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राजनीति

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राजनीतिक हिन्दुत्व पर दिग्गी का दांव

हिन्दुओं का ठेकेदार बनने की आरएसएस और उसके मातहत संगठनों की कोशिश को चुनौती मिल रही है. भगवान् राम के नाम पर राजनीति खेलकर सत्ता तक पंहुचने वाली बीजेपी के लिए और कोई तरकीब तलाशनी पड़ सकती है क्योंकि कांग्रेस की नयी लीडरशिप हिन्दू धर्म के प्रतीकों पर बीजेपी के एकाधिकार को मंज़ूर करने को तैयार नहीं है. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने साफ़ कहा है कि हिन्दू धर्म पर किसी राजनीतिक पार्टी के एकाधिकार के सिद्धांत को वे बिल्कुल नहीं स्वीकार करते.
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कांग्रेस पर सत्ता संघर्ष भारी, अब राहुल गांधी की बारी

एक अजीब से घटना है। जिस दिन राहुल गांधी अपने आपको उड़ीसा में आदिवासियों के सिपाही घोषित करते है, उसके अगले दिन ही एक खबर छपती है। खबर अखबार के पहले पन्ने की लीड है, जिसमें कहा गया है कि भारत युवाओं का देश है, पर प्रधानमंत्री बुजुर्ग है। साथ ही दुनिया के कई देशों का उदाहरण दिया गया है, जिसमें युवा लोग प्रधानमंत्री के तौर पर विराजमान है। ये एक सामान्य घटना कहेंगे या एक संयोग या एक राजनीतिक खेल? जो युवराज अभी तक कारपोरेट है, वही एकाएक आदिवासियों के सिपाही हो जाते है।
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25 साल पुराने समझौते पर सुलग रहा है पंजाब

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इस समय पंजाब फिर गर्म हो गया है। गर्मी दो फ्रंट पर है। एक तरफ पूरे पंजाब में जहां भिंडरावाले के पोस्टर कई जगह सरेआम नजर आ रहे है, वहीं राजनीतिक फ्रंट पर राजीव-लोंगोवाल समझौते को लेकर विवाद शुरू हो गया है। विवाद ठीक 25 साल बाद शुरू हुआ है। विवाद शुरू करने का समय भी बड़ा वाजिब है। विवाद तब शुरू हुआ है जब शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव नजदीक है और ठीक डेढ़ साल बाद पंजाब विधानसभा का चुनाव होने है। एक बार फिर जख्म हरे करने की कोशिश हो रही है।...
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संघ को चाहिए राम, भाजपा को सत्ता का आराम

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हाल ही में भारतीय जनगणना को लेकर संघ और भाजपा में मतभेद उभरकर सामने आ गये हैं। संघ ने जहां जाति आधारित जनगणना की आलोचना की, वहीं भाजपा ने इसे सही ठहराया है। इसी तरह समान नागरिक संहिता, हिन्दुत्व, राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण, धारा-370 और मुसलमानों से संबंधित मुद्दों पर संघ और भाजपा के अलग-अलग विचार हैं। संघ जहां हिन्दुत्व की विचारधारा के ज़रिये देश में हिन्दू राष्ट्र स्थापित करना चाहता है, वहीं भाजपा केवल सत्ता सुख चाहती है, भले ही उसके लिए उसे कोई भी नीति क्यों न अपनानी पड़े।...
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मनमोहन का मंत्री माओवादियों का मुखौटा

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चाहे जितने भी अराजनीतिक हांे पर वे यह तो समझते ही होंगे कि ममता बनर्जी को मंत्रिमंडल में नहीं रखा जाना चाहिए। ममता बनर्जी को चुनावी राजनीति से कोई रोक नहीं सकता। लेकिन प्रधानमंत्री को इतना साहस तो करना ही चाहिए कि उनका एक मंत्री माओवादियों का मुखौटा न बन जाए।...
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चेहरा बदलने आये थे, मोहरा बनकर रह गये

संघ की शाखाओं में स्वयंसेवकों को नेतृत्व क्षमता के बारे में सिखाया जाता है, "नेतृत्व वही, जिसके पास निर्णय क्षमता हो." लेकिन फिलहाल तो स्वयंसेवक गडकरी में इसका अभाव दिखता है. गडकरी की बड़े नेताओं के बीच संतुलन साधने और पार्टी के सभी गुटों को खुश रखने की रणनीति संगठन पर भारी पड़ रही है. कड़े फैसले लेकर पार्टी को सही दिशा देने की बजाए गडकरी नेताओं के महत्वाकांक्षाओं के खेल में मोहरा बन रहे हैं.
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गुजरात के गौरव में कांग्रेस का कबाड़ा

गुजरात सरकार और नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश में कांग्रेस का कबाड़ा हो रहा है। सोहराबुद्दीन जैसे अपराधी की मौत को फर्जी मुठभेड़ साबित करने की कोशिश में जुटी कांग्रेस को पता नहीं यह आइडिया किसने दिया। लेकिन अब यह जरूर पता चल रहा है कि इस पूरे मामले में भावनात्मक स्तर पर कांग्रेस को नुकसान तय है।
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राजनीतिक मौन में राजमाता

ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर डेविड कैमरन अपने पहले भारतीय दौरे पर आये हुए थे. उनके कार्यक्रमों की सूची में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गाधी से मुलाकात का कार्यक्रम भी दर्ज था. मगर अफसोस भारतीय सत्ता के इन दोनों संविधानेतर महाशक्तियों ने अंतिम समय में कैमरन से मिलने से शिष्टतापूर्वक इनकार कर दिया. सोनिया ने जहां अपनी नासाज तबीयत का बहाना बनाया, वहीं राहुल एक दिन पहले अचानक कैमरन के ही मुल्क ब्रिटेन की यात्रा पर निकल गये. आखिर ऐसा क्यों हुआ ?
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उद्धव का उद्भव, अजीत की जीत

27 जुलाई को उद्धव ठाकरे पचास साल के पूरे हो गये. मंगलवार को उनकी जीवन यात्रा के इस पड़ाव पर पूरे महाराष्ट्र में शिवसैनिकों ने कोई सात से आठ हजार स्थानों पर छोटे बड़े कार्यक्रम किये और उनके शतायु होने की कामना की. शिवसेना के मुखपत्र ने भी उद्धव ठाकरे का जन्मदिन जमकर मनाया और 12 पेज के अखबार के साथ 96 पेज का परिशिष्ट वितरित किया. मराठी में जन्मदिन को वाढ़दिवस कहते हैं. और किसी के लिए बाढ़ आयी हो या न आयी हो सामना अखबार के लिए शुभेच्छा देनेवाले विज्ञापनों की बाढ़ जरूर आ गयी.
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मुलायम को माफ नहीं करेगा मुसलमान

मुलायम सिंह यादव ने अपनी 'सल्तनत' बचाने के लिए मुसलमानों से माफी मांगी है। लेकिन अब इतनी देर हो गयी है कि मुसलमानों से माफी मांगने से काम नहीं चलने वाला है। हालांकि माफी के बाद मुलायम सिंह यादव के बंगले पर कुछ उलेमाओं ने 'हाजिरी' देकर मुलायम सिंह यादव की माफी की कद्र की और उनकी शान में 'कसीदे' जरूर पढ़े हैं। पता नहीं इस देश के सियासतदां यह कब समझेंगे कि मुसलमान सियासत में उलेमाओं की हर बात नहीं मानता।
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ममता के दरबार में कांग्रेस की सरकार
पश्चिम बंगाल में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान और चूहे बिल्ली का खेल बढ़ता जा रहा है. इसका एक उदाहरण उस वक्त देखने को मिला जब कांग्रेस के युवा नेता और केन्द्रीय मंत्री सचिन पायलट पश्चिम बंगाल के दौरे पर गये. ...
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आतंकवाद की राजनीति और मीडिया
क्या आतंकवाद बौद्धिक स्तर पर इतना विकसित हो चुका है कि उसका राजनीतिक धरातल तैयार हो सके? इस जटिल प्रश्न का उत्तर सरल नहीं है. जो लोग अल-कायदा को आतंकी संगठन बताकर उसके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं वे भी शायद इसे इस्लामिक चरमपंथ कहना ज्यादा मुनासिब समझेंगे बनिस्बत कि आतंकवाद के दर्शन में निहित राजनीति को मान्यता प्रदान करें. लेकिन मुस्लिम देशों में आतंकी गतिविधियों के द्वारा दुनियाभर में थरथराहट पैदा करनेवाले इस्लामिक विद्वान इसे उस राजनीति की प्रतिक्रिया मानते हैं जिसके वैचारिक आक्रमण के कारण इस्लाम को खतरा पैदा हो गया है. शायद इसीलिए "जिहाद" जरूरी हो गया था. ...
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राजनीतिक हिन्दुत्व पर दिग्गी का दांव
हिन्दुओं का ठेकेदार बनने की आरएसएस और उसके मातहत संगठनों की कोशिश को चुनौती मिल रही है. भगवान् राम के नाम पर राजनीति खेलकर सत्ता तक पंहुचने वाली बीजेपी के लिए और कोई तरकीब तलाशनी पड़ सकती है क्योंकि कांग्रेस की नयी लीडरशिप हिन्दू धर्म के प्रतीकों पर बीजेपी के एकाधिकार को मंज़ूर करने को तैयार नहीं है. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने साफ़ कहा है कि हिन्दू धर्म पर किसी राजनीतिक पार्टी के एकाधिकार के सिद्धांत को वे बिल्कुल नहीं स्वीकार करते....
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कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्
भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।...
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हरिप्रसाद का लोकतंत्र 'हठ'
हरिप्रसाद को एक हफ्ते तक पुलिस हिरासत में रखने के बाद जमानत मिल गयी है. जेल से छूटने के बाद हैदराबाद पहुंचे हरिप्रसाद ने कहा है कि वे इस गिरफ्तारी से न झुकेंगे न टूटेंगे बल्कि ईवीएम मशीनों की धोखाधड़ी के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेंगे. हरिप्रसाद की यह दिलेरी और लोकतंत्र के प्रति हठ निश्चित रूप से काबिले तारीफ है. ...
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'हिंदुस्तान' ने पूर्णिया को शर्मसार कर दिया
उम्र-78 साल और ये उम्र मैंने अपने घर के बंद कमरों में नहीं काटी. पूर्णिया की तमाम साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से हर दिन का साबका रहा है. कचहरी चौक पर धरना-प्रदर्शन से लेकर छोटे-बड़े तमाम मंच पर सक्रिय रहा हूं. जानता हूं कि खबरें कैसे बनती हैं और कैसे छपती हैं. 'हिंदुस्तान', 'दैनिक जागरण', 'प्रभात खबर', 'राष्ट्रीय सहारा' और ऐसे ही तमाम अखबारों में छपता रहा हूं. पत्रकारिता को लेकर खट्टे-मीठे अनुभव रहे हैं. उम्र और अनुभव का तकाजा कुछ ऐसा रहा कि कभी शाबाशी में पत्रकारों की पीठ ठोंकी तो कभी उनकी तीखी आलोचना भी की, लेकिन पिछले दिनों शहर में घटी एक घटना के बाद से बेचैन हूं, दुखी हूं, शर्मिंदा हूं- समझ नहीं आ रहा कि कैसे मन की पीड़ा व्यक्त करूं?...
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सुखाड़ का शिकार हो गया बिहार
उत्तरी बिहार के कुछ इलाकों में आए बाढ़ के बारे में टीवी चैनल पर खबर देखने या फिर किसी सामाचार पत्र में खबर पढ़ कर यह अंदाजा मत लगाइए कि बिहार में इस साल भी खूब बारिश हो रही है। दरअसल बिहार के कुछ इलाकों में आई बाढ़, नेपाल की नदियों से बहकर आया पानी है जिसकी वजह से कुछ क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। लेकिन इस पानी से किसानों का भला नहीं होने वाला है।...
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टाटा-बिड़ला-अंबानी, पीयेंगे मध्य प्रदेश का पानी
वेतन-भत्तों और सुविधाओं के विस्तार को लेकर लगातार हाय तौबा करने वाले जनप्रतिनिधि अब जनता की बुनियादी ज़रुरतों से पल्ला झाड़कर औद्योगिक घरानों की ताल पर थिरकते दिखाई दे रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पानी,बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ जुटाने का ज़िम्मा सरकारों को सौंपा गया है। मगर सरकारें अब जनहित के कामों को छोड़कर एक के बाद एक योजनाओं को निजी हाथों में सौंपती चली जा रही है, फ़िर चाहे वो प्राकृतिक संसाधन हों, ज़मीन हो या आम जनता की सेवा से जुड़े मुद्दे हों। इसी कड़ी में अब नेताओं और उद्योगपतियों को पानी मुनाफ़े का सौदा नज़र आने लगा है।...
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प्रेस क्लब ने खाना नहीं खिलाया, नोटिस थमा दिया
चंडीगढ़ प्रेस क्लब की तानाशाही का एक और नमूना सामने आया है। दैनिक भास्कर चंडीगढ़ के ब्यूरो चीफ ब्रजमोहन सिंह को क्लब ने कार्रवाई संबंधी नोटिस भेज दिया गया है। दिलचस्प बात है कि क्लब के अंदर ब्रजमोहन सिंह को दो घंटे तक खाना के आर्डर के बावजूद खाना नहीं देकर पहले बेइज्जति की गई और उसके बाद जब ब्रजमोहन सिंह ने शिकायत की तो उन्हें नोटिस दिया थमा दिया गया।...
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असफल गृहमंत्री का सफल 'आतंकवाद'
हमारे केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदबरम ने पुलिस प्रमुखों के समेलन में ''भगवा आतंकवाद'' का नया शगूफा छोड़ दिया। वैसे इस केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई मंत्री बयानों के मामले में शूरवीर की प्रसिद्धी प्राप्त कर चुके है। पी. चिदबरम भी ऐसे ही मंत्री हैं जो अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं. आतंकवाद का मामला हो, नकसलवाद का मामला हो, कश्मीर समस्या का मामला हो, या देश में घटित कोई भी अन्य महत्वपूर्ण मामला हो उनके आतंकवाद की थ्योरी भले ही सफल हो रही हो लेकिन बतौर गृहमंत्री वे असफल साबित हो रहे हैं....
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पाँचना से फोन पर पानी पहुँचा घना
घना पक्षी विहार को इस बर्ष पानी मिल गया है। करौली जिले के पाँचना बाँध से छोडा गया पानी अब भरतपुर की सीमा में पहुँच गया है। इस पानी के बाद संभावना है घने का ताज बच जाये। पानी से रिक्शा चालकों से लेकर होटल मालिक सब प्रसन्न है, लेकिन इस पानी पहुँचने के कारणों में भरतपुर सांसद का करौली कलक्टर को फोन करना चर्चा का विषय बना हुआ है।...
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तिगड्डे में फंसा किसान
वोट बैंक की राजनीति जो ना कराए वो कम है। कल तक अलीगढ़ में अपनी जमीन के मुआवजे के लिए एक महीने से लड़ रहे किसानों के साथ कोई नहीं था। लेकिन जैसे ही पुलिस की गोलीबारी में तीन किसानों की मौत हुई तो वहां नेताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। क्या कांग्रेस, क्या बीजेपी, क्या सपा और क्या बसपा। किसी ने यह मौका नहीं छोड़ा कि वे ही किसानों के सबसे बड़े हिमायती हैं यह इतना दुखदायी और पीड़ादायी है कि बताया नहीं जा सकता।...
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कांग्रेस पर सत्ता संघर्ष भारी, अब राहुल गांधी की बारी
एक अजीब से घटना है। जिस दिन राहुल गांधी अपने आपको उड़ीसा में आदिवासियों के सिपाही घोषित करते है, उसके अगले दिन ही एक खबर छपती है। खबर अखबार के पहले पन्ने की लीड है, जिसमें कहा गया है कि भारत युवाओं का देश है, पर प्रधानमंत्री बुजुर्ग है। साथ ही दुनिया के कई देशों का उदाहरण दिया गया है, जिसमें युवा लोग प्रधानमंत्री के तौर पर विराजमान है। ये एक सामान्य घटना कहेंगे या एक संयोग या एक राजनीतिक खेल? जो युवराज अभी तक कारपोरेट है, वही एकाएक आदिवासियों के सिपाही हो जाते है।...
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17 अक्टूबर से हो सकते हैं बिहार में चुनाव
बिहार विधानसभा चुनावों की घोषणा होनेवाली है. चुनाव आयोग और राज्य सरकार की मशीनरी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बिहार में दुर्गापूजा के बाद 17 अक्टूबर से चुनावों की घोषणा की जा सकती है. ऐसी संभावना है कि बिहार में चार चरणों में मतदान पूरा किया जाएगा और जल्द ही तिथियों की घोषणा कर दी जाएगी. ...
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साथी की शोकसभा के लिए भी संपादक के पास समय नहीं
29 अगस्त 2010. भागलपुर में एक पत्रकार के लिए शोकसभा का आयोजन. 29 जून को ट्रेन से गिरकर पत्रकार की मौत हो गयी थी. शोकसभा का आयोजन थोड़ी देर से किया गया था लेकिन किया गया. लेकिन खुद अखबार के संपादक ही शोकसभा में नहीं आये और बहाना बनाया कि वे मीटिंग में हैं. मीटिंग में तो संपादक महोदय नहीं आये, लेकिन आश्चर्य का ठिकाना तब नहीं रहा जब अगले अखबार ने अपने ही दिवंगत साथी की शोकसभा को एक कालम की खबर का भी दर्जा नहीं दिया. ...
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