुके। सो फैसले पर फौरन मोहर लगाने की तोहमत नहीं ली अलबत्ता बीजेपी को भी बेनकाब करने की रणनीति बनाई।...
image
सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
अपनी मध्य प्रदेश यात्रा के दौरान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव राहुल गाँधी द्वारा आरएसएस की तुलना सिमी से करने पर समूचा संघ परिवार बौखला गया है. इस बौखलाहट की वजह यह है कि जिस सिमी का विरोध कर संघ परिवारी अपनी राष्ट्रभक्ति का रंग चोखा करते थे उसी सिमी से संघ की तुलना उसे अप्रत्याशित क्षति पहुंचा सकती है. भारत और दुनिया के अकादमिक जगत के लोग, नेता और पत्रकार सभी संघ की स्थापना से लेकर अब तक यह कहते रहे की संघ एक सांप्रदायिक,फासीवादी और भारतीय संविधान की भावना के विरुद्ध खड़ा संगठन है. आज भी संघ के इस घातक चरित्र पर किसी को संदेह नहीं है....
image
शिव सेना की राह पर अकाली दल
पंजाब में सारा कुछ ठीक चल रहा था। कुछ दिन पहले ही निचली अदालत से बादल परिवार को आय से अधिक संपति के मामले में राहत मिली थी। पर यह राहत ज्यादा देर नहीं चली। घर में विस्फोट हो गया है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत सिंह बादल ने यह विस्फोट किया है। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने ही राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना कर केंद्र सरकार की नीतियों की तारीफ कर दी है। यह तब किया है जब राज्य में खुद मनप्रीत सिंह बादल वित्त मंत्री है।...
image
न अचार है न मुरब्बा है, राहुल खाली डब्बा है
सबसे पहले तो उत्तर प्रदेश भाजपा को बधाई कि उसने राहुल गांधी का संघ ज्ञान बढ़ाने के लिए संघ विचारधारा को समझानेवाली पुस्तकों का सेट भेजा है. मध्य प्रदेश की तीन दिवसीय यात्रा में उन्होंने जिस प्रकार से संघ को सिमी के करीब ठहरा दिया उससे साबित होता है कि संघ विचारधारा के बारे में तो उन्हें तनिक भी अंदाज नहीं है, साथ ही यह भी आभास होता है कि वे राजनीतिक रूप से टीन और कनस्टर के ऐसे खाली डिब्बे हैं जो जैसे चाहे अपने हित के लिए इस्तेमाल कर सकता है. ...
image
कंगाल पड़े बंगाल में रा-हुल-रा-हुल
कांग्रेस के चिकने चुपड़े युवराज राहुल गाँधी को तीन दिन के बंगाल दौरे से वहां की उबड़-खाबड़ सियासी जमीन का अंदाज जरुर लग गया होगा. पार्क स्ट्रीट के रेस्तरां में मुर्ग मसल्लम उड़ाने से लेकर शांति निकेतन में नौजवान लड़कियों के रा-हुल रा-हुल नारों की मस्ती के बीच राहुल ने फुर्सत के क्षणों के लुत्फ़ जरूर उठाया, लेकिन बात जब सियासी जमीन पर कुछ कहने की आई तो ममता बनर्जी की पार्टी के साथ कांग्रेस के स्वाभिमान की बात उठा कर उन्होंने नयी मुसीबत मोल ले ली. राहुल गाँधी ने यहाँ कहा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस तृणमूल के साथ हाथ जरूर मिलाएगी पर सर झुका कर नहीं. बंगाल में कांग्रेस के हाल से वाकिफ समझदार लोग सवाल कर रहे हैं कि यहाँ जब कांग्रेस ही नहीं बची है तो स्वाभिमान किसका?...
image
नेहरू से नौ कदम आगे निकलने की चाह
आम तौर पर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के बारे में टिप्पणी करने से बचने वाली कांग्रेस को उनका यह बयान रास नहीं आया कि मौजूदा सरकार सबसे ‘एकजुट‘ सरकारों में से एक है- यहां तक कि पंडित नेहरू के नेतृत्व वाली पहली सरकार से भी। डॉ. सिंह के इस बयान ने सबको चौंकाया क्योंकि कांग्रेस के भीतर से कोई नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू, स्व. इंदिरा गांधी या स्व. राजीव गांधी के बारे में अप्रत्यक्ष टिप्पणी भी करे तो वह एक बड़े जोखिम का काम है। लेकिन डॉ. सिंह बार-बार सिद्ध कर चुके हैं कि वे राजनीति के गुर आजमाने में निष्णात किसी खुर्राट नेता की तरह नहीं हैं। उन्होंने जो कहा वह उनकी सीधे-सादे और बेबाक इंसान की छवि के अनुरूप ही था।...
image
राजनीतिक एनकाउण्टर का बढ़ता खतरा
क्या देश में अब एनकाउण्टर के नाम पर राजनीतिक हत्याकाण्ड का दौर शुरू हो गया है? पिछले एक डेढ़ साल में हुई राजनीतिक हत्याओं पर नजर दौड़ाएं तो यह सवाल बिल्कुल ही बेकार नजर नहीं आता. अभी हाल में ही मध्य प्रदेश पुलिस ने भिंड युवक जिला कांग्रेस के पद पर कार्यरत अमजद खान को एनकाउण्टर में मार गिराया. जिस पर मध्य प्रदेश विधानसभा के उपनेता चौधरी राकेश सिंह और मध्य प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष डॉ. गोविन्द सिंह नें भिंड पुलिस के ऊपर आरोप लगाया है कि भिंड पुलिस नें 22 अगस्त को एक मुठभेड़ दिखाकर अमजद खान की हत्या कर दी।...
image
लालू-पासवान का मुख्यमंत्री हो मुसलमान!
बिहार में चुनावी बिगुल बज चुका है लेकिन उससे पहले पाटलिपुत्र के युद्ध में हर दल या मोर्चा-दूसरे मोर्चे की राजनीतिक जमीन अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटा है। राजनीति के इस खेल में कौन किस पर भारी पड़ेगा, इसकी कुंजी तो जनता जनार्दन के पास है। लेकिन उससे पहले नेता वोट की राजनीति को जात-पात, सामाजिक ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द केंद्रित करने की कोशिश में जुटे हैं। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में मात खाए लालू यादव और रामविलास पासवान ने राजनीतिक इच्छा व्यक्त की है कि राज्य में एक मुस्लिम उपमुख्यमंत्री हो?...
image
सात रेसकोर्स पर दस जनपथ का दावा
दस जनपथ से अगर आप सात रेसकोर्स पहुंचना चाहें तो बमुश्किल सात मिनट का समय लगता है. लेकिन इन दिनों कांग्रेस के शीर्ष पर शुरू हुए सत्ता संघर्ष ने लुटियंस जोन के इन दो सड़कों की दूरिया बढ़ा दी हैं. पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के अंदर कुछ वही राजनीति शुरू हो गई है जिसे किनारे लगाने की राजनीति कह सकते हैं। अक्सर जो किनारे लगाने की कांग्रेस स्टाइल है, उसी स्टाइल में काम की शुरूआत हुई है।...
image
सुप्रीम कोर्ट का सवाल और प्रधानमंत्री का मलाल
आखिरकार प्रधानमंत्री का दुख प्रकट हो ही गया. संपादकों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के काम काज के लिए नीति निर्धारण न करे. प्रधानमंत्री का यह दुख प्रशासन की उस चिंता से प्रकट होता है जो न्यायालयों के हस्तक्षेप से जुड़ा है. पहले भी कई मौकों पर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव के मौके आये हैं. अनाज के सड़न के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से एक बार फिर वह सवाल उठ खड़ा हुआ है, जिस पर प्रधानमंत्री अपनी आपत्ति जाहिर कर रहे हैं....
image
राजनीतिक हिन्दुत्व पर दिग्गी का दांव
हिन्दुओं का ठेकेदार बनने की आरएसएस और उसके मातहत संगठनों की कोशिश को चुनौती मिल रही है. भगवान् राम के नाम पर राजनीति खेलकर सत्ता तक पंहुचने वाली बीजेपी के लिए और कोई तरकीब तलाशनी पड़ सकती है क्योंकि कांग्रेस की नयी लीडरशिप हिन्दू धर्म के प्रतीकों पर बीजेपी के एकाधिकार को मंज़ूर करने को तैयार नहीं है. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने साफ़ कहा है कि हिन्दू धर्म पर किसी राजनीतिक पार्टी के एकाधिकार के सिद्धांत को वे बिल्कुल नहीं स्वीकार करते....
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2