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गुजरात के गौरव में कांग्रेस का कबाड़ा

image अमित शाह की गिरफ्तारी से भाजपा और मोदी को राजनीतिक फायदा मिलना तय

गुजरात सरकार और नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश में कांग्रेस का कबाड़ा हो रहा है। सोहराबुद्दीन जैसे अपराधी की मौत को फर्जी मुठभेड़ साबित करने की कोशिश में जुटी कांग्रेस को पता नहीं यह आइडिया किसने दिया। लेकिन अब यह जरूर पता चल रहा है कि इस पूरे मामले में भावनात्मक स्तर पर कांग्रेस को नुकसान तय है।

कुछ साल पहले तक गुजरात में महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल के अलावा कोई और नेता नहीं था, जिसको लेकर आम गुजराती के मन में गर्व का भाव रहा हो। लेकिन नरेंद्र मोदी ने पिछले कुछेक सालों में दुनिया के किसी भी कोने में बसनेवाले गुजराती के मन में उसके गुजराती होने के गौरव का नए सिरे से संचार किया है। यही वजह है कि आम गुजराती के मन में यही भावना है कि गुजरात और उसके गौरव को चोट पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन को माफी पाने का कोई हक नहीं है। कांग्रेस को इसी का सबसे बड़ा नुकसान होगा।

गुजरात के मामले में कांग्रेस, सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट इन तीनों के बर्ताव से देश के आम आदमी को तो यही लग रहा है, जैसे सोहराबुद्दीन इस देश का कोई बहुत मासूम और साधा सादा नागरिक हो। लेकिन आम गुजराती यह अच्छी तरह जानता है कि सोहराबुद्दीन कोई आपके और हमारे जैसा सामान्य नागरिक नहीं था, जिसके मारे जाने पर गुजरात के गौरव पर कलंक लगाने की कोशिश की जा रही है। जो लोग सोहराबुद्दीन को नहीं जानते उनको सिर्फ यह बताना ही काफी है कि मध्य प्रदेश के झरनिया नामक एक दूर दराज के छोटे से गांव में उसके घर से पुलिस को चालीस अत्याधुनिक एके – 47 राइफलें, कई जिंदा कारतूस और हैंड ग्रेनेड़ मिले। वह भारत के पांच राज्यों में वांटेड़ था और उस पर 40 से ज्यादा जघन्य अपराध आज भी दर्ज हैं। फिर भी कांग्रेस, पता नहीं क्या सोचकर गुजरात के खिलाफ उसे मुर्दा होने के बावजूद हीरो बनाने की कोशिश में जुटी है। कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसी की पार्टी के शासन वाले महाराष्ट्र में सोहराबुद्दीन पर कोल्हापुर के चांदगढ़ पुलिस स्टेशन में सन 2000 में हत्या करने के उद्देश्य से सरेआम फायरिंग का मुकद्दमा दर्ज है। और उसी चांदगढ़ पुलिस स्टेशन के पन्नों में सन 2005 में षड़यंत्र करके हत्या करने का एक और मुकद्दमा भी सोहराबुद्दीन पर दर्ज है। कांग्रेस के शासनवाले महाराष्ट्र में वहां सोहराबुद्दीन पर क्या कार्रवाई हुई, और नहीं हुई, तो क्यों नहीं हुई, कांग्रेस इस पर बोलने को बिल्कुल तैयार नहीं है।

न केवल गुजरात और देश, बल्कि पूरी दुनिया के गुजरातियों में सबसे पहली बदनामी तो कांग्रेस की इस बात को लेकर हो रही है कि एक कुख्यात अपराधी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले में गुजरात और मोदी को घेरने के लिए कांग्रेस, सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट तीनों का गठबंधन देश और दुनिया के सामने सार्वजनिक हो गया। और यह भी साफ हो गया कि कांग्रेस इन दोनों का जमकर इस्तेमाल कर रही है। भले ही केंद्र में सरकार कांग्रेस की है। लेकिन उसके हर आदेश को सर झुकाकर मानना सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट की मजबूरी नहीं है। लेकिन ऐसा पहले भी होता रहा है, इसीलिए इस मामले में भी हो रहा है। और कुछ ज्यादा ही हो रहा है। सोहराबुद्दीन केस में कांग्रेस ने न केवल सीबीआई का अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया है। बल्कि अब तो यह भी साफ हो गया है कि भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश को किस तरह कांग्रेस ने सीबीआई के जरिए साध कर उससे कैसे सोहराबुद्दीन मामले में सीबीआई जांच के आदेश करवाए। आपकी जानकारी के लिए यहां यह भी बताना जरूरी है कि कांग्रेस के शासन में जिस भोपाल में जिस गैस हादसे में 30 हजार निर्दोष लोगों की मौत जैसे बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले की चार्जशीट तीन पेज, जी हां सिर्फ तीन पेज की। और सोहराबुद्दीन जैसे एक अपराधी की मौत के मामले की चार्जशीट पूरे तीन हजार पेज की। कांग्रेस की असली मंशा को सिर्फ इसी से समझा जा सकता है।

सीबीआई सोहराबुद्दीन के इस मामले की सुनवाई  के लिए भी गुजरात को उपयुक्त राज्य मानने को तैयार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई ने अपील की है कि इस मामले की सुनवाई राज्य के बाहर की जाए। हो सकता है, बाकी दो मुकद्दमों की तरह इसकी भी गुजरात से बाहर सुनवाई हो, लेकिन इसके बारे में केंद्र सरकार पर गुजरात की न्याय व्यवस्था पर शक करने का आरोप लगाने के मोदी के पलटवार से गुजरात के वकील, जज और वहां की न्याय व्यवस्था में भरोसा करने वाला आम नागरिक कांग्रेस से बेहद नाराज है। इस मुद्दे पर पूरी तरह मोदी के साथ खड़ा दिख रहा है।

कांग्रेस खुद भी जानती है कि सोहराबुद्दीन कोई सामान्य इंसान तो था नहीं, जिसके मारे जाने पर इतना बवाल खड़ा किया जाए। लेकिन वह यह भी जानती है कि मुसलमानों की भावनाओं से खेलने के लिए गुजरात सरकार और नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश में सोहराबुद्दीन की मौत को फर्जी मुठभेड़ ही सबसे आसान मुद्दा हो सकती थी। मगर कांग्रेस को यह पता नहीं है कि मोदी को घेरने की कोशिश में जो बेवकूफियां हुई है, और लगातार की जा रही हैं, उसी की वजह से आम गुजराती को लग रहा है कि कांग्रेस पूरे गुजरात के गौरव को ही कठघरे में खड़ा कर रही है। सही मायने में देखा जाए तो एक अपराधी की लाश की शह पर नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश में कांग्रेस को जो नुकसान हो रहा है, इसके दूरगामी परिणाम बहुत गंभीर होंगे। दाऊद और लतीफ जैसे कुख्यात अपराधियों के लिए काम करने वाले एक कुख्यात अपराधी को मारे जाने के इस मामले को जितना तूल मिलेगा, न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश में कांग्रेस को और नुकसान होगा, यह उसे समझना चाहिए। यह सभी जानते हैं कि नरेंद्र मोदी ने सिर्फ गुजरात में ही नहीं दुनिया में कहीं भी बसनेवाले गुजराती के मन में उसके गुजराती होने के गौरव का संचार किया है। और गुजरात की जनता को यह कतई गवारा नहीं है कि  गौरव के उस अहसास के साथ कोई छेड़छाड़ करे। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि नरेंद्र मोदी गुजरात के गौरव के उस अहसास का अभिन्न तत्व बन गए हैं। लेकिन समझ में आए तब न !

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Pushkar on 06 August, 2010 14:24;42
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Well written! Congress party is behaving like Mad Dog! Little they realize that mad dogs are shot eventually.
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vivek on 06 August, 2010 14:33;24
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कांग्रेस से ज्यादा गन्दी राजनीती तो लालू और मुलायम भी नहीं कर रहे है लगता है कांग्रेस ने तो मुसलमानों की वोटो के लिए गुजरात ही नहीं पुरे देश और देश के मूल निवासियों (हिन्दुयो) के आत्म सम्मान को रौदना शुरू कर दिया है
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Dr pawan kurukshetra on 06 August, 2010 15:26;40
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very good article last two elections lost by congress there in presence of sonia gandhi and now it should be ready for third term defeat
commonwealth scandal or mahangai se congress pagal ho gai h UPA 2 ki success se desh ko apni jagir samajne lagi h bihar bengal or tamilnadu k election me aukat pe aa jayegi
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anup on 06 August, 2010 17:52;19
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उम्दा लेख....बधाई हो ...........
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suneel dutt on 06 August, 2010 22:59;34
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killing of criminals is not bad but abusing & insulting leaders & policemen is wrong. oppose it . raise ur voice against the same & save trhe nation , country & goodness.
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keshav tomar on 07 August, 2010 12:04;03
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निरंजन जी इस लेख के लिए आपको बहुत बहुत बधाई तथा धन्यवाद, इस समय देश मे सबसे गन्दी राजनीती यदि कोई पार्टी करती है तो वो कांग्रेस है वोट के लिए ये पार्टी किस हद तक गिर सकती है ये आज देश की सारी जनता देख रही है इस पार्टी ने देश का बंटाधार करा दिया मोदी गुजरात के ही नहीं सरे देश के उन्दा राजनेता है आज गुजरात का मुस्लमान भी विकास करने के लिए मोदी के साथ खड़ा है पर कांग्रेस पार्टी मुसलमानों को देश का नागरिक नहीं मात्र वोट बैंक समझती है जिन दंगो के लिए कांग्रेस मोदी को जिम्मेदार करार देती है वो मोदी ने नहीं कराये थे वो तो मात्र क्रिया की प्रतिक्रिया थी आज गुजरात के हिन्दू और मुस्लमान धर्म के नाम पर राजनीती नहीं गुजरात का विकास चाहते है इसीलिए वो आज मोदी के साथ है गुजरात आज देश का सफल राज्य है काग्रेस का प्रपंच देश के सामने आ गया है और जिनको नहीं समझ आया उनको भी मालूम हो जायेगा
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Shiv Shankar on 09 August, 2010 13:32;19
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Chah gaye guru aapto pehli baar is site ko aya hoon aur lekh bhi pad raha hoon jo kadvi sachai likhi wo sayad is congress ko hajam nahi hogi kyonki kadav jehar to sirf hamare shiv hi pi sakte hai aur koi nahi ..........congress shiv nahi ban sakti haan saleem jarur banerahi hai ....
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R K GUPTA on 09 August, 2010 16:50;16
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अरे परिहार जी ये तो मुनीमों की सरकार है, ये केवल अपना हिसाब किताब देखती है राजमाता को सिर्फ नोटों के सूटकेसों से ही मतलब रह गया है और शीला दीक्षित, वाय. एस. रेड्डी जैसे लोग ये पंहुचा कर अपना उल्लू सीधा करते है. बाकी रह गया माता का तो उसका क्या बिगड़ता है इटली तो है बाद में.
ये लोग राजनीति में इतना नीचे गिर सकते है की सेकुलर बनने के लिए अपने बाप को भी कह देंगे कि तू मेरा बाप नहीं है. और ये लोग कर रहे हैं ऐसा. सोहराबुद्दीन को अपना बाप कह कर.
चलो, एक बार ये मान लेते है कि ये एनकाउन्टर गलत था पर ये भी तो देखो कि मरने वाला था क्या. कांग्रेस ने मुसलमानों के साथ क्या किया, ये लोग भी जानते है और क्या कर रहे ये भी देख रहे है. इस समय सबसे गन्दी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस ही है जिसका न तो कोई धर्मं है और न ईमान है.
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deepak dudeja on 14 August, 2010 15:48;49
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निरंजन जी, कोटिश बधाई स्वीकार कीजिये. जहाँ आज सारा मीडिया, गुप्ताजी द्वारा नामित "राजमाता", की चमचागिरी में एक हद तक निचे गिर कर एक तरफ़ा रिपोर्टिंग कर रहा है. आपका ये लेख - कटाक्ष है इस रीड विहीन मीडिया के उपर.
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rohit on 17 August, 2010 16:23;31
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बंधू मैंने सुना है की सोहराबुद्दीन को भारत रत्न मिलने बाला है. क्या सही है
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image निरंजन परिहार मीडिया में प्रभाष जोशी और एसपी सिंह के प्रति बेहद कृतज्ञ निरंजन परिहार ने पंद्रह साल तक प्रिंट और सन 2000 के बाद से टीवी की खबरों को जो धार बख्शी, वह मुंबई की पत्रकारिता के लिए मिसाल हैं। बेजान खबरें लिखे जाने की परंपरागत शैली को उलटकर रख देने वाले परिहार का सफर नवभारत टाइम्स से शुरू हुआ और जनसत्ता में एक दशक तक रहने के बाद दो साल तक प्रात:काल दैनिक के स्थानीय संपादक भी रहे। सहारा समय टीवी नेटवर्क में संपादकीय समन्वयक और आइटीएन टीवी में सीनियर एडीटर भी रहे। और डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाई। संपर्क: niranjanparihar@hotmail.com
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