राजनीति
कंगाल पड़े बंगाल में रा-हुल-रा-हुल
कांग्रेस के चिकने चुपड़े युवराज राहुल गाँधी को तीन दिन के बंगाल दौरे से वहां की उबड़-खाबड़ सियासी जमीन का अंदाज जरुर लग गया होगा. पार्क स्ट्रीट के रेस्तरां में मुर्ग मसल्लम उड़ाने से लेकर शांति निकेतन में नौजवान लड़कियों के रा-हुल रा-हुल नारों की मस्ती के बीच राहुल ने फुर्सत के क्षणों के लुत्फ़ जरूर उठाया, लेकिन बात जब सियासी जमीन पर कुछ कहने की आई तो ममता बनर्जी की पार्टी के साथ कांग्रेस के स्वाभिमान की बात उठा कर उन्होंने नयी मुसीबत मोल ले ली. राहुल गाँधी ने यहाँ कहा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस तृणमूल के साथ हाथ जरूर मिलाएगी पर सर झुका कर नहीं. बंगाल में कांग्रेस के हाल से वाकिफ समझदार लोग सवाल कर रहे हैं कि यहाँ जब कांग्रेस ही नहीं बची है तो स्वाभिमान किसका?
नेहरू से नौ कदम आगे निकलने की चाह
आम तौर पर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के बारे में टिप्पणी करने से बचने वाली कांग्रेस को उनका यह बयान रास नहीं आया कि मौजूदा सरकार सबसे ‘एकजुट‘ सरकारों में से एक है- यहां तक कि पंडित नेहरू के नेतृत्व वाली पहली सरकार से भी। डॉ. सिंह के इस बयान ने सबको चौंकाया क्योंकि कांग्रेस के भीतर से कोई नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू, स्व. इंदिरा गांधी या स्व. राजीव गांधी के बारे में अप्रत्यक्ष टिप्पणी भी करे तो वह एक बड़े जोखिम का काम है। लेकिन डॉ. सिंह बार-बार सिद्ध कर चुके हैं कि वे राजनीति के गुर आजमाने में निष्णात किसी खुर्राट नेता की तरह नहीं हैं। उन्होंने जो कहा वह उनकी सीधे-सादे और बेबाक इंसान की छवि के अनुरूप ही था।
राजनीतिक एनकाउण्टर का बढ़ता खतरा
क्या देश में अब एनकाउण्टर के नाम पर राजनीतिक हत्याकाण्ड का दौर शुरू हो गया है? पिछले एक डेढ़ साल में हुई राजनीतिक हत्याओं पर नजर दौड़ाएं तो यह सवाल बिल्कुल ही बेकार नजर नहीं आता. अभी हाल में ही मध्य प्रदेश पुलिस ने भिंड युवक जिला कांग्रेस के पद पर कार्यरत अमजद खान को एनकाउण्टर में मार गिराया. जिस पर मध्य प्रदेश विधानसभा के उपनेता चौधरी राकेश सिंह और मध्य प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष डॉ. गोविन्द सिंह नें भिंड पुलिस के ऊपर आरोप लगाया है कि भिंड पुलिस नें 22 अगस्त को एक मुठभेड़ दिखाकर अमजद खान की हत्या कर दी।...लालू-पासवान का मुख्यमंत्री हो मुसलमान!
बिहार में चुनावी बिगुल बज चुका है लेकिन उससे पहले पाटलिपुत्र के युद्ध में हर दल या मोर्चा-दूसरे मोर्चे की राजनीतिक जमीन अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटा है। राजनीति के इस खेल में कौन किस पर भारी पड़ेगा, इसकी कुंजी तो जनता जनार्दन के पास है। लेकिन उससे पहले नेता वोट की राजनीति को जात-पात, सामाजिक ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द केंद्रित करने की कोशिश में जुटे हैं। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में मात खाए लालू यादव और रामविलास पासवान ने राजनीतिक इच्छा व्यक्त की है कि राज्य में एक मुस्लिम उपमुख्यमंत्री हो?...सात रेसकोर्स पर दस जनपथ का दावा
दस जनपथ से अगर आप सात रेसकोर्स पहुंचना चाहें तो बमुश्किल सात मिनट का समय लगता है. लेकिन इन दिनों कांग्रेस के शीर्ष पर शुरू हुए सत्ता संघर्ष ने लुटियंस जोन के इन दो सड़कों की दूरिया बढ़ा दी हैं. पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के अंदर कुछ वही राजनीति शुरू हो गई है जिसे किनारे लगाने की राजनीति कह सकते हैं। अक्सर जो किनारे लगाने की कांग्रेस स्टाइल है, उसी स्टाइल में काम की शुरूआत हुई है।...सुप्रीम कोर्ट का सवाल और प्रधानमंत्री का मलाल
आखिरकार प्रधानमंत्री का दुख प्रकट हो ही गया. संपादकों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के काम काज के लिए नीति निर्धारण न करे. प्रधानमंत्री का यह दुख प्रशासन की उस चिंता से प्रकट होता है जो न्यायालयों के हस्तक्षेप से जुड़ा है. पहले भी कई मौकों पर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव के मौके आये हैं. अनाज के सड़न के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से एक बार फिर वह सवाल उठ खड़ा हुआ है, जिस पर प्रधानमंत्री अपनी आपत्ति जाहिर कर रहे हैं.
राजनीतिक हिन्दुत्व पर दिग्गी का दांव
हिन्दुओं का ठेकेदार बनने की आरएसएस और उसके मातहत संगठनों की कोशिश को चुनौती मिल रही है. भगवान् राम के नाम पर राजनीति खेलकर सत्ता तक पंहुचने वाली बीजेपी के लिए और कोई तरकीब तलाशनी पड़ सकती है क्योंकि कांग्रेस की नयी लीडरशिप हिन्दू धर्म के प्रतीकों पर बीजेपी के एकाधिकार को मंज़ूर करने को तैयार नहीं है. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने साफ़ कहा है कि हिन्दू धर्म पर किसी राजनीतिक पार्टी के एकाधिकार के सिद्धांत को वे बिल्कुल नहीं स्वीकार करते.
कांग्रेस पर सत्ता संघर्ष भारी, अब राहुल गांधी की बारी
एक अजीब से घटना है। जिस दिन राहुल गांधी अपने आपको उड़ीसा में आदिवासियों के सिपाही घोषित करते है, उसके अगले दिन ही एक खबर छपती है। खबर अखबार के पहले पन्ने की लीड है, जिसमें कहा गया है कि भारत युवाओं का देश है, पर प्रधानमंत्री बुजुर्ग है। साथ ही दुनिया के कई देशों का उदाहरण दिया गया है, जिसमें युवा लोग प्रधानमंत्री के तौर पर विराजमान है। ये एक सामान्य घटना कहेंगे या एक संयोग या एक राजनीतिक खेल? जो युवराज अभी तक कारपोरेट है, वही एकाएक आदिवासियों के सिपाही हो जाते है।
25 साल पुराने समझौते पर सुलग रहा है पंजाब
इस समय पंजाब फिर गर्म हो गया है। गर्मी दो फ्रंट पर है। एक तरफ पूरे पंजाब में जहां भिंडरावाले के पोस्टर कई जगह सरेआम नजर आ रहे है, वहीं राजनीतिक फ्रंट पर राजीव-लोंगोवाल समझौते को लेकर विवाद शुरू हो गया है। विवाद ठीक 25 साल बाद शुरू हुआ है। विवाद शुरू करने का समय भी बड़ा वाजिब है। विवाद तब शुरू हुआ है जब शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव नजदीक है और ठीक डेढ़ साल बाद पंजाब विधानसभा का चुनाव होने है। एक बार फिर जख्म हरे करने की कोशिश हो रही है।
संघ को चाहिए राम, भाजपा को सत्ता का आराम
हाल ही में भारतीय जनगणना को लेकर संघ और भाजपा में मतभेद उभरकर सामने आ गये हैं। संघ ने जहां जाति आधारित जनगणना की आलोचना की, वहीं भाजपा ने इसे सही ठहराया है। इसी तरह समान नागरिक संहिता, हिन्दुत्व, राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण, धारा-370 और मुसलमानों से संबंधित मुद्दों पर संघ और भाजपा के अलग-अलग विचार हैं। संघ जहां हिन्दुत्व की विचारधारा के ज़रिये देश में हिन्दू राष्ट्र स्थापित करना चाहता है, वहीं भाजपा केवल सत्ता सुख चाहती है, भले ही उसके लिए उसे कोई भी नीति क्यों न अपनानी पड़े।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...



