महिला आरक्षण: कहीं खुशी का खाना, कहीं चिंता की चाय
बलवा खत्म, तो समझो महिला बिल अटक गया। यादवी तिकड़ी के हंगामे पर फिलहाल सरकार ने सरेंडर कर दिया। अब फिर बात होगी बिल के हर पहलू पर। सभी पक्षों से बात कर ही अब लोकसभा में बिल आएगा। आखिर आम बजट पास कराने की मजबूरी में सरकार को भरोसा देना पड़ा। एक बार नहीं, तीन-तीन बार। संसदीय कार्यमंत्री तो बुधवार को ही सभी से सलाह-मशविरे का एलान कर चुके। गुरुवार को लोकसभा में लालू-शरद-मुलायम ने अपनी बात रखी तो प्रणव दा ने भरोसा दिलाया। फिर भी यादवी तिकड़ी का दिल नहीं भरा।
सो प्रणव दा के कमरे में मीटिंग हुई। प्रणव-पवार-चिदंबरम-बालू-ममता-बंसल की मौजूदगी में तीनों यादव ने शर्त रखी। पहले सदन में सर्वदलीय मीटिंग का सीधा-सीधा एलान करो। फिर सदन चलने देंगे। अब एलान तो हो गया। पर सवाल, बात किससे होगी। क्या कोई नया नेतृत्व सामने आया? विरोध करने वाली त्रिमूर्ति चौदह साल से विरोध कर रही। देवगौड़ा-गुजराल-वाजपेयी-मनमोहन ने कई सर्वदलीय मीटिंगें कर लीं। पर नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा। कोटा के भीतर पिछड़ी-मुस्लिम महिलाओं के लिए कोटा का फच्चर फंसा रहा। सो अब बात करने से क्या होगा। इन चौदह साल में विरोधी अपने स्टैंड से पीछे नहीं हटे। राज्यसभा ने तो बिल पास कर दिया। फिर भी बिल के मौजूदा प्रारूप पर विरोधी राजी नहीं। सो बात के लिए बात का क्या मतलब? यही ना, आम सहमति के ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी। लेफ्ट बिल में संशोधन की स्थिति में समर्थन को राजी नहीं। तो बीजेपी पत्ते खोलने को तैयार नहीं। वैसे भी विरोधियों को राजी होना होता। तो खुद पीएम, सोनिया, प्रणव कई दफा बात कर चुके। फिर सर्वदलीय मीटिंग की मेज पर बैठकर कौन से तारे तोड़ लेंगे। पर फिर वही बात, कांग्रेस तो अपना काम कर चुकी।
वैसे लोकसभा में बिल पास हो भी जाए तो अभी मीलों सफर बाकी। बिल राष्ट्रपति के पास जाएगा। फिर चौदह राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी अनिवार्य। फिर वापस सीटों के निर्धारण वाला बिल दोनों सदनों से पास हो। तब जाकर नोटिफिकेशन होगा। पर बिल आगे तब बढ़ेगा, जब लोकसभा से स्पीड ब्रेकर हटे। अब लालू की मानो, तो बीजेपी-कांग्रेस के कई सांसद 'हमें बचाओ' की गुहार लगा रहे हैं। लालू बोले- 'बीजेपी-कांग्रेस के कई सांसद हमसे मिले। तो कहा- बचा लो, हम लोगों को डेथ सर्टिफिकेट पर दस्तखत करने को कहा जा रहा है।' यानी बिल में सिर्फ यादवी तिकड़ी ही पेच नहीं। सचमुच बीजेपी-कांग्रेस के कई सांसद भी किस्मत को कोस रहे। अब तो मार्शल भी बिल के पेच बन गए। राज्यसभा में मार्शल के जरिए विरोधियों पर जोर चला कांग्रेस-बीजेपी फंस गईं। यों बीजेपी अब पलटी मार रही। अब सुषमा स्वराज कह रहीं, बीजेपी ने निलंबित करने का सुझाव दिया था। मार्शल बुलाने का नहीं। अगर निलंबित सांसद सदन से नहीं हट रहे थे। तो थकाने की रणनीति बनानी चाहिए थी, भले बिल एक-दो दिन देरी से पास होता। पर जो सांसद सारी हदें पार करने की धमकी दे रहे थे, उनका क्या भरोसा।
सो अपनी ही चाल में फंसी बीजेपी ने भूल सुधार कर ली। गुरुवार को खुद अरुण जेतली ने मंगलवार को सदन में हुए घटनाक्रम की जिम्मेदारी ली। बाकायदा माफी मांग निलंबित सदस्यों को वापस लाने की अपील। अब सुषमा स्वराज कह रहीं, अगर लोकसभा में मार्शल का इस्तेमाल हुआ। तो बिल पर न बहस करेंगे, न वोट। वैसे सरकार भी अब मार्शल का इस्तेमाल करने की नहीं सोचेगी। तभी तो निलंबित सांसदों को वापस लिवाने की तैयारी हो रही। बस औपचारिकता भर बाकी। बंसल ने तो लोकसभा में एलान कर दिया था, देर शाम तक हल निकल आएगा। पर विरोधियों की बात तो बाद में। यहां कांग्रेस-बीजेपी के अपने ही सिर-दर्द बन गए। बीजेपी के हुकुमदेव नारायण, योगी आदित्यनाथ ने तो खुल्लमखुल्ला मोर्चेबंदी कर दी। योगी ने व्हिप जारी न करने की मांग की। एक अखबार में बीजेपी के चीफ व्हिप रमेश बैस के हवाले से 70 फीसदी सांसदों के विरोध की खबर छप गई। सो सबसे पहले बैस ने सुषमा को सफाई दी। फिर सुषमा ने हुकुमदेव-योगी से बात की। अब सुषमा की मान हुकुमदेव ने पार्टी लाइन पर वोट करने का बयान दे दिया। पर योगी से कौन कहलवाएगा।
सो जैसे ही दो-चार सांसदों ने आवाज उठाई, बीजेपी की हवा खराब। सुबह से ही मीटिंगों का दौर शुरू हो गया। आडवाणी-सुषमा-जेतली-राजनाथ-आहलूवालिया-मुंडे तीन राउंड बैठे। फिर सुषमा ने तीस पृथ्वीराज रोड पर लोकसभा सांसदों की इमरजेंसी मीटिंग बुलाने का सुझाव दिया। चिंतित बीजेपी ने आडवाणी के घर सांसदों को चाय पर बुलाया। ताकि बवाल थाम सकें। अब सुषमा की दलील, बिल को लेकर मतभिन्नताएं हैं, पर मतभेद नहीं। यों बात सोलह आने सही। पर कांग्रेस को मौके का फायदा मिल गया। सो सारा श्रेय बटोर गई। बीजेपी का आरोप, कांग्रेस ने श्रेय की होड़ में ऐसी खबर फैलाई। सो बीजेपी ने भी दो नाम बता दिए। कांग्रेस के संदीप दीक्षित और पबन घटवार। यों कांग्रेस में भी मुखालफत करने वाले सांसद कम नहीं। किशनगंज के कांग्रेसी सांसद अनवारुल हक ने तो खुलकर बोला। लालू की मानो, तो बाकी अपने नेता के डर से नहीं बोल रहे। वाकई व्हिप न हो, अंतरात्मा की आवाज पर वोट हो। तो महिला बिल चौदह साल नहीं, चौदह सदी में भी पास न हो। अब जो भी हो, कांग्रेसी चाल से बीजेपी पिछड़ गई। तभी तो महज राज्यसभा में बिल पास करा गदगद सोनिया ने गुरुवार को डिनर पार्टी दी तो आडवाणी के घर चिंता की चाय परोसी गई।
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Digg
kya aapko hindi sikhane wale ne purna vakya likhna nah sikhaya tha?
kyn hindi vaakya aur vyaakaran ki maan bahen ko ek karne pe lage ho yar.
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