राजनीति
गडकरी की टीम गरीब और दलित विरोधी
आखिर, जो सोचा था वही हुआ। न तो सोच बदली है न दृष्टि। सोचने की शक्ति भी वहीं की वहीं है। देखने की क्षमता में भी कोई सुधार नहीं हुआ है। नितिन गडकरी ने अपनी टीम की घोषणा कर दी है। टीम देखकर लगता है कि पूरा कोटे का इस्तेमाल हुआ है। वही लोग, वही टीम, वही सोच। जो लोग जमीन पर फेल हो गए, आधारहीन रहे, वही एक बार फिर गडकरी की टीम में आ गए हैं।
टीम गडकरी घोषित, खबर देनेवाले अब बाइट देंगे
आठ बार लिस्ट फाड़ने के बाद आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने हि्न्दू नववर्ष के दिन लिटिल गडकरी की जंबो टीम घोषित कर दी. टीम कुछ ऐसी बनी है कि आश्चर्य से दांतो तले अंगुली दबा लेने का मन करेगा. कल तक भाजपा के जो नेता आफलाइन ब्रीफिंग को अपना राजनीतिक कौशल समझते थे उन्हें प्रवक्ता की जिम्मेदारी दे दी गयी है.
गदराये बदन गड़करी के लिए कुछ जरूरी सुझाव
हो सकता है नितिन गडकरी अंदर से मंजे हुए राजनीतिज्ञ हों लेकिन देखने में राजनीतिक व्यक्तित्व कदापि नहीं लगते. वेशभूषा, भाषा और कार्यशैली तीनों ही स्तरों पर वे कहीं से देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष दिखाई नहीं देते. ऐसे में गडकरी को चाहिए कि अगर उन्हें नौजवानों के बीच राजनीति करनी है तो कार्यशैली से पहले इमेज बिल्डिंग और एक्सरसाईज दोनों पर ध्यान दें. ...महिला आरक्षण: कहीं खुशी का खाना, कहीं चिंता की चाय
बलवा खत्म, तो समझो महिला बिल अटक गया। यादवी तिकड़ी के हंगामे पर फिलहाल सरकार ने सरेंडर कर दिया। अब फिर बात होगी बिल के हर पहलू पर। सभी पक्षों से बात कर ही अब लोकसभा में बिल आएगा। आखिर आम बजट पास कराने की मजबूरी में सरकार को भरोसा देना पड़ा। एक बार नहीं, तीन-तीन बार। संसदीय कार्यमंत्री तो बुधवार को ही सभी से सलाह-मशविरे का एलान कर चुके। गुरुवार को लोकसभा में लालू-शरद-मुलायम ने अपनी बात रखी तो प्रणव दा ने भरोसा दिलाया। फिर भी यादवी तिकड़ी का दिल नहीं भरा।...बीजेपी-कांग्रेस फंस गईं एक-दूसरे के जाल में
बलात ही सही, राज्यसभा ने अपना काम निपटा दिया पर राज्यसभा से निकली महिला बिल की लपटें अब लोकसभा को झुलसा रहीं हैं। बिल विरोधियों ने बुधवार को भी लोकसभा नहीं चलने दी। जब बिल से पहले इस कदर हंगामा तो बिल आने पर क्या होगा?...बिहार में गड़ेगे या उखड़ेंगे गड़करी?
इस साल के अंत तक बिहार में विधानसभा के चुनाव होने हैं. बिहार में भाजपा जद (यू) के साथ मिलकर सत्ता में है. लेकिन सत्ता में रहते हुए संगठन के स्तर पर पार्टी बेहद कमजोर हो चुकी है. नवनिर्वाचित भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के लिए बिहार में भाजपा को दोबारा सत्ता में लाना जितनी बड़ी चुनौती होगा उससे बड़ी चुनौती साबित हो रही है वहां नये पार्टी अध्यक्ष का चुनाव. बिहार भाजपा की राजनीति पर एक विश्लेषण-
बाबर के बराबर हुए राम
इंदौर के कुशाभाऊ ठाकरे नगर में भारतीय जनता पार्टी का तीन दिवसीय अधिवेशन चल रहा है.इस अधिवेशन से भाजपा कि भावी दिशा तय होनी है.भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस अधिवेशन में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में मुसलामानों को राष्ट्र की मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास किया है.
बैतालों से कैसे निपटेंगे बीजेपी के विक्रमादित्य?
राख से तो नहीं, पर गोबर से उठने की कोशिश जरूर कर रही बीजेपी। जब बीजेपी में काल, कपाल, महाकाल एपीसोड चल रहा था। अनुशासन हांफ रहा था। तब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी कहा था। राख से भी उठ खड़ी होगी बीजेपी। पर जब नेतृत्व परिवर्तन की रेस खत्म हो गई। गडकरी, सुषमा, जेतली मैडल पा गए। तो अब समूची बीजेपी का ढर्रा बदलेगा।
शिवसैनिकों से सहानुभूति की जरूरत
महाराष्ट्र में शिवसेना और उसके शिवसैनिकों का उत्पात एक बार फिर चर्चा में है. वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह का मानना है कि अगर महाराष्ट्र में स्थायी शांति लानी है और भविष्य में मुंबई को उत्पात से बचाना है तो कांग्रेस और भाजपा की जिम्मेदारी है कि वे शिवसैनिकों के लिए अपने-अपने दलों के दरवाजे खोल दें ताकि वे मुख्यधारा की राजनीति में शामिल हो सकें.
बीजेपी को जनता ने हराया या ईवीएम ने?
क्या वाकई अपना लोकतन्त्र जोखिम में है? क्या दो टर्म से मनमोहन की सरकार सचमुच जनता ने नहीं चुनी? आप मानें या न मानें, पर देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी यही मान रही है। भले शब्दों को घुमाफिरा कर सवाल उठा रही। पर निचोड़ यही- ईवीएम में बड़ा गड़बड़झाला।
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रामदेव का राजनीतिक रंग
अब बाबा रामदेव अपने असली रंग में दिख रहे हैं. बात करते हैं तो बार बार उत्साह को बनाये रखने की सलाह देते हैं. जयपुर, दिल्ली और जोधपुर में तीन सभाओं के दौरान उन्होंने कमोबेश एक बात ही कही कि राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन को आगे बढ़ाना है और "चोर" "लुटेरे" "डाकुओं" से देश को मुक्त कराना है. यह विशेषण बाबा रामदेव किसके लिए इस्तेमाल कर रहे हैं यह बताने की जरूरत नहीं है. ये चोर लुटेरे और डाकू कोई और नहीं बल्कि इस देश के वही नेता हैं जिन्हें अपने योग शिविरों में बुलाकर रामदेव अपना कद बढ़ाते रहे हैं. ...
वेदांता को विस्तार का मौका न दे सरकार
उड़ीसा में बाक्साइट खनन में लगी वेदान्ता कंपनी को सरकार अब और अधिक विस्तार का मौका न दे. ऐसा करने से न केवल जंगलों को नुकसान का खतरा है बल्कि यहां की आदिवासी कौंध जनजाति के भी विलुप्त हो जाने का खतरा है. केन्द्र सरकार द्वारा गठित एक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह संतुति दी है. ...
माला तो माया की, पर मालामाल कौन नहीं?
वाकई माला के अनेकों रूप। भगवान के गले में डाल दो, तो धर्म। शादी में दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को पहनाएं, तो वरमाला। वर्कर अपने नेताओं को पहनाएं, तो आप ही तय करो। यह स्वागत या चमचागिरी? नेताओं के प्रति किसकी कितनी श्रद्धा, यह तो महानुभाव खुद ही जानते। फिर भी माला पहन हाथ ऐसे लहराते, मानो देश के पालनहार हो गए। कोई फूलों की माला पहन हाथ लहराता तो कोई सशरीर धर्मकांटे में बैठ सोने-चांदी के सिक्कों से तोला जाता है।...
चंबल घाटी में लौट रहे हैं गिद्ध
चंबल घाटी से डाकू और गिद्ध लगभग एक साथ ही गायब होना शुरू हुए. डाकुओं के कम होते असर ने निश्चित रूप से चंबल घाटी के लोगों को राहत दी होगी लेकिन गिद्धों की कमी ने स्थानीय नागरिकों को परेशान कर दिया था. लेकिन एक अच्छी खबर है. वन विभाग के ताजा सर्वे में एक बात उभरकर सामने आयी है कि चंबल घाटी में गिद्ध लौटने लगे हैं. दिनेश शाक्य की विशेष रिपोर्ट-...
परमाणु कीचड़ में सने हाथ
सरकार ने परमाणु हर्जाना विधेयक लोकसभा में पेश नहीं किया, यह अच्छा किया। पेश न करने का कारण यह भी हो सकता है कि 35 कांग्रेस सांसद अनुपस्थित थे और सारे विरोधी दल एकजुट थे। वह पेश होता तो शायद गिर जाता। कारण जो भी हो, इस विधेयक का अटक जाना भारत के हित में है। यह ठीक है कि प्रधानमंत्री अगले माह जब अमेरिका जाएंगे तो यह विधेयक उनके हाथ में नहीं होगा, लेकिन क्या कीचड़ में सने हाथों के साथ जाने से यह कहीं अच्छा नहीं कि वे खाली हाथ ही जाएं?...
निर्भीक होकर करें पत्रकारिता : नैयर
वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने कहा कि देश को एक सूत्र में बांधे रखने में अखबार की बड़ी भूमिका होती है। इसलिए पत्रकार किसी से डरे बगैर निर्भीक पत्रकारिता करे। आज की परिस्थिति में प्रचार-प्रसार माध्यमों के सामने में अनेक आहवान हैं ऐसे ही आहवान देश के सामने भी हैं।...
राष्ट्रीय टीम की घोषणा के वक्त भी दिल्ली से दूर रहे गडकरी
नई दिल्ली/नागपुर। मंगलवार को भाजपा की नयी टीम घोषित हुई. लेकिन जिस वक्त गडकरी के राष्ट्रीय टीम की घोषणा हो रही थी खुद गडकरी दिल्ली से दूर नागपुर में बैठे हुए थे और एक अखबार का लोकार्पण कर रहे थे. कार्यक्रम में वे पूरे समय मौजूद रहे पेड न्यूज पर अपना प्रवचन करते रहे. ...
कर्नाटक के कलाकारों ने बनाई नोटों की माला
मायावती के गले में हजार के नोटों की माला उनके लिए फांस बनती जा रही है. मंगलवार को जहां इस मुद्दे पर संसद में भी हंगामा हुआ वहीं दूसरी ओर लखनऊ में दिनभर नोटों की माला ही चर्चा का विषय बनी रही. नोटो की यह माला जिसमें 21 लाख रुपये होने का दावा किया जा रहा है कर्नाटक के कलाकारों ने बनाई थी वह भी माया के विश्वस्त मंत्री के आवास में बैठकर. ...
फिदा तो विदा लेकिन लौटेगें रजा
मशहूर पेंटर एमएफ हुसैन भले ही वृद्धावस्था में कतर की नागरिकता ले ली हो, लेकिन एक अन्य विख्यात पेंटर सैयद हैदर रजा अपना शेष जीवन भारत में बिताने की ख्वाहिश लेकर साल के आखिर में स्वदेश लौटने की तैयारी में हैं। बीते छह दशक से वह फ्रांस में रह रहे हैं।...
काम नहीं, नाम बना टीम गडकरी का पैमाना
बजट सत्र में अभी तीन हफ्ते का ब्रेक। सो बीजेपी में संगठन की चाल बदलने की कवायद शुरू हो गई। हिंदी कलेंडर के मुताबिक मंगलवार से नया साल शुरू हो गया। सो हिंदी, हिंदू, हिंदुस्थान के हमराह होने का दंभ भरने वाली बीजेपी ने नए सफर की शुरुआत कर दी। नितिन गडकरी ने अपनी टीम का एलान कर दिया। टीम में 33 फीसदी सीटें बढ़ा करीब 60 फीसदी नए चेहरे लेकर आए।...
गडकरी की टीम गरीब और दलित विरोधी
आखिर, जो सोचा था वही हुआ। न तो सोच बदली है न दृष्टि। सोचने की शक्ति भी वहीं की वहीं है। देखने की क्षमता में भी कोई सुधार नहीं हुआ है। नितिन गडकरी ने अपनी टीम की घोषणा कर दी है। टीम देखकर लगता है कि पूरा कोटे का इस्तेमाल हुआ है। वही लोग, वही टीम, वही सोच। जो लोग जमीन पर फेल हो गए, आधारहीन रहे, वही एक बार फिर गडकरी की टीम में आ गए हैं।...
प्रेम पांचवा पुरुषार्थ है- नामवर सिंह
नई दिल्ली। हिन्दी साहित्य जगत के प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह का कहना है कि भले ही ब्राह्मणवादी दर्शन ने जीवन के चार पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की परिभाषा की है लेकिन एक पांचवा पुरुषार्थ भी है जिसका नाम प्रेम है. यह प्रेम पांचवा पुरुषार्थ है जो भक्ति आंदोलन से भी पहले भागवतमहापुराण से समाज में स्थापित होता है. नामवर सिंह ने श्रीमद्भागवतमहापुराण को प्रेम ग्रंथ की संज्ञा दी. ...
भानुमति के पिटारे से फिर निकला कुपोषण का जिन्न
दिल्ली से सटे उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद जिले में कुपोषित बच्चों को खोजने के लिए हर गाँव में सर्च आपरेशन करवाया जा रहा है। इसके लिए आगंनबाड़ियों की टीम बनायी गई है, जो घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों की तलाश करेंगे। बच्चों के वजन को मापने के लिए प्रशासन ने 850 मशीनों की व्यवस्था दूर के गामीणों अंचलों में करवाया है। आगंनबाड़ी कार्यकर्ता नवजात शिशुओं से लेकर छह साल के बच्चों के स्वास्थ की लगातार निगरानी करते रहेंगे। ...
जी हां, मैं महिला आरक्षण विरोधी हूं
पत्रकारों की जमात से मैं अपने आप को महिला आरक्षण का विरोधी घोषित करता हूं. मेरा तर्क ये है कि अगर महिलाओं को सही मायनों में पुरुषों के बराबर हक देने की बात हो रही है तो, महिलाओं के लिए अलग कोना खोजकर उन्हें कमजोर ही बनाए रखने की और देश में नेतृत्व खत्म करने वाला ये बिल क्यों लाया जा रहा है?...
टीम गडकरी घोषित, खबर देनेवाले अब बाइट देंगे
आठ बार लिस्ट फाड़ने के बाद आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने हि्न्दू नववर्ष के दिन लिटिल गडकरी की जंबो टीम घोषित कर दी. टीम कुछ ऐसी बनी है कि आश्चर्य से दांतो तले अंगुली दबा लेने का मन करेगा. कल तक भाजपा के जो नेता आफलाइन ब्रीफिंग को अपना राजनीतिक कौशल समझते थे उन्हें प्रवक्ता की जिम्मेदारी दे दी गयी है....
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- अब भोजपुरी में बोलेगा बाजार
- तालिबान के देसी संस्करण
- विस्फोट पर अस्थाई कार्य विराम
Astha Said:अब हमनें पत्रकारिता के मिशन के तहत कथित धर्माचार्यों-आचार्यों, जगतगुरुओं, जगतगुरु शंकराचार्यों को देश की जनता की अदालत में उनके कुकृत्यों का सार्वजनिक रूप ...
Why Manmohan-Sonia-Congress is very much crazzy for this bill??
संजीव भाई, मायावती की पार्टी में ९०% दलित नेता है. और दलितों का भला करने की बजाय नोट-माला खेल रहे हैं. कांग्रेस ने जगजीवनराम जैसे ...
यार थोडा लिखना सीख लो प्लीज़. संजय जी ज़रा इनको थोड़ी ट्रेनिंग दे आप. सारे लेख का बंटाधार कर देते हो संतोष जी.
mai dakshinpanthi to nahi lekin aapke tarko ke aadhaar par likhe gaye is lekh ko padhkar yahi kah sakta hu ki shandar!!!


