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कांग्रेस को चाहिए एजंसी भाजपा को अमरनाथ

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दो खबरें ऐसी हैं जो लोकसभा चुनाव के बारे में ही नहीं बता रहीं बल्कि दिग्गज पार्टियों द्वारा कैसी तैयारी शुरू की जा चुकी है इसका भी संकेत कर रही हैं. अमरनाथ विवाद में आडवाणी और तोगड़िया का बयान हवा खराब करनेवाला है. सब जानते हैं उनका अमरनाथ मसले से शायद की कुछ लेना-देना हो. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस मुख्यालय में एक ऐसी विज्ञापन एजंसी की खोज चरम पर है जो चुनाव में कांग्रेस का गरीब परस्त चेहरा चमका सके.

कांग्रेस को चाहिए एक विज्ञापन एजंसी

लोकसभा चुनाव करीब आने के साथ ही कांग्रेस को एक ऐसी विज्ञापन एजेंसी की तलाश है जो उसे आम जनता से जोड़ सके। आज के दौर में मार्केटिंग का खेल सर्वोपरि हो गया है। ऐसे में भारत के सबसे पुराने राजनीतिक दल की चाहत है कि वह एक अरब से अधिक की उस आबादी तक अपना संदेश पहुंचा सके जिसमें युवाओं की संख्या दुनिया में सर्वाधिक है। कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि उन्हें विभिन्न एजेंसियों से कान्सेप्ट दस्तावेज मिल चुके हैं। ये एजेंसियां सत्तारुढ़ दल से आकर्षक ठेका पाने के लिए बेताब हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा- हम 15 अगस्त के बाद एजेंसी का चयन करेंगे।  इस नेता का कहना है कि सभी एजेंसियों के प्रस्तावों पर विचार करने के बाद कांग्रेस कार्यसमिति कोई निर्णय लेगी। पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि चुनावों की व्यापक थीम एजेंसियों को बताई जा रही है। बहरहाल इस सूत्र ने बजट और प्रचार अभियान के फोकस के बारे में कुछ न बताते हुए कहा- भारत का समकालीन राजनीतिक परिदृश्य अभियान में परिलक्षित होगा।

पार्टी नेताओं ने बताया कि पूरे अभियान की रूपरेखा पहले ही तैयार कर ली जाएगी ताकि मतदाताओं पर प्रभाव डालने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। समझा जाता है कि अभियान प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ-साथ दृश्य प्रचार जैसे आउटडोर अभियान के रूप में भी होगा। एक सूत्र ने बताया कि एक ही एजेंसी का चयन किया जाएगा और यह एक एकीकृत मीडिया रणनीति होगी। एजेंसी से पार्टी के लिए नए नारे तैयार करने की उम्मीद भी है जिन्हें अभियान और चुनावी सामग्री के दौरान इस्तेमाल किया जाएगा।

वर्ष 1984 में विज्ञापन अभियान की कमान रीडिफ्यूजन के पास थी जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की पृष्ठभूमि में पार्टी के लिए शानदार काम किया था। तब पार्टी को एकतरफा जीत हासिल हुई थी। एजेंसी ने उन दिनों देश की एकता और अखंडता पर खतरे को फोकस करते हुए लोगों से पार्टी के लिए वोट मांगे थे। तब आतंकवाद भी सिर उठा रहा था। समझा जाता है कि चुनावों में परमाणु करार और उसके लाभ, किसानों की कर्ज माफी और गरीब आदमी पर कांग्रेस का प्रचार अभियान केंद्रित होगा।

अमरनाथ को अयोध्या बनाने की पूरी तैयारी

विश्व हिंदू परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि अमरनाथ श्राइन बोर्ड से वापस ली गई भूमि शीघ्र लौटाई नहीं गई तो अमरनाथ दूसरा अयोध्या बन जायेगा। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महासचिव प्रवीण भाई तोगिड़या ने एक साक्षात्कार में आज कहा- सिर्फ राजनीतिक कारणों से अलगाववादियों के दबाव में केन्द्र सरकार के इशारे पर जम्मू-कश्मीर सरकार ने बोर्ड को दी गई भूमि वापस ले ली जो अनैतिक एवं कायरतापूर्ण फैसला था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र यह सौ एकड़ भूमि अमरनाथ बोर्ड को नहीं लौटाई गई तो अमरनाथ दूसरा अयोध्या बन जाएगा। अमरनाथ के दूसरा अयोध्या बन जाने के बारे में पूछने पर उन्होंने कुछ भी खुलासा करने से इंकार कर दिया और केवल इतना ही कहा कि अगले दो दिन में अगले कदम की जानकारी हो जायेगी। उन्होंने कहा कि अगली कार्रवाई बहुत ही तीव्र एवं आक्रामक होगी और इससे समस्त जम्मू-कश्मीर राज्य अस्तव्यस्त हो जायेगा। उन्होंने कहा कि वैसे यह कार्रवाई पूरी तरह अहिंसक होगी।

तोगिड़या ने मांग की कि अमरनाथ बोर्ड को वापस ली गई भूमि लौटाने के साथ ही अमरनाथ यात्रा की देखभाल की जिम्मेदारी एक बार फिर से अमरनाथ यात्रा स्थापना बोर्ड को दी जाए जो अलगाववादियों के दबाव में बोर्ड से छीन ली गई थी। उन्होंने कहा- पहले कदम के तौर पर तेरह अगस्त को पूरे देश में चक्का जाम किया जायेगा और यह तो संघर्ष का आगाज भर होगा। यह पूछे जाने पर कि इतना सब कुछ विहिप और उसके समर्थक संगठन कैसे कर पायेंगे जब जम्मू में सेना तैनात कर दी गई है, उन्होंने कहा- हिंदुओं की ताकत को कोई रोक नहीं सकेगा और भारतीय सेना से तो हमारा कोई विरोध है ही नहीं। हिंदू अपने संघर्ष को अंजाम तक पहुंचायेंगे चाहे इसके लिए कितनी भी शहादत देनी हो।

केन्द्र सरकार द्वारा गठित प्रतिनिधिमंडल से अमरनाथ संघर्ष समिति की जम्मू में हुई बातचीत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसका कोई परिणाम नहीं निकल सका है लेकिन वह बातचीत के समर्थक हैं। तोगिड़या ने अमरनाथ श्राइन बोर्ड को भूमि वापस करने के लिए चलाए जा रहे आंदोलन को कुचलने के लिए सेना का प्रयोग करने को सरासर गलत ठहराया और कहा- जहां आस्था का सवाल हो वहां सेना का उपयोग कत्तई नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमरनाथ के मामले में सेना का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री स्वयं देश की सेना की पेशेवर छवि को धूमिल करने का जोखिम उठा रहे हैं। तोगिड़या ने याद दिलाया कि अयोध्या आंदोलन जब अपने चरम पर था तब भी अयोध्या में सेना का कभी भी उपयोग नहीं किया गया था। उन्होंने केन्द्र सरकार को समय रहते चेत जाने को कहा और मांग की कि वह जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा को तत्काल वापस बुला ले। उधर 9 अगस्त को दिल्ली में भाजपा युवा मोर्चा की रैली को संबोधित करते हुए आडवाणी पहले ही अमरनाथ के मुद्दे को देशभर में उठाने का ऐलान कर चुके है.

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Suresh Chiplunkar on 11 August, 2008 13:16;48
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तो इसमें गलत क्या है? समझ नहीं आया… आडवाणी गलत हैं या कांग्रेस? कश्मीरी पंडित सही हैं या "गुलाम"? मुस्लिम वोट बैंक सही है तो हिन्दू वोट बैंक क्यों नहीं? धर्मनिरपेक्षता(?) सही है तो बाकी सब कुछ क्यों नहीं? अब तो यह आंदोलन कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाकर ही खत्म होना चाहिये…
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Brijesh Kumar Singh on 11 August, 2008 13:47;04
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हिन्दू वोट बैंक कि बात में बुराई क्या है? हमारे पत्रकार महोदय को भी धर्मनिरपेक्षता के कीड़े ने काटा होगा। हमारी सहिष्णुता का हमेशा फायदा उठाया गया है। यह धर्मनिरपेक्षता इस्लाम से जुड़े मामलों में कहां जाती है ये बुद्धजीवी केवल हिन्दूओं को ही नसीहत देना जानते हैं, और किसीको नसीहत देने का साहस इनमें नही है। हमारी सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि हमारा कोई वोट बैंक नही है। अगर हम चाहते हैं कि हमारी आवाज सुनी जाये तो हमे भी वोट बैंक के रूप में संगठित होना पड़ेगा।
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Brijesh Kumar Singh on 11 August, 2008 14:04;31
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वोट बैंक कि ही माया है कि हमारे लालूजी और मुलायमजी को सिमी जैसे आतंकवादी संगठन के समर्थन में बोलना पड़ता है, जो कि बहुत शर्मनाक है। यह बम विस्फोट में मारे गये लोगों का अपमान है।
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Ek Kamzor Hindustani on 11 August, 2008 21:15;48
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Ye sahi baat hai ke kisi ki bhi aastha ko hamesha samman dena chahiye. ye bhi sahi baat hai ke Congress ya BJP ya koi bhi party ka pahla objective apney vote bank ke bare me baat karna hota hai. Ek sawaal hamesha se man me hai.. kab tak hum dharm ne naam par haivaniyat jaise kaam kartey rahengey? kab tak ye chand log hum hindustaniyon ko dharm ke naam par bargalatey rahengey.
Ye Togadiya jaise log kab tak logo ki bhavnao ko bhadkakar apna ullu seedha kartey rahengey? Kab tak hum Togadiya jaise sapolo ko hindu dharm ka thekedar maankar unko follow kartey rahengey? Kya kabhi aisa din aayega jab hum sirf Inssan ke barey me baat karengey? jab kisi bhi party ka koi bhi neta kisi dharm se ooper uthkar insaan ke barey me baat karega. Togadiya kahtey hain ke jammu ko ayodhya bana dengey. kya kahna chahtey hai wo? kya wo jammu me bhi gareeb logo ko mout ke muh me daalna chahtey hai? Amarnath board ki zameen ko wapas lene ka faisla dukhad hai. Lekin kya ye Rajneeti nahi hai? aur jis baat ko Advani aur Togadiya poorey desh me uthana chahtey hai kya wo Rajneeti nahi hai? Babut pareshan hoon mai. kya koi hum logo ko in jaise netao aur parties se mukti dilwa sakta hai? kya koi aisa andolan ho sakta hai jismey in political parties se chhutkara paney ka nara ho? Kash aisa ho aur mai us andolan me sabsey aagey ki katar me hoon.
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y on 13 August, 2008 00:46;38
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kamjor bhai
togadia kasmiriyon ko maut k munh me dal rahe hai .kasmiri hindu ladkiyo ko kisne uth waya ? hinduo ka katle aam ho raha hai aap bas dukhad kah kar rah jayenge.aapke ghar me kabhi aaisi gujre tab samajh me aayega.her baat ko rajniti kah kar khariz kar dena jhuto ki jamat me samil hona hi hai.
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Brijesh on 13 August, 2008 15:39;16
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Are Bhaisahab aapko togadiya ki bat to buri lagati hai hamare Maulana Bhukhari aur Hurriyat ke leaders ki pukar sunai nahi deti jo ki bharat mein rahke Pakistan ki daphli bajate hain yahan ka khake wahan ka gaate hain. Inka to kam aur gira hua hai?
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namish on 20 August, 2008 06:22;05
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ज़नाब कमजोर हिन्दुस्तानी,तोगड़िया जैसे लोग यह तब तक करते रहेंगे जब तक गुलाम नबी आजाद,महबूबा मुफ्ती,फ़ारुख/उमर अब्दुल्ला,कांग्रेस,साम्यवादी,मुलायम,लालू,पासवान,सेक्युलर ढ़ोगी और आप जैसे लोग हिन्दुओं को दबानें और उनके ही देश में उन्हें गाली देकर ज़लील करनें की कोशिश करते रहेंगे। पहले तो यह बात समझ लेनें की है कि यह देश उन लोगो का है जो इसके मूल बाशिन्दे हैं न कि उनका जो यहाँ आततायी बनकर आये थे, आततायी बनकर आनें वालों नें लड़ झगड़ कर अपनें लिए एक अलग देश बना लिया हैं,अब उनके बचे बिरादरों को यह देश अच्छा नहीं लगता तो बाखुशी वे यहाँ से जा सकते हैं। इसलिए जो अमन से और दूसरों का सम्मान बरकरार रखते हुए रहना चाहते हैं उन से कोई शिकवा नहीं किन्तु हिन्दुओं को गाली देकर या दलाल टाइप नेताओं और पत्रकारों को खरीदकर या बम धमाकों से ड़रा कर अब नहीं रहा जा सकता। यह देश न तो गांधी-नेहरु की जागीर है न तोगडिया-अड़वानी की,यह देश है यहाँ रहनें वालों का,इसलिए भाई चारे से जो रहना चाहे रहे नहीं तो देश में जिस रास्ते आतंकी आते है उस रास्ते से चला जाए। मोहतरम,अड़्वानी-तोगड़िया की बात तो कर रहे हो लेकिन महबूबा,अब्दुल्ला,हुरियत या तालिबान की बात करनें में क्या शर्म आती है?वो क्या हैं ?सेक्युलर? गरीब की बात का ढ़ोंग मत करिये, जा कर मालूम कीजिये कि उत्तर प्रदेश और बिहार से जानें वाले कितनें मजदूर अभी महिनें पहिले मारे गये हैं और ४लाख कश्मीरी पण्डित जो घरों से दर बदर कर दिये गये है कया वह सब अमीर हैं या जिन को कश्मीर में ज़िबह किया गया वह सब रईस थे?क्यॊ ढ़ोंग कर रहें है-अल्लाह को तो ड़रो !
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mkatyayan on 20 August, 2008 06:57;00
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बड़ी चिरकुट पनें की रपट है।जम्मू-कश्मीर के हिन्दू यदि तीर्थयात्रियों के लिए यदि जमीन की मांग करें और आड़वानी या तोगड़िया उसका समर्थन करें तो यह राजनीति और महबूबा,फारुक अब्द्दुल्ला,गनी,मीरवायज,हुरियत या तालिबान या फिर कांग्रेस और सेक्युलरछ्क्के क्या संत समागम कर रहे हैं? रिपोर्टिग का मतलब डिक्टम देंना कब से हो गया? सेक्युलर का बिल्ला लगाए हर ऎरे गैरे कलमची को क्या अब पत्रकार कहा जाएगा?या फिर हिन्दुओं को गाली देनें से कोई तमगा मिलने वाला है? लिखकर रोजी रोटी चलाना तो समझ में आता है लेकिन रोजी रोटी के लिए अपनें आप को,हिन्दुओं को गाली बकना यह कौन सी पत्रकारिता है?
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